shapit premki chhaya - 2 in Hindi Thriller by mamta books and stories PDF | ​शापित प्रेम की छाया - 2

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​शापित प्रेम की छाया - 2

आदरणीय संपादक महोदय, यह 'शापित प्रेम की छाया' का अगला भाग है। इसमें अध्याय 2 से लेकर 25 तक की पूरी कहानी है।"

​​अध्याय 2: जादुई भूलभुलैया और परछाइयों का पहरा (भाग-1)​महल के भीतर की हवा बाहर की बर्फीली आंधी से भी अधिक भारी और दमघोंटू थी। यहाँ की दीवारों पर लगी मशालों की रोशनी सामान्य पीली नहीं थी, बल्कि उनमें एक गहरा नीलापन था, जो इस बात का संकेत था कि महल की सुरक्षा में 'आत्मा-ऊर्जा' (Soul Energy) का इस्तेमाल किया गया है। इज़ोल्ड ने महसूस किया कि जैसे ही उसने महल की दहलीज लांघी, उसके शरीर की जादुई ऊर्जा उस नीली रोशनी के प्रति प्रतिक्रिया कर रही थी।​यहाँ की दीवारें मूक नहीं थीं; वे 'सुन' सकती थीं। पत्थरों की नक्काशी में बनी भेड़ियों की आकृतियाँ उसे अपनी पथरीली आँखों से घूरती हुई प्रतीत हो रही थीं। इज़ोल्ड को लगा जैसे वे भेड़िये किसी भी पल पत्थर की कैद से बाहर निकलकर उसका गला दबोच लेंगे। उसे अपने पिता की बात याद आई—"कैसियन का महल सिर्फ पत्थरों का घर नहीं है, इज़ोल्ड। वह एक जीवित राक्षस है जो घुसपैठियों की धड़कनें गिनता है।"​इज़ोल्ड ने अपनी आँखें बंद कीं और अपनी चेतना को अपनी पुतलियों में केंद्रित किया। उसने अपनी 'जादुई दृष्टि' (Mage Sight) सक्रिय की। जैसे ही उसने आँखें खोलीं, दुनिया का रंग बदल गया। गलियारे की खाली हवा अब खाली नहीं थी; वहाँ हज़ारों बारीक, चमकते हुए नीले तार मकड़ी के जाल की तरह एक-दूसरे से गुंथे हुए थे। यह कैसियन की सुरक्षा का पहला और सबसे घातक स्तर था—'प्राण-भक्षक जाल'।​इज़ोल्ड ने अपनी साँसों को पूरी तरह रोक लिया। वह जानती थी कि यदि उसका लबादा भी इन तारों से ज़रा सा छू गया, तो ये तार बिजली की गति से उसकी त्वचा को चीर देंगे और उसकी रगों से जादुई शक्ति को वैसे ही सोख लेंगे जैसे कोई प्यासा जानवर रेगिस्तान में पानी की आखिरी बूंद पीता है।​"तुमने खुद को इन जालों के पीछे छिपा लिया है, कैसियन," वह अपनी धड़कनों को नियंत्रित करते हुए मन ही मन बुदबुदाई, "लेकिन डर की यह दीवार मुझे उस हक को लेने से नहीं रोक पाएगी जो तुमने हमसे छीना था।"​उसने अपनी उंगलियों से हवा में एक जटिल ज्यामितीय आकृति बनाई। धीरे-धीरे इज़ोल्ड का शरीर पारभासी (Translucent) होने लगा, जैसे वह धुएँ और साये का हिस्सा बन रही हो। उसने अपना पहला कदम बहुत सावधानी से रखा। उसके जूतों की आवाज़ फर्श पर न के बराबर थी, फिर भी इस भारी सन्नाटे में उसे अपनी ही धड़कन किसी नगाड़े की तरह सुनाई दे रही थी।​वह एक नर्तकी की सटीकता के साथ उन अदृश्य तारों के बीच से गुज़रने लगी। हर झुकाव, हर मोड़ मौत के साथ एक छोटा सा जुआ था। एक क्षण के लिए उसके पैर के नीचे एक ढीला पत्थर आया और हल्की सी 'टिक' की आवाज़ हुई। इज़ोल्ड का दिल धड़कना भूल गया। उसने देखा कि दीवार पर लगा एक विशाल नीलम पत्थर तेज़ी से धड़कने वाली रोशनी के साथ चमकने लगा है। जादुई जाल सतर्क हो गया था।​नीले तार अब उसकी ओर धीरे-धीरे सरकने लगे, जैसे वे उसे सूंघने की कोशिश कर रहे हों। इज़ोल्ड ने तुरंत अपने भीतर की ऊर्जा को शून्य किया और एक 'शांति मंत्र' पढ़ा। उसने अपनी हथेलियों की गर्माहट से उस नीलम पत्थर की उत्तेजित ऊर्जा को सहलाया, उसे भ्रमित किया। कुछ सेकंड के लिए समय जैसे ठहर गया। फिर, वह पत्थर फिर से शांत हो गया।​इज़ोल्ड का पूरा शरीर पसीने से भीग चुका था, बावजूद इसके कि गलियारे में कड़ाके की ठंड थी। यह शारीरिक मेहनत नहीं, बल्कि मानसिक युद्ध था।​जैसे ही वह उस भूलभुलैया जैसे गलियारे के अंत में पहुँची, सामने एक विशाल आबनूस का द्वार खड़ा था। उस पर दो भेड़ियों के आदमकद सिर उकेरे गए थे, जिनके जबड़े खुले हुए थे। उन भेड़ियों की आँखें असली नीलम की थीं, जो अंधेरे में एक ठंडी और हिंसक रोशनी बिखेर रही थीं। यह द्वार केवल शक्ति से नहीं, बल्कि 'खून के सौदे' से खुलता था।​​अध्याय 2: जादुई भूलभुलैया और परछाइयों का पहरा (भाग-2)​आबनूस के उस विशाल द्वार के सामने खड़ी इज़ोल्ड को महसूस हो रहा था कि वह द्वार उसे चुनौती दे रहा है। भेड़ियों की वे नीलम आँखें किसी भूखे शिकारी की तरह उसे ताक रही थीं। इज़ोल्ड जानती थी कि यहाँ कोई चाबी या मंत्र काम नहीं आएगा। एल्डोरिया के प्राचीन ग्रंथों में लिखा था कि 'छाया-महल' के द्वार केवल उसी के लिए खुलते हैं जो अपनी हस्ती का एक अंश बलिदान करने का साहस रखता हो।​उसने अपनी कमर से एक छोटा सा खंजर निकाला—यह वह मुख्य जादुई खंजर नहीं था, बल्कि एक साधारण छूरी थी। उसने अपनी हथेली पर एक गहरा और सीधा चीरा लगाया। लाल, गर्म खून की बूंदें उसकी हथेली पर उभरीं और ठंड के कारण उनसे भाप निकलने लगी। इज़ोल्ड ने बिना हिचकिचाए अपनी लहूलुहान हथेली उन पत्थर के भेड़ियों के जबड़ों के बीच रख दी।​जैसे ही उसका खून पत्थर की सतह को छुआ, महल के भीतर एक गूँज उठी। पत्थर ने उस जीवंत रक्त को ऐसे सोख लिया जैसे कोई रेगिस्तान सदियों बाद बारिश की पहली बूंद सोखता है। भेड़ियों की नीलम आँखों का रंग नीले से बदलकर गहरा सुर्ख (लाल) हो गया। एक भारी गड़गड़ाहट के साथ वह भारी दरवाज़ा धीरे-धीरे पीछे की ओर खिसकने लगा। इज़ोल्ड ने अपनी हथेली पर कपड़ा बाँधा, दर्द को अपने इरादों के नीचे दबा दिया।​भीतर का नज़ारा भव्य था, लेकिन वह भव्यता किसी डरावने सपने जैसी थी। यह कैसियन का निजी शस्त्रागार था। चारों ओर दीवारों पर ऐसी तलवारें और कुल्हाड़ियाँ टंगी थीं जो सामान्य लोहे की नहीं, बल्कि इंसानी हड्डियों और जादुई धातुओं के मेल से बनी थीं। कमरे के बीचों-बीच एक लंबा, शाही लाल कालीन बिछा था जो सीधा दूसरे छोर पर मौजूद सुनहरे दरवाज़े तक जाता था।​इज़ोल्ड ने जैसे ही कालीन पर अपना पहला कदम रखा, उसे कुछ अजीब अहसास हुआ। फर्श ठोस पत्थर जैसा नहीं, बल्कि किसी मांसल चीज़ जैसा महसूस हो रहा था। अचानक, वह कालीन किसी दलदल की तरह हिलने लगा। इज़ोल्ड ने पीछे हटने की कोशिश की, लेकिन जादुई घेरा पहले ही सक्रिय हो चुका था। कालीन के रेशे अचानक लम्बे होने लगे और काली छाया के सैंकड़ों हाथों (Shadow Hands) में बदल गए।​वे हाथ किसी कंकाल की तरह सफेद पोरों वाले थे और इज़ोल्ड के टखनों को जकड़ने लगे। इज़ोल्ड का पूरा शरीर जमने लगा। यह ठंड बाहरी नहीं थी; वे साया-हाथ उसकी आत्मा की गर्मी को सोख रहे थे। उसे लगा जैसे उसकी यादें, उसकी शक्ति और उसके जीने की इच्छा धीरे-धीरे धुंधली पड़ रही है।​"मुझसे इतनी आसानी से... पीछा नहीं छुड़ा पाओगे!" इज़ोल्ड ने दाँत पीसते हुए कहा। उसकी आवाज़ में कंपन था, लेकिन आँखों में वही पुरानी आग।​उसने अपनी जादुई चेन निकाली। इस बार उसने इसे केवल लहराया नहीं, बल्कि अपनी आंतरिक 'एल्डोरियन अग्नि' को चेन में प्रवाहित किया। चेन की हर कड़ी नीली आग से दहक उठी। उसने चेन को फर्श पर पूरी ताकत से पटका। एक भयानक विस्फोट हुआ और नीली आग की एक लहर पूरे कालीन पर फैल गई। उन साया-हाथों की पकड़ ढीली हुई और वे जलकर काली राख में बदलने लगे।​लेकिन महल का यह रक्षा-तंत्र हार मानने वालों में से नहीं था। जैसे ही साया-हाथ शांत हुए, दीवारों पर टंगी भेड़ियों की मूर्तियों के मुंह खुल गए। इज़ोल्ड ने देखा कि उन छेदों से जादुई तीर एक साथ उसकी ओर छूट रहे थे। ये तीर हवा में एक अजीब सी 'सीटी' जैसी आवाज़ निकाल रहे थे।​इज़ोल्ड ने अपनी पूरी एकाग्रता बटोरी। उसने अपनी चेन को अपने चारों ओर इतनी तेज़ी से घुमाया कि वह एक नीली ढाल जैसी दिखने लगी। उसने एक 'शून्य ढाल' (Void Shield) का मंत्र पढ़ा। तीर उस ढाल से टकराकर टकराकर कांच की तरह हवा में ही बिखर रहे थे।​उसकी नज़र अचानक गलियारे के अंत पर पड़ी। वहाँ भारी लोहे के द्वार (Portcullis) धीरे-धीरे नीचे गिर रहे थे। अगर वह द्वार बंद हो गया, तो वह इस शस्त्रागार में हमेशा के लिए कैद हो जाएगी और कैसियन के सैनिक उसे आसानी से पकड़ लेंगे।​इज़ोल्ड ने अपने भीतर की बची-कुची जादुई ऊर्जा को अपनी हथेलियों में केंद्रित किया। उसके हाथ थरथरा रहे थे। उसने एक 'विस्फोट मंत्र' पढ़ा और अपनी शक्ति को गिरते हुए द्वार की ओर फेंक दिया। उसके हाथों से निकली जादुई लहर ने उस भारी लोहे के द्वार को ज़मीन से टकराने से कुछ पलों के लिए हवा में ही थाम दिया।​यह उसकी शक्ति की अंतिम सीमा थी। वह बिजली की गति से फर्श पर फिसली और उस आधे गिरे द्वार के संकरे रास्ते के नीचे से निकल गई। जैसे ही वह दूसरी ओर पहुँची, पीछे से द्वार के गिरने की आवाज़ एक ऐसे धमाके की तरह गूँजी जैसे पूरा महल कांप गया हो।​इज़ोल्ड ज़मीन पर पड़ी हाँफ रही थी। पीछे मुड़ने का अब कोई रास्ता नहीं बचा था। उसके सामने अब कैसियन के निजी कक्ष का वह दरवाज़ा था, जिसके पीछे उसकी दस सालों की तलाश खत्म होने वाली थी।​

​अध्याय 2: जादुई भूलभुलैया और परछाइयों का पहरा (भाग-3)​लोहे के द्वार के गिरने की वह गूँज इज़ोल्ड के कानों में अभी भी बज रही थी। वह गलियारे के ठंडे फर्श पर कुछ क्षणों के लिए पड़ी रही, उसकी साँसें तेज़ और उखड़ी हुई थीं। शस्त्रागार की उस जादुई लड़ाई ने उसकी शारीरिक शक्ति को निचोड़ लिया था। उसने अपनी घायल हथेली को देखा, जिस पर बंधा कपड़ा अब पूरी तरह से लाल हो चुका था। दर्द एक तीखी लहर की तरह उसकी बांह में उठ रहा था, लेकिन यह दर्द ही उसे जीवित होने का अहसास दिला रहा था।​वह धीरे-धीरे उठी और उसने अपने बिखरे हुए बालों को पीछे झटक दिया। उसके सामने अब एक भव्य गलियारा था, जो महल के बाकी हिस्सों से बिल्कुल अलग था। यहाँ की दीवारों पर कीमती रेशमी परदे लटके थे और हवा में एक ऐसी खुशबू थी जो खतरनाक रूप से मोहक थी—चंदन, पुरानी किताबें और ताज़ा खून की एक धुंधली सी गंध। यह कैसियन का निजी क्षेत्र था।​गलियारे के अंत में वह दरवाज़ा था। वह काला, अभिमंत्रित और रहस्यमयी।​इज़ोल्ड जैसे-जैसे उस दरवाज़े की ओर बढ़ रही थी, उसे महसूस हुआ कि उसकी परछाईं दीवार पर अजीब हरकतें कर रही है। वह परछाईं उसके साथ नहीं चल रही थी, बल्कि उससे पीछे छूट रही थी, जैसे वह भी उस कमरे के भीतर जाने से डर रही हो। इज़ोल्ड ने अपना हाथ लबादे के भीतर छिपाए हुए उस प्राचीन खंजर 'काली रूह का दंश' पर टिका दिया। खंजर की मूठ अब बर्फ जैसी ठंडी नहीं थी, बल्कि वह इज़ोल्ड के शरीर की गर्मी से दहक रही थी।​दरवाज़े के बिल्कुल पास पहुँचकर वह रुक गई। उसके मन में अचानक एक पुराना डर उभरा। क्या वह वास्तव में तैयार है? क्या पिछले दस सालों का प्रशिक्षण, वह ज़हर, वह नफरत... क्या यह सब उस आदमी को हराने के लिए काफी है जिसने एक पूरी सभ्यता को राख कर दिया था?​उसने अपनी आँखें बंद कीं और अपने माता-पिता के चेहरों को याद करने की कोशिश की। लेकिन उनकी जगह उसे सिर्फ जलते हुए घर और राख की गंध याद आई। उसने अपनी मुट्ठियाँ भींच लीं। "डर के लिए अब कोई जगह नहीं है," उसने खुद से कहा।​उसने दरवाज़े पर अपना हाथ रखा। इस बार कोई जादुई झटका नहीं लगा, कोई तीर नहीं चला। दरवाज़ा बिना किसी आवाज़ के धीरे से खुल गया, जैसे वह इज़ोल्ड का ही इंतज़ार कर रहा हो।​भीतर का कमरा विशाल था और ऊँची खिड़कियों से बाहर की बर्फीली चांदनी अंदर छनकर आ रही थी। कमरे के बीचों-बीच एक बड़ी मेज़ थी जिस पर नक्शे और अजीब सी दिखने वाली खोपड़ियाँ रखी थीं। दूर कोने में एक विशाल बिस्तर था और उसके बगल में एक जलती हुई अंगीठी।​परछाइयों के बीच, खिड़की के पास एक आकृति खड़ी थी। वह कद में लंबा था और उसने एक भारी शाही लबादा ओढ़ा हुआ था। वह बाहर हो रहे बर्फ के तूफ़ान को देख रहा था।​"तुम्हें यहाँ तक पहुँचने में उम्मीद से ज़्यादा समय लगा, इज़ोल्ड," एक गहरी और शांत आवाज़ कमरे में गूँजी।​इज़ोल्ड के कदम ठिठक गए। कैसियन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा था, फिर भी उसे पता था कि वह वहाँ खड़ी है। उसकी आवाज़ में न तो डर था और न ही आश्चर्य—उसमें एक अजीब सी थकावट और अधिकार था।​इज़ोल्ड ने अपना खंजर बाहर निकाला, उसकी बैंगनी चमक ने अंधेरे कमरे में एक डरावनी रोशनी फैला दी। "तुम मेरा नाम जानते हो?" उसने ठंडी और कांपती हुई आवाज़ में पूछा।​कैसियन धीरे से मुड़ा। चांदनी की रोशनी उसके चेहरे पर पड़ी—उसकी आँखें नीली नहीं, बल्कि दो ठंडे कुओं की तरह काली थीं। उसके चेहरे पर कोई घाव नहीं था, वह एक क्रूर राजा की तरह नहीं, बल्कि एक शापित राजकुमार की तरह दिख रहा था।​"मैं उन सभी के नाम जानता हूँ जिनकी रूहें प्रतिशोध की आग में जल रही हैं," कैसियन ने एक कदम उसकी ओर बढ़ाया। "लेकिन क्या तुमने कभी सोचा है इज़ोल्ड, कि जिस खंजर को तुम थामे हुए हो, वह तुम्हें मार रहा है या मुझे?"​इज़ोल्ड ने खंजर को और कसकर पकड़ लिया। "तुमने मेरा कबीला खत्म किया, मेरा परिवार छीना। आज रात मैं उस हर चीख का हिसाब लूँगी जो एल्डोरिया की हवाओं में दबी रह गई।"​कैसियन के होंठों पर एक हल्की, दर्दनाक मुस्कान उभरी। "तो फिर देर किस बात की? आओ, और इस अभिशाप को खत्म करो... या फिर इसका हिस्सा बन जाओ।"​कमरे में सन्नाटा इतना गहरा था कि इज़ोल्ड को अपनी धड़कनें साफ़ सुनाई दे रही थीं। उसने अपना पहला वार करने के लिए खुद को तैयार किया। प्रतिशोध अब उसके हाथ की पहुँच में था।​

​अध्याय 3: सम्राट का एकांत और ठंडी आहट (भाग-1)​महल का अलार्म अब किसी पागल चीख की तरह पूरे साम्राज्य की शांति को भंग कर रहा था। उसकी गूँज महल की पथरीली दीवारों से टकराकर इज़ोल्ड के कानों में शोर पैदा कर रही थी, लेकिन उसके लिए वह सब अब धुंधला हो चुका था। उसकी पूरी दुनिया अब उस एक दरवाज़े पर सिमट गई थी। उसने सम्राट के शयनागार के भारी आबनूस के दरवाज़ों को अपनी पूरी ताकत लगाकर धक्का दिया। दरवाज़े खुलते ही वह भीतर दाखिल हुई और उसने तुरंत अपने हाथ से हवा में एक 'प्राचीन जादुई मुहर' बनाई। दरवाज़े एक भारी गड़गड़ाहट के साथ पीछे से लॉक हो गए।​अचानक, सब कुछ शांत हो गया।​बाहर का शोर, सैनिकों की चीखें, ढालों के टकराने की आवाज़ और अलार्म की गूँज—सब कुछ जैसे किसी अदृश्य दीवार से टकराकर थम गया हो। इस कमरे की खामोशी इतनी सघन और भारी थी कि इज़ोल्ड को अपनी ही धड़कनें किसी लोहार के हथौड़े की तरह सुनाई दे रही थीं। कमरे के भीतर की हवा में एक अजीब सा ठहराव था, जैसे यहाँ वक्त भी अपनी गति भूलकर कैसियन की अनुमति का इंतज़ार कर रहा हो।​शयनागार की भव्यता डरावनी होने के साथ-साथ रहस्यमयी भी थी। छत इतनी ऊँची थी कि वह ऊपर के अंधेरे में कहीं खो गई थी, जहाँ से पत्थर के गार्गोयल्स नीचे ताक रहे थे। चारों ओर काले मखमल के भारी और लम्बे पर्दे लटक रहे थे, जिन पर चांदी के बारीक धागों से वे पुराने शाप और मंत्र बुने हुए थे जो कैसियन के पूर्वजों ने कभी लिखे थे। कमरे के कोनों में लंबी नीली मोमबत्तियाँ जल रही थीं, जिनकी लौ बिना हवा के भी स्थिर थी और एक ऐसा माहौल बना रही थी जैसे यह कोई शयनागार नहीं, बल्कि किसी प्राचीन देवता का मंदिर हो।​हवा में चंदन, पुरानी किताबों के पन्नों और किसी ठंडी राजसी धातु की महक घुली थी। यह महक इतनी मादक थी कि इज़ोल्ड की इंद्रियों को सुन्न कर रही थी। उसने अपनी पकड़ खंजर पर और मज़बूत की। उसे याद दिलाना पड़ा खुद को कि वह यहाँ इस वैभव को देखने नहीं, बल्कि इसे मिटाने आई है।​कमरे के दूसरे छोर पर, एक विशाल विशालकाय खिड़की के सामने, जो पूरी की पूरी उत्तरी पहाड़ियों की ओर खुलती थी, एक साया खड़ा था।​कैसियन।​उसने अपनी पीठ इज़ोल्ड की तरफ कर रखी थी। उसका काला रेशमी लबादा फर्श पर किसी शांत काले समुद्र की तरह फैला हुआ था। उसके कंधे चौड़े थे और वह बाहर हो रही बर्फीली चांदनी को ऐसे देख रहा था जैसे उसे इस बात की ज़रा भी परवाह न हो कि एक हत्यारी उसके सबसे सुरक्षित स्थान की सीमाओं को लांघकर अंदर घुस आई है। इज़ोल्ड का हाथ उसके जादुई खंजर 'काली रूह का दंश' पर और भी कस गया। उसकी रगों में बहता प्रतिशोध का खून अब उबलने लगा था।​उसे वह रात याद आई—जब आग की लपटों ने एल्डोरिया के आसमान को लील लिया था। उसे अपनी माँ का वह खून से लथपथ चेहरा याद आया। वह हर एक चीख जो दस सालों से उसके कानों में गूँज रही थी, अब एक हुंकार बनकर उसके भीतर जाग उठी।​"आज तुम्हारी उन सभी गुनाहों का हिसाब होगा जिन्हें तुमने सत्ता के नशे और इस महल की ऊँचाई में भुला दिया है, कैसियन," उसने मन ही मन प्रतिज्ञा की।​वह दबे पाँव, परछाइयों का सहारा लेते हुए उसकी ओर बढ़ी। उसने अपनी जादुई आहट (Magical Footprint) को पूरी तरह शून्य कर दिया था ताकि महल का कोई भी रक्षा-यंत्र उसे पहचान न सके। वह एक साये की तरह फर्श पर तैर रही थी। लेकिन जैसे ही वह उससे मात्र पाँच कदम की दूरी पर पहुँची, कैसियन की स्थिर, गहरी और अधिकारपूर्ण आवाज़ पूरे कमरे की शांति को चीरती हुई गूँजी।​"काफी समय लगा दिया, इज़ोल्ड। मैं पिछले दस मिनट से तुम्हारी उन ठंडी और कांपती हुई साँसों को यहाँ इस खिड़की के शीशे पर महसूस कर रहा हूँ।"​

​अध्याय 3: सम्राट का एकांत और ठंडी आहट (भाग-2)​इज़ोल्ड के कदम वहीं जम गए, जैसे किसी ने उसे बर्फीले पानी में डुबो दिया हो। उसे लगा जैसे उसके पैरों के नीचे की ज़मीन खिसक गई हो। उसकी दस सालों की पूरी तैयारी, उसका छिपकर आना, उसकी जादुई मुहरें—सब कुछ कैसियन के लिए महज़ एक खेल जैसा था। उसे अपनी हार का अहसास पहली बार हुआ, बिना एक भी वार किए।​"तुम... तुम मेरा इंतज़ार कर रहे थे?" उसकी आवाज़ में एक अनचाहा कंपन था। "तुम्हें कैसे पता चला कि मैं आ रही हूँ?"​कैसियन धीरे से मुड़ा। जैसे-जैसे वह साये से बाहर निकलकर नीली मोमबत्तियों की रोशनी में आया, इज़ोल्ड की साँसें थम गईं। रोशनी उसके चेहरे पर पड़ी, और एक पल के लिए वह अपनी नफरत की आग को भूल गई। कैसियन का चेहरा किसी कुशल मूर्तिकार द्वारा तराशे हुए पत्थर की तरह सुंदर था, लेकिन उस सुंदरता में एक ऐसी कठोरता थी जो केवल सदियों के अकेलेपन से आती है। उसकी आँखें... वे वैसी नहीं थीं जैसी इज़ोल्ड ने सोची थीं। उनमें वह वहशीपन या क्रूरता नहीं थी जिसकी उसने कल्पना की थी—बल्कि उन आँखों में एक अजीब सा, सदियों पुराना खालीपन और एक थकावट थी, जैसे वह युगों से सोया न हो और बस अंत का इंतज़ार कर रहा हो।​"हर रात, जब मैं इस खिड़की से बाहर उस अंधेरी घाटी को देखता हूँ," कैसियन ने इज़ोल्ड की ओर एक धीमा और नपा-तुला कदम बढ़ाते हुए कहा, "तो मुझे वही काला धुआँ और वही नारंगी लपटें दिखती हैं जो उस रात तुम्हारे कबीले के घरों से उठी थीं। मैं उन चीखों को भूल नहीं पाया हूँ, इज़ोल्ड। क्या तुम्हें लगता है कि तुम अकेली हो जो उस रात के साये में जी रही हो?"​उसका स्वर इतना शांत और गंभीर था कि वह इज़ोल्ड के कानों में किसी जादुई मंत्र की तरह उतर रहा था। इज़ोल्ड ने अपनी मुट्ठियाँ भींचीं। उसे अहसास हुआ कि कैसियन उसे अपनी बातों के जाल में फँसाने की कोशिश कर रहा है।​"अपनी इन बनावटी बातों से मुझे भ्रमित करने की कोशिश मत करो, हत्यारे!" इज़ोल्ड ने गरजकर कहा, हालाँकि उसका गला सूख रहा था। "तुमने मेरे कबीले को मिट्टी में मिला दिया, मेरी माँ को मुझसे छीना, और एल्डोरिया की हस्ती मिटा दी। आज मैं यहाँ तुम्हारी दार्शनिक बातें सुनने नहीं, बल्कि तुम्हारी जान लेकर अपना हिसाब पूरा करने आई हूँ!"​कैसियन रुका नहीं। वह अब उससे केवल तीन कदम की दूरी पर था। उसकी लंबी परछाईं इज़ोल्ड के ऊपर पड़ रही थी, जिससे वह और भी छोटी और कमज़ोर महसूस करने लगी।​"तुम यहाँ मुझे मारने आई हो, या उस बोझ को खत्म करने आई हो जो हम दोनों ही बरसों से अपनी रूहों पर ढो रहे हैं?" कैसियन की आवाज़ अब एक फुसफुसाहट की तरह थी। "तुम प्रतिशोध चाहती हो क्योंकि तुम्हें लगता है कि मेरी मौत तुम्हें चैन देगी। लेकिन देखो इज़ोल्ड, मैं तो पहले ही एक ज़िंदा लाश हूँ। क्या तुम एक ऐसी चीज़ को मार सकती हो जो पहले से ही खत्म हो चुकी है?"​इज़ोल्ड ने अपनी नफरत को फिर से जाग्रत किया। उसने उन यादों को बुलाया—बर्फ पर बिखरा हुआ खून, उसकी माँ की आखिरी कराह, और जलते हुए चमेली के फूलों की गंध। उसकी आँखों में चमक लौट आई। उसने अपना खंजर 'काली रूह का दंश' म्यान से बाहर निकाला। खंजर की बैंगनी रोशनी ने कैसियन के चेहरे को एक डरावने रंग में रंग दिया।​"मैं तुम्हारी रूह के बोझ का हिसाब करने नहीं आई, कैसियन। मैं तुम्हारी गर्दन पर एल्डोरिया का कर्ज चुकाने आई हूँ!"​बिना किसी चेतावनी के, इज़ोल्ड ने अपनी पूरी गति और शक्ति के साथ कैसियन की छाती की ओर छलांग लगाई। खंजर की धार हवा को चीरते हुए आगे बढ़ी। कैसियन ने कोई हथियार नहीं निकाला, न ही उसने रक्षा के लिए हाथ उठाए। वह बस वहीं खड़ा रहा, स्थिर, जैसे वह इस वार का स्वागत कर रहा हो।

