Vedanta 2.0 - 25 in Hindi Spiritual Stories by Vedanta Two Agyat Agyani books and stories PDF | वेदान्त 2.0 - भाग 25

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वेदान्त 2.0 - भाग 25

वेदान्त 2.0


मात्र एक दर्शन है — समझ।
इसके अतिरिक्त कुछ नहीं।
यह
धर्म नहीं है,
संस्था नहीं है,
गुरु–समुदाय नहीं है,
भगवान, देश, जाति, पंथ नहीं है।
यह
कोई साधना–उपाय नहीं,
कोई मार्ग नहीं,
कोई फीस नहीं।
यह केवल समझ है।


✦ समझ का नियम ✦


समझ मिलते ही
कचरा गिराया नहीं जाता —
अपने आप गिर जाता है।
लेकिन
यदि तुम्हें अपनी गंदगी पर ही विश्वास है,
तो बात यहीं छोड़ दो।
फिर
अपनी गंदगी से जीतकर दिखाओ।
क्योंकि
यदि समझ से ही
योग, ज्ञान, साधना, गुरु, धर्म, विकास
सब मिल रहा है —
तो फिर
इतने उपाय क्यों?
इतना नाटक क्यों?


✦ सबसे बड़ा अंधविश्वास ✦


यह कहना कि —
“सब मेरे जैसे हैं, इसलिए मैं उन्हीं के साथ चलूँगा”
सबसे बड़ा अंधविश्वास है।
भीड़ के पीछे चलना
सत्य नहीं —
नर्क है।
तुम्हारे पास
शिव–नेत्र हैं।
सब कुछ है।
बस
समझ की ज़रूरत है।
और समझ
कहीं खरीदी नहीं जाती —
वह भीतर है।


✦ गुरु और आत्मा ✦


जो तुम्हारे भीतर समझ है —
वही गुरु है।
उस गुरु को नकारकर
पाखंड की भीड़ की शरण क्यों?
यदि तुम्हारे भीतर
आत्मा और ईश्वर नहीं हैं —
तो तुम जीवित कैसे हो?
कौन-सा धर्म,
कौन-सा गुरु
तुम्हें
प्राण, श्वास और भोजन दे रहा है?
यदि यह पाखंड नहीं,
तो क्या तुम्हारे प्राण
धर्म से निकलते हैं?


✦ धर्म का नशा ✦


आज का धर्म
धर्म नहीं —
अफीम है।
एक नशा,
जिसमें
न आत्मा है,
न आनंद।
यह
धर्म–गुरु–पाखंड का खेल है,
जिसमें
सबको नशा मिलता है।
और उस नशे के लिए
लोग
अपना पूरा जीवन दाँव पर लगा देते हैं,
सिर्फ इसलिए कि
उन्हें
दानवीर होने का
अहंकार मिल जाए।
यह सत्य नहीं है।


✦ सत्य का स्वरूप ✦

 

सत्य
तुम्हारे भीतर है।
उसके लिए
किसी प्रमाण की ज़रूरत नहीं।
प्रमाण झूठ को चाहिए
तुम 99% झूठ जी लो —
कोई समस्या नहीं।
लेकिन
धर्म और आत्मा को झूठ मत बनाओ।
यही धर्म है।


✦ भीड़ बनाम सत्य ✦


भीड़
कभी सत्य नहीं होती।
भीड़
डर से खड़ी होती है,
लालच से इकट्ठा होती है।
50 करोड़ लोग
कुंभ में आए —
यह सत्य का प्रमाण नहीं।
यह
दुःख की संख्या है,
बंधन की संख्या है।
कोई
धन्यवाद देने नहीं आया —
सब
पुण्य माँगने,
शांति माँगने,
गंदगी से मुक्ति माँगने आए।
यह
स्वास्थ्य नहीं —
बीमारी है।
लेकिन
तुम
बीमारी को
सत्य कह रहे हो।


✦ अंतिम वाक्य ✦


राजनीति और विज्ञान
भीड़ को मूर्ख बना सकते हैं —
लेकिन
वेदान्त को नहीं।
इसलिए
धर्म को बिज़नेस मत बनाओ।
धर्म के नाम पर
बलि, भोग, हिंसा और झूठ
बंद करो।
यह सब
तुम भी जानते हो।
लेकिन
अहंकार, बुद्धि और डर
तुम्हें
सत्य स्वीकारने नहीं देते।
और फिर
तुम
भीड़ को
सत्य कहने लगते हो।
यही
अज्ञान की अंतिम परिभाषा है।

