Pahli Mulakat - 1 in Hindi Short Stories by puja books and stories PDF | पहली मुलाक़ात - 1

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पहली मुलाक़ात - 1

Apisode -1)बारिश हो रही थी काव्य कॉलेज के बाहर खड़ी थी🧍‍♀️, गाड़ी खराब हो गई थी 🚕!तभी आरव नें पुरानी साइकिल रोक🚲 !"अगर बुरा ना मानो....तो मैं छोड़ दूं ? " आराम ने धीरे से पूछा ! काव्या ने पहली बार किसी अनजान पर भरोसा किया! वे मुस्कुराई....😊 और उसी मुस्कान ने अरब की जिंदगी बदल दी !😇 उसे दिन किसी ने नहीं सोचा था कि ये मुलाकात 🫂 एक लंबे दर्द की शुरुआत है😭

Apisode-2) नजदीकियां                                          कॉलेज में मुलाकात बढ़ने लगी! हंसी,बातें,खामोश एहसास ! लेकिन काव्य जानती थी... कि उसका प्यार आसान नहीं!                Apisode-3) सख्त पिता                                                     विक्रम को सच्चाई पता चलती है! वों काव्य को चेतावनी देता है----" ये रिश्ता यहीं खत्म हो जाना चाहिए!"                         Apisode-4) मजबूरी                                                          काव्य रोती है, आरव से दूरी बना लेती है! आरव समझ नहीं पता है --- गलती उसकी क्या थी?                                              Apisode -5) प्यार बदनाम परिवार                                     आरव की मां कहती है--- अगर उसका घर बर्बाद ना हो, तो तू पीछे हट जा बेटा! "                                                               apisode-6) अलग होने का फैसला  😭                                  आरव पूरी रात सो नही पाया! काव्या खामोसी उसे खाई जा रही थी! सुबह होते ही वो काव्या से मिलने पंहुचा! "अगर मुझसे कोई गलती हुईं हो तो बता दो...." आरव  की आवाज कॉप रहीं थीं! काव्या की आखों मे आँशु थे, लेकीन आवाज़ सख्त था! " अब हमें नहीं मिलाना चाहिए,आरव!" आरव शांत रह गया! " "क्यों?कल तक तो सब ठीक था.... " काव्या नें मुंह फेर लिया! "कुछ रिश्ते चाह कर भी नहीं निभाए जाते!" वों चली गई! पीछे ऱह गया आरव.... पहली बार पूरा टुटा हुआ!                             Apisode-7) माँ का दर्द 🤱                          

    आरव घर  लौटा तो चुप था! माँ नें सब समझ लिया! " प्यार आसान नहीं होता बेटा, " माँ नें सिर हिलाया,"  लेकिन सच्ची तो ख़त्म भी नही होता!"                                                               Apisode-8)  पिता का दवाब                                                   विक्रम काव्या से कहता है---- " मैंने तुम्हारे लिए रिस्ता तय कर लिया है!"  काव्या का मानो सब उजर गया हो!😭                 apisode -9) साहनाई की खबर 💔                                    आरव चाय की दुकान पर बैठा था, अखबार में नजर गई...." विक्रम जी की बेटी  काव्या की शादी तय "  उसके हाथ कांपने लगे दिल जैसे वही रुक गया! "ये झूठ है...ये नहीं हो सकता... वों बुदबुढ़ाया! उसी वक्त फोन बजा! काव्या का मैसेज था... "माफ करना... मै मजबूर हूं!" आरव की आंखों से आंसू गिर पड़े! उसने पहली बार खुद को हारा हुआ महसूस किया!                            apisode-10) काव्या की सच्चीई                                             शहनाई की तैयारी चल रही थी! काव्या आईने के सामने खड़ी थी--- हाथों में मेहंदी,लेकिन दिल में सिर्फ दर्द! माँ नें पूछा ---- "खुश तो है ना? " काव्या ने हल्की मुस्कान दी.... लेकिन आखों नें धोखा दे दिया! " माँ नें कहाँ.." कुछ खुशियां मजबूरी में ओढनी पड़ती है!"                                                                         Apisode-11) आरव का फैसला 💔                           आरव नें माँ से कहाँ ---- मैं यहाँ नहीं ऱह सकता!" माँ चुप रहीं! फिर बोली....   भागने नें दर्द कम नहीं होता बेटा., लेकिन कभी कभी दुरी जरुरी होती है!, " आरव नें छोटा सा बैग उठाया! शहर छोड़ने का फैसला कर लिया!                                                  Apisode-12) अधूरी बिदाई 💔                                           बारिश हो रहीं थीं! बस स्टेन पर आरव खड़ा था! तभी भीड़ मैं काव्या दिखी!  दोनों की नजरे मिली!                                                अगले apisode के liye like, फॉलो karo👍