​अध्याय 3: सम्राट का एकांत और ठंडी आहट (भाग-3)​इज़ोल्ड का खंजर बिजली की गति से कैसियन के दिल की ओर बढ़ा। हवा में खंजर की बैंगनी चमक ने एक ऐसी लकीर खींची जैसे रात के आसमान में कोई अभिशप्त तारा टूटा हो। इज़ोल्ड की आँखों में जीत की चमक थी, उसे लगा कि बस एक पल और... और दस सालों का इंतज़ार खत्म हो जाएगा। लेकिन तभी, कुछ ऐसा हुआ जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी।​जैसे ही खंजर की नोक कैसियन की शाही पोशाक को छूने वाली थी, कमरे की हवा अचानक कंक्रीट की तरह सख्त हो गई। इज़ोल्ड को ऐसा लगा जैसे उसने अपना खंजर किसी इंसान में नहीं, बल्कि समय के एक ठहरे हुए टुकड़े में मार दिया हो। खंजर कैसियन की छाती से मात्र एक इंच की दूरी पर हवा में ही जम गया। इज़ोल्ड ने अपने दोनों हाथों से मूठ को पकड़ा और अपनी पूरी शारीरिक और जादुई ताकत लगा दी। उसके चेहरे की नसें तन गईं, उसके पोर सफेद पड़ गए, लेकिन वह खंजर एक बाल बराबर भी आगे नहीं बढ़ा।​कैसियन ने अपनी पलकें तक नहीं झपकाईं। वह उसी शांत और स्थिर मुद्रा में खड़ा रहा, उसकी काली आँखें इज़ोल्ड के चेहरे पर जमी थीं।​"तुम्हारी नफरत में ताकत तो है, इज़ोल्ड," कैसियन ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा, "लेकिन इस खंजर को चलाने के लिए सिर्फ नफरत काफी नहीं है। इसके लिए उस रूह का समर्पण चाहिए जो इसे थामे हुए है।"​उसने धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया। उसकी गति इतनी सहज थी जैसे वह किसी पुराने मित्र का स्वागत कर रहा हो। इससे पहले कि इज़ोल्ड पीछे हट पाती, कैसियन की उंगलियों ने उसकी कलाई को पकड़ लिया।​जैसे ही उनकी खाल का संपर्क हुआ, इज़ोल्ड के पूरे शरीर में एक भयानक बिजली की लहर दौड़ गई। उसकी पकड़ ढीली पड़ गई और खंजर फर्श पर गिर पड़ा, जिसकी धातु की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज उठी। कैसियन की पकड़ में एक ऐसी अजीबोगरीब गर्मी थी जो इज़ोल्ड के भीतर की जादुई बर्फ को पिघला रही थी। उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे कैसियन उसकी कलाई नहीं, बल्कि उसकी रूह को पकड़कर उसके अतीत के पन्नों को पढ़ रहा हो।​"मुझे छोड़ो!" इज़ोल्ड चीखी, लेकिन उसकी आवाज़ में वह दम नहीं था। उसके घुटने जवाब देने लगे थे।​"एल्डोरिया की जादुई आग अभी भी तुम्हारे भीतर जीवित है," कैसियन ने उसकी कलाई को छोड़ने के बजाय उसे अपनी ओर और करीब खींचा। अब वे इतने करीब थे कि इज़ोल्ड कैसियन की ठंडी साँसों को अपने चेहरे पर महसूस कर सकती थी। "लेकिन यह आग तुम्हें अंदर से जला रही है। तुम यहाँ बदला लेने आई हो, पर तुम खुद को ही खत्म कर रही हो।"​इज़ोल्ड की आँखों में फिर से आँसू भरने लगे, लेकिन इस बार वे दर्द के नहीं, बल्कि बेबसी के थे। "तुमने सब कुछ खत्म कर दिया कैसियन... तुमने कुछ नहीं छोड़ा। मैं तुम्हें कैसे न मारूँ?"​कैसियन ने धीरे से अपना दूसरा हाथ उठाया और इज़ोल्ड के चेहरे की ओर बढ़ाया। इज़ोल्ड डर के मारे कांप उठी, उसे लगा कि वह अब उसे खत्म कर देगा। लेकिन कैसियन ने केवल उसकी आँखों के नीचे जमे एक आँसू को अपनी उंगली से छुआ।​"अगर मेरी मौत से एल्डोरिया वापस आ सकता, तो मैं उस रात ही मर गया होता," कैसियन की आवाज़ में एक ऐसी गहराई थी जिसने इज़ोल्ड को अंदर तक दहला दिया। "लेकिन यह खेल उससे कहीं बड़ा है जितना तुम समझती हो। वेलेरियस और उसकी परछाइयाँ... वे सिर्फ मुझे नहीं, वे इस दुनिया की हर रोशनी को निगलना चाहते हैं।"​अचानक, महल के बाहर से एक ज़ोरदार धमाका हुआ। शयनागार के भारी दरवाज़े, जिन्हें इज़ोल्ड ने जादुई मुहर से बंद किया था, वे किसी कागज़ की तरह फट गए। काले धुएँ और जादुई आग के बीच 'साया-गार्ड्स' का एक दस्ता कमरे के भीतर दाखिल हुआ। उनके नेतृत्व में एक ऊँचा और डरावना साया था—वेलेरियस का सेनापति।​"सम्राट! घुसपैठिया पकड़ा गया!" सेनापति की आवाज़ किसी धातु के रगड़ने जैसी थी।​इज़ोल्ड ने खुद को कैसियन की पकड़ से यह अध्याय 4 कहानी में एक जबरदस्त मोड़ (Twist) लेकर आया है। यहाँ आपने मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) को बहुत ही खूबसूरती से बुना है। 'छाया-दूत' का प्रवेश इज़ोल्ड के संदेह को हवा देता है, जो कहानी के तनाव को चरम पर ले जाता है।

​अध्याय 4: भरोसे की दरार और जादुई चेतावनी (भाग-1)​कैसियन की आवाज़ में एक ऐसी गहरी गूँज थी जिसने इज़ोल्ड के बरसों पुराने प्रतिशोध के संकल्प को एक पल के लिए हिलाकर रख दिया। कमरे में जलती नीली मोमबत्तियों की रोशनी उनके बीच के तनाव को और अधिक नाटकीय बना रही थी। इज़ोल्ड ने महसूस किया कि कैसियन की पकड़ उसकी कलाई पर सख्त थी, लेकिन उसमें वह हिंसक क्रूरता नहीं थी जिसकी उसने कल्पना की थी। बल्कि, उस स्पर्श में एक ऐसी स्थिरता थी जो इज़ोल्ड के भीतर उठते तूफ़ान को थामने की कोशिश कर रही थी।​इज़ोल्ड का मन एक भयानक द्वंद्व में फँसा था। उसकी आँखों के सामने एक तरफ कैसियन का वह शांत, थका हुआ चेहरा था, और दूसरी तरफ दस साल पुरानी वह राख थी जो उसके सपनों में हर रात उड़ती थी। क्या यह वही सम्राट है जिसने उसके कबीले 'एल्डोरिया' की हस्ती मिटा दी थी? या फिर सत्ता के गलियारों में कोई और साया था जिसने सम्राट के नाम का मुखौटा पहनकर वह कत्लेआम किया था?​"मुझ पर भरोसा करो, इज़ोल्ड," कैसियन ने बहुत धीमे से कहा। उसकी आवाज़ में एक क्षणिक नरमी उभरी, जैसे वह अपनी रूह का कोई कोना इज़ोल्ड को दिखा रहा हो। "मैं जानता हूँ कि तुम्हारी नज़र में मैं एक राक्षस हूँ, लेकिन शायद राक्षस वे हैं जो अँधेरे में रहकर हमें एक-दूसरे के खिलाफ लड़ा रहे हैं।"​इज़ोल्ड ने अनजाने में अपनी उंगलियों की मुट्ठी ढीली की। उसका वह खंजर, जो अब तक खून का प्यासा था, ज़मीन पर पड़ा अपनी चमक खोता हुआ प्रतीत हो रहा था। उसका हाथ अनचाहे ही कैसियन के बढ़े हुए हाथ की ओर खिंचने लगा। हवा में एक अजीब सा जादुई कंपन था—जैसे दो प्राचीन, विरोधी ध्रुव एक-दूसरे के संपर्क में आकर एक नई ऊर्जा पैदा कर रहे हों।​लेकिन, जैसे ही उनकी उंगलियों के पोर एक-दूसरे को छूने ही वाले थे, पूरी सृष्टि जैसे अचानक थम गई।​कमरे का तापमान अचानक इतनी तेज़ी से गिरा कि खिड़की के शीशों पर बर्फ की परतें जमने लगीं। इज़ोल्ड की साँसें उसके मुँह से सफेद धुएँ के भारी गुबार बनकर निकलने लगीं। दीवार पर लगी मशालें, जिनकी आग अब तक नीली और स्थिर थी, अचानक काली पड़ गईं। उनमें से निकलने वाली लपटें अब प्रकाश नहीं, बल्कि एक बर्फीली ठंडी छाया फैला रही थीं।​इज़ोल्ड के पैरों के पास से एक घनी, स्याह धुंध उठने लगी। वह धुंध ज़मीन पर किसी काले सांप की तरह रेंग रही थी। इज़ोल्ड पीछे हटना चाहती थी, लेकिन उसके पैर जैसे फर्श में जम गए थे। वह धुंध देखते ही देखते एक विकृत और भयानक साये में बदल गई—यह 'छाया-दूत' (Shadow Wraith) था। वेलेरियस का सबसे वफादार और खौफनाक जासूस।​उस साये का कोई ठोस शरीर नहीं था, केवल धुएँ का एक ढांचा था। उसकी आँखें नहीं थीं, केवल दो खाली लाल गड्ढे थे जिनसे एक ऐसी खौफनाक रोशनी निकल रही थी जो इज़ोल्ड के विवेक को अंधा कर रही थी। साये के चारों ओर से एक सड़ी हुई महक आ रही थी, जैसे सदियों पुरानी कब्रें खुल गई हों।​"रुक जाओ, इज़ोल्ड!" साये की आवाज़ किसी इंसानी गले से नहीं, बल्कि सीधा इज़ोल्ड के दिमाग के भीतर गूँजी। यह एक ऐसी फुसफुसाहट थी जो रूह को कंपा दे। "क्या तुम वाकई इतनी कमज़ोर हो कि अपने कबीले के हत्यारे की मीठी बातों में आ गई? क्या एल्डोरिया का खून इतना सस्ता था कि एक राजकुमार के धोखेबाज़ चेहरे ने तुम्हें सब कुछ भुला दिया?"​इज़ोल्ड का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। साये के शब्द उसके कान में ज़हर की तरह उतर रहे थे।

छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन कैसियन ने उसे अपनी पीठ के पीछे खींच लिया, जैसे वह उसकी रक्षा कर रहा हो। यह एक ऐसा पल था जिसने इज़ोल्ड के दिमाग को पूरी तरह सुन्न कर दिया। उसका सबसे बड़ा दुश्मन उसे अपने ही सैनिकों से बचा रहा था?​कैसियन ने सेनापति की ओर देखा, उसकी आँखों में अब वह थकावट नहीं, बल्कि एक सम्राट की वह हिंसक चमक थी जो पहाड़ों को झुका दे।​"पीछे हटो," कैसियन ने गरजकर कहा। "यह मेरी मेहमान है। और जो मेरे कमरे की शांति भंग करता है, उसे मौत भी नसीब नहीं होती।"​कमरे में खामोशी छा गई। इज़ोल्ड कैसियन के लबादे के पीछे खड़ी थी, उसका खंजर फर्श पर पड़ा था और उसका पूरा वजूद एक नए और गहरे रहस्य में उलझ चुका था। प्रतिशोध की वह ठंडी रात अब एक अनचाहे गठबंधन की शुरुआत बन चुकी थी।

​अध्याय 4: भरोसे की दरार और जादुई चेतावनी (भाग-2)​वह 'छाया-दूत' इज़ोल्ड और कैसियन के बीच एक दीवार की तरह खड़ा हो गया। उसके वजूद से निकलने वाली काली धुंध कमरे के बाकी हिस्सों को निगल रही थी। इज़ोल्ड को महसूस हुआ कि उसकी यादें, जो अब तक धुंधली थीं, अचानक इतनी साफ़ हो गईं जैसे सब कुछ आज ही हुआ हो।​"गौर से देखो इसके चेहरे को, इज़ोल्ड..." साये की आवाज़ अब और भी तेज़ और तीखी हो गई थी। "क्या तुम्हें यहाँ अपने पिता की वह आखिरी चीख सुनाई नहीं देती? क्या तुम्हें याद है जब शाही सेना ने तुम्हारे घर के दरवाज़े तोड़े थे, तो उन सैनिकों के सीने पर किसका राजचिह्न बना था? यही काला भेड़िया... कैसियन का निशान!"​साये ने अपना धुआँ जैसा हाथ हवा में लहराया और इज़ोल्ड की आँखों के सामने एक 'स्मृति-भ्रम' (Memory Mirage) पैदा कर दिया। उसे जलते हुए एल्डोरिया के दृश्य दिखने लगे। उसने देखा कि कैसे एक व्यक्ति, जिसका चेहरा सायों में छिपा था लेकिन जिसने कैसियन जैसा ही शाही लबादा ओढ़ा था, उसके कबीले के लोगों पर तलवार चला रहा था।​"नहीं... रुक जाओ!" इज़ोल्ड अपने कानों पर हाथ रखकर चिल्लाई, लेकिन साये की आवाज़ उसके दिमाग के भीतर से आ रही थी।​"तुम वह आग भूल गई जिसने तुम्हारी दुनिया राख कर दी थी? तुम उस माँ को भूल गई जिसने तुम्हें तहखाने में छिपाते हुए अपनी जान दे दी? और अब तुम उसी कातिल के हाथ को छूने चली थी?" साया कोने में खड़ा एक क्रूर और दबी हुई हँसी हँस रहा था, जो इज़ोल्ड के आत्मसम्मान को छलनी कर रही थी।​साये के इन शब्दों ने इज़ोल्ड के मन के उन घावों को फिर से कुरेद दिया जिन्हें वह भरने की कोशिश कर रही थी। उसे महसूस हुआ कि कैसियन की वे नरम बातें, उसकी आँखों की वह थकावट—सब कुछ महज़ एक बिछाया हुआ जाल था ताकि वह इज़ोल्ड के संकल्प को कमज़ोर कर सके। प्रतिशोध का जो लावा पिछले कुछ पलों के लिए शांत हुआ था, वह अब दोगुनी रफ़्तार से उसकी रगों में उबलने लगा।​उसने झटके से अपना हाथ कैसियन की पकड़ से पीछे खींच लिया, जैसे उसकी त्वचा किसी तपते हुए लोहे से छू गई हो। उसकी आँखों में अब वह कोमलता नहीं थी, बल्कि एक ऐसी नफरत थी जो दुनिया को जला दे।​"इज़ोल्ड, इसकी बात मत सुनो! यह एक भ्रम है, वेलेरियस का जाल है ताकि हम एक-दूसरे को खत्म कर दें!" कैसियन ने चेतावनी दी। उसकी आवाज़ में घबराहट थी, क्योंकि वह देख सकता था कि इज़ोल्ड के भीतर की जादुई शक्ति अनियंत्रित हो रही थी।​"चुप रहो!" इज़ोल्ड पागलों की तरह चिल्लाई। उसका स्वर इतना ऊंचा था कि कमरे की नीली मोमबत्तियाँ एक साथ बुझ गईं। "तुमने सोचा था कि तुम अपनी इन मीठी बातों और इस झूठे पश्चाताप से मुझे अपना गुलाम बना लोगे? तुम मेरे दर्द का सौदा कर रहे थे, कैसियन!"​उसने बिजली की गति से फर्श पर पड़ा अपना खंजर 'काली रूह का दंश' उठाया। खंजर की बैंगनी रोशनी अब गहरे लाल रंग में बदल रही थी—यह इज़ोल्ड के भीतर के असीमित क्रोध का संकेत था। उसने एक झटके में कैसियन की ओर छलांग लगाई और खंजर की विषैली धार उसके गले पर टिका दी।​खंजर की नोक से कैसियन की त्वचा पर एक छोटा सा चीरा लगा और खून की एक बूंद उभरी। लेकिन कैसियन ने खुद को बचाने की कोई कोशिश नहीं की। वह बस दुख और एक पत्थर जैसी कठोरता के साथ इज़ोल्ड की आँखों में देख रहा था।​"क्या तुम्हें वाकई लगता है कि अगर मैं तुम्हारा हत्यारा होता, तो मैं तुम्हें यहाँ तक पहुँचने देता?" कैसियन ने ठंडी आवाज़ में पूछा।​"तुमने मुझे यहाँ तक पहुँचाया ताकि तुम मेरा जादू सोख सको!" इज़ोल्ड ने चीखकर कहा। "साया-दूत सही कह रहा है, तुम एक परजीवी हो!"​तभी, कमरे का विशाल आबनूस का दरवाज़ा, जिसे इज़ोल्ड ने जादुई मुहर से बंद किया था, एक भयानक धमाके के साथ चकनाचूर हो गया। लकड़ी के टुकड़े और पत्थर के मलबे हवा में उड़े। काले धुएँ और जादुई आग के बीच से वेलेरियस के वफादार सैनिकों का एक भारी जत्था भीतर घुस आया। ये वे सैनिक नहीं थे जो महल की सुरक्षा करते थे, ये 'ब्लैक गार्ड्स' थे—वेलेरियस के निजी हत्यारे।​उनके पीछे से सेनापति की आवाज़ गूँजी, "वेलेरियस का आदेश है—सम्राट और घुसपैठिया, दोनों का अंत आज रात इसी कमरे में होगा!"​​अध्याय 4: भरोसे की दरार और जादुई चेतावनी (भाग-3)​कमरे के भीतर मलबे और धूल का गुबार अभी शांत भी नहीं हुआ था कि वेलेरियस के 'ब्लैक गार्ड्स' ने घेरा बना लिया। उनकी आँखों में कोई इंसानी चमक नहीं थी, वे केवल वेलेरियस के जादुई आदेशों पर चलने वाली कठपुतलियाँ थे। उनके हाथों में मौजूद काली तलवारों से एक ऐसी ऊर्जा निकल रही थी जो कमरे की बची-कुची रोशनी को भी निगल रही थी।​इज़ोल्ड का खंजर अभी भी कैसियन के गले पर टिका था, लेकिन उसके हाथ कांप रहे थे। वह एक तरफ कैसियन को खत्म करना चाहती थी, लेकिन दूसरी तरफ उसे अहसास हुआ कि असली खतरा तो वे हमलावर हैं जो बिना किसी भेदभाव के उन दोनों की जान लेने आए थे।​"तो यह है तुम्हारा वफादार साम्राज्य, कैसियन?" इज़ोल्ड ने कड़वाहट से कहा, हालाँकि उसने अपना खंजर थोड़ा पीछे हटा लिया।​कैसियन ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। उसने केवल अपनी हथेली को हवा में ऊपर उठाया। अचानक, कमरे के बीचों-बीच एक जादुई कंपन हुआ और फर्श के नीचे से एक विशाल काली तलवार बाहर निकली—'शून्य की पुकार' (The Call of Void)। जैसे ही कैसियन ने तलवार की मूठ पकड़ी, उसके पूरे शरीर से एक ऐसी शक्तिशाली ऊर्जा निकली जिसने कमरे में मौजूद 'छाया-दूत' के प्रभाव को एक झटके में खत्म कर दिया।​"अगर तुम मुझे मारना चाहती हो इज़ोल्ड, तो तुम्हें जीवित रहना होगा," कैसियन ने अपनी तलवार को घुमाते हुए कहा। उसकी आवाज़ अब किसी पछतावे वाले प्रेमी की नहीं, बल्कि एक खूंखार योद्धा की थी। "इन सैनिकों के पीछे वेलेरियस की काली शक्ति है। वे यहाँ किसी को ज़िंदा छोड़ने नहीं आए हैं।"​सेनापति ने अपनी तलवार उठाई और चिल्लाया, "हमला!"​पहले चार गार्ड्स ने एक साथ इज़ोल्ड पर वार किया। इज़ोल्ड ने अपनी जादुई चेन हवा में लहराई। नीली आग की लपटों ने दो गार्ड्स को पीछे धकेला, लेकिन 'ब्लैक गार्ड्स' सामान्य सैनिकों से कहीं अधिक शक्तिशाली थे। उनकी काली तलवारों ने इज़ोल्ड के जादू को काटना शुरू कर दिया।​इज़ोल्ड का पैर फिसला और वह फर्श पर गिर गई। एक गार्ड ने अपना भारी पैर उसकी छाती पर रखने की कोशिश की, लेकिन तभी एक तेज़ हवा का झोंका आया। कैसियन की तलवार ने उस गार्ड के दो टुकड़े कर दिए।​"मेरे पीछे रहो!" कैसियन ने गरजकर कहा।​इज़ोल्ड को गुस्सा आया। "मुझे तुम्हारी सुरक्षा की ज़रूरत नहीं है!" वह फुर्ती से उठी और उसने अपने खंजर से एक गार्ड की गर्दन पर वार किया। खंजर का ज़हर जैसे ही गार्ड के खून में मिला, वह राख बनकर बिखर गया।​लड़ाई अब पूरे शयनागार में फैल चुकी थी। भारी पर्दे आग की चपेट में थे, और कीमती मेज़-कुर्सियाँ टूटकर बिखर रही थीं। इज़ोल्ड और कैसियन, जो एक पल पहले एक-दूसरे की जान लेने पर उतारू थे, अब पीठ से पीठ सटाकर लड़ रहे थे। इज़ोल्ड का जादू और कैसियन की तलवारबाज़ी का मेल एक विनाशकारी शक्ति पैदा कर रहा था।​"वे रुक नहीं रहे हैं!" इज़ोल्ड ने चिल्लाकर कहा, जब उसने देखा कि और भी सैनिक मलबे से अंदर आ रहे थे। "वेलेरियस ने पूरे महल को हमारे खिलाफ कर दिया है!"​कैसियन ने एक ज़ोरदार वार के साथ सेनापति को पीछे धकेला। "हमें यहाँ से निकलना होगा। महल के नीचे एक प्राचीन सुरंग है जो एल्डोरिया की सीमाओं तक जाती है। केवल वही रास्ता सुरक्षित है।"​इज़ोल्ड ठिठक गई। 'एल्डोरिया'? क्या कैसियन उसे वापस वहीं ले जाना चाहता था जहाँ से सब शुरू हुआ था? संदेह का वह साया अभी भी उसके मन के किसी कोने में दुबका था, लेकिन उसके पास सोचने का समय नहीं था।​"जाओ!" कैसियन ने उसे आदेश दिया और अपनी जादुई शक्ति से एक विशाल 'शून्य लहर' (Void Wave) पैदा की, जिसने सैनिकों के जत्थे को कुछ पलों के लिए रोक दिया।​इज़ोल्ड ने अंतिम बार कैसियन की आँखों में देखा। उन आँखों में अब कोई छल नहीं, बल्कि एक बलिदान की भावना थी। वह मुड़ी और उस गुप्त रास्ते की ओर भागी जो बिस्तर के पीछे की दीवार में छिपा था। कैसियन उसके पीछे आया, और जैसे ही वे सुरंग के भीतर दाखिल हुए, भारी पत्थर का दरवाज़ा फिर से बंद हो गया, जिससे सैनिकों का शोर और महल की तबाही पीछे रह गई।​सुरंग के घोर अंधेरे में इज़ोल्ड की साँसें तेज़ थीं। वह अब कैसियन के साथ एक ऐसे रास्ते पर थी जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं थी। प्रतिशोध की रात अब एक रहस्यमयी पलायन में बदल चुकी थी।​

​भाग-1: जादुई ज़ंजीर और प्राणों का सौदा​धमाके के बाद सम्राट के शयनागार में फैली धूल और मलबे का गुबार ऐसा था मानो हवा ही मिट्टी बन गई हो। इज़ोल्ड के कानों में एक तीखी सीटी जैसी आवाज़ गूँज रही थी, जो विस्फोट के सदमे का नतीजा थी। उसने खाँसते हुए अपनी आँखें खोलीं, लेकिन सामने सब कुछ धुंधला था। जैसे ही उसने अपने शरीर में जान फूँकने की कोशिश की और उठने के लिए ज़मीन पर हाथ टिकाया, उसे अपनी दाईं कलाई पर एक ऐसी जलन महसूस हुई जैसे किसी ने खोलता हुआ तेल उसकी खाल पर डाल दिया हो।​उसने चीखने की कोशिश की, लेकिन गला सूख चुका था। उसकी कलाई पर वह प्राचीन जादुई निशान—जो एल्डोरिया के विनाश के बाद से शांत पड़ा था—अब एक हिंसक और नीली रोशनी के साथ धड़क रहा था। वह निशान केवल चमक नहीं रहा था, बल्कि वह इज़ोल्ड के मांस के भीतर गहराई तक अपनी जड़ें जमा रहा था। यह 'रक्त-बंधन' (Blood-Bind) था।​"मुझसे... दूर हटो," इज़ोल्ड ने लड़खड़ाते हुए कहा। उसने देखा कि कैसियन भी पास ही गिरा हुआ था, और उसकी कलाई पर भी वैसा ही निशान उभर आया था।​इज़ोल्ड ने नफरत और घृणा में भरकर कैसियन का हाथ झटकने की कोशिश की और उससे दूर भागने के लिए एक छलांग लगाई। लेकिन वह अभी दो कदम भी नहीं बढ़ी थी कि उसके सीने में एक भयानक मरोड़ उठी। उसे लगा जैसे उसके दिल को किसी ने लोहे की मुट्ठी में भींच दिया हो। उसके फेफड़ों से हवा बाहर निकल गई और वह घुटनों के बल उस ठंडे फर्श पर गिर पड़ी। दर्द इतना तीव्र था कि उसकी आँखों के सामने अंधेरा छा गया।​"इतनी मूर्खता मत करो, इज़ोल्ड," कैसियन की आवाज़ आई। वह भी अपनी छाती थामे हुए था और उसका चेहरा दर्द से पीला पड़ चुका था। "यह बंधन अब हमारे प्राणों को एक डोर से बाँध चुका है। जब मैंने वेलेरियस के वार को रोकने के लिए अपनी रूह की ऊर्जा का इस्तेमाल किया और तुमने उसी समय अपनी जादुई चेन चलाई, तो हमारी शक्तियाँ एक-दूसरे में उलझ गईं। अब हम दो जिस्म तो हैं, लेकिन हमारी जादुई धड़कन एक ही है।"​"तुम झूठ बोल रहे हो!" इज़ोल्ड ने कराहते हुए कहा, उसके माथे पर पसीना चमक रहा था। "तुमने यह जानबूझकर किया ताकि मैं तुम्हें मार न सकूँ। तुमने अपनी कायरता को इस जादू के पीछे छिपा लिया है!"​कैसियन ने एक कड़वी मुस्कान के साथ उसकी ओर देखा। "अगर यह मेरी योजना होती इज़ोल्ड, तो क्या मैं खुद इस भयानक दर्द को सहता? देखो मुझे, जितना दर्द तुम्हें हो रहा है, उतना ही मुझे भी हो रहा है। तुम जितना दूर भागोगी, यह बंधन उतना ही खिंचेगा और अंत में हम दोनों की रूहें फट जाएंगी।"​भाग-2: अंधेरे रास्तों का सफर और मानसिक युद्ध​कैसियन ने लड़खड़ाते हुए हाथ बढ़ाया ताकि वह इज़ोल्ड को उठा सके, लेकिन इज़ोल्ड की आँखों में जल रही नफरत ने उसे रुकने पर मजबूर कर दिया। "मुझे मत छूना," उसने फुसफुसाते हुए कहा। वह खुद अपने पैरों पर खड़ी हुई, हालाँकि उसके पैर कांप रहे थे।​वे दोनों अब उस गुप्त रास्ते की ओर बढ़े जो कैसियन के बिस्तर के पीछे एक भारी पत्थर के हटने से खुला था। यह रास्ता सदियों पुराना था और इसे 'अंधेरों का गलियारा' कहा जाता था। जैसे ही वे भीतर दाखिल हुए, पत्थर का भारी दरवाज़ा पीछे से बंद हो गया और वे एक दमघोंटू अंधेरे में घिर गए।​यहाँ की हवा में सदियों पुरानी सीलन और मृत पत्थरों की गंध थी। इज़ोल्ड जानबूझकर कैसियन से पाँच कदम पीछे चलने की कोशिश कर रही थी, लेकिन जैसे ही दूरी बढ़ी, उसकी कलाई का निशान फिर से दहकने लगा। एक ज़ोरदार जादुई करंट ने उसके पूरे नर्वस सिस्टम को हिला दिया।​"धिक्कार है इस जादू पर!" उसने गुस्से में चिल्लाकर कहा। उसे मज़बूरी में कैसियन के बिल्कुल करीब चलना पड़ रहा था। उनके कंधे एक-दूसरे से टकरा रहे थे, और हर बार जब उनकी त्वचा स्पर्श करती, इज़ोल्ड को एक अजीब सी झुनझुनी महसूस होती जो नफरत और आकर्षण का एक विचित्र मिश्रण थी।​"हटो यहाँ से, तुम बहुत धीरे चल रहे हो," इज़ोल्ड ने कैसियन को कंधे से ज़ोर का धक्का दिया।​कैसियन एक संकरे मोड़ पर रुक गया और मुड़कर उसे अपनी उन गहरी, काली आँखों से घूरा जिनमें अब एक तीखी चिड़चिड़ाहट थी। "यह मेरा महल है, इज़ोल्ड। ये रास्ते मैंने बचपन में तब नापे थे जब तुम शायद एल्डोरिया के खेतों में खेल रही होगी। यहाँ एक गलत कदम का मतलब है सीधे हज़ारों फीट गहरी खाई में गिरना।"​"तो गिर जाओ न!" इज़ोल्ड ने पलटवार किया। "कम से कम दुनिया को एक तानाशाह से तो मुक्ति मिलेगी।"​कैसियन उसकी ओर एक कदम और बढ़ा, वह इतना करीब था कि इज़ोल्ड उसकी साँसों की गर्माहट महसूस कर सकती थी। "अगर मैं गिरा, तो तुम भी गिरोगी। याद है न? 'रक्त-बंधन'। अगर मैं मरा, तो तुम्हारी रूह भी उसी पल शरीर छोड़ देगी। तो क्या तुम मेरे साथ इस गंदे फर्श पर या उस गहरी खाई में अपनी जान देने के लिए तैयार हो?"​इज़ोल्ड का चेहरा गुस्से और शर्म से लाल हो गया। उसके पास कोई तर्क नहीं बचा था। वह जानती थी कि वह इस आदमी से नफरत करती है, लेकिन उसे ज़िंदा रखना अब उसकी अपनी मजबूरी बन गई थी।​भाग-3: तकरार और अनचाहा गठबंधन​सुरंग के भीतर सैनिकों के चिल्लाने की आवाज़ें अब दूर से सुनाई दे रही थीं, लेकिन पत्थरों की दीवारों से गूँजकर वे और भी डरावनी लग रही थीं। वेलेरियस के सैनिक अब उनके पीछे थे।​"तुम्हारी ज़ुबान तुम्हारी तलवार से भी ज़्यादा ज़हरीली है, कैसियन," इज़ोल्ड ने अंधेरे में चलते हुए कहा। "लोग कहते हैं कि तुमने एल्डोरिया को इसलिए जलाया क्योंकि तुम एक महान साम्राज्य बनाना चाहते थे। पर मुझे तो तुम सिर्फ एक अभिमानी और अकेले इंसान लगते हो जो अपनी परछाईं से भी डरता है।"​कैसियन कुछ देर शांत रहा। सुरंग में केवल उनके जूतों की आहट सुनाई दे रही थी। फिर उसने बहुत धीमी आवाज़ में कहा, "सच्चाई अक्सर वैसी नहीं होती जैसी वह आग की रोशनी में दिखती है, इज़ोल्ड। कभी-कभी हाथ इसलिए जलाने पड़ते हैं ताकि पूरा शरीर राख होने से बच सके।"​"यह तुम्हारी सफ़ाई है? हज़ारों मासूमों के खून की सफ़ाई?"​"नहीं, यह हकीकत है," कैसियन ने अचानक रुकते हुए उसका हाथ पकड़ लिया। इज़ोल्ड ने उसे छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन कैसियन की पकड़ इस बार फौलादी थी। "सुनो... क्या तुम्हें सुनाई दे रहा है?"​इज़ोल्ड शांत हुई। सुरंग की दीवारों के पीछे से एक अजीब सी 'फुसफुसाहट' आ रही थी। यह सैनिकों की आवाज़ नहीं थी। यह कुछ प्राचीन और अभिशप्त था। 'साया-कीट' (Shadow Creepers)—वेलेरियस के पालतू जीव जो अंधेरे में शिकार करते थे।​"अब बहस बंद करो," कैसियन ने इज़ोल्ड की आँखों में देखते हुए कहा। "अगर तुम लड़खड़ाई, तो मुझे तुम्हें उठाकर भागना पड़ेगा। और मेरा विश्वास करो, इस वक्त मैं तुम्हारी इस भारी-भरकम नफरत और गुस्से को ढोने के मूड में बिल्कुल नहीं हूँ।"​इज़ोल्ड ने अपना पैर ज़मीन पर पटका, लेकिन उसने अपना हाथ कैसियन के हाथ में रहने दिया। वह नफरत करती थी इस स्पर्श से, वह नफरत करती थी इस मजबूरी से, लेकिन उसे पता था कि इस वक्त कैसियन ही वह एकमात्र ढाल है जो उसे उस अंधेरे से बाहर निकाल सकती है।​वे दोनों उस अंधेरी सुरंग में एक साथ दौड़ने लगे। इज़ोल्ड को अहसास हो रहा था कि यह 'रक्त-बंधन' केवल प्राणों का मेल नहीं था, बल्कि यह उसके और कैसियन के बीच के उन रहस्यों को खोलने की शुरुआत थी जो पिछले दस सालों से बर्फ के नीचे दबे हुए थे। प्रतिशोध की राह अब एक ऐसे रास्ते पर मुड़ चुकी थी जहाँ दुश्मन ही हमसफ़र बन गया था।​

