दुर्गा पूजा की रात थी पंडाल में सब देवी को पूज रहें थें। चारों तरफ सिंदूर था और ढोल-नगाड़े बज रहें थें। कोलकाता के इस शहर में हर साल देवी की पूजा धूम -धाम से मनाइ जाती है। कहतें हैं देवी ने असुरों का नाश करने के लिए माँ दुर्गा का स्वरूप धारण किया था। हर साल दुर्गा का आगमन बुराई पे अच्छाई कि जीत को दर्शाता है लेकिन जरूरी नहीं है की हर युग में जीत अच्छाई की ही हो। ये कहानी है कलयुग की जहां मोह- माया ही सब कुछ है और लोग इन्हें पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकतें हैं। ये कहानी है ऐसी ही जिद की , एक ऐसे जुनून और पागलपन जिसे पाने के लिए इन्सान शैतान बन जाता हैं।
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“पंडित जी, I hope आपको आपकी दक्षिणा मिल गई होगी । ” सफेद साड़ी और लाल ब्लाउज पहने एक 29 वर्ष की लड़की ने कहा।
“बस आप ही का और माता रानी का आशीर्वाद है ” पंडित जी मुस्कुराते हुए हाथ जोड़ कर बोले।
उस लड़की का नाम मोनिका मोइत्रा था , उसने पूजा की थाल उठाई और जैसे ही आरती करने के लिए आगे बढ़ी पीछे से एक आवाज आई “ऐसा कौन आ गया है इस शहर में जो बासुस के होते हुए पहले आरती करने की जुर्रत रखता हो? ” और जब उस लड़की ने पीछे मुड़ कर देखा तो उसके सामने एक लगभग 55 वर्ष की बेहद खूबसूरत महिला खड़ी थी । उस औरत ने 55 साल के होते हुए अपने आप को बहुत अच्छी तरह से maintain किया हुआ था और वो दिखने से ही किसी ऊंचे घराने की लगती थी ।
“हमसे माँ की भक्ति में आखिर क्या कमी रह गई थी पंडित जी? आप शायद भूल रहे है कि हर साल पंडाल के लिए सबसे बड़ी डोनेशन कौन करता है।” उस औरत ने झूठी मुस्कान के साथ पंडित को चील की नज़रों से देखते हुए कहा । “वो…वो मैडम जी इन्हों ने इस बार पंडाल के लिए अधिक चन्दा दान में दिया है । इसी लिए - ” इससे पहले पंडित जी कुछ और बोल पाते उस औरत ने हाथ के इशारे से उन्हें चुप कर दिया और वो मोनिका की तरफ घूमते हुए बोली “आपको आपकी दक्षिणा मिल जाएगी । और अगर हमसे माता की भक्ति में कुछ कमी रह गई हो तो उसके लिए हम माफी चाहेंगे। ”
“और तुम , तुम्हें तो मैने यहाँ पहले कभी नहीं देखा , लगता है इस शहर में नई आई हो । तुम ये नहीं जानती - हर साल इस पंडाल में आरती बासुस ही करतें हैं। यहीं यहाँ की रीत है और सालों से यही होता आया है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि हमारी family को छोड़ कर किसी और ने आरती की हो। ” उस औरत ने मोनिका से अपनी आँखें बड़ी-बड़ी करते हुए एक झूठी मुस्कान के साथ कहा ।
“वो क्या करें मिसेज बासु रीत बनाई ही तोड़ने के लिए जाती है और हर चीज़ कभी ना कभी जिंदगी में पहली बार होती है । ” मोनिका ने भी सिर हिला कर फीकी मुस्कान के साथ जवाब दिया ।
“काफि हिम्मत है तुम में , लगता है तुम जानती नहीं हो कि मैं कौन हूँ ? ” उस औरत ने अभी भी चेहरे पर झूठी मुस्कान बरकरार रखते हुए बोला ।
“वो actually क्या है ना जिंदगी में इतना कुछ देख लिया और डर को इतने करीब से महसूज किया है कि अब किसी और से डर नहीं लगता ।” मोनिका ने एक तिरछी मुस्कान के साथ अपने बाल संवारते हुए reply दिया।
“इतना निडर होना भी कोई अच्छी बात नहीं है । डरना चाहिए , सबको डरना चाहिए । वो actually क्या है ना डर आपको आगे आने वाले खतरों से बचा भी सकता है। ” उस औरत ने चील भरी निगाहों से देखते हुए एक झूठी मुस्कान के साथ बोला।
Haa Haan ha haan haa तभी मोनिका खिलखिला कर हंस पड़ी । “ I was just kidding Mises Basu . आपको कौन नहीं जानता? You're the one and only Geetanjali Basu . Basu Group of Industries की Managing Director और award winning film director and former actress. Of course I know you.” ये बोलते हुए मोनिका ने पूजा की थाली आगे बढ़ा दी। गीतांजलि मोनिका को हैरान और सवाल भरी नजरों से देख रही थी मानो की उसकी शक्ल से उसका दिमाग पड़ने की कोशिश कर रही हो।
“लगता है इस शहर में आने से पहले सब कुछ पता लगा लिया है तुम ने। ” गीतांजलि पूजा की थाल अपनी हाथ में लेते हुए बोलती है।
“वो क्या हैं ना मिसेज बासु as a businesswoman जो इस शहर में नई आई है और अपना business जमाना चाहती है, इतना पता तो लगाना ही पड़ेगा ना। वैसे भी उम्र और तजुर्बे में आप मुझसे बड़ी जो हो । आप ही पहले आरती कर लीजिए। मैं बस आपके हाथ को छू लूंगी । ”
“अरे भाई क्या बातें हो रहीं हैं ।” एक 57 साल का आदमी आते हुए बोलता है।
“जी हमें नहीं मिलाइए गा इनसे। ” उस आदमी ने गीतांजलि से कहा और अपना हाथ मिलाने के लिए मोनिका की तरफ हाथ बढ़ाते हुए आगे बोला “Hello beautiful. What's your name?” मोनिका ने एक नजर उस आदमी के हाथ को देखा और अपना थूंख धैंट लिया ।
मोनिका ने प्रणाम करते हुए अपने हाथ जोड़े “ मोनिका मोइत्रा ” । ये देख कर उस आदमी ने अपना हाथ पीछे खींच लिए ।ल
“मैं - ” इससे पहले वो आदमी आगे कुछ बोल पाता मोनिका बोल पड़ी “सुधीर बासु . Am I right Mr. Basu ?”
