Back for Revenge - 2 in Hindi Drama by Radhika books and stories PDF | Back for Revenge - 2

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Back for Revenge - 2

एक साल बाद,(जिन्दल इंड्रस्टीज़)
"महाराज! आज वो दिन है जिस दिन उस कन्या की मृत्यु हुई थी और आज ही वो दिन भी हैं जब उसे जन्म लेना है।" चित्रगुप्त ने कहा। 

"हां तो इसमें मुझे बताने लायक क्या बात है उसके आत्मा को रिहा कर दो क्योंकि मैं मृत्यु का देवता हूं जनम देना मेरे हाथ में नहीं।" यमराज ने कहा। 

"महाराज जहां तक मुझे याद है, आपने इस लड़की को एक वादा किया था। और उस वादे के मुताबिक आपको ही इसे नया जीवन देना होगा।" चित्रगुप्त ने कहा ।

"लेकिन संसार का सृजनकर्ता मैं नहीं हूं। मैं भला ये कार्य कैसे कर सकता हूं।" यमराज ने कहा।

"महाराज अगर इसका जन्म भी बाकी लोगों की तरह हुआ तो यह अपना पिछला जन्म भूल जायेगी, जिससे उसका बदला पूर्ण नहीं होगा। और आपने ही उसे वरदान दिया था कि वह अपने साथ हुए अन्याय का बदला अवश्य ले पायेंगी।" चित्रगुप्त ने कहा तो यमराज ने कुछ सोचा और फिर नित्या के आत्मा से उन सभी यादों को मिटा दिया जो कि उसने मरने के बाद स्वर्ग में बिताए थे। 

लेकिन नित्या को अपना पिछला जन्म याद रखने का वरदान मिला और इसी वरदान के साथ वह धरती पर पहुंच गई और नियमानुसार यमराज ने उसे एक औरत के गर्भ में डाल दिया।
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एक बहुत बड़ी कम्पनी जहां के सभी वर्कर्स अपना पेमेंट नहीं मिलने पर कई दिनों से काम नहीं कर रहे थे। बस झगड़ रहे थे। इसलिए कम्पनी के मेनेजमेंट डायरेक्टर परेशान थें। कम्पनी आजकल लॉस से चल रहा था, उनके प्रोडक्ट की कीमत मार्केट में दिन ब दिन गिरते ही जा रहे थे और वजह था इस समय कम्पनी में हुए घोटालें। घोटालों की वजह से कम्पनी के कई सिक्रेट्स को रिविल कर दिया था और पैसों के मामलों में भी बड़े घोटाले हो रहे थे मगर अब तक हल नहीं निकल पा रहा था।

कम्पनी के मेनेजमेंट डायरेक्टर अपना सिर पकड़े अपने केबिन पर बैठे हुए थे। तभी असिस्टेंट डायरेक्टर वहां आ गए।

"ये क्या हो रहा है मिस्टर मेहता? आपने तो कहा था इस महिने कि पहली तारिख तक सबको उनकी पगार मिल जायेगी लेकिन आज तो आधा महीना खत्म हो चुका है। अब हम वर्कर्स को क्या जवाब देंगे?" मेनेजमेंट डायरेक्टर ने कहा जो इस वक्त टेंशन में था। 

"देखो, आपको पेनिक होने की जरूरत नहीं है, इन सब चीजों कि जिम्मेदारी मुझ पर हैं और मैं किसी भी हालत में सबकुछ ठीक करके रहूंगा।" मिस्टर मेहता बोले।

"अगर जिन्दल साहब को पता चला कि वर्कर्स को अब तक उनका पेमेंट नही मिला है तो वो हम सब को नौकरी से निकाल देंगे।" मेनेजमेंट डायरेक्टर बोले।

"सब तो ठीक है, लेकिन यह पैसा गायब कहां हुआ? मुझे तो यही समझ नहीं आ रहा है। माना इस समय कम्पनी लॉस में चल रही हैं लेकिन वर्कर्स के पेमेंट के लिए मैंने सब अरेंज कर दिया था। जिन्दल साहब ने अपने अकाउंट से निकाल कर कम्पनी के अकाउंट में जमा किया था लेकिन उसी रात अचानक पैसे गायब हो गए।" मिस्टर मेहता टेंशन भरी आवाज में बोले।

    "मुझे तो इस बात का डर है कि अगर जिन्दल साहब को पता चलेगा तो क्या होगा? वो तो हमें जिंदा ही खा जायेंगे।" मेनेजमेंट डायरेक्टर ने घबराते हुए कहा।

"अरे यार सक्सेना, भाई तुम भी हद करते हों, जिन्दल साहब इतने बुरे नहीं है, उन्हें इस बारे में सब कुछ बता दिया था मैंने लेकिन फिलहाल वो कम्पनी नहीं आ सकते?" मिस्टर मेहता ने कहा। दरअसल दोनों बहुत अच्छे दोस्त हैं इसलिए एक दूसरे को सर कहकर नहीं बोलते है।

"कम्पनी से बढ़कर जिन्दल साहब के लिए और क्या इम्पोर्टेंट हो सकता है?" मेनेजमेंट डायरेक्टर ने सोचते हुए कहा। मेनेजमेंट डायरेक्टर अभी अभी ज्वॉइन हुए थे इसलिए वो ज्यादा कुछ नहीं जानते थे।