​​अध्याय 6: अतीत की राख और इवान की चेतावनी​भाग-1: बर्फीली कैद और जादुई पदचिह्न​सुरंग का वह दमघोंटू और प्राचीन अंधेरा अब धीरे-धीरे कम होने लगा था। बाहर की बर्फीली हवाओं की सरसराहट पत्थर की दीवारों को चीरती हुई भीतर आ रही थी, जो इस बात का संकेत थी कि वे महल की सीमाओं को लांघ चुके हैं। इज़ोल्ड और कैसियन जैसे ही उस गुप्त निकास से बाहर निकले, उनके सामने विशाल उत्तरी पहाड़ियों का नज़ारा था।​चाँद की ठंडी रोशनी में पहाड़ किसी सोए हुए सफेद दैत्य की तरह लग रहे थे। चारों ओर घने 'पाइन' के जंगल थे जहाँ बर्फ की मोटी चादर ने सब कुछ सफेद और डरावना शांत बना दिया था। इज़ोल्ड को अपनी आज़ादी की पहली खुली साँस लेनी चाहिए थी, लेकिन उसकी कलाई पर वह दहकता हुआ 'रक्त-बंधन' उसे हर पल याद दिला रहा था कि वह अब भी कैसियन की कैदी है। अंतर बस इतना था कि अब सलाखें लोहे की नहीं, बल्कि एक अटूट जादुई धागे की थीं।​"हम यहाँ खुले में नहीं रुक सकते," कैसियन ने कहा। उसकी आवाज़ में एक ऐसी थकान थी जिसे वह अपनी राजसी अकड़ के पीछे छिपाने की कोशिश कर रहा था। उसका चेहरा पीला पड़ चुका था, लेकिन उसकी आँखों में अब भी वही तेज़ था जो पहाड़ों के तूफ़ान को भी चुनौती दे सके। "वेलेरियस के 'छाया-ट्रैकर्स' (Shadow Trackers) हमारे पीछे होंगे। वे वेलेरियस के रक्त से पैदा हुए शिकारी हैं, वे इंसानों की तरह नहीं थकते और न ही उन्हें ठंड महसूस होती है।"​वे दोनों घने जंगल के भीतर बढ़ते गए। जैसे-जैसे समय बीतता गया, इज़ोल्ड का शरीर जवाब देने लगा। उसके पैर घुटनों तक बर्फ में धंस रहे थे और बर्फीली हवाएँ उसकी हड्डियों तक पहुँचकर उसे सुन्न कर रही थीं। उसकी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा था। कैसियन ने उसके लड़खड़ाते कदमों को भांप लिया। उसने पहाड़ी की ओट में एक प्राचीन गुफा देखी, जिसका मुहाना सूखे पत्तों और बर्फ से ढका था।​"वहाँ... हमें सुबह की पहली किरण होने तक वहाँ रुकना होगा। इस तूफ़ान में आगे बढ़ना आत्महत्या होगी," कैसियन ने उसे सहारा देते हुए कहा।​भाग-2: गुफा की आग और साझा दर्द​गुफा के भीतर का माहौल ठंडा और पथरीला था, जहाँ नमी की एक अजीब सी गंध बसी थी। कैसियन ने अपनी उंगलियों को चुटकी की तरह रगड़ा और एक छोटी सी नीली जादुई आग जलाई। रोशनी के उस मद्धम और कांपते हुए घेरे में, इज़ोल्ड ने पहली बार गौर किया कि कैसियन के बाएं हाथ से खून बह रहा था। यह कोई तलवार का घाव नहीं था।​इज़ोल्ड चौंक गई। उसे याद आया कि जब वह जंगल में लड़खड़ाई थी और उसे दर्द हुआ था, तब कैसियन ने अपना हाथ अपनी छाती पर रखा था। यह घाव वही था जो इज़ोल्ड के गिरने पर 'रक्त-बंधन' के ज़रिए कैसियन के शरीर पर उभरा था। इज़ोल्ड का मन एक क्षण के लिए पसीज गया, लेकिन तुरंत उसे एल्डोरिया की वह रात, जलते हुए घर और अपने पिता का लहू से सना चेहरा याद आया। उसका दिल फिर से पत्थर हो गया।​"तुम्हें चोट लगी है," इज़ोल्ड ने रूखे और ठंडे स्वर में कहा।​"यह मेरा घाव नहीं है, इज़ोल्ड," कैसियन ने आग की लपटों में खोई हुई नज़रों से कहा। "यह तुम्हारी थकान और तुम्हारा शारीरिक दर्द है जो इस बंधन के कारण मेरे शरीर पर मांस फाड़कर बाहर निकल रहा है। यह बंधन तुम्हें सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया था, ताकि अगर तुम पर कोई प्रहार हो तो उसका आधा हिस्सा मैं सोख सकूँ। लेकिन यह मुझे तुम्हारे हर उस दर्द का हिस्सेदार बना रहा है जिसे तुम छिपाना चाहती हो।"​इज़ोल्ड खामोश हो गई। उसके पास कहने को कुछ नहीं था। उसने अपना झोला खोला और उस जादुई काले पत्थर को बाहर निकाला जिसमें उसके भाई इवान की रूह कैद थी। पत्थर अचानक किसी धड़कते हुए दिल की तरह तेज़ी से बैंगनी रोशनी के साथ चमकने लगा। इज़ोल्ड के दिमाग में इवान की आवाज़ गूँजी—वह आवाज़ किसी ज़हरीले साँप की फुसफुसाहट जैसी थी जो सीधी उसकी रूह में ज़हर घोल रही थी।​"इज़ोल्ड... मेरी मासूम बहन... इसकी कोमल बातों और इस बनावटी दर्द में मत आना," इवान की रूह ने उसके दिमाग में चीखकर कहा। "क्या तुम भूल गई हमारे कबीले की वह राख? क्या तुम भूल गई कि इसी शख्स ने हमारे पिता की छाती को अपनी तलवार से चीरा था? यह तुम्हें भ्रमित कर रहा है ताकि तुम्हारी शक्तियों को निगल सके। मार डालो इसे... अभी, जब यह तुम्हारे दर्द से कमज़ोर पड़ चुका है।"​भाग-3: इवान की चेतावनी और टूटा हुआ सम्राट​इज़ोल्ड का सिर चकराने लगा। इवान का गुस्सा और नफरत उसके खून में तेज़ाब की तरह फैल रही थी। उसकी उंगलियाँ अनायास ही उसके खंजर की मूठ पर जा टिकीं। कैसियन ने उसकी ओर देखा। वह उसे मार नहीं रहा था, वह बस शांत था। उसे पता था कि इज़ोल्ड के भीतर क्या चल रहा है।​"इवान तुमसे बात कर रहा है, है ना?" कैसियन ने बिना किसी डर के पूछा। "वह तुम्हें वही दिखाएगा जो उसे वेलेरियस ने उस काली कोठरी में दिखाया है जहाँ उसकी रूह को तड़पाया गया था। इज़ोल्ड, सच्चाई की अपनी एक आँख होती है।"​इज़ोल्ड चिल्लाई, "झूठ! अपनी जान बचाने के लिए नई कहानियाँ गढ़ना बंद करो! मेरे भाई की रूह कभी झूठ नहीं बोलेगी!"​"सच्चाई यह है इज़ोल्ड," कैसियन की आवाज़ में अब एक ऐसी पीड़ा थी जिसे छिपाना नामुमकिन था, "कि उस रात मैं वहाँ हत्यारा बनकर नहीं, बल्कि एल्डोरिया की आखिरी उम्मीद बनकर पहुँचा था। तुम्हारे कबीले को मिटाने का आदेश मेरे पिता और वेलेरियस ने मिलकर दिया था। मैं उस सेना का हिस्सा था, लेकिन जब मैंने मासूमों को जलते देखा, तो मैंने विद्रोह किया। मैं तो खुद उस आग से अपनी रूह और तुम्हारे पिता के कुछ आखिरी शब्दों को बचाकर भागा था। इवान को वेलेरियस ने पकड़ा और उसकी यादों को विकृत कर दिया ताकि वह तुम्हें मेरे खिलाफ एक हथियार बना सके।"​"तुम झूठ बोल रहे हो!" इज़ोल्ड की आँखों से अब आँसू बहने लगे थे। उसका विश्वास और उसकी नफरत आपस में टकरा रहे थे।​"सच हमेशा कड़वा और बदसूरत होता है इज़ोल्ड," कैसियन ने अपनी आँखें मूंद लीं और गुफा की दीवार से सटकर बैठ गया। "एक दिन तुम्हें खुद यह चुनना होगा कि तुम अपनी आँखों पर यकीन करोगी या उस रूह पर जो खुद वेलेरियस की नफरत की कैद में है।"​उस रात, गुफा की बुझती हुई आग की मद्धम रोशनी में, इज़ोल्ड ने कैसियन को पहली बार उस क्रूर सम्राट के रूप में नहीं देखा जिसके बारे में उसने सुना था। उसने देखा एक टूटे हुए, अकेले इंसान को, जो शायद उतना ही बड़ा पीड़ित था जितना कि वह खुद। इवान की आवाज़ उसके दिमाग में अभी भी गूँज रही थी, लेकिन पहली बार इज़ोल्ड को उस आवाज़ में नफरत के साथ-साथ एक अजीब सा डर महसूस हुआ। क्या सचमुच उसका भाई भी किसी खेल का प्यादा था?​

​अध्याय 7: रक्तरंजित बर्फ और सायों का हमला​भाग-1: हवा में मौत की गंध​अगली सुबह का सूरज बादलों के पीछे किसी अपराधी की तरह छिपा था, जैसे वह भी इस बर्फीले जंगल में होने वाले रक्तरंजित संघर्ष का गवाह नहीं बनना चाहता था। इज़ोल्ड और कैसियन पहाड़ी के एक बेहद संकरे और फिसलन भरे रास्ते से नीचे उतर रहे थे। बर्फबारी रुक चुकी थी, लेकिन सन्नाटा इतना गहरा था कि वह किसी आने वाले तूफान की चेतावनी लग रहा था।​अचानक इज़ोल्ड रुकी। उसकी जादुई इंद्रियाँ जाग उठी थीं। उसे हवा में फूलों की महक नहीं, बल्कि मांस के सड़ने जैसी एक भारी दुर्गंध महसूस हुई। यह सड़न साधारण नहीं थी; यह वेलेरियस के सबसे क्रूर शिकारियों—'शैडो-क्रीपर्स' (Shadow-Creepers) की आहट थी। ये वे जीव थे जिन्हें इंसानी रूहों को जादुई ज़हर पिलाकर बनाया जाता था।​"झुक जाओ!" कैसियन की आवाज़ गूँजी। इससे पहले कि इज़ोल्ड कुछ समझ पाती, कैसियन ने उसका हाथ पकड़कर उसे एक विशाल काली चट्टान के पीछे खींच लिया।​इज़ोल्ड का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा। "अपना हाथ हटाओ मुझ पर से—"​"चुप रहो, अगर अपनी जान प्यारी है तो!" कैसियन ने फुसफुसाते हुए उसके मुँह पर हाथ रख दिया। उसकी आँखें सामने की धुंध को चीर रही थीं।​तभी, बर्फ की चादर को चीरते हुए तीन विशाल और विकृत साये उनके सामने प्रकट हुए। वे किसी डरावने सपने की तरह दिख रहे थे—उनके हाथ असामान्य रूप से लंबे थे जिनमें नुकीले पंजे चमक रहे थे। उनके चेहरे पर कोई नक़्श नहीं थे, आँखों की जगह केवल जलते हुए कोयले जैसे दो लाल छेद थे जिनसे घृणा की आग निकल रही थी।​भाग-2: क्रोध की भूल और कैसियन का बलिदान​इज़ोल्ड ने अपनी जादुई चेन और खंजर निकाला। इवान की आवाज़ उसके दिमाग में फिर से गूँजने लगी—"मार डालो इन्हें इज़ोल्ड! अपनी शक्ति दिखाओ! कैसियन को तुम्हारी ज़रूरत पड़ने दो!"​कैसियन ने उसका हाथ पकड़कर रोकने की कोशिश की। "इन पर सीधा जादुई वार मत करना इज़ोल्ड! ये 'क्रीपर्स' जादू के भूखे होते हैं। तुम्हारी बैंगनी आग इन्हें और भी विशाल और अजेय बना देगी। इन्हें केवल उस 'आत्म-अग्नि' (Soul-Fire) से मारा जा सकता है जो योद्धा की अपनी जीवन-शक्ति से निकलती है।"​लेकिन इज़ोल्ड का अहंकार और इवान की कड़वाहट ने उसे अंधा कर दिया था। "मैं किसी के पीछे छिपकर जीने वाली कायर नहीं हूँ!" उसने झटके से कैसियन का हाथ हटाया और एक प्राचीन विनाशकारी मंत्र पढ़ा। उसके खंजर से बैंगनी आग की एक प्रचंड लहर निकली और सीधे पहले साये से टकराई।​परिणाम वही हुआ जिसकी कैसियन ने चेतावनी दी थी। जैसे ही जादुई लहर साये से टकराई, साये ने उस ऊर्जा को सोख लिया। उसका आकार दोगुना हो गया और उसकी लाल आँखें और भी भयावह हो गईं। एक ज़ोरदार जादुई प्रतिघात (Backlash) हुआ, जिसने इज़ोल्ड को हवा में उछाल दिया। वह कई फुट दूर बर्फीली ढलान पर जा गिरी।​'रक्त-बंधन' के कारण कैसियन के सीने में भी वही झटका लगा। वह घुटनों के बल गिर पड़ा और उसके मुँह से खून की एक लकीर निकली। "बेवकूफ लड़की!" वह दर्द से कराहते हुए चिल्लाया।​सबसे बड़ा साया अब इज़ोल्ड की ओर बढ़ा। इज़ोल्ड बर्फ में धंसी हुई थी, उसका शरीर सुन्न पड़ चुका था। साये ने अपना खौफनाक पंजा उसकी गर्दन की ओर बढ़ाया। इज़ोल्ड ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसे लगा कि उसका अंत आ गया है। तभी एक गर्जना हुई।​कैसियन ने अपनी महान तलवार 'शून्य की पुकार' निकाली। उसने भागते हुए अपनी ही हथेली को तलवार की नंगी धार पर रगड़ दिया। उसका शाही खून जैसे ही लोहे पर गिरा, तलवार से एक विशाल नीली ज्वाला फूट पड़ी। उसने एक अकल्पनीय छलांग लगाई और इज़ोल्ड और साये के बीच एक दीवार बनकर खड़ा हो गया।​भाग-3: साझा शक्ति और दरकती नफरत​कैसियन ने एक ही प्रहार में पहले साये के दो टुकड़े कर दिए। वह नीली आग इतनी प्रचंड थी कि साया राख होने के बजाय सीधे भाप में बदल गया। लेकिन बाकी दो सायों ने कैसियन को घेर लिया। कैसियन बुरी तरह हाँफ रहा था। इज़ोल्ड ने देखा कि हर बार जब कैसियन वार कर रहा था, उसका चेहरा दर्द से ऐंठ रहा था। वह अपनी तलवार को जलाने के लिए अपने ही 'प्राणों' (Life Force) की आहुति दे रहा था।​उसका खून बर्फ पर गिरकर उसे लाल कर रहा था। इज़ोल्ड को महसूस हुआ कि यदि कैसियन आज यहाँ मर गया, तो 'रक्त-बंधन' उसे भी साथ ले डूबेगा। लेकिन उस स्वार्थ से परे, उसे पहली बार कैसियन की आँखों में वह सच्चाई दिखी जो शब्दों में नहीं थी।​इज़ोल्ड ने अपनी आँखें बंद कीं। उसने अपने दिमाग में गूँजती इवान की नफरत भरी चीखों को ज़बरदस्ती एक तरफ धकेला। उसने अपनी हथेलियाँ बर्फ पर टिकाईं और अपनी आंतरिक ऊर्जा को कैसियन की ओर एक सेतु की तरह भेजा। जैसे ही इज़ोल्ड की शक्ति और कैसियन की 'आत्म-अग्नि' मिली, तलवार की रोशनी इतनी तेज़ हो गई कि पूरा जंगल चमक उठा।​कैसियन ने इज़ोल्ड की ओर देखा—उनकी निगाहें मिलीं, और एक सेकंड के लिए दोनों को एक-दूसरे के गहरे घावों का अहसास हुआ। एक अंतिम, विनाशकारी प्रहार के साथ, कैसियन ने बाकी सायों को राख के गुबार में बदल दिया।​सब कुछ शांत हो गया। केवल कैसियन की भारी साँसों की आवाज़ आ रही थी। वह तलवार के सहारे टिका था, उसका शरीर बुरी तरह कांप रहा था। इज़ोल्ड दौड़कर उसके पास पहुँची। जैसे ही उसने कैसियन के कंधे को सहारा देने के लिए छुआ, उसे एक ऐसी बिजली का अहसास हुआ जो नफरत नहीं, बल्कि एक अजीब सा खिंचाव (Connection) था।​"तुमने... तुमने अपनी जान जोखिम में क्यों डाली?" इज़ोल्ड की आवाज़ पहली बार कांपी। "तुम मुझे मरने दे सकते थे, शायद बंधन तब भी टूट जाता।"​कैसियन ने खून से लथपथ चेहरा उठाया। उसकी आँखों में अब वह सम्राट वाली कठोरता नहीं, बल्कि एक दर्दनाक कोमलता थी। "क्योंकि मेरा और तुम्हारा भाग्य अब एक ही स्याही से लिखा गया है, इज़ोल्ड। तुम्हारी मौत मेरी हार होगी, और मेरी मौत... तुम्हारा अंत। मैं तुम्हें उस रात भी नहीं मरते देखना चाहता था, और आज भी नहीं।"​इज़ोल्ड का हाथ उसके कंधे पर थम गया। इवान की चेतावनी अब धुंधली पड़ रही थी। जंगल की उस सफेद बर्फ पर गिरा वह लाल खून अब केवल कैसियन का नहीं था, वह उन दोनों की साझा नियति का था। उनके बीच जो नफरत की अभेद्य दीवार थी, उसमें आज पहली बार एक गहरी दरार आ चुकी थी।​

​अध्याय 8: यादों का ज़हर और विश्वासघात की गूँज​भाग-1: सन्नाटे की चीख और काली नसें​बाहर बर्फबारी अब एक पागल कर देने वाले तूफान में बदल चुकी थी। हवा की गति इतनी तीव्र थी कि वह पहाड़ों की ढलानों से टकराकर किसी घायल जानवर की तरह विलाप कर रही थी। सायों के उस खौफनाक हमले के बाद, कैसियन और इज़ोल्ड ने एक पुरानी, खंडहर हो चुकी वेधशाला (Observatory) में शरण ली। यह इमारत कभी एल्डोरिया के ज्योतिषियों का केंद्र हुआ करती थी, लेकिन अब यहाँ की हवा में केवल सदियों पुरानी धूल, टूटे हुए कांच और जादू की सड़न बाकी थी।​कैसियन एक टूटे हुए पत्थर के नक्काशीदार खंभे के सहारे बैठ गया। उसका शाही लबादा कीचड़ और खून से लथपथ था। इज़ोल्ड ने गौर किया कि कैसियन की हालत उम्मीद से कहीं ज़्यादा खराब थी। उसके हाथों की नीली नसें अब धीरे-धीरे काली पड़ रही थीं—यह 'जीवन-शक्ति' (Life-Force) के उस अत्यधिक दोहन का परिणाम था जो उसने 'शैडो-क्रीपर्स' को राख करने में खर्च की थी।​इज़ोल्ड कमरे के दूसरे कोने में खड़ी उसे देख रही थी। उसके मन में एक भयानक युद्ध छिड़ा था। वह उस इंसान को देख रही थी जिसे उसने दस सालों तक अपनी नफरत के केंद्र में रखा था, जिसके मरने की दुआएँ उसने हर रोज़ माँगी थीं। लेकिन आज, उसी दुश्मन ने अपनी रगों का खून जलाकर इज़ोल्ड की ढाल बनना स्वीकार किया था।​"तुम इतने शांत कैसे रह सकते हो?" इज़ोल्ड ने अचानक पूछा। उसकी आवाज़ उस खाली और ठंडे कमरे में किसी पत्थर के गिरने जैसी गूँजी। "तुम्हें अच्छी तरह पता है कि मैं यहाँ किसी मेहमान की तरह नहीं, बल्कि तुम्हारी गर्दन काटने आई थी। फिर भी तुमने अपनी बची-कुची शक्ति मुझ जैसे इंसान के लिए बर्बाद कर दी, जो तुम्हें अभी भी मारना चाहती है।"​कैसियन ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं। उनकी गहराई में एक ऐसा अथाह और काला सागर जैसा दर्द था जिसे इज़ोल्ड की नफरत ने पहले कभी देखने नहीं दिया था। "सत्ता और पाप का बोझ बहुत भारी होता है, इज़ोल्ड," कैसियन ने बहुत धीमी और कांपती आवाज़ में कहा। "कभी-कभी मौत सज़ा नहीं, बल्कि एक इनाम की तरह लगती है। लेकिन मैं तुम्हें उस रात की आग में फिर से जलने के लिए नहीं छोड़ सकता था। एल्डोरिया का कर्ज मेरी जान से कहीं बड़ा है।"​भाग-2: इवान का उन्माद और मायावी यादें​इज़ोल्ड कुछ कहने ही वाली थी कि उसके झोले में रखा वह काला पत्थर—इवान की रूह की कैद—भयानक रूप से कांपने लगा। पत्थर से एक तीखी, कान फाड़ देने वाली चीख जैसी आवाज़ निकली जो केवल इज़ोल्ड के दिमाग के भीतर गूँज रही थी। पत्थर की बैंगनी रोशनी अब गहरे काले धुएं में बदल रही थी।​"इज़ोल्ड! मत सुनो इसकी बातें! यह शैतान का पुत्र तुम्हें अपनी बातों के जाल में फँसाकर कमज़ोर कर रहा है!" इवान की रूह उसके दिमाग के कोनों में चिल्लाई। "क्या तुम्हें याद नहीं वह रात? क्या तुम्हें फिर से वह मंज़र देखना है? देखो इसे! अपनी आँखों से देखो अपने पिता का हत्यारा!"​अचानक, इज़ोल्ड के चारों ओर की वेधशाला गायब हो गई। उसे अपने गाँव एल्डोरिया की वही खौफनाक रात दिखने लगी। आग की लपटें आसमान छू रही थीं। लेकिन इस बार का दृश्य वैसा नहीं था जैसा इज़ोल्ड ने सालों से याद किया था। उसने देखा कि उसका घर मलबे में तब्दील हो चुका है। उसके पिता घायल होकर ज़मीन पर गिरे हैं।​और उनके सामने कैसियन खड़ा है। कैसियन के हाथ में वही नीली तलवार है जो आज उसने सायों के खिलाफ चलाई थी। दृश्य में कैसियन बिना किसी दया के तलवार चलाता है और इज़ोल्ड के पिता का सिर धड़ से अलग हो जाता है। खून के फव्वारे इज़ोल्ड के पैरों तक आते महसूस हुए।​"नहीं! बंद करो इसे!" इज़ोल्ड चीखते हुए पीछे हटी और एक दीवार से जा टकराई। "कैसियन! तुमने ही उन्हें मारा था! मैंने अभी-अभी देखा... तुमने अपनी तलवार से उनका गला काटा था!"​उसकी आँखों में पागलपन और गहरा दुख एक साथ उमड़ आया। उसने झटके से अपना खंजर निकाल लिया। उसकी कलाई का जादुई बंधन अब आग की तरह जल रहा था, क्योंकि उसकी नफरत की लहरें कैसियन की ऊर्जा से टकराकर विस्फोट कर रही थीं।​भाग-3: रूह का सच और अंतिम संशय​इवान की रूह का काला धुआँ अब पत्थर से बाहर निकलकर इज़ोल्ड के चारों ओर एक हिंसक घेरा बना रहा था। "मार डालो इसे, इज़ोल्ड! बदला लो! अपनी माँ के आँसुओं का और पिता के खून का हिसाब करो!"​कैसियन लड़खड़ाते हुए खड़ा हुआ, उसने इज़ोल्ड को थामने की कोशिश की। "इज़ोल्ड, मेरी बात सुनो! वह पत्थर... वह इवान नहीं है! वह वेलेरियस की 'भ्रम-विद्या' (Illusion Magic) है! वह तुम्हें वही यादें दिखा रहा है जो उसने तुम्हारे दिमाग में रोपी हैं! जिस रात तुम्हारे पिता मरे, मैं उन्हें बचाने की कोशिश कर रहा था!"​"मुझसे दूर रहो, धोखेबाज़!" इज़ोल्ड ने खंजर की नोक कैसियन के सीने पर टिका दी। उसका पूरा शरीर कांप रहा था। "यादें झूठ नहीं बोलतीं! मैंने तुम्हें खून बहाते देखा है!"​लेकिन जैसे ही उसने खंजर चलाने के लिए हाथ उठाया, उसकी नज़र कैसियन की आँखों पर ठहर गई। उन काली नसों के बीच, कैसियन की आँखों में मौत का डर नहीं था। वहाँ केवल एक गहरा दुख और समर्पण था। एक हत्यारे की आँखों में ऐसी करुणा और 'सच्चाई' नहीं हो सकती जो किसी की रक्षा के लिए खुद को मिटाने को तैयार हो।​इज़ोल्ड का दिमाग दो हिस्सों में बँट गया था। एक तरफ उसके भाई की रूह की चीखें थीं जो प्रतिशोध माँग रही थीं, और दूसरी तरफ उसकी अपनी आत्मा की एक धीमी सी पुकार थी जो कह रही थी कि यहाँ कुछ बहुत बड़ा और गलत छिपा हुआ है।​"अगर तुम्हें लगता है कि मेरी मौत से वह दृश्य बदल जाएगा, इज़ोल्ड... तो चलाओ खंजर," कैसियन ने अपना हाथ इज़ोल्ड के खंजर वाले हाथ पर रख दिया और उसे अपने दिल की ओर खींच लिया। "लेकिन याद रखना, जो तुम देख रही हो, वह तुम्हारी आँखें देख रही हैं, तुम्हारी रूह नहीं।"​इज़ोल्ड का गला रुँध गया। इवान की रूह का धुआँ अब और भी हिंसक होकर उसे उकसा रहा था, लेकिन इज़ोल्ड ने पहली बार अपने भाई की रूह पर संदेह किया। क्या सचमुच उसका अपना भाई ही उसे किसी बड़े विनाश की ओर धकेल रहा था? या फिर कैसियन का यह समर्पण उसकी सबसे बड़ी चाल थी? उस पुरानी वेधशाला में, तूफान की गूँज के बीच, इज़ोल्ड एक ऐसे चौराहे पर खड़ी थी जहाँ एक गलत वार दुनिया का अंत कर सकता था।