 

*********************************

 

 

अभाव का भी मूल्य होता है।

 


जो अनुपस्थित है, वही सबसे ज़्यादा मूल्यवान होता है।
हवा दिखती नहीं, पर जीवन उसी से चलता है।
जल सर्वत्र हो तो उसका मूल्य गिर जाता है;
सूखा पड़े तो एक घूँट अमृत हो जाता है।
यही नियम धर्म पर लागू होता है।
आज कोई धार्मिक नहीं है —
इसलिए धर्म मूल्यवान है।
यदि सच में 2–4 भी बुद्ध पुरुष प्रकट हो जाएँ,
तो भीड़ की सारी नक़ली आध्यात्मिकता ढह जाएगी।
क्योंकि तब सत्य दुर्लभ नहीं रहेगा,
और जो दुर्लभ नहीं — उसकी दुकान नहीं चलती।
भीड़ इसलिए है क्योंकि सत्य नहीं मिलता।
पुण्य इसलिए बिकता है क्योंकि
कहा जाता है — पुण्य मिलेगा तो सत्य मिलेगा।
और सत्य पाने की यह भीड़
करोड़ों में है।
क्योंकि कहा जाता है—
यात्रा से मिलेगा
साधना से मिलेगा
मार्ग से मिलेगा
त्याग से मिलेगा
कर्मकांड से मिलेगा
सेवा से मिलेगा
लेकिन सत्य कभी मिला ही नहीं।
सत्य किसी विधि से नहीं मिलता,
क्योंकि वह पहले से है।
आत्मा कोई वस्तु नहीं
जो बाहर से लाई जाए।
वह तुम्हारे होने का कारण है।
जो पहले से है, उसे पाया नहीं जाता —
उसे उघाड़ा जाता है।
समस्या यह नहीं कि आत्मा नहीं है।
समस्या यह है कि—
अहंकार
अज्ञान
मान्यता
धारणा
अंधविश्वास
पाखंड
इनकी मोटी परतें
उसे ढँके हुए हैं।
जैसे ज़मीन के नीचे पत्थर है —
पत्थर को कुछ करना नहीं पड़ता।
बस मिट्टी हटानी पड़ती है।
जितनी मिट्टी हटेगी,
पत्थर उतना प्रकट होगा।
लेकिन धर्म ने क्या किया?
मिट्टी हटाने के बजाय
ऊपर और मिट्टी डाल दी।
तप, त्याग, भूख, प्यास, कष्ट —
इन सबका प्रदर्शन किया गया
ताकि लोगों की नज़र
भीतर के सत्य से हटकर
परिश्रम के तमाशे पर चली जाए।
और फिर कहा गया—
“यही ईश्वर है,
यही आत्मा है,
यही ब्रह्मलीन है।”
यह झूठ है।
आत्मा छुपी नहीं है।
ईश्वर दूर नहीं है।
ब्रह्म कहीं गया नहीं।
जो हटाना है वह हटाओ— धर्म का कचरा,
पाखंड का वायरस।
बस।
कोई साधना नहीं चाहिए,
कोई मार्ग नहीं चाहिए,
कोई गुरु नहीं चाहिए।
सत्य उत्पन्न नहीं होता।
सत्य प्रकट होता है।
और यही बात
यदि धर्म साफ़-साफ़ कह दे —
तो उसकी सारी दुकानें
एक दिन में बंद हो जाएँ।
यही कारण है
कि सत्य को कभी स्पष्ट नहीं किया गया।
— 🙏🌸 —
A̳ ̳P̳h̳i̳l̳o̳s̳o̳p̳h̳y̳ ̳t̳h̳a̳t̳ ̳T̳r̳a̳n̳s̳f̳o̳r̳m̳s̳ ̳S̳p̳i̳r̳i̳t̳u̳a̳l̳i̳t̳y̳ ̳i̳n̳t̳o̳ ̳a̳ ̳S̳i̳m̳p̳l̳e̳ ̳S̳c̳i̳e̳n̳c̳e̳
𝕍𝕖𝕕𝕒𝕟𝕥𝕒 𝟚.𝟘 𝔸𝕘𝕪𝕒𝕥 𝔸𝕘𝕪𝕒𝕟𝕚