Vulture - 8 in Hindi Magazine by Ravi Bhanushali books and stories PDF | Vulture - 8

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Vulture - 8

शीर्षक: वल्चर: अनंत महासंग्राम — रक्तवर्षा का युग
[दृश्य 1 – युद्ध का आह्वान]
आकाश में करोड़ों दरारें खुलती हैं। हर दरार से अलग-अलग लोकों की सेनाएँ उतरती हैं। एक ओर एक करोड़ विलन, दूसरी ओर मल्टीवर्स से आए एक करोड़ नायक। धरती का क्षितिज काले बादलों और अग्नि-वर्षा से ढक जाता है। शहर मैदान बन चुका है।
वल्चर (आकाश में गूंजती आवाज़):
“आज कोई ब्रह्मांड सुरक्षित नहीं रहेगा…
आज केवल हिम्मत बचेगी!”
हज़ारों गिद्धों के झुंड आकाश को ढँक लेते हैं। उनकी पंखों की फड़फड़ाहट युद्ध का नगाड़ा बन जाती है।
महायुद्ध की शुरुआत
[दृश्य 2 – महासेनाओं का टकराव]
धरती काँप उठती है। बिजली, अग्नि, समय-तरंगें, आकाशीय शस्त्र—सब एक साथ फूट पड़ते हैं। नायक और विलन करोड़ों की संख्या में भिड़ते हैं। पर्वत ढहते हैं, नदियाँ दिशा बदलती हैं।
नायक-सेनापति:
“आज अगर हम रुके… तो हर दुनिया रुकेगी!”
विलन-सम्राट:
“हर दुनिया रुकेगी… और शून्य चलेगा!”
मीरा का बलिदान
[दृश्य 3 – मीरा का अंतिम मोर्चा]
मीरा घायलों को सुरक्षित निकाल रही है। अचानक ब्लडटाइड और नेदरक्वीन की संयुक्त शक्ति से एक रक्त-भंवर उठता है। मीरा उस भंवर में फँस जाती है।
वल्चर (दूर से चीख):
“मीरा! पीछे हटो—!”
मीरा पीछे मुड़कर मुस्कराती है, उसकी आँखों में आँसू और साहस एक साथ चमकते हैं।
मीरा:
“अगर आज किसी एक दिल की कीमत… लाखों जानें बचा सकती है…
तो अर्जुन, मुझे जाने देना।”
वल्चर गोता लगाकर उसे पकड़ने बढ़ता है, पर भंवर और तेज़ हो जाता है। मीरा वल्चर की ओर हाथ बढ़ाती है।
मीरा (काँपती आवाज़ में):
“उड़ते रहना… मेरे लिए भी।”
भंवर विस्फोट में बदलता है। प्रकाश और रक्त की लहर फैलती है। जब धुआँ छँटता है—मीरा नहीं होती। केवल उसका टूटा कंगन ज़मीन पर गिरा होता है।
वल्चर का प्रलय-क्रोध
[दृश्य 4 – मौन से तूफ़ान]
वल्चर हवा में स्थिर हो जाता है। उसकी आँखें सूनी हैं। फिर अचानक आकाश काला पड़ जाता है। गिद्धों का महासमूह उसकी ओर खिंच आता है।
वल्चर (भरे गले से फुसफुसाता है):
“दुनिया ने मेरा दिल छीन लिया…
अब मैं दुनिया से उसका हिसाब लूँगा।”
उसके पंख रक्त-प्रकाश से चमकते हैं। वह धरती पर प्रहार करता है। एक ही वार में सैकड़ों विलन उछलकर गिरते हैं। आकाश में ध्वनि-विस्फोट होता है।
वल्चर (गर्जना):
“आज कोई छाया नहीं बचेगी!
आज हर अंधेरा जलेगा!”
गिद्धों का महासंग्राम
[दृश्य 5 – आकाश का नरसंहार]
हज़ारों गिद्ध विलनों पर टूट पड़ते हैं। आकाश में पंखों का तूफ़ान बनता है। विलन सेनाएँ टूटने लगती हैं। नायक सेना वल्चर के पीछे-पीछे धावा बोलती है।
नायक-अग्निवीर:
“यह क्रोध नहीं… यह न्याय की आग है!”
शून्यसिंह की वापसी
[दृश्य 6 – अराजकता का सम्राट]
शून्यसिंह पुनः प्रकट होता है। उसके चारों ओर शून्य-तरंगें घूम रही हैं।
शून्यसिंह:
“प्रेम मर गया… अब संतुलन आसान है।”
वल्चर (लहूलुहान, दहाड़ते हुए):
“तूने संतुलन की बात की…
मैं तुझे इंसानियत का मतलब सिखाऊँगा!”
दोनों आकाश में टकराते हैं। टकराव से मल्टीवर्स की दीवारें काँप उठती हैं। नायक और विलन दूर फेंके जाते हैं।
अंतिम टकराव और युग का मोड़
[दृश्य 7 – अनंत प्रहार]
वल्चर अपनी सारी शक्ति समेटता है—प्रेम की स्मृति, मीरा का नाम, टूटे कंगन की चमक। वह शून्यसिंह पर अंतिम गोता लगाता है। विस्फोट से समय कुछ क्षण के लिए रुक जाता है। शून्यसिंह पीछे हटता है, घायल होकर दरार में गिर जाता है।
शून्यसिंह (गूँजती आवाज़):
“युद्ध खत्म नहीं हुआ, वल्चर…
बस अगला अध्याय शुरू हुआ है…”
विलाप और शपथ
[दृश्य 8 – युद्ध के बाद]
मैदान खामोश है। करोड़ों नायक और विलन राख में बदल चुके हैं। वल्चर ज़मीन पर बैठकर मीरा का टूटा कंगन उठाता है।
वल्चर (धीरे से):
“मैंने दुनिया बचाई…
पर अपनी दुनिया खो दी।”
वह आकाश की ओर देखता है। गिद्धों का झुंड धीरे-धीरे शांत होता है।
वल्चर (दृढ़ शपथ):
“मीरा की मौत व्यर्थ नहीं जाएगी।
अब हर ब्रह्मांड मेरी उड़ान में उसकी साँस सुनेगा।
जब तक अंधेरा बचेगा…
वल्चर युद्ध करता रहेगा।”
आकाश में सूर्योदय होता है—लालिमा के साथ।
युद्ध का युग खत्म, पर प्रतिशोध और संरक्षण का नया युग जन्म ले चुका है।