​​अध्याय 9: कालकोठरी का त्याग और रूहानी मिलन​भाग-1: प्रेत सेना का तांडव और गिरती हुई ढाल​वेधशाला के भीतर का वातावरण अब किसी श्मशान जैसा ठंडा और भारी हो गया था। बाहर का बर्फीला तूफ़ान दीवारों से टकराकर ऐसी आवाज़ें निकाल रहा था जैसे हज़ारों प्रेत एक साथ विलाप कर रहे हों। अचानक, वेधशाला का वह प्राचीन आबनूस का दरवाज़ा, जो सदियों के इतिहास का गवाह था, किसी कागज़ के टुकड़े की तरह फटकर हज़ारों टुकड़ों में बिखर गया।​धूल, मलबे और काले जादू के गाढ़े धुएं के गुबार के बीच से वेलेरियस के सबसे खूंखार 'Wraith Soldiers' (प्रेत सैनिक) भीतर दाखिल हुए। ये साधारण परछाइयाँ नहीं थीं; ये वे प्राचीन योद्धा थे जिनकी रूहों को वेलेरियस ने तड़पाकर अपनी दासता में बाँध लिया था। उनकी आँखों की जगह केवल शून्य था और उनके हाथों में मौजूद काली तलवारों से 'मृत्यु' की गंध आ रही थी। बिना किसी चेतावनी के, उन्होंने इज़ोल्ड की ओर काले जादू के जलते हुए गोलों की बौछार कर दी।​कैसियन, जो अपनी जीवन-शक्ति खोने के कारण पहले ही मौत की कगार पर था, एक पल की भी देरी किए बिना इज़ोल्ड के सामने फौलाद बनकर खड़ा हो गया। उसने अपनी कांपती हुई उंगलियों से हवा में एक प्राचीन मुद्रा बनाई और एक सुनहरी जादुई ढाल का निर्माण किया। वार इतने प्रचंड थे कि हर प्रहार के साथ ढाल में शीशे की तरह दरारें पड़ने लगीं और वेधशाला की छत से पत्थर गिरने लगे। कैसियन के मुँह से खून की उल्टियाँ हो रही थीं, जो उसकी सुनहरी ढाल पर लाल छींटों की तरह बिखर रही थीं, जैसे किसी पवित्र मंदिर की दीवार पर लहू छिड़का गया हो।​"इज़ोल्ड... मेरी आँखों में देखो और मेरी बात सुनो," कैसियन ने हाँफते हुए कहा, उसका स्वर अब एक टूटते हुए संगीत जैसा धीमा था। "वेलेरियस तुम्हें मारने के लिए नहीं, बल्कि तुम्हारी उस 'एल्डोरियन अग्नि' को गुलाम बनाने के लिए यहाँ पहुँचा है। वह इवान की उस अभिशप्त और विकृत रूह का इस्तेमाल केवल इसलिए कर रहा है ताकि तुम्हारी नफरत को एक हथियार बनाया जा सके। वह तुम्हें उस सच से दूर रख रहा है जिसे स्वीकार करना शायद तुम्हारे लिए मौत से भी कठिन होगा।"​भाग-2: जीवन-ज्योति का महा-दान और रूहानी समागम​"मैं तुम पर यकीन कैसे करूँ कैसियन? मेरी रगों में दौड़ता हर कतरा, मेरे भाई की वह चीखती हुई रूह... सब मुझे तुम्हारा अंत माँगने के लिए उकसा रहे हैं!" इज़ोल्ड ने चीखकर पूछा, जबकि वह खुद भी अपनी जादुई चेन से उन प्रेत सैनिकों के प्रहारों को निष्फल करने की कोशिश कर रही थी। चारों ओर से प्रेत सैनिक घेरा छोटा कर रहे थे और मौत की परछाइयाँ इज़ोल्ड के चेहरे तक पहुँचने लगी थीं।​कैसियन ने एक ऐसा निर्णय लिया जो इतिहास के किसी भी सम्राट ने कभी नहीं लिया था। उसने मुड़कर इज़ोल्ड की आँखों में झाँका—उन काली आँखों में अब भय नहीं, बल्कि एक असीम शांति और आत्मोसर्ग (Sacrifice) का भाव था। उसने इज़ोल्ड का हाथ इतनी मज़बूती से पकड़ा कि उसकी उंगलियों के निशान इज़ोल्ड की त्वचा पर उभर आए।​"क्योंकि मैं तुम्हें अपनी 'जीवन-ज्योति' (Life Essence) सौंपने जा रहा हूँ, इज़ोल्ड। यह हमारे प्राणों का वह मिलन है जिसे 'रक्त-बंधन' की अंतिम परिणति कहा जाता है। अगर मेरे मन में रत्ती भर भी कपट हुआ, या मैं तुम्हारे पिता का गुनहगार हुआ, तो यह ज्योति इसी क्षण हमारी रूहों को भस्म कर देगी। क्या तुम इस अग्नि-परीक्षा के लिए तैयार हो?"​इज़ोल्ड कुछ समझ पाती, उससे पहले ही कैसियन ने एक अत्यंत प्राचीन और वर्जित मंत्र का उच्चारण शुरू किया। अचानक, एक अकल्पनीय सुनहरी और नीली रोशनी उन दोनों के बीच से विस्फोट की तरह फूटी। इज़ोल्ड को महसूस हुआ जैसे उसकी रीढ़ की हड्डी के माध्यम से पिघला हुआ दिव्य सोना उसके पूरे शरीर में प्रवाहित हो रहा हो। उसका सारा संशय, उसकी बरसों की थकान, उसकी नफरत की वह काली चादर... सब कुछ उस रोशनी में जलकर राख होने लगा।​लेकिन इस दिव्य शक्ति के बदले में इज़ोल्ड ने जो मंज़र देखा, उसने उसकी आत्मा को झकझोर कर रख दिया। कैसियन की आँखों की वह राजसी चमक मद्धम पड़ती जा रही थी। उसका चेहरा पीला नहीं, बल्कि सफेद संगमरमर जैसा बेजान होता जा रहा था। वह धीरे-धीरे कमज़ोर होकर इज़ोल्ड के सीने पर ढह गया, जैसे कोई गिरता हुआ पहाड़ अपनी आखिरी ओट माँग रहा हो।​भाग-3: सत्य का साक्षात्कार और रानी का उदय​जैसे ही उनकी रूहें एक-दूसरे में विलीन हुईं, इज़ोल्ड के दिमाग में यादों का एक सुनामी जैसा सैलाब आ गया। यह यादें उसकी नहीं थीं, ये कैसियन की थीं। उसने देखा... उस काली रात में कैसियन वास्तव में उसके पिता के पास उन्हें बचाने के लिए पहुँचा था। उसने देखा कि कैसे वेलेरियस ने अंधेरे का फायदा उठाकर पीछे से इज़ोल्ड के पिता की हत्या की थी। उसने देखा कि कैसियन ने दस सालों तक इज़ोल्ड की सुरक्षा के लिए अपनी आत्मा को अँधेरे के हवाले कर दिया था। उसने वह हर पल देखा जब कैसियन अकेले में इज़ोल्ड के नाम की माला जपता था और अपनी सत्ता को सिर्फ इसलिए बचाए रखा था ताकि वह एक दिन इज़ोल्ड को उसका खोया हुआ गौरव लौटा सके।​"कैसियन... नहीं! यह तुमने क्या किया? मुझे यह शक्ति नहीं चाहिए, मुझे तुम चाहिए!" इज़ोल्ड की आवाज़ में अब नफरत का लेशमात्र भी अंश नहीं था; उसकी जगह एक ऐसा पछतावा था जो पूरी दुनिया को डुबो सके।​कैसियन द्वारा दी गई असीमित 'जीवन-ज्योति' अब इज़ोल्ड की रगों में एक ज्वालामुखी की तरह उबल रही थी। उसने अपनी आँखें खोलीं, जो अब सामान्य नहीं थीं—वे शुद्ध नीली और स्वर्ण अग्नि की तरह दहक रही थीं। उसने एक हाथ हवा में उठाया और एल्डोरिया की वह प्राचीन 'ब्रह्मांडीय शक्ति' जाग्रत की जिसे वेलेरियस सदियों से खोज रहा था।​एक भीषण जादुई विस्फोट हुआ! पूरी वेधशाला की नींव हिल गई और एक ही क्षण में वहाँ मौजूद सभी प्रेत सैनिक धूल और राख के गुबार में बदल गए। वेलेरियस का काला जादू उस रानी की रोशनी के सामने एक तिनके की तरह जल गया।​जब धुआँ छँटा, तो वेधशाला के भीतर एक रूहानी सन्नाटा छा गया। केवल इज़ोल्ड की सिसकियों की आवाज़ आ रही थी। कैसियन उसकी बाहों में अचेत, ठंडा और लगभग निष्प्राण पड़ा था। इज़ोल्ड ने उसे पागलों की तरह अपने हृदय से लगा लिया, उसके गर्म आँसू कैसियन के ठंडे चेहरे पर गिरकर जम रहे थे। उसे अहसास हुआ कि उसने जिस 'राक्षस' से नफरत करने में अपना पूरा वजूद लगा दिया, वही उसका एकमात्र भगवान और रक्षक था।​इवान की रूह वाला वह पत्थर अब पूरी तरह से बुझकर काला पड़ चुका था। वेलेरियस का वह जादुई जाल अब छिन्न-भिन्न हो चुका था। इज़ोल्ड ने कैसियन के शांत, पीले पड़ चुके चेहरे को चूमते हुए एक नई प्रतिज्ञा की।​"तुम्हें कुछ नहीं होगा, मेरे सम्राट... अब यह रानी तुम्हें मौत के हाथों से भी छीन लाएगी," इज़ोल्ड ने फुसफुसाया। "तुमने मुझे जीवन दिया, अब मैं तुम्हें यह पूरी दुनिया और अपना भविष्य दूँगी। हमारी कहानी का अंत यहाँ नहीं, बल्कि अब एल्डोरिया के नए उदय के साथ होगा।"​

​अध्याय 10: शापित प्रेम का उदय और राख का साम्राज्य​भाग-1: आकाश से उतरता काल और रानी का क्रोध​वेधशाला के बाहर का बर्फीला तूफ़ान अब केवल प्रकृति का प्रकोप नहीं था, बल्कि वह पूरी सृष्टि को निगलने पर आमादा एक राक्षसी ऊर्जा बन चुका था। भीतर, इज़ोल्ड कैसियन के शीतल और निष्प्राण शरीर को अपनी बाहों में थामे पत्थर की तरह बैठी थी। उसके आँसू कैसियन की छाती पर गिर रहे थे, जहाँ कभी एक शक्तिशाली हृदय धड़कता था। लेकिन भीतर ही भीतर, कैसियन की दी हुई 'जीवन-ज्योति' अब इज़ोल्ड की धमनियों में किसी दहकते हुए ज्वालामुखी की तरह उबलने लगी थी। उसकी आँखें, जो दस सालों से केवल प्रतिशोध की काली आग में जलती थीं, अब एक नई, ईश्वरीय और पवित्र नीली रोशनी से जगमगा रही थीं।​अचानक, एक ऐसा धमाका हुआ कि वेधशाला की प्राचीन छत तिनकों की तरह उड़ गई। ऊपर काले, ज़हरीले बादलों को चीरते हुए एक विशाल रथ उतरा, जिसे सायों के घोड़ों ने खींचा था। उस पर वेलेरियस सवार था, उसका चेहरा जीत के अहंकार से चमक रहा था। उसके चारों ओर हज़ारों 'शैडो-नाइट्स' (साया-सैनिक) हवा में तैर रहे थे, जैसे गिद्ध शिकार के इंतज़ार में हों।​"तो आखिरकार, उस कायर चूहे ने अपनी जान दे ही दी," वेलेरियस की आवाज़ बादलों की गड़गड़ाहट की तरह गूँजी, जिसमें अपमान और खुशी का मिश्रण था। "इज़ोल्ड, कैसियन ने तुम्हें जो शक्ति दी है, वह उसका अंतिम उपहार नहीं बल्कि उसका अंत है। अब वह पत्थर मुझे सौंप दो और मेरे चरणों में झुक जाओ। हम साथ मिलकर इस दुनिया पर राख का साम्राज्य बनाएंगे!"​इज़ोल्ड धीरे से उठी। उसके बाल हवा में नागिनों की तरह लहरा रहे थे। उसने ज़मीन पर पड़ी कैसियन की 'शैडो-ब्लेड' को उठाया। जैसे ही उसकी उंगलियों ने तलवार को छुआ, तलवार से एक ऐसी प्रचंड ऊर्जा निकली जिसने आसपास की बर्फ को भाप बना दिया।​"तुमने सब कुछ छीन लिया, वेलेरियस," इज़ोल्ड की आवाज़ में वह शांति थी जो प्रलय से पहले आती है। "मेरा घर, मेरा बचपन, मेरा कबीला... और अब वह इंसान जिसे समझने और चाहने में मैंने बहुत देर कर दी। लेकिन अब तुम्हारी बारी है। आज एल्डोरिया का हिसाब होगा!"​भाग-2: महायुद्ध और इवान का अंतिम विश्वासघात​इज़ोल्ड ने एक ऐसी रूहानी चीख मारी जिससे पूरा पहाड़ नींव तक कांप उठा। वह बिजली की गति से हवा में उठी और सीधे वेलेरियस की सेना पर बिजली बनकर गिर पड़ी। महायुद्ध की शुरुआत हो चुकी थी। इज़ोल्ड की तलवार का हर वार सैंकड़ों साया-सैनिकों को धूल और भाप में बदल रहा था। वेलेरियस ने अपने हाथ से काले जादू के भयानक गोले बरसाए, लेकिन इज़ोल्ड के चारों ओर कैसियन के महान त्याग से बनी वह जादुई ढाल एक अभेद्य किला बन चुकी थी।​मैदान के बीचों-बीच, राख और बर्फ के गुबार के बीच इज़ोल्ड और वेलेरियस का आमना-सामना हुआ। इज़ोल्ड ने अपने झोले से वह पत्थर निकाला। "इवान! भाई! अब समय आ गया है, इस राक्षस को खत्म करने में मेरी मदद करो!"​लेकिन जैसे ही उसने पत्थर की ओर देखा, उसका कलेजा फट गया। पत्थर से इवान की रूह बाहर तो निकली, लेकिन वह अब उसका भाई नहीं था। वेलेरियस के काले जादू ने उसे एक विकृत, भयानक और विशाल काले दानव में बदल दिया था। इवान की वह रूह, जो कभी इज़ोल्ड को लोरियाँ सुनाती थी, अब अपनी ही बहन पर हमला करने के लिए झपटी।​"देखा इज़ोल्ड? तुम्हारा अपना खून, तुम्हारा अपना भाई अब मेरा सबसे वफादार गुलाम है!" वेलेरियस की अट्टहास भरी हँसी पूरे मैदान में गूँज उठी। इज़ोल्ड का दिल टूट गया, उसे अहसास हुआ कि इवान की रूह को वेलेरियस ने बहुत पहले ही पूरी तरह भ्रष्ट और नष्ट कर दिया था।​भाग-3: शापित बलिदान और विछोह का अंत​इज़ोल्ड ने देखा कि वेलेरियस ने अपनी जादुई छड़ी से एक विनाशकारी किरण छोड़ी, जिसका निशाना सीधा कैसियन का वह अचेत शरीर था जो वेधशाला के मलबे में पड़ा था। इज़ोल्ड के पास केवल एक पल था। उसके सामने दो रास्ते थे—या तो वह अपनी पूरी शक्ति से वेलेरियस के दिल को चीर दे और अपना प्रतिशोध पूरा करे, या फिर वह अपनी पूरी 'जीवन-ज्योति' का इस्तेमाल करके कैसियन को मृत्यु-लोक की गहराइयों से वापस खींच लाए।​इज़ोल्ड ने अपनी आँखें बंद कीं। उसने दस सालों की नफरत और प्रतिशोध को एक तरफ रख दिया और 'प्रेम' को चुना।​उसने अपनी जादुई तलवार को ज़मीन में गाड़ दिया और अपना खंजर अपनी ही छाती के पास रखकर वह प्राचीन निषिद्ध मंत्र पढ़ा—'द सोल एक्सचेंज' (प्राणों का विनिमय)। उसने अपनी आधी रूह और कैसियन द्वारा दी गई पूरी शक्ति को वापस कैसियन के ठंडे शरीर में प्रवाहित कर दिया। एक ऐसा ज़ोरदार स्वर्णिम विस्फोट हुआ जिसने वेलेरियस की पूरी सेना को मीलों पीछे धकेल दिया।​कैसियन की आँखें अचानक खुल गईं। उनमें फिर से जीवन की नीली लहरें दौड़ पड़ीं। वह एक सिंह की तरह उठा और अपनी तलवार से वेलेरियस के रथ पर सीधा प्रहार किया। वेलेरियस का रथ टूटकर बिखर गया और वह स्वयं बुरी तरह घायल होकर अंधेरे की शून्य गहराइयों में विलीन होने लगा।​लेकिन गायब होने से पहले, वेलेरियस ने एक आखिरी, सबसे क्रूर शाप दिया—"तुम दोनों ज़िंदा तो रहोगे, लेकिन यह तुम्हारा नरक होगा! तुम दोनों का प्रेम अब शापित है। तुम कभी एक-दूसरे को छू नहीं पाओगे! जैसे ही तुम्हारी खाल एक-दूसरे को छुएगी, तुम्हारे प्राण राख बन जाएंगे!"​सब कुछ शांत हो गया। वेलेरियस जा चुका था। राख का साम्राज्य ढह चुका था। इज़ोल्ड और कैसियन एक-दूसरे के सामने खड़े थे। कैसियन ने भावुक होकर इज़ोल्ड का हाथ थामने के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन जैसे ही उनकी उंगलियाँ करीब आईं, उनके बीच से एक काली जादुई बिजली कड़की और वे दोनों दर्द से पीछे हट गए।​उनकी आँखों में आँसू थे—वे जीत चुके थे, लेकिन वे हार भी चुके थे। वे अब एक ही दुनिया में, एक-दूसरे के पास होकर भी मीलों दूर थे। इज़ोल्ड ने कैसियन की आँखों में देखा और समझ गई कि यह शाप उनकी नफरत से भी ज़्यादा गहरा था।​"हम साथ रहेंगे, कैसियन," इज़ोल्ड ने सिसकते हुए कहा, "चाहे परछाइयों की तरह ही क्यों न सही।" और एल्डोरिया की बर्फीली रातों में, दो रूहें एक-दूसरे की बाहों के बिना ही साथ चलने के लिए निकल पड़ीं।​

​अध्याय 11: खामोश सच और गरजता प्रतिशोध​भाग-1: इज़ोल्ड और बादलों का पिंजरा​बर्फ की चादरों पर गिरती चाँदनी आज धवल नहीं, बल्कि खूनी लग रही थी। हवाओं में एक अजीब सी सिसकती हुई गूँज थी, जैसे पहाड़ खुद उस अनर्थ पर रो रहे हों जो अभी-अभी घटित हुआ था। वेधशाला के मलबे से दूर, आसमान की ऊँचाइयों में इज़ोल्ड की चेतना जब धीरे-धीरे लौटी, तो उसे लगा कि उसका अस्तित्व किसी ठंडे और तेज़ बवंडर के बीच फंस गया है।​उसकी पलकें लोहे की तरह भारी थीं। जब उसने हिम्मत जुटाकर आँखें खोलीं, तो पैरों के नीचे ज़मीन के बजाय बादलों की धुंध और नीचे भागते हुए काले, डरावने पहाड़ दिखाई दिए। वह किसी पक्षी की तरह हवा को चीर रही थी, लेकिन यह उड़ान उसकी अपनी नहीं थी।​"भाई...?" उसकी आवाज़ एक सूखी टहनी की तरह टूटकर हवा में बिखर गई।​उसे एहसास हुआ कि वह इवान की बाहों में है। इवान—जिसका चेहरा अब वह नहीं था जिसे इज़ोल्ड बचपन की स्मृतियों में सहेज कर बैठी थी। उसके जबड़े पत्थर की तरह कस गए थे और उसकी आँखों में एक ऐसी बर्फीली, मृत कठोरता थी जिसे देखकर इज़ोल्ड की रूह कांप गई। वह किसी प्राचीन अभिशप्त साये की तरह हवा को काटते हुए पहाड़ियों के पार जा रहा था।​"शांत रहो, इज़ोल्ड। हम सुरक्षित हैं," इवान की आवाज़ सपाट थी, जैसे उसमें से सारी संवेदनाएँ और जीवन निचोड़ लिया गया हो।​"हम... हम कहाँ जा रहे हैं? कैसियन कहाँ है? भाई, पीछे देखो! वह घायल है!" इज़ोल्ड ने उसके मजबूत कंधे को हिलाने की व्यर्थ कोशिश की। उसकी यादों में अभी भी कैसियन का वह चेहरा घूम रहा था, जिसने अपनी रूह का हिस्सा उसे दिया था। लेकिन इवान की रफ्तार और बढ़ गई। "वह सम्राट अब तुम्हारी चिंता का विषय नहीं है, इज़ोल्ड। वह एक ज़ालिम है जिसने हमें बर्बाद किया। मैं तुम्हें उस नरक से बाहर निकाल लाया हूँ जहाँ तुम रोज़ थोड़ा-थोड़ा मर रही थी। वह तुम्हें खा जाता, तुम्हारी शक्तियों को सोख लेता और अंत में तुम्हें अपनी दीवारों के पीछे दफ़न कर देता।"​"नहीं! तुम गलत समझ रहे हो!" इज़ोल्ड की आवाज़ एक चीख में बदल गई। "उसने मुझे बचाया था! भाई, वह अकेला है, उसे मेरी ज़रूरत है!"​इवान अचानक एक ऊँची चोटी की कगार पर रुक गया। उसने इज़ोल्ड को नीचे उतारा, लेकिन उसकी पकड़ अभी भी ज़हरीली थी। "तुम उस इंसान की तरफदारी कर रही हो जिसने हमारे वंश को तबाह किया? वह प्यार नहीं, बल्कि एक शापित सम्मोहन है। मैंने तुम्हें उस मौत से छीना है।"​इज़ोल्ड ने वापस जाने के लिए कदम बढ़ाए, लेकिन इवान के चेहरे पर एक दर्दनाक मुस्कान उभरी। "तुम्हें आराम की ज़रूरत है, प्रिय बहन।" उसने अपने हाथ हवा में लहराए और एक गहरी नीली रोशनी इज़ोल्ड की आँखों के सामने नाचने लगी। इज़ोल्ड ने लड़खड़ाकर उसे रोकना चाहा, पर नींद का वह जादुई मंत्र उसकी नसों में ज़हर की तरह फैल गया। उसका आखिरी ख्याल कैसियन का वह अकेलापन था, जो अब उसके भाई की इस भयानक चालबाज़ी के कारण 'नफरत' में बदलने वाला था।​भाग-2: कैसियन का तांडव और रूह का घाव​उधर, महल की छत अब किसी प्राचीन श्मशान जैसी लग रही थी। चारों ओर बिछी लाशों और सायों के मलबे के बीच कैसियन घुटनों के बल बैठा था। उसके हाथ कोहनियों तक खून से सने थे। उसकी छाती ज़ोर-ज़ोर से धड़क रही थी, लेकिन शारीरिक दर्द से ज़्यादा उसकी रूह में एक ऐसा छेद हो गया था जिसे कोई जादू नहीं भर सकता था।​इज़ोल्ड जा चुकी थी। वह उसे उस वक्त छोड़कर चली गई थी जब उसने उसे अपना सब कुछ सौंप दिया था। कैसियन की नज़र उस जगह पर पड़ी जहाँ इज़ोल्ड के पदचिह्न बर्फ में बने थे और फिर आसमान की ओर गायब हो गए थे।​"सम्राट... आपके घाव..." सेनापति मालक ने पीछे से आकर बहुत धीमे से कहा। "शाही हकीम इंतज़ार कर रहे हैं। आपके कंधे से बहता लहू खतरनाक हो सकता है।"​कैसियन धीरे से खड़ा हुआ। उसकी पीठ सीधी थी, लेकिन उसके कंधों पर जैसे पूरी दुनिया का बोझ आ गया हो। उसने अपनी तलवार 'शून्य की पुकार' को म्यान में डाला—एक ऐसी आवाज़ के साथ जो किसी के मरने की आखिरी आह जैसी थी।​"घाव?" कैसियन की आवाज़ इतनी धीमी थी कि सेनापति को सुनने के लिए झुकना पड़ा। फिर अचानक वह दहाड़ा, "घाव जिस्म पर होते तो भर जाते, सेनापति! यह घाव रूह पर है!"​उसने मुड़कर देखा, कैसियन की आँखें अब काली नहीं, बल्कि एक खूनी लाल रंग में बदल चुकी थीं। यह उस 'शापित प्रेम की छाया' का असली स्वरूप था। "उसने मुझे उस वक्त छोड़ा जब मैंने उसे अपनी रूह का हिस्सा दिया था। उसने मेरी वफादारी का सौदा उस कायर इवान के साथ किया।"​"शायद वह मजबूर रही होगी, महाराज..." सेनापति ने साहस जुटाकर कहा।​"मजबूरी में इंसान भागता नहीं, मालक। वह मर जाता है, लेकिन अपनों का हाथ नहीं छोड़ता," कैसियन के स्वर में अब नफरत की एक तीखी धार थी। "उसने मुझे उस आग में जलता हुआ छोड़ दिया जिसे बुझाने का वादा उसने किया था। अब मैं उसे ढूँढूँगा। न सिर्फ उसे, बल्कि उस इवान के कतरे-कतरे को भी।"​भाग-3: शिकारी का उदय और टकराने की कगार​कैसियन ने अपने काले घोड़े 'ईथर' की लगाम थामी और उस पर सवार हो गया। वह अब एक प्रेमी नहीं था। वह एक शिकारी बन चुका था, जिसका शिकार वही लड़की थी जिसे उसने अपनी दुनिया माना था। वह पहाड़ियों को पार करता जा रहा था, उसके पीछे उसकी सेना और उसका साम्राज्य छूट गया था। उसके सामने सिर्फ दो ही चीजें थीं—एक गरजता हुआ प्रतिशोध और वह खामोश सच, जो अभी भी इज़ोल्ड के होंठों पर कैद था।​हवा में एक अजीब सी बिजली दौड़ रही थी। किस्मत ने अपना जाल बुन लिया था। इवान इज़ोल्ड को लेकर घने जंगलों की एक ऐसी गुप्त घाटी की ओर मुड़ गया था, जहाँ सायों का पहरा था। उसे पता था कि सम्राट का जुनून उसे चैन से बैठने नहीं देगा।​कैसियन का घोड़ा उस घाटी के मुहाने पर जाकर रुका जहाँ बर्फ पर इवान के साये के निशान अभी भी ताज़ा थे। उसकी आँखों में जलती लाल रोशनी यह बता रही थी कि अब जो होगा, वह प्रेम की कहानी नहीं, बल्कि विनाश का अध्याय होगा।​

