The one whom the heart desired - 30 in Hindi Love Stories by R B Chavda books and stories PDF | दिल ने जिसे चाहा - 30

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दिल ने जिसे चाहा - 30

शादी का venue रोशनी से जगमगा रहा था।चारों तरफ झालरों की चमक, फूलों की खुशबू, और शहनाई की धीमी-सी मधुर धुन वातावरण में घुली हुई थी। लोग हँसते-बोलते इधर-उधर घूम रहे थे, बच्चे भाग रहे थे, रिश्तेदार फोटो खिंचवा रहे थे…

लेकिन इस शोर और रौनक के बीच… दो दिल ऐसे भी थे, जो सिर्फ एक-दूसरे को ढूँढ रहे थे।

Rushali अपनी माँ के साथ venue पर पहुँची।आज उसने खास तौर पर navy blue रंग का लहँगा पहना था—Mayur sir का पसंदीदा रंग।

खुले straight बाल उसकी पीठ पर हल्के-हल्के गिर रहे थे। हाथों की चूड़ियाँ चलते समय धीमी-सी आवाज़ कर रही थीं, और पैरों की पायल जैसे हर कदम पर कोई धुन छेड़ रही थी। चेहरे पर हल्का-सा मेकअप, लेकिन आँखों में गहराई… इंतज़ार की गहराई।

आज वो सच में किसी दुल्हन से कम नहीं लग रही थी।

कभी-कभी चाहतें इंसान को सजाती नहीं,
बस निखार देती है…

उसी समय दूसरी ओर से Mayur sir भी venue में दाखिल हुए।
White रंग की शेरवानी… वही सादगी, वही शांत चेहरा… लेकिन आँखों में आज बेचैनी थी।

उनकी नज़र जैसे ही Rushali पर पड़ी… वो ठिठक गए।

“उसने… मेरा पसंदीदा रंग पहना है…”
दिल ने धीरे से कहा।

उधर Rushali की नज़र भी उन पर पड़ी—
“आज इन्होंने white पहना है… मेरा पसंदीदा रंग…”

दोनों बस देखते रहे।

कुछ पल ऐसे होते हैं
जहाँ शब्दों की ज़रूरत नहीं होती…
दिल ही दिल से बात कर लेते हैं।

उसी समय किसी ने आवाज़ दी—
“Rushali… Prisha बुला रही है…”

वो अंदर चली गई… और Mayur sir बारातियों के बीच चले गए… लेकिन दोनों ने जाते-जाते एक बार पलटकर ज़रूर देखा।

Prisha ने Rushali को देखते ही हँसते हुए कहा—“इतना सजना नहीं था… कोई मुझे देखेगा ही नहीं, सब तुझे ही देखेंगे!

”Rushali मुस्कुराई—
“आज की दुल्हन तू है, मैं नहीं…”

दोनों हँस पड़ीं।

थोड़ी देर बाद सब लड़कियाँ छत पर बारात देखने गईं।ढोल की आवाज़ गूँज रही थी… लोग नाच रहे थे… और Vivan घोड़ी पर बहुत अच्छे लग रहे थे।

Prisha मुस्कुराकर बोली—
“आज तो मेरा दूल्हा बहुत जच रहा है… finally Mr Perfect मुझे लेने आ गया…”

Rushali ने उसकी आँखों की चमक देखी… और दिल से खुश हुई।

फिर स्वागत की रस्म हुई… गाना बजा… Prisha ने dance करते हुए Vivan का स्वागत किया और उसका हाथ पकड़कर मंडप तक ले गई।

चारों तरफ खुशियाँ थीं…
लेकिन एक कोना ऐसा था जहाँ दो लोग अब भी इंतज़ार कर रहे थे।

भीड़ थोड़ी कम हुई।
Rushali एक तरफ खड़ी थी… Mayur sir दूसरी तरफ।

Mayur sir धीरे-धीरे उसके पास आए।

“कैसी हो… Rushali…?”

बस इतना सुनते ही Rushali की आँखें भर आईं।

Mayur sir घबरा गए—
“अरे… क्या हुआ? मैंने कुछ गलत कह दिया क्या?”