“You're absolutely right. वैसे लगता है तुम यहाँ नई आई हो?” सुधीर ने बोला।
“जी हां Mr. Basu, मैं इस शहर में नई ज़रूर आई हूं पर इस शहर से मेरा एक बहुत पुराना और गहरा नाता है ।” मोनिका अपना सिर उठा कर पंडाल की छत को एक देखते हुए कहती है।
कुछ देर बाद वहाँ बासु परिवार के और भी लोग आ जातें हैं। इसमें से सबसे बड़े बेटे का नाम समीर बासु होता है और छोटे बेटे का नाम राजबीर बासु । इनके अलावा इनके साथ इनके घर में पहले खाना बनाने वाली की बेटी देविका भी मौजूद होती है ।
“अरे यार ! उस लड़की को देखा कितनी सुन्दर लग रही है वो ।” देविका एक खूबसूर लड़की की तरफ इशारा करते हुए समीर से कहती है । समीर भी देविका के कहने पर उस लड़की को एक नजर देखता है । वो लड़की और कोई नहीं बलकि मोनिका ही थी। मोनिका के बाल लंबे और भूरें , आँखें बिलौरी और रंग गोरा था , उसका फिगर और फेस कट भी बेहद खूबसूरत था । उसे देख कर कोई भी फिदा हो जाए ऐसी थी उसकी personality ।
“Humm , हाँ खूबसूरत तो बेहद है लेकिन तुमसे ज्यादा नहीं” समीर देविका के कान के करीब जूझ कर , अपने कंधे से उसके कंधे पर हलके से मारते हुए कहता हैं । देविका भी उसे बड़ी-बड़ी आँखें फाड़ देखने लगती है और हलके से अपनी कोहनी मारते हुए बोलती है “चल झूठे !” “ouch! यार क्या कर रही हो? मुझे लग रही है।” समीर मुंह बना के बोलता है और दोनों हंसने लगते हैं।
असल में समीर और देविका बहुत ही अच्छे दोस्त है। पैसों में अंतर होते हुए भी दोनों साथ पले-बड़े है और एक दूसरे के बेहद करीब है । देविका समीर की है कंपनी द्वारा ऑन किए गए एक hotel की manager है।
दूसरी तरफ इधर आरती चल रही थी और मोनिका माता की मूर्ति के सामने हाथ जोड़ कर खड़ी थी।
उसे कोई घूर-घूर के ताड़े जा रहा था। ये आदमी और कोई नहीं बलकि राजबीर बासु था ।
राजबीर को वो लड़की एक बार में भा गई थी। वो तो मानो उसकी खूबसूरती में कही खो सा गया था।
उसके लाल - लाल होठ , हरि - हरि आँखें और हॉट फिगर उसे और भी आकर्षक बना रही थें।
वो बहाने से मोनिका के बगल में जा कर खड़ा हो जाता है और उस साड़ी में मोनिका के कोमल बदन को निहारने लगता है। मोनिका ने इस वक्त अपनी आँखें बंद की हुई थीं। मौके का फायदा उठा कर वो प्रसाद में से एक केला उठा लेता है , और उस केले का छिलका छुड़ा कर चुपके से उसके पैरों के पास रख देता है।
इधर मोनिका भी अपनी आँखें खोल लेती है और जैसे ही वो वहां से जाने के लिए मुड़ती है। उसका पैर उस छिलके पर फिसल जाता है लेकिन एहम वक्त पर राजबीर उसे गिरने से बचा लेता है और वो सीधा राजबीर के बाहों में जा गिरती है। राजबीर की नीली - नीली निगाहें मोनिका की पलकों से कुछ देर के लिए मिलती है लेकिन मोनिका अपनी नजरें फेर लेती है।
“Umm thanks” मोनिका अपने आपको संभाल के खड़े होते हुए कहती है।
“Mention not . Hello I'm Rajbeer Basu . Younger son of Geetanjali and Sudhir Basu .” राजबीर अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए बोलता है।
मोनिका ने अपना हाथ आगे बढ़ा कर उससे हाथ मिला लिया और कहा “Hello I’m Monica , Monica Moitra . Chairman of Fast Fashion Styles and Major Preference Share holder of Vaayu Group of Industries . ”
Vaayu Group of Industries , नाम तो कुछ सुना सुना लगता है ।