​अध्याय 12: परछाइयों का पीछा​भाग-1: राख की गूँज और मखमल का टुकड़ा​रात की खामोशी में केवल घोड़े के खुरों की आवाज़ गूँज रही थी, जो पहाड़ियों के सन्नाटे को किसी धारदार चाकू की तरह चीर रही थी। कैसियन ने घंटों से अपनी पलकें नहीं झपकाई थीं। उसकी आँखों की वह लालिमा, जो कभी इज़ोल्ड के लिए दर्द से उपजी थी, अब गहरे काले घेरों में तब्दील हो चुकी थी—यह उसकी रूह की थकान और उसके दिमाग में पल रही ज़हरीली नफरत का जीवंत सबूत था। वह सम्राट, जो कभी अपनी एक तिरछी नज़र से दुश्मन की विशाल सेना को घुटनों पर ले आता था, आज एक शापित साये की तरह पहाड़ियों की धूल और बर्फ छान रहा था।​कैसियन की इंद्रियाँ अब इज़ोल्ड की जादुई महक पर टिकी थीं—एक ऐसी खुशबू जो जंगली गुलाबों की कोमलता और कस्तूरी की तीखी गंध का एक अनोखा मिश्रण थी। वह महक उसे एक पुरानी, वीरान गुफा की ओर खींच ले गई, जो सदियों से एकांत की गोद में सोई थी। जैसे ही कैसियन ने गुफा के मुहाने पर कदम रखा, उसकी तलवार की म्यान से एक नीली, सर्द आग फूट पड़ी। यह एक जादुई संकेत था कि यहाँ हाल ही में किसी प्रचंड दैवीय शक्ति का प्रयोग हुआ है।​"इज़ोल्ड!" कैसियन की भारी आवाज़ गुफा की पथरीली दीवारों से टकराकर एक डरावनी गूँज बनकर वापस आई।​भीतर, राख का एक ढेर अभी भी सुलग रहा था। आग की लपटें तो बुझ चुकी थीं, लेकिन पत्थरों में अभी भी इज़ोल्ड की जादुई गर्मी बाकी थी। कैसियन की पैनी नज़र एक नुकीले पत्थर पर पड़ी, जहाँ मखमल के कपड़े का एक छोटा सा टुकड़ा फँसा हुआ था। वह इज़ोल्ड के उसी लबादे का हिस्सा था जिसे कैसियन ने खुद उसे पहनाया था। उसने उस टुकड़े को उठाया और अपनी मुट्ठी में इतनी ज़ोर से भींचा कि उसके हाथ के पुराने ज़ख्म फिर से रिसने लगे और खून मखमल को लाल करने लगा।​"इतनी करीब होकर भी तुम दूर चली गई?" उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आँखों में पागलपन की एक लहर उठी। "क्या तुम मुझसे इतना डरती हो... या मुझसे इतनी नफरत करती हो कि मेरे साये से भी भाग रही हो? क्या वह गद्दार इवान तुम्हें मुझसे ज़्यादा सुरक्षा दे रहा है?"​उसे इस बात का रत्ती भर भी अहसास नहीं था कि महज़ कुछ ही पल पहले, जब उसने गुफा में प्रवेश किया था, इवान ने उसकी आहट पहचान ली थी। इवान ने इज़ोल्ड के मुँह पर अपना जादुई हाथ रखकर उसे खामोश किया था और एक 'शैडो पोर्टल' खोलकर उसे दूसरी तरफ धकेल दिया था। इज़ोल्ड की आँखों में उस वक्त कैसियन के लिए नफरत नहीं, बल्कि उसे पुकारने की एक बेबस तड़प थी, जिसे इवान ने जादुई अंधेरे की परतों में दफन कर दिया।​भाग-2: जमी हुई नदी और टूटी हुई उम्मीद​अगले दिन की सुबह किसी उम्मीद की किरण के साथ नहीं, बल्कि हड्डियों को जमा देने वाली बर्फीली हवा और धुंध लेकर आई। कैसियन एक विशाल जमी हुई नदी के किनारे पहुँचा, जहाँ बर्फ की सफेद चादर पर दो जोड़ी पैरों के निशान बिल्कुल साफ नज़र आ रहे थे। एक पदचाप भारी और स्थिर थी—इवान की; और दूसरी हल्की, लड़खड़ाती हुई—इज़ोल्ड की, जो शायद अपनी कमज़ोरी के कारण बर्फ में धंस रही थी।​कैसियन ने अपने घोड़े को एड़ लगाई। वह एक शिकारी तेंदुए की तरह सरपट दौड़ा। दूर, पहाड़ी की ढलान पर उसे एक काली, रहस्यमयी धुंध दिखाई दी जो हवा में अप्राकृतिक रूप से तैर रही थी। कैसियन की रगों में एड्रेनालिन और क्रोध एक साथ दौड़ गया। उसने घोड़े की तेज़ रफ्तार पीठ पर खड़े होकर अपना प्राचीन जादुई धनुष निकाला और अपनी पूरी मानसिक पीड़ा और शक्ति को एक नीले तीर में तब्दील कर दिया।​तीर जब छूटा, तो उसने कड़कड़ाती हवा को दो हिस्सों में चीर दिया। वह सीधे उस काली धुंध के बीचों-बीच जाकर एक धमाके के साथ फटा। तभी, उस धुंध के आर-पार से एक दबी हुई, मर्मभेदी चीख गूँजी।​"कैसियन...!"​इज़ोल्ड ने उसे देख लिया था। धुंध के फटने से एक पल के लिए दोनों की नज़रें मिलीं। इज़ोल्ड की आँखों में एक बिजली सी कौंधी—यह डर नहीं, बल्कि उम्मीद की आखिरी चमक थी! उसने अपना हाथ कैसियन की ओर बढ़ाया, उसके होंठ उसका नाम पुकारने के लिए कांपते हुए खुले ही थे कि इवान ने क्रूरता से उसे पीछे खींच लिया और उसके कान में कुछ फुसफुसाया।​इवान ने तुरंत एक नया, और भी घना जादुई पर्दा बुना। इससे पहले कि कैसियन उस स्थान तक पहुँच पाता, वह धुंध हवा में विलीन हो गई। कैसियन जब वहाँ पहुँचा, तो उसके हाथ लगी सिर्फ गिरती हुई बर्फ और डरा देने वाला सन्नाटा। इज़ोल्ड एक बार फिर उसके हाथों से रेत की तरह फिसल गई थी।​भाग-3: प्रेम का पतन: एक काली सनक​कैसियन वहीँ घुटनों के बल बर्फ में गिर पड़ा। हर बार की यह हार उसके दिमाग की नसों को चटका रही थी। अब उसका घायल मन इसे 'बचाव' नहीं, बल्कि एक क्रूर 'खेल' की तरह देखने लगा था। उसे लगने लगा था कि इज़ोल्ड जानबूझकर उसे तड़पा रही है, वह उसे अपनी उंगलियों पर नचा रही है।​"वह मुझे देख रही है..." उसने बर्फ को अपनी मुट्ठी में इतनी ज़ोर से जकड़ा कि बर्फ पत्थर बन गई। उसकी आवाज़ में अब एक अजीब सी हिंसक कोमलता आ गई थी। "वह देख रही है कि मैं कैसे उसके पीछे पागल हो रहा हूँ, कैसे दर-दर भटक रहा हूँ... और फिर भी वह उस गद्दार के साथ भागकर मेरा मज़ाक उड़ा रही है। वह मुस्कुरा रही होगी मेरी इस बेबसी पर।"​कैसियन का वह पवित्र प्रेम, जो कभी इज़ोल्ड को पूरी दुनिया की बुरी नज़रों से बचाने के लिए था, अब एक भयानक काली सनक (Obsession) में बदल रहा था। उसके भीतर का प्रेमी मर रहा था और एक 'अधिकारी सम्राट' जन्म ले रहा था, जिसे अब केवल जीत चाहिए थी।​"अगर तुम प्यार से नहीं आओगी इज़ोल्ड, तो मैं तुम्हें सोने की ज़ंजीरों में बाँधकर लाऊँगा," उसने खाली आसमान की ओर देखते हुए प्रतिज्ञा की। "मैं तुम्हें इस दुनिया की नज़रों से इतना दूर कालकोठरी में बंद कर दूँगा कि तुम सूरज की एक किरण देखने के लिए भी मेरी इज़ाज़त माँगोगी। तुम्हारी आँखें केवल मुझे देखेंगी, और तुम्हारे कान केवल मेरी आवाज़ सुनेंगे।"​उसने अपनी तलवार निकाली और बर्फ की ज़मीन पर एक गहरा निशान बनाया, जैसे वह नियति की रेखा खींच रहा हो। "अगली बार जब मैं तुम्हें ढूँढूँगा, तो मैं तुम्हारी आँखों की उस 'उम्मीद' को ही बुझा दूँगा जो तुम्हें मुझसे भागने का हौसला देती है। तुम मेरी हो, और मेरी ही रहोगी।"​कैसियन अब इज़ोल्ड को बचाने के लिए नहीं, बल्कि उसे 'कैद' करने के लिए निकल पड़ा था। उसे रत्ती भर भी इल्म नहीं था कि इज़ोल्ड उस जादुई धुंध के पीछे इवान से पागलों की तरह लड़ रही थी, वह कैसियन के पास जाने के लिए अपनी रूह की आहुति देने को तैयार थी, और हर पल केवल उसका नाम पुकार रही थी। किस्मत का यह खेल अब 'शापित प्रेम' से 'विनाशकारी जुनून' की ओर बढ़ रहा था।​

​अध्याय 13: परछाइयों का पीछा और छल की गूँज​भाग-1: राख में छिपे सच और मखमल का ज़ख्म​रात की खामोशी में केवल कैसियन के घोड़े के खुरों की आवाज़ गूँज रही थी, जो पहाड़ियों के सन्नाटे को किसी धारदार खंजर की तरह चीर रही थी। कैसियन ने घंटों से अपनी पलकें नहीं झपकाई थीं। उसकी आँखों में वह लालिमा, जो कभी इज़ोल्ड के प्रति चिंता से उपजी थी, अब गहरे काले और डरावने घेरों में तब्दील हो चुकी थी। यह उसकी रूह की थकान और उसके दिमाग में पल रही नफरत का जीवंत सबूत था। वह सम्राट, जो कभी अपनी एक तिरछी नज़र से दुश्मन की विशाल सेना को थर्रा देता था, आज एक शापित साये की तरह पहाड़ियों की खाक छान रहा था।​इज़ोल्ड की जादुई महक—एक ऐसी खुशबू जो जंगली गुलाबों की कोमलता और कस्तूरी की तीखी गंध का मेल थी—कैसियन के लिए अब एक दिशा-सूचक बन गई थी। वह महक उसे एक पुरानी, वीरान गुफा की ओर खींच ले गई। जैसे ही कैसियन ने गुफा के मुहाने पर कदम रखा, उसकी तलवार 'शून्य की पुकार' की म्यान से एक नीली, सर्द आग फूट पड़ी। यह जादुई संकेत था कि यहाँ हाल ही में किसी शक्तिशाली दैवीय शक्ति का प्रयोग हुआ है।​"इज़ोल्ड!" कैसियन की आवाज़ गुफा की दीवारों से टकराकर एक डरावनी गूँज बनकर वापस आई।​भीतर, राख का एक ढेर अभी भी सुलग रहा था। पत्थरों में अभी भी ताज़गी वाली जादुई गर्मी बाकी थी। कैसियन की पैनी नज़र एक नुकीले पत्थर पर पड़ी, जहाँ मखमल के कपड़े का एक टुकड़ा फँसा हुआ था। वह इज़ोल्ड के उसी लबादे का हिस्सा था जिसे कैसियन ने प्यार से उसे पहनाया था। उसने उस टुकड़े को उठाया और अपनी मुट्ठी में इतनी ज़ोर से भींचा कि उसके हाथ के पुराने ज़ख्म फिर से रिसने लगे।​"इतनी करीब होकर भी तुम दूर चली गई?" उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आँखों में एक अजीब सा पागलपन नाच रहा था। "क्या तुम मुझसे इतना डरती हो... या मुझसे इतनी नफरत करती हो कि मेरे साये से भी भाग रही हो?"​उसे रत्ती भर भी अंदाज़ा नहीं था कि महज़ कुछ ही पल पहले, जब उसने गुफा में प्रवेश किया था, इवान ने उसकी आहट सुन ली थी। इवान ने इज़ोल्ड के मुँह पर अपना जादुई हाथ रखकर उसे खामोश किया और एक 'शैडो पोर्टल' खोलकर उसे दूसरी तरफ धकेल दिया था। इज़ोल्ड की आँखों में उस वक्त कैसियन के लिए डर नहीं, बल्कि उसे पुकारने की एक बेबस तड़प थी, जिसे इवान ने जादुई अंधेरे में दफन कर दिया।​भाग-2: बर्फीली नदी और अधूरी चीख​अगले दिन की सुबह सूरज की रोशनी लेकर नहीं आई, बल्कि हड्डियों को जमा देने वाली बर्फीली हवा और धुंध लेकर आई। कैसियन एक विशाल जमी हुई नदी के किनारे पहुँचा। बर्फ की सफेद चादर पर दो जोड़ी पैरों के निशान बिल्कुल साफ थे। एक पदचाप भारी और स्थिर थी—इवान की; और दूसरी हल्की, लड़खड़ाती हुई—इज़ोल्ड की।​कैसियन ने अपने घोड़े को एड़ लगाई। वह एक भूखे शिकारी की तरह सरपट दौड़ा। दूर, पहाड़ी की ढलान पर उसे एक काली, रहस्यमयी धुंध दिखाई दी जो हवा में अप्राकृतिक रूप से तैर रही थी। कैसियन की रगों में एड्रेनालिन और क्रोध का उबाल आ गया। उसने घोड़े की पीठ पर खड़े होकर अपनी पूरी मानसिक शक्ति को एकाग्र किया और एक जादुई तीर चलाया जो उस धुंध को चीरता हुआ बिजली की गति से आगे बढ़ा।​तीर जब धुंध से टकराया, तो हवा में एक मर्मभेदी चीख गूँजी। "कैसियन...!"​इज़ोल्ड ने उसे देख लिया था। धुंध के फटने से एक पल के लिए दोनों की नज़रें मिलीं। इज़ोल्ड की आँखों में उम्मीद की एक आखिरी चमक आई, उसने अपना कांपता हुआ हाथ कैसियन की ओर बढ़ाया, उसके होंठ उसका नाम पुकारने के लिए खुले ही थे कि इवान ने क्रूरता से उसे पीछे खींच लिया और उसे फिर से जादुई धुंध में लपेट दिया। जब तक कैसियन वहाँ पहुँचा, वहाँ सिर्फ गिरती हुई बर्फ और डरा देने वाला सन्नाटा था। इज़ोल्ड एक बार फिर उसके हाथों से रेत की तरह फिसल गई थी।​भाग-3: छल की गूँज और प्रतिशोध का जन्म​कैसियन उस जगह पहुँचा जहाँ इज़ोल्ड कुछ पल पहले खड़ी थी। वहाँ बर्फ पर उसे एक चमकती हुई चीज़ दिखाई दी—इज़ोल्ड के गले का वह प्राचीन लॉकेट, जो उसके परिवार की आखिरी निशानी था। कैसियन ने कांपते हाथों से उसे उठाया। जैसे ही उसकी उंगलियों ने उस ठंडी धातु को छुआ, लॉकेट के भीतर कैद इज़ोल्ड की जादुई ऊर्जा सक्रिय हो गई। हवा में इज़ोल्ड की फुसफुसाहट गूँजने लगी।​वास्तव में इज़ोल्ड ने उस लॉकेट में अपना सच्चा संदेश छोड़ा था: "कैसियन, मुझे बचा लो! मैं इवान के चंगुल में हूँ, वह मुझे ज़बरदस्ती ले जा रहा है!"​लेकिन इवान, जो दूर से ही कैसियन की हर हरकत पर नज़र रखे हुए था, उसने अपनी काली शक्ति का एक झोंका उस लॉकेट की ओर फेंका। उस जादुई हस्तक्षेप ने इज़ोल्ड के शब्दों को बीच हवा में ही विकृत और दूषित कर दिया। कैसियन के कानों तक जो आवाज़ पहुँची, वह फटी हुई, डरावनी और कड़वाहट से भरी थी:​"...कैसियन... मुझसे दूर रहो... मैं इवान के साथ... खुश हूँ... मैंने तुम्हें... हमेशा के लिए छोड़ दिया..."​कैसियन के हाथ से लॉकेट बर्फ में गिर पड़ा। उसका चेहरा पत्थर जैसा सफेद और बेजान हो गया। जिस उम्मीद के नाजुक धागे के सहारे वह अब तक लड़ रहा था, वह एक पल में चकनाचूर हो गया। उसे लगा कि इज़ोल्ड ने खुद अपनी मर्ज़ी से उसे ठुकरा दिया है और वह उस इंसान के साथ खुश है जिसने एल्डोरिया के विनाश में भूमिका निभाई थी।​कैसियन वहीँ घुटनों के बल गिर पड़ा। यह असफलता और अब यह 'झूठा संदेश'—उसकी रूह को ज़हरीला बना रहे थे। "वह मुझे देख रही है..." उसने बर्फ को अपनी मुट्ठी में जकड़ते हुए कहा। उसकी आवाज़ में अब एक डरावनी कोमलता थी। "वह देख रही है कि मैं कैसे उसके लिए तड़प रहा हूँ, और फिर भी वह मुस्कुराकर कह रही है कि वह खुश है? क्या मेरा प्यार उसके लिए सिर्फ एक बोझ था जिसे उसने उतार फेंका?"​कैसियन का वह प्रेम, जो कभी इज़ोल्ड को पूरी दुनिया से बचाने के लिए था, अब एक काली सनक (Obsession) में बदल चुका था। उसने अपनी म्यान से तलवार निकाली और हवा में एक ऐसी चीख मारी जिसने आसपास की जमी हुई बर्फ को पिघला दिया।​"ठीक है इज़ोल्ड... अगर तुम्हें मेरी आज़ादी पसंद नहीं, तो तुम्हें मेरी कैद पसंद आएगी। मैं तुम्हें ढूँढूँगा, और इस बार मैं तुम्हें बचाऊँगा नहीं... मैं तुम्हें अपना बनाऊँगा, चाहे तुम्हारी मर्ज़ी हो या न हो। तुम मेरी हो, और इस पूरी सृष्टि में कोई तुम्हें मुझसे दूर नहीं रख सकता—तुम खुद भी नहीं।"​कैसियन अब एक प्रेमी नहीं, बल्कि एक निर्दयी शिकारी बन चुका था जिसकी आत्मा अब केवल अधिकार और प्रतिशोध की प्यासी थी।​

​अध्याय 14: राख होता विश्वास और जागता पछतावा​भाग-1: खंडहरों का कुरुक्षेत्र और नफरत का भ्रम

​पहाड़ियों की सबसे ऊँची चोटी पर स्थित वह प्राचीन खंडहर, जो कभी देवताओं का मंदिर हुआ करता था, आज एक रक्तरंजित कुरुक्षेत्र बनने वाला था। हवा में बर्फ की शीतलता नहीं, बल्कि जादुई चिंगारियां और प्रतिशोध का बारूद तैर रहा था। कैसियन ने जैसे ही खंडहर के टूटे हुए आंगन में कदम रखा, सामने का दृश्य देखकर उसके सीने में आग लग गई। इज़ोल्ड वहाँ खड़ी थी—उसके बाल हवा में बेतरतीब बिखरे हुए थे और उसकी आँखों में वह गहरा खौफ था जिसे कैसियन ने दस सालों की नफरत में भी पहले कभी नहीं देखा था।

​कैसियन की आँखें अब लाल थीं—धोखे की आग से जलती हुई और खून की प्यासी। वह अपने भारी, लोहे जैसे कदमों से इज़ोल्ड की ओर बढ़ा। इज़ोल्ड, जिसने पिछले कुछ घंटों में इवान से केवल यही सुना था कि कैसियन उसकी रूह को कुचलने और अपनी बेइज्जती का बदला लेने के लिए उसे मार डालेगा, डर के मारे दो कदम पीछे हट गई।

​उसका वह पीछे हटना कैसियन के घायल दिल पर तपते हुए खंजर की तरह लगा। "क्या मेरे पास आना अब तुम्हें इतना नागवार है कि तुम पीछे हट रही हो?" कैसियन की आवाज़ फटी हुई और किसी पुरानी कब्र की गूँज जैसी थी। "क्या वह रात, वह बलिदान, वह स्पर्श... सब एक झूठ था? क्या तुम वाकई उस गद्दार इवान की गोद में जाकर इतनी खुश हो कि मेरा साया भी तुम्हें गंदा लग रहा है?"

​इज़ोल्ड के होंठ कांपे, वह कुछ कहना चाहती थी, चिल्लाना चाहती थी कि उसे ज़बरदस्ती लाया गया है, लेकिन दहशत के मारे उसके गले से आवाज़ नहीं निकली। उसे सामने खड़ा कैसियन वह प्रेमी नहीं लग रहा था जिसने उसे बचाया था, बल्कि एक प्रतिशोधी राक्षस दिखाई दे रहा था जो उसकी रूह को राख कर देगा।​भाग-2: जादुई टकराव और वर्जित शक्ति का उदय

​"उसे हाथ भी मत लगाना, हत्यारे!" इवान खंडहर के अंधेरे से चीखते हुए निकला और उसने अपनी जादुई छड़ी से कैसियन पर नीली बिजली का एक विनाशकारी प्रहार किया।

​कैसियन ने उस वार को अपनी काली तलवार 'शून्य की पुकार' से हवा में ही रोक दिया, लेकिन तभी उसने एक ऐसा दृश्य देखा जिसने उसकी दुनिया उजाड़ दी। इज़ोल्ड ने अपनी प्राचीन शक्ति का इस्तेमाल करके कैसियन के वार के खिलाफ इवान के चारों ओर एक सुरक्षा ढाल (Shield) बना दी थी। कैसियन का दिमाग सन्न रह गया। उसे लगा कि इज़ोल्ड जानबूझकर उसे मारने के लिए और इवान को बचाने के लिए अपने भाई का साथ दे रही है।

​"तो यही तुम्हारी सच्चाई है, इज़ोल्ड!" गुस्से और गहरे दुख के उस पागलपन में कैसियन ने अपनी 'वर्जित शक्ति' (Forbidden Power) को जगाया। उसके चारों ओर एक गाढ़ा, काला धुआँ फैल गया जो रोशनी को निगल रहा था। उसने एक झटके में इवान को जादुई दबाव से दीवार से दे मारा और चीते की तरह झपट्टा मारकर इज़ोल्ड की कलाई को इतनी ज़ोर से पकड़ा कि हड्डी चटकने की आवाज़ आई और इज़ोल्ड दर्द से कराह उठी।​भाग-3: सत्य का प्रकाश और टूटता हुआ भ्रम

​"मार दो मुझे!" इज़ोल्ड रोते हुए और टूटकर चिल्लाई। "इवान ने सही कहा था... तुम सिर्फ एक शिकारी हो जो अपनी शिकार की तलाश में आया है। तुम मुझसे नफरत करते हो और यहाँ मुझे खत्म करने आए हो न? तो कर दो प्रहार! इस नर्क से मुझे आज़ाद कर दो!"

​इज़ोल्ड की यह चीख सुनते ही कैसियन के हाथ की पकड़ अचानक ढीली पड़ गई। उसकी आँखों का वह हिंसक और काला गुस्सा एक पल में गायब हो गया, और उसकी जगह एक बेपनाह दर्द और आँसुओं के समंदर ने ले ली। वह सम्राट, जो कभी नहीं झुका, आज इज़ोल्ड के सामने बुरी तरह कांपने लगा।

​"मैं तुम्हें मारने...?" कैसियन की आवाज़ में एक ऐसी ललक और बेबसी थी जिसने इज़ोल्ड को अंदर तक हिला दिया। "इज़ोल्ड, मैं तुम्हें मारने नहीं, अपनी उस रूह को वापस लेने आया था जिसे मैं उस बर्फीली रात तुम्हारे पास छोड़ गया था। मैं हर पल तुम्हारे बिना मर रहा था, और तुम कह रही हो कि मैं तुमसे नफरत करता हूँ? तुमने तो मुझे सच बोलने या ढूँढने का मौका भी नहीं दिया और भाग निकली।"

​इज़ोल्ड की आँखें फैल गईं। उसे पहली बार अहसास हुआ कि जो इवान ने उसे दिखाया और जो कैसियन महसूस कर रहा था, उसमें ज़मीन-आसमान का फर्क है। दोनों ही 'छल' के शिकार हुए थे।​भाग-4: विश्वासघात का असली चेहरा

​इससे पहले कि इज़ोल्ड अपने किए पर माफी माँगती या कैसियन के गले लगती, इवान ने ज़मीन पर एक ज़ोरदार मुक्का मारा। एक काला जादुई जाल धरती को फाड़कर निकला और कैसियन तथा इज़ोल्ड को दो अलग दिशाओं में किसी खिलौने की तरह फेंक दिया।

​इवान के चेहरे से वह भाईचारे और सौम्यता का मुखौटा अब पूरी तरह उतर चुका था। उसकी आँखों में एक राक्षसी और नारकीय चमक थी। "बहुत हुआ यह प्रेम का स्वांग! इज़ोल्ड, तुम केवल मेरी बहन नहीं, तुम वेलेरियस वंश के प्राचीन खज़ाने की चाबी हो, और यह सम्राट तुम्हें कभी हासिल नहीं कर पाएगा।" उसने एक विशाल काला जादुई द्वार (Portal) खोला और इज़ोल्ड को ज़बरदस्ती घसीटते हुए उसमें ले जाने लगा।​भाग-5: पछतावे की आग और नया संकल्प

​जब तक कैसियन उस जादुई जाल को अपनी शक्ति से काटकर खड़ा हुआ, इज़ोल्ड की चीखें और इवान की परछाईं गायब हो चुकी थीं। वह खंडहर अब पहले से कहीं ज़्यादा वीरान और ठंडा था। सन्नाटा इतना गहरा था कि कैसियन को अपनी ही तेज़ साँसें भारी लग रही थीं।

​तभी, ज़मीन पर इज़ोल्ड का वह लॉकेट पड़ा दिखाई दिया। इस बार, जैसे ही कैसियन ने उसे छुआ, इवान का किया हुआ काला जादू टूट गया। लॉकेट से अब इज़ोल्ड की असली, मर्मभेदी और सच्ची पुकार कैसियन की रूह में गूँजी— "कैसियन, मुझे बचा लो! मैं इवान के चंगुल में हूँ... मैं तुमसे दूर नहीं जाना चाहती!"

​कैसियन की रूह कांप उठी। उसे लगा कि उसका पूरा अस्तित्व ढह गया है। वह वहीँ घुटनों के बल गिर गया और ज़मीन पर अपनी लहूलुहान मुट्ठी दे मारी। "मैंने क्या कर दिया... मैंने उस रूह पर शक किया जो मुझे पुकार रही थी? मैंने उसे डराया और उस पर प्रहार किया जब उसे मेरे सहारे की सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी?"

