Majburi ka Souda - 3 in Hindi Thriller by Abantika books and stories PDF | मजबूरी का सौदा: एक अनकही शर्त - 3

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मजबूरी का सौदा: एक अनकही शर्त - 3

अध्याय 3 : ज़िंदा तस्वीर का सच


​कमरे में सन्नाटा इतना गहरा था कि अंजलि को अपनी ही धड़कनों की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी। वह दरवाज़े को पीट रही थी, लेकिन बाहर से कोई जवाब नहीं आ रहा था। हार मानकर वह पलटी और उसकी नज़र फिर उस व्हीलचेयर पर बैठी लड़की पर पड़ी।


​"सुनिए... आप कौन हैं? क्या आप ठीक हैं?" अंजलि ने कांपते हुए हाथ उस लड़की के कंधे पर रखा।


​जैसे ही उसने छुआ, अंजलि के रोंगटे खड़े हो गए। उस लड़की का शरीर बर्फ़ जैसा ठंडा था। जैसे ही अंजलि ने उसे थोड़ा घुमाया, उसे एहसास हुआ कि वह कोई इंसान नहीं, बल्कि एक आदमकद मोम की मूर्ति (Wax Statue) थी!
​लेकिन वह मूर्ति इतनी असली लग रही थी कि कोई भी धोखा खा जाए। सबसे डरावनी बात यह थी कि उस मूर्ति ने वही कपड़े पहने थे जो अंजलि ने उस दिन पहने थे जब वह पहली बार रुद्र से मिली थी।


​"यह सब क्या है? रुद्र ने मेरी जैसी मूर्ति क्यों बना रखी है?" अंजलि खुद से बड़बड़ाई।


​तभी उसकी नज़र पास पड़ी एक डायरी पर पड़ी। अंजलि ने पन्ने पलटे तो उसके होश उड़ गए। डायरी में अंजलि की बचपन से लेकर अब तक की ढेरों तस्वीरें थीं। वह कहाँ जाती है, क्या खाती है, किससे मिलती है— रुद्र के पास हर चीज़ का हिसाब था।


​डायरी के आखिरी पन्ने पर लिखा था:
"सौदा पूरा हुआ। अंजलि को यहाँ लाना सिर्फ शुरुआत है। उसे अहसास भी नहीं है कि वह इस घर में अपनी माँ को बचाने नहीं, बल्कि अपनी मौत के करीब आई है। उसे वही जगह लेनी होगी जो 'उसने' खाली छोड़ी थी।"
​अभी अंजलि यह पढ़ ही रही थी कि कमरे का दरवाज़ा धीरे से खुला। अंधेरे में रुद्र की लंबी परछाईं अंदर आई। उसके हाथ में एक इंजेक्शन था।


​"देख लिया तुमने?" रुद्र की आवाज़ ठंडी और डरावनी थी। "मैं पिछले पाँच सालों से तुम्हारा इंतज़ार कर रहा था अंजलि। तुम सिर्फ एक लड़की नहीं हो, तुम मेरे उस अधूरे ख्वाब का आखिरी हिस्सा हो जिसे दुनिया 'रुही' के नाम से जानती थी।"
​अंजलि पीछे हटने लगी। "कौन रुही? मैं किसी रुही को नहीं जानती! मुझे यहाँ से जाने दो, वरना मैं शोर मचा दूँगी!"
​रुद्र खिलखिलाकर हंसा, एक ऐसी हंसी जो किसी शैतान की हो सकती थी। "शोर? इस बंगले की दीवारें चीखें पी जाती हैं अंजलि। और वैसे भी, दुनिया की नज़र में तुम अभी भी अपने घर पर सो रही हो। यहाँ तो सिर्फ तुम्हारी एक 'मजबूर परछाई' आई है।"

​रुद्र इंजेक्शन लेकर उसकी तरफ बढ़ा। अंजलि ने पास पड़ा एक फूलदान उठाया और उसे मारने की कोशिश की, लेकिन रुद्र ने उसकी कलाई पकड़कर मरोड़ दी।
​"आज रात तुम्हें वो सच पता चलेगा जिसे जानकर तुम खुद अपनी जान की भीख मांगोगी," रुद्र ने फुसफुसाते हुए कहा और अंजलि की गर्दन के पास इंजेक्शन की सुई चुभा दी।
​अंजलि की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा। गिरते-गिरते उसने देखा कि रुद्र उस मोम की मूर्ति को गले लगा रहा था और रो रहा था।


​"रुही कौन थी? और रुद्र अंजलि के साथ क्या करने वाला है? क्या अंजलि इस मौत के जाल से बच पाएगी? कहानी अब एक खतरनाक मोड़ ले चुकी है! अगले अध्याय के लिए बने रहें और अपनी राय कमेंट में ज़रूर लिखें।"


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