“Actually हमारी company Switzerland based hai , हमारे headquarters Geneva में है लेकिन हम operate globally करतें है । हम luxury से लेकर कॉमन कंज्यूमर goods and even medicines तक सब manufacture करतें हैं। और तो और extractive and plantation में भी हमने अपना पैर जमाया हुआ है। ”मोनिका कहती है ।
“Oh ! that’s great पर आपका India कैसे आना हुआ ? और हां मुझे अब याद आया आपके brand का watch तो मेरे फ्रेंड ने मुझे गिफ्ट में दिया था ।”
“ जी मैं कोलकाता में कुछ नई फैक्टरीज और research एंड development centres खोलना चाहती हूँ । India में तो हमारी बहुत सारी फैक्टरीज और माइनस है लेकिन कोलकाता में एक भी नहीं जबकि irony तो ये है कि मेरी mom कोलकाता से हैं।
Plus मैं अपने fashion ब्रांड को India में भी launch करना चाहती हूँ वरना अब तक तो हम इस brand को सिर्फ बाहर ही export ही कर रहें थें। ”
“Oh that's great news . वैसे मुझे लगता है कि मैने आपके जैसी आँखे कही देखी है लेकिन मुझे याद नहीं आ रहा कहाँ ।”
“शायद देखी होंगी ,कई साल पहले। यादें बहुत कीमती चीज होतीं हैं, इसीलिए उन्हें हमेशा संभाल के रखना चाहिए वरना वो धुंधली पड़ जाती है और वक्त के साथ अतीत में कहीं गुम हो जाती हैं। जहाँ से हम उन्हें कभी वापस नहीं ला सकतें।”
“Sorry?मतलब? कई साल पहले से आपका क्या मतलब है। ” राजबीर सवालिया नज़रों से पूछता है।
“वो actually क्या है ना मेरा जन्म कोलकाता में ही हुआ था लेकिन जब मैं 14 साल की थीं तब मेरी माँ ने मुझे एक orphanage से adopt किया था और adopt करने के बाद मुझे Geneva ले गई थीं । हो सकता है कि बचपन में हम कही टकरा गए हों। ” ये कहते हुए उसने सुधीर और गीतांजलि बासु की तरफ एक नजर देखा और मुंह फेर लिया।
“Oh! वैसे आप कहानियां अच्छी सुना लेतिं हैं । मुझे और सुन्नी हैं। Let's meet for coffee someday.”
“जी मैं यहाँ काम से आई हूँ। मेरे पास इन सब चीजों के लिए वक्त नहीं है। ” मोनिका ने straight फेस के साथ serious tone में जवाब दिया।
“वक्त होता किसके पास है , वक्त तो निकालना पड़ता है है ना ।”राजबीर ने मोनिका से मजाकिया लहजे में बोला।
“वैसे आप बातें बहुत अच्छी बना लतें हैं।” मोनिका ने खिलखिलाते हुए रिप्लाई दिया और वहाँ से मुड़ कर जाने लगी।
वो कुछ कदम आगे बढ़ी ही थी जब पीछे से एक आदमी की आवाज आई “वैसे अपना number तो देते जाइए ।”
मोनिका ने दो कदम पीछे ले लिए फिर मुड़ कर राजबीर को आखों में आँखें डाल देखते हुए बोली “ मैं कदम आगे बढ़ाने के बाद अगर एक बार पीछे कर लूं तो पीछा नहीं छोड़ती । ”
“ हम तो चाहेंगे कि आप हमारा जिंदगी भर पीछा करते रहें।”
“very funny ” ek झूठ मूठ की मुस्कान के साथ मोनिका ने कहा और मुंह फेर के जाने लगी।
“लेकिन number?” राजबीर ने आवाज लगाते हुए कहा।
इस बार बिना पीछे ममुड़े मोनिका एक जगह पर रुक गई और बोली “ मैं अंजान लोगों से अपना नंबर शेयर नहीं करती और ये तो हमारी पहली मुलाकात है । ”
इस से पहले राजबीर मोनिका से कुछ बोल पाता , मोनिका बिना पीछे देखे पंडाल से जल्दी निकल गई और राजबीर उसे बस पीछे से जाते हुए देखता ही रह गया।
ये सब होते हुए समीर और देविका ने भी नोटिस कर लिया था ।
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आखिर कौन है ये मोनिका मोइत्रा?
क्या करेगा राजबीर आगे?
और क्या होगा आगे इस कहानी में ?
जानने के लिए पड़ते रहिए “बेहद है ये जुनून ”।
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