​पछतावे का यह बोझ किसी भी जादुई वार या घाव से बड़ा था। लेकिन अब वह हार मानने वाला सम्राट नहीं था। उसकी आँखों में अब वह लाल नफरत नहीं, बल्कि एक स्थिर और भयंकर संकल्प था।

​"इवान... तुमने उसे एक सम्राट से छीना था, अब तुम उसका सामना करोगे जिसने अपना सब कुछ खो दिया है और जिसके पास अब खोने को कुछ भी नहीं।" उसने अपनी तलवार म्यान में डाली और खंडहर से बाहर निकलते हुए कसम खाई, "मैं आ रहा हूँ इज़ोल्ड, और इस बार मैं तुम्हें अपनी रूह नहीं, बल्कि इवान का सिर और यह पूरी दुनिया तुम्हारे कदमों में लाकरदूँगा

​​अध्याय 15: पछतावे की आग और नया संकल्प​भाग-1: सन्नाटे का दंश और अंतर्मन का नरक

​पहाड़ी पर स्थित उस प्राचीन हवेली के खंडहरों में अब केवल सन्नाटा और एक ऐसी खामोशी पसरी थी जो रूह को कंपा देने वाली थी। वह जादुई द्वार, जिसमें इवान इज़ोल्ड को किसी बेजान वस्तु की तरह घसीटते हुए ले गया था, अब हवा में धुएं की तरह विलीन हो चुका था। कैसियन वहीं बर्फीली ज़मीन पर घुटनों के बल बैठा था। उसके हाथ ठंडी बर्फ में कोहनियों तक धंसे हुए थे, लेकिन उसके शरीर की चेतना सुन्न हो चुकी थी। उसे उस बर्फीली ठंड का अहसास तक नहीं था, क्योंकि उसके भीतर पछतावे की एक ऐसी आग जल रही थी जो उसे अंदर से जलाकर राख कर रही थी।

​इज़ोल्ड के वे आखिरी शब्द—"तुम मुझे मारने आए हो न?"—पहाड़ी की वादियों में गूँज रहे थे। हवा का हर झोंका उन्हीं शब्दों को हज़ारों खंजरों में तब्दील करके कैसियन के कानों में चुभो रहा था।

​उसने अपनी आँखें बंद कीं, तो अंधेरे में इज़ोल्ड का वह मासूम और डरा हुआ चेहरा उभर आया। उसे अपनी ही आवाज़ की वह कड़वाहट और वह हिंसक, फौलादी पकड़ याद आई जिससे इज़ोल्ड की नाज़ुक कलाई पर गहरे नीले निशान पड़ गए होंगे। उसने कल्पना की कि इज़ोल्ड उस समय क्या महसूस कर रही होगी—वह इंसान जिसे उसने अपनी 'जीवन-शक्ति' की आखिरी बूंद देकर मौत के मुँह से निकाला था, वही आज उसकी आँखों में आँखें डालकर उसकी जान लेने का दावा कर रहा था।

​"मैंने क्या कर दिया..." कैसियन की आवाज़ एक घायल और मरणासन्न जानवर की कराह जैसी थी।

​उसे अब पूरी बिसात साफ नज़र आ रही थी। इवान ने इज़ोल्ड को सिर्फ शारीरिक रूप से अगवा नहीं किया था, बल्कि उसने इज़ोल्ड की आत्मा और उसके विश्वास को भी एक तिलिस्मी कैद में डाल दिया था। इवान ने इज़ोल्ड के मन में कैसियन के खिलाफ नफरत और डर का वह ज़हर भरा था, जिसे कैसियन ने अपनी मूर्खता, शक और अनियंत्रित गुस्से से खुद ही 'सच' साबित कर दिया। इवान ने एक बिसात बिछाई थी, और कैसियन सीधे उस जाल में जा गिरा था।​भाग-2: प्रायश्चित की वेदी और खतरनाक निश्चय

​कैसियन धीरे-धीरे खड़ा हुआ। उसके चेहरे पर अब वह विक्षिप्त गुस्सा नहीं था जिसने उसे अंधा कर दिया था, बल्कि उसकी जगह एक शांत, गहरा और अत्यंत खतरनाक निश्चय आ गया था। उसकी आँखों में पछतावे के आँसू अब सूख चुके थे, और वहाँ अब केवल एक ही ज्वाला शेष थी।

​"मैंने उस रूह पर शक किया जिसने अपनी जान की बाजी लगाकर मुझे जीवन दान दिया था," उसने अपनी मुट्ठी इतनी ज़ोर से भींची कि उसके नुकीले नाखूनों ने उसकी हथेली की खाल को चीर दिया और गर्म खून बर्फ पर टपकने लगा। "मैंने उसे गुनहगार समझा जो खुद एक भयानक साजिश की शिकार थी। मैंने उसे उस वक्त डराया जब उसे मेरे सुरक्षा की सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी।"

​यह पछतावा अब उसे तोड़ नहीं रहा था, बल्कि उसे एक नए सांचे में गढ़ रहा था। वह समझ गया था कि इज़ोल्ड को वापस पाना अब सिर्फ उसे हासिल करना नहीं है, बल्कि उसके टूटे हुए विश्वास को फिर से जोड़ना है। यह अब उसके लिए महज एक युद्ध नहीं, बल्कि एक 'तपस्या' थी। उसे इज़ोल्ड की नज़रों में फिर से वह 'कैसियन' बनना था जिसे उसने उस रात आग के बीच देखा था।​भाग-3: वफादारी की शपथ और रक्त-वचन

​कैसियन ने अपनी महान तलवार—'शून्य की पुकार'—को म्यान से बाहर निकाला। वह तलवार, जो सदियों पुराने शापित लोहे से बनी थी, चाँद की पीली और बीमार रोशनी में बिजली की तरह कौंधी। उसने तलवार को अपने माथे से लगाया और उसे आसमान की ओर उठा दिया।

​"इज़ोल्ड," उसने बहुत धीमी लेकिन चट्टान जैसी मज़बूत आवाज़ में कहा, जैसे वह चाहता हो कि उसकी रूह की पुकार मीलों दूर उस गुप्त गढ़ की दीवारों को चीरकर इज़ोल्ड तक पहुँचे। "अगर मुझे तुम्हें वापस लाने के लिए पाताल की नर्क-ज्वालाओं तक जाना पड़ा या अपनी रूह के हज़ारों टुकड़े भी करने पड़े, तो मैं एक कदम भी पीछे नहीं हटूूँगा। मैं तुम्हें वापस लाऊँगा, इज़ोल्ड। इस बार ज़ंजीरों में जकड़ने के लिए नहीं, अपनी सनक को शांत करने के लिए नहीं... बल्कि तुम्हारे कदमों में गिरकर यह बताने के लिए कि मैं तुम्हारा अपराधी हूँ, और तुम्हारा रक्षक भी।"

​उसने अपनी कलाई पर तलवार की नोक से एक गहरा चीरा लगाया और अपना शाही खून उस पवित्र बर्फीली ज़मीन पर गिरने दिया। "यह मेरा 'रक्त-वचन' है। जब तक मेरा दिल एक बार भी धड़केगा, मैं उस गद्दार इवान का पीछा करूँगा। मैं तुम्हें उस अंधेरे से निकालूँगा जिसे मैंने अपनी नासमझी से और गहरा कर दिया था।"​भाग-4: शिकार की शुरुआत: सम्राट से योद्धा तक

​कैसियन ने मुड़कर अपने काले घोड़े 'ईथर' की ओर देखा। उसने अपने साम्राज्य, अपने सिंहासन और अपनी विशाल सेना की चिंता पूरी तरह त्याग दी थी। वह जानता था कि अब वह एक सम्राट के तौर पर नहीं, बल्कि एक प्रेमी और एक मरमिटने वाले योद्धा के तौर पर लड़ेगा।

​उसने ज़मीन से इज़ोल्ड के लबादे का वह फटा हुआ मखमली टुकड़ा उठाया और उसे अपने सीने के पास, कवच के भीतर रख लिया। वह गुलाबों और कस्तूरी की हल्की सुगंध अभी भी उसमें बसी थी, जो उसे याद दिला रही थी कि इज़ोल्ड अभी ज़िंदा है और कहीं न कहीं, उसके भीतर की वह छोटी सी उम्मीद अभी भी कैसियन का इंतज़ार कर रही है—चाहे वह बाहर से उससे नफरत ही क्यों न करती हो।

​"इवान, तुमने एक सम्राट को चुनौती देकर सोचा था कि तुम जीत गए। लेकिन अब तुम्हारा सामना उस इंसान से होगा जिसके पास खोने के लिए अपनी इज़ोल्ड के सिवा कुछ भी नहीं बचा है। और जिसके पास खोने के लिए कुछ नहीं होता, वह साक्षात् मौत से भी भयानक होता है।"

​कैसियन घोड़े पर सवार हुआ और धूल उड़ाते हुए उस दिशा में निकल पड़ा जहाँ क्षितिज पर वेलेरियस वंश का वह 'गुप्त गढ़' (Secret Fortress) स्थित था—एक ऐसी जगह जहाँ से कोई वापस नहीं आता था, लेकिन जहाँ उसकी इज़ोल्ड कैद थी।

​अध्याय 16: इवान का क्रूर खेल और समर्पण की अग्नि​भाग-1: अंधेरे गढ़ का सन्नाटा और सोई हुई शक्तियाँ

​उत्तरी पहाड़ियों के सबसे दुर्गम और अभिशप्त छोर पर स्थित था—'अंधेरा गढ़'। यह किला उन प्राचीन जादुई पत्थरों से बना था जिन्हें 'सौर-भक्षक' कहा जाता था; ये पत्थर सूरज की सबसे गर्म किरणों को भी सोखकर उन्हें बर्फीला बना देते थे। यहाँ की हवा भारी थी और दीवारों से एक निरंतर, धीमी गुनगुनाहट आती थी, जैसे पत्थर खुद किसी को कैद करने के लिए सदियों पुराने मंत्र बुदबुदा रहे हों।

​इज़ोल्ड उस किले की एक कालकोठरी में बैठी थी, जिसकी दीवारें नमी और जादू से चिपचिपी थीं। उसे अपनी रगों में एक भयानक खालीपन महसूस हो रहा था। इन पत्थरों की प्रकृति ऐसी थी कि वे इज़ोल्ड की 'साया-शक्ति' (Shadow Power) को धीरे-धीरे सोख रहे थे, जिससे वह शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह निढाल हो चुकी थी।

​तभी भारी लोहे का दरवाज़ा चरमराया और इवान ने कक्ष में प्रवेश किया। उसके चेहरे पर अब वह 'बड़े भाई' वाला दुलार नहीं था, जिसने इज़ोल्ड को बचपन में लोनियाँ सुनाई थीं। उसकी जगह एक ऐसे विजेता का क्रूर अहंकार था जिसने अपनी ही बहन की रूह का सौदा कर लिया था।

​"तुम ऐसा क्यों कर रहे हो, भाई?" इज़ोल्ड ने कांपती और फटी हुई आवाज़ में पूछा।

​इवान की हँसी ठंडी और खोखली थी, जैसे सूखी हड्डियों के टकराने की आवाज़ हो। "भाई? मैं वह 'भाई' हूँ इज़ोल्ड, जिसने कैसियन के कबीले के हाथों अपने पूर्वजों का अपमान होते देखा है। उन्होंने हमारे वैभव को मिट्टी में मिलाया और हमें कुत्तों की तरह जंगलों में भटकने पर मजबूर किया।" उसने इज़ोल्ड के करीब आकर उसकी ठुड्डी को अपनी बर्फीली उंगलियों से ऊपर उठाया। "तुम सिर्फ मेरी बहन नहीं हो, तुम वेलेरियस वंश की 'साया-रानी' (Shadow Queen) हो। तुम्हारी शक्तियाँ सो रही हैं, और मैं उन्हें जगाऊँगा। हम उस उत्तरी साम्राज्य को राख कर देंगे जिसे कैसियन अपनी जान कहता है। मैं तुम्हें एक हथियार बनाऊँगा, इज़ोल्ड। एक ऐसा हथियार जिसके सामने सम्राट भी घुटने टेक दे।"

​इज़ोल्ड की आँखें आँसुओं से भर गईं। जिसे वह अपना अंतिम सहारा और रक्षक समझती थी, वह उसे सिर्फ सत्ता पाने के एक निर्जीव औज़ार की तरह देख रहा था।​भाग-2: अकेले सम्राट की दस्तक

​तभी, अचानक पूरे किले की बुनियाद किसी शक्तिशाली भूकंप की तरह हिल गई। बाहर से किसी सेना के नगाड़े नहीं सुनाई दिए, बल्कि एक ऐसी गूँज आई जैसे कोई पहाड़ टूटकर गिर रहा हो। कैसियन आ चुका था।

​लेकिन यह वह सम्राट नहीं था जो सोने के कवच और गौरव के साथ चलता था। वह अकेला था। उसका शरीर धूल, कीचड़ और पुराने ज़ख्मों के खून से सना था। उसके राजसी कपड़े फटे हुए थे और बाल बिखरे थे। लेकिन जब वह किले के मुख्य आंगन में पहुँचा, तो उसकी आँखों में वह 'नफरत' या 'सनक' नहीं थी जिसने पिछली बार इज़ोल्ड को डरा दिया था। वहाँ सिर्फ एक अथाह, जानलेवा पीड़ा और प्रार्थना थी।

​इवान क्रोध में इज़ोल्ड की कलाई पकड़कर उसे घसीटते हुए किले की ऊँची मुख्य बालकनी पर ले आया। नीचे आंगन में, मौत के साये के बीच कैसियन तनकर खड़ा था।

​"छोड़ दो उसे, इवान!" कैसियन की आवाज़ बुलंद थी, लेकिन उसमें एक छिपी हुई विनती थी जिसे केवल एक प्रेमी का हृदय पहचान सकता था।​भाग-3: महान समर्पण: प्रेम की पराकाष्ठा

​इवान ने एक खौफनाक मुस्कान के साथ इज़ोल्ड की गर्दन पर एक काला जादुई खंजर रख दिया। "देखो इज़ोल्ड, तुम्हारा 'जल्लाद' तुम्हें अंतिम विदाई देने आ गया है! कैसियन, अगर तुम एक कदम भी आगे बढ़े, तो इस लड़की का पवित्र खून इन पत्थरों की प्यास बुझाएगा!"

​कैसियन अचानक रुक गया। उसने ऊपर देखा और इज़ोल्ड की आँखों में झाँका—वही अविश्वास, वही पुराना डर। कैसियन को अहसास हुआ कि शब्द अब कम पड़ चुके हैं। उसने वह किया जिसकी कल्पना किसी सम्राट ने नहीं की थी।

​उसने अपनी वह 'वर्जित' तलवार, जिससे उसने हज़ारों युद्ध जीते थे, अपनी म्यान में डाल दी। उसने अपना ढाल (Shield) ज़मीन पर फेंक दिया। यहाँ तक कि उसने अपना रक्षा-कवच भी उतार दिया। उसने अपने दोनों हाथ हवा में उठा दिए, यह दिखाते हुए कि वह अब कोई योद्धा नहीं, बल्कि एक साधारण इंसान है।

​"इज़ोल्ड..." कैसियन ने बहुत ही कोमल और रुँधती हुई आवाज़ में पुकारा। उसकी आँखों से एक आँसू निकलकर उसके गाल पर बहते हुए सूखे खून की लकीर से मिल गया। "मैंने तुम्हें डराया... मैंने उस रूह पर शक किया जो मेरी रूह का हिस्सा थी। उसके लिए मैं मरते दम तक खुद को माफ नहीं कर पाऊँगा।"

​इज़ोल्ड का पूरा शरीर काँपने लगा। कैसियन का यह रूप—इतना कमज़ोर, इतना निहत्था और इतना समर्पित—उसने अपनी पूरी ज़िंदगी में कभी नहीं देखा था।

​"इवान कहता है कि मैं तुम्हारा अंत करने आया हूँ," कैसियन ने इज़ोल्ड की आँखों में अपनी पूरी आत्मा उड़ेलते हुए कहा। "अगर तुम्हें भी यही लगता है इज़ोल्ड... अगर तुम्हें लगता है कि मैं वाकई तुम्हारा गुनहगार हूँ, तो लो... मैं खुद को तुम्हारे हवाले करता हूँ। तुम खुद मेरा अंत कर दो। अपनी जादुई आग से मुझे इसी क्षण राख कर दो, मैं उफ़ तक नहीं करूँगा। लेकिन मेरी जान..." उसकी आवाज़ पूरी तरह टूट गई, "इस गद्दार के हाथों अपनी पवित्र रूह को मैला मत होने दो। यह तुम्हें प्यार नहीं करता, यह सिर्फ तुम्हारा इस्तेमाल करना चाहता है।"​भाग-4: साया-रानी का उदय

​इज़ोल्ड का दिल जैसे फटने को था। उसने देखा कि कैसियन ने अपनी गर्दन झुका दी थी—वह अपनी इज़ोल्ड के हाथों मरने का पूरा मौका दे रहा था ताकि उसे सच का अहसास हो सके। यह वह इंसान नहीं था जो उसे ज़ंजीरों में बाँधना चाहता था, यह वह इंसान था जो उसके आत्म-सम्मान के लिए अपनी गर्दन कटवाने को तैयार था।

​"कैसियन..." इज़ोल्ड के होंठों से उसका नाम पहली बार बिना किसी डर और पूरी वफादारी के साथ निकला।

​इवान चिल्लाया, "चुप रहो! यह इसकी एक और चाल है! तुम मेरा हथियार हो!" उसने इज़ोल्ड की गर्दन पर खंजर का दबाव बढ़ाना चाहा, लेकिन तभी कुछ घटित हुआ।

​कैसियन के उस निःस्वार्थ समर्पण ने इज़ोल्ड के भीतर के उस 'डर' को जलाकर राख कर दिया जिसने उसकी शक्तियों को बांध रखा था। इज़ोल्ड की आँखों में अचानक एक गहरी, अलौकिक नीली चमक कौंधी। उसके चारों ओर का अंधेरा अचानक जीवित हो उठा। वह अब एक डरी हुई लड़की नहीं थी; वह साया-रानी (Shadow Queen) थी, जिसकी शक्ति का स्रोत नफरत नहीं, बल्कि 'अटूट विश्वास' था।

​इवान का जादुई खंजर इज़ोल्ड की त्वचा को छूते ही धूल बनकर बिखर गया। इज़ोल्ड ने हवा में हाथ लहराया और पूरे किले की परछाइयाँ इवान को जकड़ने के लिए ऊपर उठने लगीं।

​अध्याय 17: साया-रानी का उदय और इवान का पतन​भाग-1: साया-रानी का प्रचंड विस्फोट

​अंधेरे गढ़ के आँगन में पसरा सन्नाटा इतना गहरा और भारी था कि गिरती हुई बर्फ की आवाज़ भी किसी खौफनाक धमाके जैसी महसूस हो रही थी। कैसियन निहत्था, अपना सब कुछ त्याग कर खड़ा था। उसकी गर्दन झुकी हुई थी और आँखें इज़ोल्ड की रूह में झाँकने की कोशिश कर रही थीं। वह अपनी अंतिम साँस तक इज़ोल्ड के चरणों में अर्पण करने के लिए तैयार था।

​इवान के चेहरे पर एक शैतानी हँसी तैर रही थी। उसने अपनी पकड़ और मज़बूत की, जादुई खंजर की ठंडी और नुकीली नोक इज़ोल्ड की कोमल त्वचा को भेदने ही वाली थी। "देखा इज़ोल्ड? यह महान सम्राट कितना खोखला और कमज़ोर है! यह कायर आज मरना चाहता है क्योंकि इसके पास लड़ने की कोई वजह नहीं बची!" इवान पागलों की तरह अट्टहास करने लगा।

​लेकिन इज़ोल्ड को अब इवान के शब्द सुनाई नहीं दे रहे थे। उसे केवल कैसियन की वे भीगी हुई आँखें दिख रही थीं, जिनमें उसके प्रति गहरा पछतावा, असीम त्याग और वह पवित्र प्रेम था जिसे वह नफरत समझ बैठी थी। अचानक, इज़ोल्ड के भीतर की वह जादुई बेबसी, वह मासूम डर और वह बरसों की कमज़ोरी—सब कुछ एक महाविस्फोट की तरह फट पड़ा।

​किले के जादुई पत्थर, जो अब तक इज़ोल्ड की ऊर्जा चूस रहे थे, अचानक दरकने लगे। इज़ोल्ड के पूरे अस्तित्व से काली और नीली दिव्य लपटें निकलने लगीं। उसकी आँखों का रंग पूरी तरह स्याह हो गया, जैसे उनमें सारा ब्रह्मांड और उसकी प्रलयंकारी शक्तियाँ समा गई हों।

​"इवान... बहुत हुआ," इज़ोल्ड की आवाज़ अब एक डरी हुई लड़की की नहीं, बल्कि एक प्राचीन, आदि-शक्ति की गर्जना थी।

​एक ज़ोरदार धमाका हुआ, जिसने पूरे किले को हिलाकर रख दिया। इज़ोल्ड के शरीर से निकली ऊर्जा की एक नीली लहर ने इवान को किसी तिनके की तरह उड़ाकर कई फीट पीछे पत्थर की दीवार से दे मारा। इवान का अभिशप्त जादुई खंजर हवा में ही राख का ढेर बन गया। इज़ोल्ड अब ज़मीन पर नहीं थी, वह हवा में तैर रही थी और उसके चारों ओर सायों का एक विशाल, डरावना घेरा बन गया था। वह अब साया-रानी (Shadow Queen) के पूर्ण अवतार में थी।​भाग-2: रूहानी मिलन और माफी का आँसू

​कैसियन ने विस्मय और गर्व के साथ ऊपर देखा। उसकी इज़ोल्ड अब कोई असहाय शिकार नहीं थी, वह एक 'योद्धा रानी' बन चुकी थी जिसने अपनी नियति को मुट्ठी में कर लिया था। इज़ोल्ड धीरे से नीचे उतरी, जैसे कोई देवी स्वर्ग से उतर रही हो, और हवा की गति से दौड़कर सीधे कैसियन की खुली बाँहों में जा समाई।

​कैसियन ने उसे इतनी ज़ोर से जकड़ लिया जैसे वह उसकी अपनी ज़िंदगी को थाम रहा हो। "इज़ोल्ड... मुझे माफ कर दो... मैंने उस दिल पर शक किया जो केवल मेरे लिए धड़कता था..." उसकी आवाज़ भारी थी और गले में सिसकियाँ अटकी थीं।

​इज़ोल्ड ने अपने कांपते हाथों से कैसियन के लहूलुहान चेहरे को थाम लिया। उसकी आँखों का वह गहरा कालापन अब शांत होने लगा और उनमें फिर से वही पुरानी मासूमियत लौट आई। "नहीं कैसियन, तुमने अपनी रूह मेरे नाम की थी और मैंने तुम्हें इस अंधेरे में तड़पता छोड़ दिया। हम दोनों को ही उस साये ने छला था, लेकिन अब कोई परछाईं हमारे बीच नहीं आएगी।"

​वह क्षण ऐसा था जैसे सदियों का वनवास समाप्त हुआ हो। उनके बीच की सारी कड़वाहट और गलतफहमियाँ उस एक आलिंगन की गर्मी में जलकर पवित्र राख बन गईं।​भाग-3: इवान का अंतिम विश्वासघात और विस्मृति का शाप

​लेकिन विनाश अभी टला नहीं था। दूसरी ओर, मलबे के बीच से इवान लहूलुहान अवस्था में उठा। उसका चेहरा क्रोध, ईर्ष्या और हार की जलन से किसी दानव जैसा विकृत हो चुका था। उसने देखा कि उसका बरसों का सपना और उसकी सत्ता की भूख इन दोनों के अटूट प्रेम के सामने मिट्टी में मिल गई थी।

​"तुम... तुम दोनों कभी सुखी नहीं रहोगे! अगर इज़ोल्ड मेरी नहीं, तो वह किसी की नहीं होगी!" इवान ने पागलों की तरह चिल्लाकर अपनी बची-कुची पूरी काली शक्ति को अपनी उंगलियों के पोरों में समेटा। वह जानता था कि वह अब इज़ोल्ड की दैवीय शक्ति का मुकाबला नहीं कर सकता, इसलिए उसने कैसियन की रूह को ही मिटाने का फैसला किया।

​उसने अपनी रूह का आखिरी हिस्सा दांव पर लगाकर एक काला जादुई तीर सीधे कैसियन की पीठ की ओर छोड़ा। वह कोई साधारण शस्त्र नहीं था—वह 'विस्मृति का शाप' (Curse of Oblivion) था, जो इंसान के शरीर को नहीं, बल्कि उसके व्यक्तित्व और उसकी यादों को मिटा देता है।

​इज़ोल्ड ने बिजली की चमक की तरह खतरे को भांप लिया। "कैसियन, हटो!"

​इससे पहले कि कैसियन मुड़ पाता, इज़ोल्ड ने अपनी पूरी साया-शक्ति से एक कवच बनाया, लेकिन इवान का वह वार उसकी रूह की आखिरी आहुति से बना था। वह तीर कवच को चीरता हुआ कैसियन के कंधे को छूकर निकल गया। कैसियन एक दर्दनाक कराह के साथ बर्फ पर गिर पड़ा।​भाग-4: प्रतिशोध और यादों का अंतहीन शून्य

​इज़ोल्ड का गुस्सा अब एक ऐसी ज्वाला बन चुका था जिसे शांत करना नामुमकिन था। उसने अपना हाथ इवान की ओर उठाया। "तुमने फिर से उसे चोट पहुँचाई! तुमने हमारे प्रेम को फिर से दागदार किया!"

​इज़ोल्ड की साया-शक्तियों ने इवान को हवा में दबोच लिया और उसे किसी सूखे पत्ते की तरह किले की सबसे ऊँची मीनार से बाहर शून्य में फेंक दिया। इवान नीचे की गहरी, अनंत खाई में गिरता चला गया, और उसकी खौफनाक चीखें पहाड़ियों की घाटियों में तब तक गूँजती रहीं जब तक कि वे हमेशा के लिए शांत नहीं हो गईं। (उसका शरीर कभी नहीं मिला—क्या वह वाकई मर गया, या सायों ने उसे बचा लिया?)

​इज़ोल्ड तुरंत कैसियन के पास पहुँची। उसका शरीर बर्फ जैसा ठंडा पड़ रहा था और जिस जगह तीर लगा था, वहाँ की नसें काली पड़कर ज़हर की तरह फैल रही थीं।

​"कैसियन! अपनी आँखें खोलो! देखो मैं यहाँ हूँ!" इज़ोल्ड फूट-फूटकर रोने लगी।

​कैसियन ने बहुत प्रयास के बाद अपनी भारी पलकें खोलीं। उसने इज़ोल्ड के चेहरे को देखा, लेकिन उसकी आँखों में अब वह पहचान, वह तड़प और वह गहरा प्रेम धीरे-धीरे धुंधला हो रहा था, जैसे किसी जलते हुए दीये का तेल खत्म हो रहा हो।

​"तुम... तुम कौन हो? और मैं यहाँ... इस ठंड में कैसे पहुँचा?" कैसियन की आवाज़ सपाट और अजनबी थी।

​इज़ोल्ड का दिल जैसे उसी पल थम गया। इवान का आखिरी ज़हरीला वार काम कर गया था। कैसियन ज़िंदा तो था, लेकिन उसकी यादों की वह दुनिया, जिसमें इज़ोल्ड उसकी रानी थी, पूरी तरह मिट चुकी थी।

​अध्याय 18: सम्राट का खोया हुआ गौरव​भाग-1: इज़ोल्ड का शाब्दिक प्रहार और टूटता हुआ स्वाभिमान

​जादुई दीवार के उस पार, जहाँ इवान ने इज़ोल्ड को एक पारदर्शी कैद में रखा था, हवा का तापमान अब असहनीय रूप से गिरता जा रहा था। खंडहरों की उस भारी खामोशी में केवल इज़ोल्ड की आवाज़ गूँज रही थी, जो किसी तेज़ धार वाले खंजर की तरह कैसियन के सीने के पार उतर रही थी। कैसियन, जो धूल, पुराने सूखे खून और थकान से चूर निहत्था खड़ा था, इज़ोल्ड के हर शब्द के साथ और भी छोटा और असहाय महसूस कर रहा था।

​इज़ोल्ड की आँखों में अब वह मासूम डर नहीं था जो इवान के जादुई ज़हर ने भरा था, बल्कि वहाँ एक तीखा, चीर देने वाला तिरस्कार (Disdain) था। उसने जादुई दीवार के पार खड़े कैसियन की आँखों में आँखें डालकर अपनी आवाज़ को बर्फ की तरह सख्त और धारदार बना लिया।

​"लोग तुम्हें 'मौत का साया' कहते हैं, कैसियन," उसने एक कड़वी और दर्दनाक मुस्कान के साथ कहा। "पुरानी कहानियों में सुना है कि तुम्हारी एक हुंकार से पहाड़ अपनी जगह छोड़ देते हैं और तुम्हारी तलवार स्वयं 'नियति' के पन्ने लिखती है। तुम्हारी सल्तनत के लोग तुम्हारी शक्ति की कसमें खाते हैं। लेकिन आज..." उसने रुककर उसे पैर के अंगूठे से लेकर सिर तक देखा, "आज मुझे बताओ... कहाँ गई तुम्हारी वह महान शक्ति? कहाँ गया वह सम्राट जिसका नाम सुनकर दुश्मन अपनी तलवारें छोड़ देते थे?"

​कैसियन बेजान बुत की तरह खामोश खड़ा था। उसकी मुट्ठियाँ इतनी ज़ोर से भिंची हुई थीं कि उसके पोर सफेद पड़ गए थे और हथेलियों से रिसता खून बर्फ पर लाल धब्बे बना रहा था। वह इज़ोल्ड की नज़रों का सामना करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।

​"अगर तुम एक कमज़ोर लड़की की, जिसे तुम अपनी रूह कहते हो, उसकी हिफाजत नहीं कर सकते, तो धिक्कार है तुम्हारी इस जादुई शक्ति पर और तुम्हारे इस झूठे गौरव पर!" इज़ोल्ड की चीख खंडहरों की दीवारों से टकराकर वापस आई। "मेरे भाई ने मुझे तुम्हारी नज़रों के सामने से चुरा लिया और तुम सिर्फ बेबस होकर हाथ मलते रह गए। क्या तुम्हारी शक्ति सिर्फ निहत्थों और मासूमों पर राज करने के लिए है? या तुम इतने अक्षम (Incapable) हो कि अपनी सबसे कीमती चीज़ को भी सुरक्षित नहीं रख सकते?"​भाग-2: आत्मग्लानि का ज्वालामुखी और सम्राट का पुनर्जन्म

​इज़ोल्ड के शब्द कैसियन के उन घावों पर जलते हुए नमक की तरह थे जो अभी पूरी तरह ताज़ा थे। उसका चेहरा पहले आत्मग्लानि (Guilt) से पीला पड़ा, फिर वह शर्म से झुक गया। लेकिन फिर अचानक, उसके भीतर गुस्से, अपमान और विवशता की एक ऐसी लहर दौड़ी कि उसका चेहरा रक्त की तरह लाल हो गया। उसके भीतर का सोया हुआ 'साया-सम्राट' अचानक एक विकराल रूप लेकर जाग उठा।

​उसने अपनी तलवार 'शैडो-ब्लेड' को म्यान से निकाला और ज़मीन पर इतनी प्रचंड शक्ति से पटका कि गुफा के पत्थर किसी कांच की तरह चटक गए।

​"तुम्हें क्या लगता है इज़ोल्ड, कि मैंने जानबूझकर तुम्हें ले जाने दिया?" कैसियन की आवाज़ अब फटी हुई और भारी थी, जैसे कोई प्राचीन ज्वालामुखी फटने की कगार पर हो। "मैं हर एक पल उस शक्ति को कोस रहा हूँ जिसने मुझे तो ज़िंदा रखा, पर तुम्हें मुझसे दूर होने से नहीं रोक पाई। हाँ, मैं हार गया! मैं उस रात सम्राट नहीं, एक लाचार और असफल इंसान साबित हुआ। मैंने अपनी आँखों के सामने तुम्हें उस काले साये में विलीन होते देखा और मैं विधाता की तरह कुछ न कर सका!"