"हैं न? उनकी पत्नी और जिन्दल साहब पिछले तीन दिनों से अपने घर पर बीवी के पल्लू से बंधे हुए हैं, पता नहीं इतनी उम्र में भी प्यार का भूत इनके सिर से कैसे नहीं उतरा?" मिस्टर मेहता ने कहा।

"ये भाभी जी का प्यार हैं मिस्टर मेहता जो भैय्या को अपनी पल्लू से बंधे रखता है और आज कितने सालों बाद जिन्दल इंड्रस्टीज़ का वारिस जन्म लेने वाला है भला भाई साहब अपनी बीवी को अकेले कैसे छोड़ सकते हैं?" आनन्द जिन्दल(38) ने कहा जो करण जिन्दल का भाई है। जैसे ही आनंद केबिन में कहते हुए आया दोनों कि घिग्घी बंध गई क्योंकि उन दोनों ने जिन्दल साहब की बेइज्जती जो कर दी थी। 

लेकिन जिन्दल फैमिली भले ही कितने ही अमीर क्यो न हो उनके दिल में सबके लिए प्यार और सम्मान बराबर होता है। आनन्द मुस्कुराते हुए उनके पास खड़ा था। दोनों अचानक से उठ कर खड़े हो गए और मिस्टर मेहता ने हड़बड़ा कर कहा — "डूग इवनिंग सर, सॉरी गुड इवनिंग सर।" 

"अरे भाई मेहता, अभी गुड आफ्टरनून चल रहा है।" आनन्द ने मुस्कुराते हुए कहा और फिर गहरी आवाज़ में बोले — " इस समय मैंने सब कुछ सम्भाल लिया है , वर्कर्स काम करने के लिए मान गये लेकिन, तुम्हें एक काम करना है।

"हां, जी सर बोलिए, मुझे क्या करना होगा? खैर आप जो बोलोगे करूंगा।" मिस्टर मेहता ने हड़बड़ा कर कहा।

"आपको न एक खून करना होगा।" आनन्द ने मुस्कुराकर  कहा।
    "जी सर," मिस्टर मेहता ने जल्दी से कहां और फिर बात को समझते ही आंखें बड़ी करके— "आई एम सॉरी सर, मैं यह काम नहीं कर सकता।" आनन्द और असिस्टेंट डायरेक्टर दोनों हंस पड़े।

"मेहता जी घबराइए नहीं, आपको बस उस इंसान को पकड़ना है जिसने कम्पनी में घोटाले की हैं।" आनन्द ने कहा तो मिस्टर मेहता के जान में जान आई।

"सर आप बिल्कुल फिक्र मत करिए, मैं सम्भाल लूंगा।" मिस्टर मेहता ने कहा। 

"तुम हर बार कहते हो लेकिन करते कुछ नहीं?" मेनेजमेंट डायरेक्टर ने कहा तो दोनों मुस्करा दिए लेकिन मेहता साहब के चेहरे से हंसी गायब हो गई।

"खैर अब सब कुछ ठीक है, मैं अब घर जा रहा हूं, वैसे भी घर का माहौल आज कुछ अलग है।" आनन्द ने कहा और वहां से बाहर निकल कर घर की ओर चल दिया।
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एक खूबसूरत सा मेंशन, जहां एक कमरे में किसी कि चिल्लाने की आवाज आ रही थी। घर के हॉल में एक चालिस साल का आदमी परेशान सा चक्कर काट रहा था। उसके चेहरे पर हल्के झुर्रियां थी मगर आंखों में एक अलग ही चमक था। 

आंखों में चश्मा और थ्री पीस सूट में परेशान आदमी करण जिन्दल था जो जिन्दल इंड्रस्टीज़ का ओनर है। वहीं एक चेयर पर एक बॉसी टाइप की औरत बैठी हुई थी जो लगभग पैंतीस साल की हैं, उसका नाम सायसा जिन्दल हैं जो करण जिन्दल की साली साहिबा हैं और आनन्द जिन्दल की वाइफ भी।
 
" जीजू आप इस तरह घूम घूम कर मुझे टेंशन में डाल रहें हैं। ऐसा लग रहा है जैसे आज हम सब का रिजल्ट आने वाला है और हमें फैल होने का डर है।" सायसा ने कहा। 

"ऐसा नहीं है, मुझे बस इस बात का डर है कि जो मुझे चाहिए वो नहीं मिलेगा।" कि तभी बच्चे की रोने की आवाज़ आई, दोनों जल्दी से दौड़कर दरवाजे के पास आए। 

अन्दर से एक दादी मां निकली जो अराधना जिन्दल थी, इन्हें जिन्दल फैमिली की मुखिया भी कह सकते हैं क्योंकि सब कुछ इनके अनुसार ही होता है। 

"मुबारक हो बेटा, हमारे घर पर लक्ष्मी आई है।" दादी मां ने कहा और दोनों बस हैरानी से एक दूसरे को देखते रह गए। 
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वेल दोस्तों आज के लिए इतना ही, मिलते हैं अगले एपिसोड में तब तक के लिए बाय बाय।