Rushali ने सिर हिलाया—
“नहीं… बस… पाँच साल बाद आपकी आवाज़ सुन रही हूँ… आपके मुँह से अपना नाम…”

उसकी आवाज़ भर गई।

Mayur sir ने हाथ बढ़ाया… आँसू पोंछने के लिए… लेकिन फिर रुक गए।

“Please रो मत… और अगर रोना ही है… तो मुझे भी कंपनी देने के लिए साथ में रोना पड़ेगा…”

Rushali हँस पड़ी… और Mayur sir भी मुस्कुरा दिए।

Mayur sir बोले—
“DM madam बन गई हो… मुझे तुम पर बहुत गर्व है… मुझे पता था तुम एक दिन अपने सपने ज़रूर पूरे करोगी…”

फिर उनकी आवाज़ धीमी हो गई—

“बस एक अफसोस रहा… तुम्हारे struggle में मैं तुम्हारे साथ नहीं था… मुझे माफ़ कर दो…”

Rushali बस उन्हें देखती रही… आँखों में शिकायत नहीं, बस अपनापन था।

कुछ पल बाद Mayur sir बोले—

“मुझे पता है तुम क्या पूछना चाहती हो… मेरी शादी हुई या नहीं…”

Rushali चुप रही… लेकिन उसकी आँखों ने सवाल पूछ लिया।

“नहीं हुई…”
Mayur sir ने धीरे से कहा।

Rushali की साँस जैसे रुक गई।

Mayur sir आगे बोले—

“जब तुम दूर गई… तब समझ आया कि तुम मेरे लिए कितनी खास हो…
अस्पताल वही था… काम वही था… लेकिन हर चीज़ अधूरी लगने लगी थी…

”उन्होंने धीमे स्वर में कहा—

“तुम्हारी हँसी… तुम्हारी बिना मतलब की बातें… तुम्हारा मुझे परेशान करना… सब बहुत याद आया… इतना समझ आया—तुम्हारी जगह कोई और ले ही नहीं सकता…”

Rushali ने धीरे से पूछा—
“तो… आपने मुझे ढूँढा क्यों नहीं…?”

Mayur sir ने गहरी साँस ली—

“क्योंकि मैं चाहता था… तुम पहले अपने सपने पूरे करो… अगर मैं तुम्हें रोक लेता… तो शायद तुम अपनी मंज़िल से दूर रह जाती…और में वो इंसान नहीं बनना चाहता था जिसकी वजह से तुम अपने सपने पीछे छोड़ दो....”

Rushali की आँखें भर आईं।
उसने धीरे से उनके होंठों पर हाथ रख दिया—

“ऐसा मत कहिए… आप मेरे लिए हमेशा खास थे… और आप साथ होते तो मुझे हिम्मत मिलती....लेकिन इस वक्त आपने मुझे मना किया था… मैंने नहीं…”

Mayur sir हल्का-सा मुस्कुराए—
“बहुत साल बाद तुम्हारा ये taunting वाला रूप देख रहा हूँ… अच्छा लग रहा है…”

फिर दोनों मंडप के पास बैठ गए।
फेरे शुरू हो चुके थे… मंत्र गूँज रहे थे… अग्नि की लौ शांत होकर जल रही थी।

Rushali और Mayur sir चुप थे… लेकिन दोनों के मन में एक ही सपना था।

जैसे कुछ रिश्ते
दूसरों की शादी देखकर
अपने सपने देख लेते हैं…

तभी Rushali की माँ वहाँ आईं।
Rushali ने धीरे से कहा—
“माँ… ये Mayur sir हैं…”

Mayur sir तुरंत खड़े हो गए, झुककर नमस्ते किया—“नमस्ते aunty…”

Rushali की माँ ने उन्हें देखा… एक पल के लिए जैसे पहचानने की कोशिश की… फिर बोलीं—
“अरे… इतने सालों बाद मिल रहे हो…”

बस इतना ही कहा… और हल्की-सी मुस्कान के साथ सिर हिलाया।
“बैठो… मैं ज़रा उधर देखकर आती हूँ…”

और वो आगे बढ़ गईं।

Mayur sir और Rushali फिर चुपचाप बैठ गए।फेरे चलते रहे… मंत्र गूँजते रहे…

लेकिन उनके मन में जो चल रहा था… वो किसी मंत्र से कम नहीं था—
अनकहे शब्द… अधूरे सवाल… और एक रिश्ता… जो शायद अभी भी कहीं जिंदा था।

शादी खत्म हुई… Prisha की विदाई हुई… सबकी आँखें नम थीं।

धीरे-धीरे सब जाने लगे।
Mayur sir बारात के साथ चले गए…
Rushali भी अपनी माँ के साथ घर लौट आई।

कुछ रिश्ते वक्त से नहीं हारते,
बस वक्त के साथ और गहरे हो जाते हैं…

कुछ चाहतें इज़हार की मोहताज नहीं होतीं,
वो खामोशी में भी सुनाई देती हैं…

कुछ मुलाकातें किस्मत लिखती है,
और कुछ इंतज़ार…

लेकिन जब इंतज़ार और किस्मत
एक ही रास्ते पर मिल जाएँ—
तो कहानी वहीं से शुरू होती है
जहाँ सबको लगता है कि वो खत्म हो गई।


क्या Mayur sir अपने दिल की बात कह पाएँगे…?

क्या Rushali फिर से उस रिश्ते को नाम दे पाएगी…?

जानने के लिए पढ़िए — Dil ne jise chaha – Part 31