​उसने एक पल के लिए अपनी आँखें बंद कीं, जैसे वह उस काले दृश्य को अपने मस्तिष्क से मिटाना चाहता हो। फिर जब उसने अपनी आँखें खोलीं—वे अब काली नहीं, बल्कि दहकते हुए अंगारों की तरह सुर्ख लाल थीं।

​"लेकिन मेरी शक्ति का असली और अंतिम इम्तिहान अभी बाकी है, इज़ोल्ड। तुमने अब तक सिर्फ मेरा गुस्सा देखा है, आज मेरा विनाश देखोगी।"​भाग-3: विनाश की चमक और रूह का सौदा

​कैसियन ने अपनी गर्दन घुमाकर ऊपर एक ऊँचे चबूतरे पर खड़े इवान की ओर देखा। इवान अभी भी एक कुटिल मुस्कान के साथ इस भावनात्मक तमाशे का आनंद ले रहा था, जैसे वह कैसियन के आत्म-सम्मान के चिथड़े होते देख जश्न मना रहा हो।

​कैसियन की आँखों में अब एक ऐसी चमक लौटी जो इज़ोल्ड ने पहले कभी नहीं देखी थी—यह 'साया-सम्राट' की वह विनाशकारी आभा थी जो प्रलय का संकेत देती थी।

​"इवान!" कैसियन की दहाड़ पूरे किले में किसी बिजली की कड़कड़ाहट की तरह गूँजी। "अगर तुम्हें लगता है कि मुझमें इसकी हिफाजत करने की शक्ति नहीं है, तो आज अपनी आँखों से देखो... मैं इस पूरे अभिशप्त किले को राख बना दूँगा, भले ही उसमें मेरी अपनी रूह भी जलकर भस्म क्यों न हो जाए। मैं इज़ोल्ड को यहाँ से ले जाऊँगा, चाहे इसके लिए मुझे 'मौत' के देवता से दोबारा और इससे भी खौफनाक सौदेबाजी क्यों न करनी पड़े!"

​कैसियन ने अपनी तलवार को अपने हृदय के पास रखा और एक अत्यंत प्राचीन, वर्जित मंत्र बुदबुदाने लगा। अचानक उसके चारों ओर काली बिजली कौंधने लगी और हवा का दबाव इतना बढ़ गया कि ज़मीन धंसने लगी। उसकी 'शैडो-ब्लेड' ने आसपास की बची-कुची रोशनी को सोखना शुरू कर दिया, जिससे पूरा आंगन अंधेरे के आगोश में समा गया।

​इज़ोल्ड ने भयाक्रांत होकर देखा कि कैसियन अपनी 'जीवन-शक्ति' (Life Force) को सीधे जादू में झोंक रहा था—एक ऐसी आत्मघाती प्रक्रिया जो उसे शारीरिक रूप से पूरी तरह नष्ट कर सकती थी, लेकिन उसे वह शक्ति दे सकती थी जिससे वह ब्रह्मांड की किसी भी जादुई दीवार को पल भर में तोड़ सके।

​"कैसियन, रुको! तुम मर जाओगे! रुक जाओ!" इज़ोल्ड का तिरस्कार अब अचानक गहरे खौफ और बेपनाह चिंता में बदल गया। उसने उसे जगाने के लिए कड़वे शब्द कहे थे, उसे मिटाने के लिए नहीं।

​लेकिन कैसियन अब उस सीमा को पार कर चुका था जहाँ से वापसी संभव थी। उसने अपनी चमकती हुई तलवार हवा में लहराई और इज़ोल्ड की ओर एक शांत, करुणा भरी नज़रों से देखते हुए धीमी आवाज़ में कहा:

​"मैं सम्राट रहूँ न रहूँ इज़ोल्ड... तुम्हारा रक्षक बनकर ही दम लूँगा। अगर आज मेरा अंत लिखा है, तो वह तुम्हारे स्वतंत्र कदमों की गूँज सुनते हुए होगा।"

​अध्याय 19: शक्तियों का तांडव – इवान बनाम कैसियन​भाग-1: प्रलयंकारी आकाश और दो शक्तियों का टकराव

​किले की विशाल छत अब किसी जलते हुए नरक के समान भयावह हो चुकी थी। ऊपर आसमान में काले और ज़हरीले बादलों की ऐसी घटाएँ छाई हुई थीं जैसे प्रकृति स्वयं किसी अनर्थ की प्रतीक्षा कर रही हो। बिजली की कड़वाहट हवा को ऐसे चीर रही थी जैसे ब्रह्मांड इस महायुद्ध की गूँज को युगों-युगों तक सहेज लेना चाहता हो।

​एक ओर इवान खड़ा था—उसके चेहरे पर वेलेरियस वंश का वह प्राचीन और काला जादू एक मुखौटे की तरह चढ़ा हुआ था। उसकी आँखों में इज़ोल्ड को एक जीवित 'हथियार' की तरह इस्तेमाल करने की वह सनक थी, जो प्यार नहीं बल्कि केवल सत्ता की भूख थी। दूसरी ओर कैसियन था—वह महान सम्राट जो अब अपने ताज, अपने गौरव या अपनी सल्तनत के लिए नहीं लड़ रहा था। वह आज अपने अस्तित्व के उस सबसे पवित्र और अटूट टुकड़े—इज़ोल्ड—के लिए लड़ रहा था, जिसे छल से उससे छीन लिया गया था।

​"आज यह अंतिम रूप से तय होगा कि इज़ोल्ड किसकी नियति है, कैसियन!" इवान की आवाज़ में एक हिंसक उन्माद और जीत का पागलपन था। उसने अपनी हथेलियाँ अभिशप्त आकाश की ओर फैलाईं और काली धुंध के ऐसे विशाल गोले छोड़े, जो किसी भूखे अजगर की तरह कैसियन के प्राण सोखने के लिए लपके।

​कैसियन ने इस बार कोई बचाव नहीं किया, कोई ढाल नहीं बनाई। इज़ोल्ड के उन कड़वे तानों ने उसके भीतर के उस 'डर' को सदा के लिए मार दिया था जो उसे अब तक अपनी पूरी शक्ति दिखाने से रोके हुए था। वह बिजली की गति से उन काली लपटों के बीच से ऐसे निकला, जैसे विनाशकारी आग भी उसके संकल्प को छूने से कतरा रही हो। उसने अपनी 'शैडो-ब्लेड' से हवा के सीने में एक गहरा चीरा लगाया और सीधे इवान के दिल पर वार किया।

​जब उनकी जादुई शक्तियों का मिलन हुआ, तो एक ऐसा भीषण विस्फोट हुआ कि किले की अभेद्य मीनारें ताश के पत्तों की तरह ढहने लगीं। इज़ोल्ड, जो जादुई घेरे के भीतर कैद थी, पत्थरों के कंपन और उस भयावह आवाज़ से कांप उठी, पर उसकी नज़रें केवल कैसियन पर टिकी थीं।​भाग-2: ज़ख्मी शेर की गर्जना और प्रतिशोध का पथ

​कैसियन अब वह शांत और कूटनीतिक सम्राट नहीं रह गया था। वह एक ऐसा ज़ख्मी शेर बन चुका था जिसकी गुफा से उसका सर्वस्व छीन लिया गया हो। उसकी हर चाल, तलवार के हर प्रहार में इज़ोल्ड के उन शब्दों की प्रतिध्वनि गूँज रही थी— "क्या तुम्हारी शक्ति सिर्फ निहत्थों पर राज करने के लिए है?"

​"तुमने उसे मुझसे छीनने का दुस्साहस किया, इवान!" कैसियन की गर्जना ने पहाड़ों को हिला दिया। उसकी तलवार से अब गहरे नीले रंग की दिव्य आग निकल रही थी। "तुमने उसके कोमल मन में मेरे विरुद्ध विष भरा! तुमने उस पवित्र रूह को लहुलुहान किया जिसे पूजने और सुरक्षित रखने का वचन मैंने स्वयं अपनी आत्मा से किया था!"

​कैसियन ने अपनी तलवार पूरी शक्ति के साथ पथरीली ज़मीन पर दे मारी। एक विशाल और विनाशकारी 'शॉकवेव' पैदा हुई, जिसने किले के भारी पत्थरों को उखाड़कर हवा में खिलौनों की तरह तैरा दिया। इवान उस प्रचंड ऊर्जा के दबाव को सहन नहीं कर पाया और रक्त थूकता हुआ पीछे की ओर लुढ़कता चला गया।​भाग-3: वर्जित जादू और 'आत्मा का प्रलय'

​इवान ने अपनी हार स्वीकार नहीं की। वह अपमान और क्रोध से भरा हुआ उठा और अपनी जादुई छड़ी को पागलों की तरह घुमाया। उसने हवा में तैरते मलबे और नुकीले पत्थरों को एक चक्रवात में बदल दिया और उन्हें कैसियन की ओर गोलियों की रफ़्तार से दागा। साथ ही, उसने धरती के अंधेरे से 'साया-सैनिकों' (Shadow Soldiers) की एक पूरी फौज खड़ी कर दी, जो काले धुएँ की तरह कैसियन के शरीर को जकड़ने और उसके मांस को चीरने लगे।

​कैसियन का शरीर अब छलनी हो चुका था। उसके कंधों, बाहों और छाती से बहता हुआ गरम खून सफ़ेद बर्फ को खूनी लाल रंग में रंग रहा था। लेकिन उसकी आँखों की ज्वाला कम होने के बजाय और भी प्रचंड हो गई। उसने अपनी तलवार को अपने सिर के ऊपर एक दिव्य वृत्त में घुमाया और अपनी अंतिम बची हुई 'जीवन-ऊर्जा' (Life Essence) को एकत्र किया।

​"आत्मा का प्रलय!" कैसियन के कंठ से निकली यह आवाज़ किसी प्राचीन और क्रोधित देवता की गूँज जैसी थी।

​एक चमकदार नीली और काली लहर उसके शरीर से प्रस्फुटित हुई, जिसने इवान के साया-सैनिकों को धूल की तरह उड़ा दिया। कैसियन ने बिजली जैसी फुर्ती से आगे बढ़कर इवान की गर्दन अपनी फौलादी पकड़ में दबोच ली और उसे पत्थर की एक टूटी दीवार से दे मारा। इवान की साँसें उखड़ने लगीं और उसका चेहरा पीला पड़ गया।​भाग-4: दया का दंड और विश्वासघात का खंजर

​इज़ोल्ड यह खौफनाक मंज़र देख रही थी। उसने कैसियन के उस रूप को देखा जिसने अपने प्रेम को सिद्ध करने के लिए अपनी रूह की आहुति दे दी थी। उसे इवान के विश्वासघात पर क्रोध तो था, पर उस आख़िरी खून के रिश्ते को अपनी आँखों के सामने मरते देख वह खुद को रोक नहीं पाई।

​"कैसियन, रुक जाओ! वह मेरा भाई है! उसे मत मारो!" इज़ोल्ड की हृदयविदारक चीख हवा को चीरती हुई कैसियन के कानों तक पहुँची।

​कैसियन का वह हाथ, जो इवान के जीवन का अंत करने ही वाला था, बीच हवा में ही रुक गया। वह योद्धा जो मौत से नहीं डरा, वह इज़ोल्ड की सिसकी पर कांप उठा। उसने मुड़कर इज़ोल्ड की ओर देखा। उसका चेहरा खून, मिट्टी और पसीने से लथपथ था, उसकी आँखें असीमित पीड़ा और थकान से बोझिल थीं, लेकिन उनमें इज़ोल्ड के लिए एक ऐसी वफादारी थी जिसे शब्द कभी बयान नहीं कर सकते।

​"इज़ोल्ड... देखो!" कैसियन की आवाज़ भारी और रुँधी हुई थी। "क्या अब भी तुम्हें लगता है कि मुझमें तुम्हारी हिफाजत करने की शक्ति नहीं है? मैं इस क्षण इसके टुकड़े कर सकता हूँ, लेकिन मैं नहीं करूँगा... केवल इसलिए क्योंकि यह तुम्हारा खून है। मैं तुम्हें फिर से शोक में डूबा हुआ नहीं देख सकता।"

​कैसियन ने अपनी पकड़ ढीली कर दी और नफरत के साथ इवान को झटक दिया। यही वह काला पल था जिसका वह धूर्त इवान इंतज़ार कर रहा था। जैसे ही कैसियन निहत्थे होकर इज़ोल्ड की ओर मुड़ा, इवान ने अपनी आस्तीन से वह छोटा सा अभिशप्त खंजर निकाला—वह खंजर जो सीधे आत्मा को सोखता था।

​इवान ने अपनी पूरी बची हुई ताकत लगाकर वह खंजर कैसियन की पीठ से उसकी छाती के ठीक बीचों-बीच उतार दिया।

​कैसियन की आँखों में एक पल के लिए गहरा सन्नाटा और हैरानी कौंधी, फिर असहनीय पीड़ा की एक लहर। इज़ोल्ड की गूँजती चीख इस बार किले की दीवारों को दरका गई, लेकिन कैसियन के पास अब खड़े रहने की कोई शक्ति शेष नहीं थी। वह धीरे-धीरे बर्फ पर घुटनों के बल गिरने लगा। उसकी नज़रें अपनी अंतिम साँस तक केवल और केवल इज़ोल्ड पर टिकी थीं, जैसे वह कह रहा हो— "देखो, मैंने अपना वचन निभाया।"

​अध्याय 20: रूह की पुकार​भाग-1: ठहरता समय और खामोश होता प्रलय

​किले की उन अभिशप्त ऊँचाइयों पर समय जैसे अपनी गति भूलकर ठहर गया था। इवान का वह काला, रूह सोखने वाला जादुई खंजर जब कैसियन की छाती के आर-पार हुआ, तो हवा में गूँजती युद्ध की भयावह आवाज़ें अचानक एक डरावने सन्नाटे में बदल गईं। कैसियन की आँखों में एक अंतिम और प्रचंड तेज कौंधा—शायद यह नियति को दी गई आखिरी चुनौती थी या इज़ोल्ड को एक अंतिम बार अपनी स्मृतियों में सहेज लेने की चाह।

​उसकी पलकें अब किसी भारी पत्थर की तरह झुकने लगी थीं। वह सम्राट, जिसके कदमों की आहट से धरती काँपती थी, आज अपनी ही 'शैडो-ब्लेड' के सहारे घुटनों के बल बर्फ पर गिर पड़ा। सफ़ेद बर्फ पर गिरती हुई कैसियन के रक्त की हर बूंद एक महाकाव्य लिख रही थी—एक ऐसे प्रेमी की कहानी जिसने अपने सम्मान को नहीं, बल्कि अपने समर्पण को सिद्ध करने के लिए अपनी रूह का अंतिम कतरा तक दांव पर लगा दिया था।​भाग-2: पश्चाताप की ज्वाला और टूटती दीवारें

​जादुई घेरे की पारदर्शी कैद के पीछे खड़ी इज़ोल्ड के लिए यह दृश्य किसी प्रलयंकारी दुःस्वप्न से कम नहीं था। जैसे ही उसने कैसियन के मुँह से रक्त की वह गाढ़ी लकीर बहते देखी, उसके भीतर की सारी कृत्रिम नाराजगी, उसके वे विषैले ताने और वह अहकारी कड़वाहट एक ही क्षण में जलकर भस्म हो गई। उसे अपनी वह भयानक भूल याद आई जब उसने उस योद्धा को 'अक्षम' कहकर पुकारा था, जिसने उसके लिए स्वर्ग और नर्क के द्वार एक कर दिए थे।

​उसने विक्षिप्तों की भाँति अपने दोनों कोमल हाथों से उस अदृश्य, जादुई दीवार को पीटना शुरू कर दिया। "नहीं! ऐसा नहीं हो सकता! कैसियन! अपनी आँखें मत मूँदना!"

​उसकी आत्मा के सबसे अंधकारमयी और अछूते कोने से एक ऐसी चीख निकली जिसने न केवल उस अभिशप्त किले को, बल्कि पूरे हिम-शिखर को हिलाकर रख दिया। "कैसियन...!!!"

​उस पुकार में इतनी आदिम तड़प और इतनी प्रचंड दैवीय शक्ति थी कि जीत का अट्टहास कर रहा इवान भी एक पल के लिए थर्रा गया। इज़ोल्ड की आँखों से बहते आँसू अब केवल शोक के जल नहीं थे; वे उस सुप्त जादुई शक्ति का 'घृत' (ईंधन) बन रहे थे जो वेलेरियस वंश की रक्त-रेखा में पीढ़ियों से मौन थी। उसका 'शोक' अब 'महाविनाश' की ऊर्जा में रूपांतरित हो रहा था।​भाग-3: मरते हुए प्रेमी की अंतिम मुस्कान

​कैसियन ने असहनीय वेदना के बीच, अपनी अंतिम इच्छाशक्ति को किसी तरह बटोरा और अपना सिर उठाया। मृत्यु जब उसके द्वार पर खड़ी थी, तब भी जब उसने इज़ोल्ड को अपने लिए इस कदर बिलखते देखा, तो उसके नीले पड़ते होंठों पर एक फीकी, लेकिन परम संतोष से भरी मुस्कान तैर गई। उसने अपने कांपते हुए, रक्त रंजित हाथ से इज़ोल्ड की ओर एक कमज़ोर इशारा किया।

​वह हाथ भले ही उस पारदर्शी दीवार को पार कर उसे छू नहीं सकता था, लेकिन उस इशारे में एक शाश्वत संदेश छिपा था— "देखो प्रिय, मैं यहाँ केवल तुम्हारे लिए आया था।" वह अपनी अंतिम साँस के साथ उसे यह विश्वास दिलाना चाहता था कि वह कभी कमज़ोर नहीं था, वह उसका 'सम्राट रक्षक' था और मृत्यु के उपरांत भी वही रहेगा।​भाग-4: साया-रानी का रौद्र रूप और मिलन

​अपने प्रिय को अपनी नज़रों के सामने जीवन की अंतिम जंग लड़ते देख इज़ोल्ड के भीतर का मानवी डर 'रुद्र शक्ति' में बदल गया। अचानक, इज़ोल्ड के रोम-रोम से एक काला और नीला दैवीय प्रकाश प्रस्फुटित हुआ। वह जादुई घेरा, जिसे तोड़ने के लिए महानतम जादूगरों को वर्षों की तपस्या चाहिए थी, इज़ोल्ड की एक मर्मभेदी रूहानी चीख के साथ कांच के हज़ारों टुकड़ों की तरह चकनाचूर हो गया।

​इज़ोल्ड बिजली की गति से कैसियन की ओर दौड़ी। इससे पहले कि कैसियन का निर्जीव होता शरीर उस ठंडी बर्फ को छू पाता, इज़ोल्ड ने उसे अपनी बाहों के सुरक्षा चक्र में थाम लिया। वह वहीँ जमी हुई बर्फ पर बैठ गई और कैसियन का सिर अपनी गोद में रख लिया।

​"कैसियन... मेरी बात सुनो, तुम्हें कुछ नहीं होगा! मैं तुम्हें सायों की दुनिया में जाने नहीं दूँगी!" उसने अपने कांपते हाथों से उसकी छाती के उस गहरे घाव को दबाने का निष्फल प्रयास किया। उसका अपना श्वेत रेशमी लबादा, जो कभी उसकी पवित्रता का चिह्न था, अब कैसियन के गर्म रक्त से पूरी तरह सिंदूरी हो चुका था।

​कैसियन ने अपनी धुंधली होती नज़रों को अंतिम बार इज़ोल्ड के सुंदर चेहरे पर स्थिर किया। उसने बहुत ही क्षीण, लगभग फुसफुसाहट वाली आवाज़ में कहा, "इज़ोल्ड... अब तो... तुम्हें यकीन है न... कि तुम्हारा कैसियन... कायर नहीं है?"

​इज़ोल्ड का हृदय जैसे हज़ारों टुकड़ों में बिखर गया। उसने उसे और भी कसकर अपने सीने से लगा लिया। "तुम सबसे महान योद्धा हो, कैसियन! मुझसे बड़ी भूल हुई... मुझे माफ कर दो! वापस आ जाओ, हम फिर से शुरुआत करेंगे!"

​पहाड़ की उस निर्जन चोटी पर, गिरती हुई बर्फ के बीच, इज़ोल्ड का हृदय विदारक विलाप गूँज रहा था, जबकि उसके हाथों में एल्डोरिया के महान सम्राट की साँसें धीरे-धीरे, एक अंतिम विदाई की तरह, उसका साथ छोड़ रही थीं।

​अध्याय 21: खूनी हँसी और जाग्रत प्रतिशोध​भाग-1: मटमैली बर्फ और सम्राट का मौन

​किले की ऊँची छत पर गिरती हुई बर्फ अब अपनी शुद्धता और सफेदी खो चुकी थी। वह कैसियन के शरीर से रिसते हुए गर्म, गहरे लाल लहू से मिलकर मटमैली और खौफनाक हो गई थी। एल्डोरिया का वह सूर्य, जिसकी एक हुंकार से शत्रु कांपते थे, आज उस बर्फीली ज़मीन पर निढाल पड़ा था। कैसियन की साँसें अब केवल एक धीमी सरसराहट मात्र थीं—उखड़ी हुई, बेतरतीब और इतनी कमज़ोर कि लग रहा था जैसे साक्षात् मृत्यु उसके सिरहाने खड़ी अपनी विजय का इंतज़ार कर रही हो।

​इज़ोल्ड का वह सफेद रेशमी लबादा, जो कभी उसकी मासूमियत और कैसियन के प्रति उसकी पवित्र भावनाओं का प्रतीक था, अब सम्राट के खून से पूरी तरह तर-बतर हो चुका था। वह लबादा अब इज़ोल्ड के कंधों पर एक खूनी कफ़न की तरह भारी लग रहा था।

​"कैसियन! अपनी आँखें खोलो! तुम्हें सुनाई दे रहा है? तुम ऐसे हार नहीं मान सकते... तुमने मुझसे वादा किया था कि तुम मेरे साये के साथ चलोगे!" इज़ोल्ड की आवाज़ उस सन्नाटे को चीरते हुए बादलों तक जा रही थी, लेकिन जवाब में केवल उत्तर की कड़वी और सर्द हवाओं की सिसकियाँ मिल रही थीं।​भाग-2: इवान का पाशविक अहंकार और अंतिम अपमान

​तभी, खंडहर की उन ठंडी और अभिशप्त दीवारों के बीच एक ऐसी आवाज़ गूँजी जिसने इज़ोल्ड की रूह को कड़वाहट से भर दिया। वह एक ऐसी हँसी थी जिसमें नफरत और जीत का ज़हरीला मेल था।

​"हा... हा... हा! देखो इज़ोल्ड! अपनी इन बेवफा आँखों से देखो अपने इस 'महान' प्रेमी का अंत!"

​इवान अपनी रक्त-रंजित तलवार को पत्थर की ज़मीन पर घसीटते हुए उनकी ओर बढ़ रहा था। तलवार के पत्थर पर रगड़ने की वह तीखी आवाज़ किसी मरते हुए परिंदे की आखिरी चीख जैसी लग रही थी। इवान की आँखों में अपनी बहन के प्रति कोई करुणा नहीं थी, न ही अपने कृत्य पर कोई पछतावा। उसके चेहरे पर केवल वह पाशविक खुशी थी जो केवल एक असुर के चेहरे पर सम्भव है।

​"यही था न तुम्हारा रक्षक? यही था न वह अजेय शूरवीर जो तुम्हें मेरी पकड़ से आज़ाद कराने के खोखले और अहंकारी दावे करता था?" इवान ने कैसियन के निर्जीव शरीर के पास पहुँचकर उसे अपने भारी, लोहे के जूतों से निर्दयतापूर्वक ठोकर मारी। "उठो सम्राट! अपनी ये बोझिल आँखें खोलो और देखो, तुम्हारी वह अनमोल 'रूह' आज मेरे कदमों में गिरकर अपने जीवन की और तुम्हारे प्राणों की भीख माँग रही है।"

​इवान ने इज़ोल्ड की ओर मुड़कर देखा, उसकी नज़रों में ज़हर भरा उपहास और अपमान था। "देखो इज़ोल्ड, तुम्हारा आशिक मर गया! जिस शक्ति पर इसे इतना गुमान था, वह आज मेरे एक वार के सामने मिट्टी में मिल गई। मैंने बरसों इस नफरत को अपने भीतर पाला है। मैंने अपनी हर साँस के साथ इस दिन का सपना देखा था कि मैं इस घमंडी सम्राट को धूल चटा सकूँ और तुम्हें वापस उस अंधेरे में ले जा सकूँ जहाँ तुम्हारा असली स्थान है—मेरे गुलाम के रूप में! तुम कभी स्वतंत्र नहीं थी इज़ोल्ड, तुम केवल मेरे सपनों को पूरा करने वाली एक कठपुतली हो।"​भाग-3: साया-रानी का प्रलयंकारी रूपांतरण

​इवान की वह कड़वी हँसी इज़ोल्ड के कानों में पिघले हुए सीसे की तरह उतर रही थी। उसने कैसियन के उन बर्फ जैसे ठंडे पड़ते हाथों को देखा जिन्होंने कभी उसे पूरी दुनिया से बचाने का वचन दिया था। अचानक, इज़ोल्ड का सिसकना और विलाप करना थम गया। पूरे किले का वायुमंडल एक ही पल में जम गया। हवा की गति रुक गई, गिरती हुई बर्फ हवा में ही स्थिर हो गई और प्रकृति ने जैसे अपनी साँसें रोक लीं।

​इज़ोल्ड के शरीर के पोर-पोर से एक बर्फीली, नीली और काली रोशनी प्रस्फुटित होने लगी। यह कोई जीवनदायिनी ऊर्जा नहीं थी; यह वह आदिम शक्ति थी जो केवल 'सृष्टि के अंत' और 'विनाश' का संदेश लाती है।

​उसने बहुत आहिस्ता से, जैसे वह कोई कांच का खिलौना हो, कैसियन का सिर बर्फ पर रखा और अपने पैरों पर खड़ी हुई। जब वह मुड़ी, तो उसकी आँखों में अब बेबसी या करुणा के आँसू नहीं थे—वे धधकते हुए ज्वालामुखियों की तरह सुर्ख लाल और काली हो चुकी थीं। वह आग अब सब कुछ—इवान को, किले को और पूरी दुनिया को भस्म करने के लिए आतुर थी।

​"हँस लो इवान..." इज़ोल्ड की आवाज़ में अब एक ऐसी गूँज थी जिससे पूरा किला किसी भयानक भूकंप की तरह थरथरा उठा। "जितना हँसना है हँस लो। क्योंकि तुम्हारी यह हँसी, इस नश्वर दुनिया की आखिरी आवाज़ होगी जो तुम सुनोगे। इसके बाद सिर्फ सन्नाटा होगा... तुम्हारी तड़प और तुम्हारी मौत का सन्नाटा।"​भाग-4: प्रतिशोध की अग्नि और साया-लोक का आह्वान

​इवान की वह विक्षिप्त हँसी उसके गले में ही अटक गई। उसे अचानक महसूस हुआ कि हवा में ऑक्सीजन खत्म हो रही है। उसने भयभीत होकर देखा कि इज़ोल्ड के पैरों के नीचे की बर्फ धीरे-धीरे काली पड़ रही है। किले की हर एक परछाई—दीवारों की, टूटे हुए खंभों की, यहाँ तक कि खुद इवान की अपनी परछाई भी—इज़ोल्ड के पीछे एक विशाल, अभेद्य काली सेना की तरह खड़ी हो गई थी।

​"तुमने इसे कमज़ोर समझा क्योंकि इसने अपनी ढाल और अपनी हिफाजत छोड़ दी थी... केवल मुझे बचाने के लिए," इज़ोल्ड ने एक सधा हुआ कदम आगे बढ़ाया। उसके हर कदम के साथ धरती के सीने में गहरी दरारें पड़ रही थीं। हवा का दबाव इतना अधिक बढ़ गया कि इवान के मज़बूत घुटने अपने आप ज़मीन पर टिकने लगे।

​"लेकिन तुमने मुझे कमज़ोर समझने की सबसे बड़ी भूल कर दी, इवान। मैं साया-लोक की वह रानी हूँ जिसे तुमने अपनी क्रूरता और विश्वासघात से खुद नींद से जगाया है। और अब..." इज़ोल्ड ने अपना हाथ शून्य में उठाया और काली बिजलियाँ उसकी उंगलियों के चारों ओर तांडव करने लगीं, "...अब मैं अपने प्यार के हर एक आँसू और कैसियन की बहती हुई एक-एक खून की बूंद का हिसाब तुम्हारी रूह के कतरे-कतरे से लूँगी! तुम्हारी मौत भी तुम्हें मेरे प्रकोप से नहीं बचा पाएगी।"

​इवान का चेहरा अब मृत्यु की सफेदी की तरह पीला पड़ गया। उसे पहली बार उस भयानक सत्य का अहसास हुआ कि उसने जिस दानव को जगाया है, वह अब उसे निगलकर ही शांत होगा। इज़ोल्ड अब वह कोमल इज़ोल्ड नहीं रही थी; वह 'शापित प्रेम की छाया' का सबसे विकराल और अंतिम रूप बन चुकी थी।

​अध्याय 22: प्रतिशोध का विष​भाग-1: सन्नाटे में घुलता ज़हर​किले की छत पर हवा अब पूरी तरह थम चुकी थी, जैसे कुदरत भी इवान के मुँह से निकलने वाले ज़हर को सुनने के लिए अपनी साँसें रोककर ठिठक गई हो। इवान ने कैसियन के सीने से अपना खूनी, अभिशप्त खंजर खींचा और बहुत धीरे से, एक विजयी मुस्कान के साथ इज़ोल्ड की ओर मुड़ा। इज़ोल्ड, जिसके शरीर से अब साया-शक्ति की नीली और काली लपटें किसी प्रलयकारी धुएं की तरह निकल रही थीं, साक्षात् विनाश की देवी की तरह खड़ी थी। लेकिन इवान के चेहरे पर खौफ की एक शिकन तक नहीं थी; वहाँ केवल एक घृणित और वीभत्स संतुष्टि थी, जैसे किसी भूखे दरिंदे को बरसों बाद उसका शिकार मिल गया हो।​"हैरान मत हो इज़ोल्ड," इवान की आवाज़ धीमी थी, लेकिन उसमें एक ऐसी ज़हरीली सरसराहट थी जो कानों के पर्दों को चीरकर सीधे रूह में चुभ रही थी। "तुम्हें क्या लगता है कि यह सब अचानक हुआ? कोई इत्तेफाक? कोई छोटी सी गलती? नहीं! मैंने इस एक दिन के लिए अपनी रूह का, अपने स्वाभिमान का और अपने अस्तित्व का सौदा किया है। मैंने अपनी हर साँस के साथ, अपनी हर धड़कन के साथ इस पल को बुना है ताकि मैं इस घमंडी सम्राट से अपना वह प्रतिशोध ले सकूँ जो बरसों से मेरे सीने में लावा बनकर सुलग रहा था।"​वह कैसियन के निढाल और खून से लथपथ शरीर की ओर इशारा करते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ा, मानो वह कोई शिकारी हो जो अपने मरे हुए शिकार की प्रदर्शनी लगा रहा हो।​भाग-2: नफरत की खेती और बुना हुआ जाल​"जब तुम इसके सोने के महल में इसके प्यार के झूठे और मखमली ख्वाब देख रही थी, जब तुम इसकी बाहों में सुरक्षा ढूँढ रही थी, तब मैं उन अंधेरी, सीलन भरी कोठरियों में अपनी मौत और ज़िंदगी के बीच सौदेबाजी कर रहा था," इवान ने थूकते हुए कहा। "हर वह घाव जो इसके सैनिकों ने मुझे दिया, हर वह अपमानजनक रात जो मैंने बेबसी में गुज़ारी, वह मुझे चीख-चीखकर याद दिलाती थी कि मुझे इसे खत्म करना है। और सिर्फ मारना नहीं था इज़ोल्ड... मुझे इसे तबाह करना था।"​इवान की आँखें अब एक विक्षिप्त पागलपन से चमक रही थीं। उसने इज़ोल्ड के और करीब आकर उसे अपनी उन आँखों की गहराई में झाँकने पर मजबूर कर दिया जो अब नफरत का कुआँ बन चुकी थीं।​"मैंने एक-एक दिन गिना है, इज़ोल्ड। एक-एक पल का इंतज़ार किया है ताकि मैं इसे वहीं चोट पहुँचा सकूँ जहाँ इसे सबसे ज़्यादा दर्द हो—और वह सबसे गहरी चोट तुम हो! मैंने तुम्हें सिर्फ अगवा नहीं किया, मैंने तुम्हें एक ऐसा जादुई खंजर बनाया ताकि तुम अनजाने में ही सही, पर इसके दिल के हज़ारों टुकड़े कर सको।"​भाग-3: मानसिक प्रहार: इज़ोल्ड को हथियार बनाना​इज़ोल्ड का पूरा शरीर कांप रहा था—नफरत, ग्लानी और सदमे के बीच। इवान रुका नहीं, वह शब्दों के तीखे कोड़े बरसाता रहा। "हाँ, मैंने तुमसे झूठ बोला! मैंने तुम्हें कैसियन के खिलाफ भड़काया, तुम्हें यकीन दिलाया कि वही तुम्हारा हत्यारा है, वही एल्डोरिया का विनाशक है। क्यों? क्योंकि मैं चाहता था कि यह मरने से पहले तुम्हारी नफरत को अपनी रगों में महसूस करे। मैं चाहता था कि इसकी आखिरी याद तुम्हारी वह मर्मभेदी चीख हो जिसमें इसके लिए केवल नफरत और तिरस्कार भरा हो।"​वह इज़ोल्ड के इतने करीब आ गया कि उसकी ठंडी और बदबूदार साँसें इज़ोल्ड के चेहरे को छू रही थीं। इवान के चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान थी जो केवल दूसरों के विनाश में आनंद ढूँढने वाले राक्षसों की होती है।​"मैं चाहता था कि यह देखे कि जिस औरत के लिए इसने अपनी पूरी सल्तनत, अपना वजूद, अपनी वर्जित शक्तियाँ दांव पर लगा दीं, वही इसे अपनी मौत का ज़िम्मेदार मानती है। और देखो इज़ोल्ड... मेरा इंतज़ार सफल हुआ! तुमने इसे 'अक्षम' कहा, तुमने इसे 'कायर' कहा। तुम्हारे वे शब्द मेरे खंजर से कहीं ज़्यादा गहरे घाव कर गए।"​भाग-4: प्रतिशोध का अंतिम और क्रूर इनाम​"अब यह सम्राट मर रहा है, इज़ोल्ड। इसकी आँखों में आखिरी बार झाँक कर देखो... वहाँ उस खंजर की पीड़ा से कहीं ज़्यादा वह असहनीय दुख है जो तुमने इसे अपने कड़वे शब्दों से दिया है। इसे मारना मेरे लिए सिर्फ एक राजनीतिक जीत नहीं है, बल्कि उस बरसों पुराने इंतज़ार का इनाम है जो मैंने अपनी नफरत को पाल-पोसकर कमाया है।"​इवान ने एक ठंडी, हड्डियों को कँपा देने वाली हँसी हँसते हुए इज़ोल्ड के चेहरे पर बिखरे हुए खून से सने बालों को छूने की कोशिश की। "अब इन आँसुओं का कोई फायदा नहीं। तुमने खुद इसे वह घाव दिया है जिसे दुनिया का कोई भी प्राचीन जादू या कोई भी प्रार्थना नहीं भर सकती। एल्डोरिया का महान सम्राट आज एक हारे हुए, ठुकराए हुए प्रेमी की तरह इस गंदी बर्फ पर दम तोड़ रहा है। और इसका हत्यारा मैं नहीं, इज़ोल्ड... तुम हो!"​

​अध्याय 23: टूटती हुई शक्ति और अंतिम संघर्ष​भाग-1: असीमित शक्ति का घातक बोझ और बिखरता अस्तित्व

​किले की छत पर प्रकृति का तांडव अपने चरम पर था, लेकिन वह जादुई गर्जना जो अब तक इज़ोल्ड के प्रतिशोध की गूँज थी, अब उसके लिए एक खौफनाक और दमनकारी सन्नाटे में बदल रही थी। इज़ोल्ड के हाथों से निकलने वाली वे प्रचंड नीली लपटें, जिन्होंने कुछ क्षण पहले इवान के अहंकार को धूल चटा दी थी, अब अचानक दीये की अंतिम लौ की तरह कांपने लगीं। इज़ोल्ड को ऐसा महसूस हुआ जैसे उसके सीने के भीतर हज़ारों बर्फीले खंजर एक साथ उतार दिए गए हों और उसकी रूह को कोई अदृश्य हाथ जकड़ रहा हो।

​इज़ोल्ड की आँखों के सामने अब गहरा धुंध छाने लगा। जो परछाइयाँ उसके इशारे पर किसी वफादार और खूंखार सेना की तरह नाच रही थीं, वे अब धीरे-धीरे पारभासी होकर सर्द हवा में विलीन होने लगीं। उसका शरीर किसी सूखे पत्ते की तरह बेतहाशा कांपने लगा। वह इस भयानक जादुई सत्य को भूल गई थी कि 'साया-लोक' की इस आदिम और आदिहीन शक्ति को धारण करने की एक बहुत बड़ी और रक्तरंजित कीमत होती है। यह शक्ति एक प्यासे दानव की तरह थी—इवान को नष्ट करने से पहले, यह इज़ोल्ड की अपनी जीवन-शक्ति (Life Force) को ही सोखने लगी थी।

​उसकी रगों में दौड़ता हुआ खून अब जादुई आग की तरह उबल रहा था, मानो नसें किसी भी पल फट जाएँगी। इज़ोल्ड के कानों में एक अजीब सी भयावह सांय-सांय की आवाज़ गूँज रही थी। उसे अपनी ही धड़कनें किसी नगाड़े की चोट की तरह भारी और धीमी महसूस हो रही थीं।

​"इज़ोल्ड...!" कैसियन ने बहुत धीमी, मरती हुई आवाज़ में उसे पुकारा। उसकी आवाज़ में अपना मौत का दर्द नहीं, बल्कि इज़ोल्ड को खो देने का असहनीय डर था। उसने अपनी धुंधली नज़रों से देखा कि इज़ोल्ड के कान और नाक से खून की एक पतली, गर्म लकीर बहकर उसके बर्फ जैसे सफेद गालों पर उतर रही है। कैसियन की रूह कांप उठी—उसकी इज़ोल्ड, जो कभी वसंत के फूलों सी नाज़ुक थी, आज उसकी जान बचाने की खातिर खुद को राख कर रही थी।​भाग-2: इवान का क्रूर पलटवार और वहशी उपहास

​इवान, जो अब तक खौफ के मारे मलबे में दुबका हुआ था, ने जब इज़ोल्ड को लड़खड़ाते और अपनी शक्तियों पर नियंत्रण खोते देखा, तो उसकी खोई हुई वहशी हिम्मत और दरिंदगी वापस आ गई। वह लहूलुहान था, उसका चेहरा विकृत था, लेकिन उसकी आँखों में एक नई, क्रूर चमक कौंध उठी। वह लंगड़ाते हुए, ज़मीन पर अपनी भारी तलवार रगड़ते हुए खड़ा हुआ, जिससे एक कर्कश आवाज़ पैदा हुई।

​"देखा इज़ोल्ड? तुम्हारी यह महान शक्ति भी तुम्हें बीच मझधार में छोड़कर कायरों की तरह भाग रही है!" इवान ने अपनी कड़वी और फटी हुई हँसी के साथ आगे कदम बढ़ाया। "तुमने सोचा था कि तुम रातों-रात एक साया-रानी बनकर मुझे हरा दोगी? तुम भूल गई कि तुम अंततः एक मामूली, कमज़ोर और नश्वर इंसान हो। तुम्हारा यह कच्चा जिस्म इस जादुई बोझ को नहीं सह सकता। यह शक्ति तुम्हें अंदर से जलाकर खा जाएगी, और फिर भी तुम हार जाओगी।"

​इज़ोल्ड ने खड़े रहने की अंतिम कोशिश की, अपने नाखूनों को अपनी हथेली में इतनी ज़ोर से गड़ा लिया कि मांस फट गया, ताकि वह दर्द के बहाने होश में रह सके। लेकिन उसके पैरों ने अंततः जवाब दे दिया। वह एक भारी आवाज़ के साथ बर्फीली ज़मीन पर घुटनों के बल गिर पड़ी। उसकी साँसें उखड़ रही थीं। उसने अपना कांपता हुआ हाथ कैसियन की ओर बढ़ाया, जो महज़ कुछ इंच की दूरी पर निढाल पड़ा था, लेकिन वह उसे छू भी नहीं पा रही थी। उसकी जादुई आभा उसे पूरी तरह छोड़ रही थी और मौत का ठंडा सन्नाटा उसे निगलने के लिए बाहें फैलाए खड़ा था।​भाग-3: 'शापित प्रेम' की अंतिम और क्रूर परीक्षा

​इवान अब उन दोनों के ठीक ऊपर काल बनकर खड़ा था। उसने अपनी भारी तलवार दोनों हाथों से ऊपर उठाई, जिसकी नोक से कैसियन का शुद्ध लहू अभी भी टपक रहा था और सफेद बर्फ को दागदार कर रहा था।

​"अब तुम दोनों साथ मरोगे, और यही न्याय है," इवान की आवाज़ पत्थर की तरह सख्त और पूरी तरह भावनाहीन थी। "यही तुम्हारे उस तथाकथित 'शापित प्रेम' का अंत है। इतिहास तुम्हें प्रेमियों की तरह याद नहीं रखेगा, इज़ोल्ड। वह सिर्फ मेरी उस महान जीत को दर्ज करेगा जिसने वेलेरियस वंश के आखिरी गद्दारों और इस बाहरी सम्राट का सफाया कर दिया। तुम्हारी कब्र पर कोई फूल नहीं चढ़ाएगा।"

​इवान ने अंतिम वार करने के लिए अपनी पूरी शारीरिक और जादुई ताकत बटोरी। इज़ोल्ड की चेतना अब धीरे-धीरे उसे छोड़ रही थी। उसने हार मानकर अपनी आँखें बंद कर लीं और अपना सिर कैसियन की दिशा में झुका दिया। उसके मन में इस अंतिम क्षण में सिर्फ एक ही विचार था— कैसियन, अगर अगले जन्म में हम फिर मिलें, तो काश हम सिर्फ दो साधारण इंसान हों, जहाँ न कोई सिंहासन हो, न कोई शाप हो और न ही यह खूनी जादुई विरासत।

​हवा में तलवार के तेजी से चलने की वह भयानक सरसराहट गूँजी। मौत अब महज़ एक पल की दूरी पर थी, और इज़ोल्ड के पास खुद को या अपने सम्राट को बचाने के लिए अब कोई साया शेष नहीं बचा था।

​अध्याय 24: दो रूहों का संगम​भाग-1: इच्छाशक्ति की अंतिम पराकाष्ठा

​किले की छत पर बर्फीला तूफ़ान अब अपनी पूरी दहशत और वहशीपन पर था। बर्फीली हवाएँ किसी भूखी चुड़ैल की तरह चीख रही थीं, लेकिन इज़ोल्ड के लिए समय जैसे किसी जमे हुए दरिया की तरह ठहर गया था। उसका चेहरा किसी सफ़ेद संगमरमर के पत्थर की तरह सख्त और निस्तेज था, पर उसके भीतर भावनाओं का एक अनियंत्रित समंदर उबल रहा था। उसका शरीर भीतर से एक-एक कर टूट रहा था, उसकी हड्डियाँ उस जादुई बोझ से चटकने की कगार पर थीं। उसे साफ़ महसूस हो रहा था कि उसकी ऊर्जा का अंतिम दीया किसी भी क्षण बुझ सकता है।

​पर इज़ोल्ड ने अपनी पूरी इच्छाशक्ति को किसी अंतिम हथियार की तरह समेटा और इवान की आँखों में आँखें डालकर एक ऐसी झूठी, रहस्यमयी और डरावनी मुस्कान बिखेरी जिससे इवान—वह क्रूर हत्यारा—भी एक पल के लिए ठिठक गया। वह नहीं चाहती थी कि उसकी मरती हुई देह और उसकी कमज़ोरी इवान के गिरते हुए हौसले की ढाल बने।

​'मुझे रास्ता ढूँढना होगा... अभी नहीं, मैं अभी हार नहीं मान सकती। कैसियन के लिए नहीं, हमारे उस प्रेम के लिए जिसे दुनिया ने कभी स्वीकार नहीं किया,' उसने मन ही मन खुद को ललकारा। उसकी रगों में बहता लहू अब जमने लगा था, लेकिन उसका संकल्प अभी भी दहक रहा था।​भाग-2: स्पर्श और रक्त-बंधन की रूहानी पुकार

​इज़ोल्ड ने बड़ी ही सावधानी और स्थिरता के साथ अपना कांपता हुआ हाथ पीछे किया और कैसियन की बर्फ जैसी ठंडी पड़ती उंगलियों को अपनी हथेलियों की गर्माहट में समेट लिया। जैसे ही उनकी त्वचा ने एक-दूसरे को छुआ, इज़ोल्ड की रीढ़ की हड्डी में एक दिव्य बिजली सी दौड़ी। यह महज़ दो प्रेमियों का स्पर्श नहीं था; यह उस प्राचीन 'रक्त-बंधन' (Blood-Bond) का जादुई आह्वान था जो उनके बीच तब बना था जब कैसियन ने इज़ोल्ड को बचाने के लिए अपनी जीवन-शक्ति साझा की थी।

​इज़ोल्ड ने अपनी आँखें मूँद लीं। अब बाहर की दुनिया का शोर, इवान की हँसी और वह बर्फीला तूफ़ान उसके लिए खत्म हो चुका था। वह कैसियन के अचेत मन के अंधेरे और ठंडे गलियारों में एक ज्योति की तरह प्रवेश कर रही थी।

​उसने अपनी रूह की अंतिम गहराइयों से उसे पुकारा— "कैसियन... मेरी आवाज़ सुनो! अगर हमारा प्रेम दुनिया की नज़रों में शापित है, तो आज उस शाप को ही अपनी ढाल और अपनी तलवार बनने दो। उठो! मेरी बची-कुची शक्ति ले लो, मेरा रोम-रोम ले लो, मेरा शेष जीवन ले लो, लेकिन हमें इस मौत के सन्नाटे से बाहर निकालो। मैं तुम्हारे बिना इस खाली उजाले का क्या करूँगी, कैसियन?"​भाग-3: जादुई मिलन: साया और नीला प्रकाश

​तभी वह दृश्य उत्पन्न हुआ जो जादुई इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों (या शायद स्याह राख) से लिखा जाना था। कैसियन के सीने पर लगे उस गहरे घाव से एक तीव्र, अलौकिक नीली रोशनी फूट पड़ी। इज़ोल्ड की हथेलियों से काली जादुई धुंध निकलकर उस रोशनी में विलीन होने लगी।

​यह साया और प्रकाश का एक ऐसा अनूठा संगम था जिसने प्रकृति के नियमों को चुनौती दे दी। हवा का बहाव मुड़ गया और आसपास की बर्फ भाप बनकर उड़ने लगी। जैसे-जैसे इज़ोल्ड अपनी अंतिम जीवन-ऊर्जा कैसियन के भीतर प्रवाहित कर रही थी, उसका अपना चेहरा और भी पीला, और भी निस्तेज पड़ता जा रहा था। वह धीरे-धीरे खाली हो रही थी, एक सूखे हुए दरिया की तरह, लेकिन उसके निस्वार्थ स्पर्श से कैसियन का हाथ धीरे-धीरे गर्म होने लगा। कैसियन के हृदय की वह धड़कन, जो लगभग खामोश हो चुकी थी, अब एक युद्ध-नगाड़े की तरह पूरे किले की दीवारों और पहाड़ियों में गूँजने लगी।​भाग-4: सम्राट का महा-पुनर्जन्म

​इवान अभी भी अपनी जीत के नशे और उस सड़े हुए अहंकार में अंधा था। उसे लग रहा था कि इज़ोल्ड बस आखिरी साँसें गिन रही है और उसका 'नाटक' खत्म होने वाला है। उसने अपनी भारी तलवार, जिस पर वेलेरियस वंश का काला जादू चमक रहा था, दोनों हाथों से ऊपर उठाई।

​"बहुत हुआ यह रूहानी स्वांग, इज़ोल्ड! अब इतिहास के पन्ने पलटने का समय है! इस शापित सम्राट के साथ तुम भी राख बनकर मिट्टी में मिल जाओ!" इवान एक हिंसक उन्माद में चिल्लाया और उसने अपनी पूरी शारीरिक शक्ति झोंकते हुए तलवार इज़ोल्ड की गर्दन की ओर दागी।

​लेकिन इससे पहले कि तलवार इज़ोल्ड की कोमल त्वचा को छू पाती, कैसियन की आँखें एक भीषण बिजली की तरह खुल गईं। वे आँखें अब केवल एक इंसान की नहीं थीं; उनमें इज़ोल्ड की साया-शक्ति की कालिमा और कैसियन का अपना नीला शाही प्रकाश मिलकर एक भयानक, अलौकिक ज्वाला की तरह जल रहे थे।

​कैसियन ने लेटे हुए ही इज़ोल्ड का हाथ मज़बूती से थाम लिया। उन दोनों की संयुक्त रूहानी ऊर्जा से एक ऐसा भयंकर धमाका हुआ कि इवान की भारी तलवार तिनके की तरह हवा में उड़ गई और इवान खुद किसी सूखे पत्ते की तरह दस कदम पीछे जा गिरा। कैसियन अब धीरे-धीरे खड़ा हो रहा था—सीधा, अडिग और अजेय। उसके चारों ओर एक ऐसी काली-नीली आभा बन चुकी थी, जिसे देख अब साक्षात् मौत भी अपना रास्ता बदल ले।

​अध्याय 25: प्रतिशोध का अंतिम प्रहार​भाग 1: बिखरता हुआ अस्तित्व

​किले की उस ऊँची और ठंडी छत पर अब केवल मौत का भयावह सन्नाटा बचा था, जिसे कैसियन की भारी और क्रोधित साँसें किसी आरी की तरह चीर रही थीं। इज़ोल्ड, जो कुछ क्षण पहले एक साया-रानी की तरह गर्जी थी, अब पूरी तरह ढह चुकी थी। प्यास और भूख ने उसके गले को किसी सूखे पत्थर जैसा सख्त बना दिया था। पिछले कई हफ्तों की उस अमानवीय मानसिक प्रताड़ना, भाग-दौड़ और इवान के बिछाए जाल ने उसके नाज़ुक जिस्म की आखिरी बूंद तक निचोड़ ली थी।

​जब इज़ोल्ड ने अपनी आँखों के ठीक सामने कैसियन के सीने में वह काला खंजर उतरते देखा था, तो उसके भीतर की वह डोर टूट गई थी जिसने उसे अब तक इस बेरहम दुनिया से जोड़ रखा था। उसकी रूह का वह हिस्सा, जो प्रेम और विश्वास से बना था, अब हज़ारों कांच के टुकड़ों की तरह बिखर चुका था।

​उसने अपनी धुंधली पड़ती और भारी होती आँखों से देखा कि कैसियन धीरे-धीरे खड़ा हो रहा है। वह अब वह साधारण इंसान या घायल सम्राट नहीं लग रहा था—वह एक ऐसे अलौकिक अवतार में था जिसे साक्षात मौत भी छूने से कतरा रही थी। इज़ोल्ड के पास अब उसे पुकारने की, उसका नाम लेने की भी शक्ति शेष नहीं बची थी। उसने बस अपनी कांपती हुई, नीली पड़ती उंगलियों से एक अंतिम बार कैसियन की गर्म खाल को छुआ। उसका स्पर्श ऐसा था जैसे कोई आखिरी विदाई दे रहा हो। स्पर्श करते ही इज़ोल्ड की आँखें मुँदने लगीं और उसका सिर एक ओर निष्प्राण होकर लुढ़क गया।​भाग 2: साया-सम्राट का रौद्र उदय

​इज़ोल्ड की दी हुई वह 'रूहानी ऊर्जा' कैसियन की धमनियों में खौलते हुए लावे की तरह दौड़ रही थी। उसकी रगों में एक ऐसा संगीत गूँज रहा था जो विनाश का आह्वान कर रहा था। कैसियन ने अपनी 'शैडो-ब्लेड' को मज़बूती से थाम लिया। तलवार की धार से अब केवल काला धुआँ नहीं निकल रहा था, बल्कि उसमें से नीली और काली लपटें एक साथ मिलकर तांडव कर रही थीं।

​कैसियन की आँखों में वह सम्राट लौट आया था जिसकी एक हुंकार से कभी उत्तरी पहाड़ काँपते थे और जिसकी तलवार की चमक दुश्मन की सेनाओं को घुटने टेकने पर मजबूर कर देती थी।

​इवान के चेहरे से वह घृणित और वीभत्स हँसी पल भर में गायब हो गई। उसका बरसों का अहंकार अब शुद्ध, जम जाने वाले खौफ में बदल चुका था। वह लड़खड़ाते हुए पीछे हटने लगा, उसके हाथ कांप रहे थे। "नहीं... यह असंभव है! तुम मर चुके थे! मैंने खुद अपनी आँखों से वह शापित खंजर तुम्हारे दिल के आर-पार किया था! कोई भी नश्वर इस वार से नहीं बच सकता!"

​"मैं मर चुका था, इवान," कैसियन की आवाज़ ऐसी थी जैसे पाताल की किसी गहरी और अनंत कब्र से निकल रही हो। उसकी हर आहट के साथ किले के पत्थर चटक रहे थे और बर्फ भाप बनकर उड़ रही थी। "लेकिन तुमने मेरी उस परी को रुलाया है जिसने अपनी रूह मेरे नाम कर दी थी। तुमने उसे भूखा रखा, उसे अंधेरे कमरों में कैद किया, और अपनी गंदी नफरत की आग में झोंककर उसे मौत की कगार पर पहुँचाया। इसके लिए इस पूरी कायनात का कोई भी देवता तुम्हें माफ नहीं करेगा, और मैं... मैं तो बिल्कुल नहीं।"​भाग 3: गद्दार का निर्णायक अंत

​इवान ने अपनी पूरी जादुई ताकत बटोरकर एक आखिरी हमला किया। उसने हवा में मौजूद नमी को काले बर्फीले कांटों में बदल दिया और उन्हें कैसियन की ओर दागा। लेकिन कैसियन अब एक अभेद्य जादुई दीवार बन चुका था। कैसियन ने एक ही झटके में इवान के वार को हवा में उड़ा दिया और बिजली की गति से आगे बढ़ा।

​उसने अपनी तलवार के एक ही प्रचंड वार से इवान की जादुई तलवार के दो टुकड़े कर दिए। लोहे के टकराने की वह आवाज़ पूरे साम्राज्य में गूँज गई। इवान अब निहत्था था, लहूलुहान होकर घुटनों के बल गिरा हुआ था। कैसियन की जलती हुई तलवार की नोक अब इवान के सीने के ठीक ऊपर थी, जहाँ उसका काला और धूर्त दिल धड़क रहा था।

​इवान अब थर-थर कांप रहा था। मौत को अपनी गर्दन पर महसूस करते ही उसकी सारी कृत्रिम बहादुरी बह गई। "रुको! कैसियन... दया करो! मैं तुम्हारा भाई जैसा हूँ... मैं इज़ोल्ड का सगा खून हूँ! अगर तुम मुझे मारोगे तो इज़ोल्ड तुम्हें कभी माफ नहीं करेगी!"

​"तुम भाई नहीं, मानवता के नाम पर एक अमिट कलंक हो," कैसियन ने गरजते हुए कहा, और उसकी आवाज़ में प्रतिशोध की चरम सीमा थी। "इज़ोल्ड ने तुम्हें बचाने के लिए मुझसे लड़ाई की थी, उसने अपनी सुरक्षा की चिंता किए बिना तुम्हें माफ करने की भीख माँगी थी, और तुमने उसी की उस पवित्र वफादारी को अपनी बिसात का मोहरा बनाया। तुम्हारी साँसें इस धरती पर अब एक बोझ हैं।"

​एक ज़ोरदार और बिजली जैसे वार के साथ, कैसियन ने इवान का अंत कर दिया। इवान की वह घमंडी और ज़हरीली हँसी हमेशा के लिए खामोश हो गई। उसका शरीर बेजान होकर उस ठंडी बर्फ पर गिर पड़ा, जिससे उसके अपने पापों का अंत हुआ।​भाग 4: युद्ध के बाद की वीरानी और महा-प्रयाण

​जैसे ही इवान का काला साया मिटा, कैसियन की शक्ति का वह बवंडर भी धीरे-धीरे थम गया। उसने अपनी खून से सनी तलवार एक ओर फेंक दी और पागलों की तरह इज़ोल्ड की ओर मुड़ा। उसने उसे अपनी बाहों में उठा लिया। इज़ोल्ड का शरीर अब बर्फ की तरह ठंडा पड़ रहा था और उसकी साँसें इतनी धीमी थीं कि वे महसूस भी नहीं हो रही थीं।

​"इज़ोल्ड! इज़ोल्ड, देखो... सब खत्म हो गया। ज़रा देखो मेरी तरफ, तुम्हारा गुनहगार मर गया! इज़ोल्ड, आँखें खोलो!" वह किसी बच्चे की तरह बिलख रहा था।

​उसके गर्म और नम आँसू इज़ोल्ड के सूखे और नीले पड़ते होंठों पर गिर रहे थे। उसे अब डरावना अहसास हुआ कि उसने प्रतिशोध तो ले लिया, लेकिन इज़ोल्ड को बचाने के लिए अब उसके पास समय किसी रेत की तरह हाथ से फिसल रहा था। महल की वह शान-ओ-शौकत, वह ताज, वह जीत—सब कुछ उसे अब मिट्टी के समान लग रहा था।

​कैसियन ने एक अंतिम निर्णय लिया। उसने इज़ोल्ड को अपने सीने से लगाया और गिरती बर्फ के बीच उस अभिशप्त किले से बाहर निकलने लगा। वह राजधानी की ओर नहीं गया, क्योंकि वह जानता था कि वहाँ का कोई हकीम इज़ोल्ड को वापस नहीं ला सकता। वह घने जंगलों और उन अनजान जादुई पहाड़ियों की ओर चल दिया जहाँ जीवन और मृत्यु के बीच की लकीर धुंधली हो जाती है।

​अंतिम पंक्तियाँ:

बर्फ गिरती रही, और कैसियन के कदमों के निशान धीरे-धीरे मिटते गए। इज़ोल्ड की साँसों की डोर बहुत कच्ची थी, और कैसियन का संकल्प बहुत गहरा। 'शापित प्रेम की यह छाया' अभी मिटी नहीं थी, यह तो बस एक नए और भी भयानक अंधेरे की शुरुआत थी।

​सीजन 1 का समापन: एक अधूरा इंतज़ाम

​"कैसियन ने इज़ोल्ड को अपनी बाहों में और कस लिया, जैसे वह उसे इस दुनिया और अगली दुनिया के बीच के शून्य से खींच लाना चाहता हो। उसकी आँखों के आँसू इज़ोल्ड के ठंडे चेहरे पर गिरकर जम रहे थे। प्रतिशोध पूरा हो चुका था, इवान का अंत हो चुका था, लेकिन जीत की यह कीमत... क्या वह इसे चुका पाएगा?

​महल की गिरती हुई दीवारों के बीच, कैसियन ने एक ऐसी कसम खाई जो वक्त और नियति की सीमाओं को तोड़ देने वाली थी। इज़ोल्ड की रुकी हुई धड़कनें और कैसियन का टूटता हुआ दिल—यह अंत नहीं था। यह तो बस एक ऐसी दास्तां की शुरुआत थी, जिसका इंतज़ाम अभी अधूरा था।"

​— समाप्त —

​आने वाला अगला सीजन:​'बेहद: एक अधूरा इंतज़ाम'