jangal treep in Hindi Thriller by devil books and stories PDF | जंगल की गवाही

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जंगल की गवाही


भाग 1 -

टैगलाइन: "जब डर का मजाक उड़ाया गया... डर ने सबक सिखा दिया।"

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एक्ट 1 — रोड, फन एंड ह्यूमिलिएशन 

दृश्य 1: एक्स्टीरियर - शहर की सड़क - दिन

विस्तार:
सुबह के 10 बजे। एक काली SUV शहर से बाहर की ओर तेज रफ्तार से भाग रही है। विंडोज खुली हैं, तेज हिप-हॉप म्यूजिक गूंज रहा है। कार में 9 युवा (5 लड़के, 4 लड़कियाँ)।

लड़के: राहुल (ड्राइवर), आरव, अभिनव, रोहित, आशुतोश, विक्रम, नील
लड़कियाँ: नेहा, पूजा, प्रिया

राहुल स्टीयरिंग पर ताल दे रहा है। उसने धूप का चश्मा लगा रखा है।
राहुल: (चिल्लाकर) "आज का नियम! कोई फोन नहीं, कोई सोशल मीडिया नहीं! सिर्फ असली लाइफ!"

सब चिल्लाते हैं। पिछली सीट पर आरव अकेला बैठा है। उसने नीले रंग की फुल-शर्ट और जींस पहनी है। वह विंडो से बाहर देख रहा है, लेकिन उसकी नजरें शून्य में ताक रही हैं। उसकी उंगलियां सीट के आर्मरेस्ट पर एक सटीक रिदम में टैप कर रही हैं - टैप-टैप-पॉज-टैप-टैप।

रोहित पीछे मुड़कर आरव को देखता है।
रोहित: "अरे यार आरव, इतना सीधा क्यों बैठा है? लगता है स्कूल बस में बैठा है!"

आरव बिना मुड़े जवाब देता है, उसकी आवाज शांत और सपाट है:
आरव: "आदत है।"

राहुल रियरव्यू मिरर में आरव को देखकर मुस्कुराता है।
राहुल: "इसीलिए तो तुझे बुलाया है भाई! हॉरर मूवी का असली, अनफिल्टर्ड रिएक्शन सिर्फ तू ही दे पाएगा। हमारा 'फट्टू'!"

सब ठहाका मारकर हंसते हैं। नेहा, जो राहुल के बगल वाली सीट पर बैठी है, पीछे मुड़कर आरव की ओर देखती है। उसके चेहरे पर हंसी नहीं, एक हल्की चिंता है।

आरव के होंठों पर एक बहुत हल्की सी मुस्कान आती-जाती है, जैसे कोई प्राइवेट जोक सुन रहा हो।

कैमरा क्लोज-अप: आरव की उंगलियां अब और तेज टैप कर रही हैं। रिदम बदल गया है - टैप-टैप-टैप-टैप - बिना रुके।

दृश्य 2: एक्स्टीरियर - हाईवे डीएक्सबी स्टॉप - दिन

एक छोटा सा डीएक्सबी। सब चाय और समोसे ले रहे हैं। आशुतोश और रोहित सिगरेट पी रहे हैं। विक्रम अपने कैमरे से आसपास की तस्वीरें ले रहा है।

नेहा आरव के पास जाती है, जो एक पेड़ के नीचे अकेला खड़ा है।
नेहा: "उनकी बातों को दिल पर मत लो। ये लोग ऐसे ही हैं।"

आरव उसकी ओर देखता है। सूरज की रोशनी में उसकी आंखें एक अजीब सा एम्बर कलर दिखा रही हैं।
आरव: "मैं दिल पर नहीं लेता, नेहा। मैं... रजिस्टर करता हूं। हर शब्द। हर हंसी। हर अपमान।"

नेहा थोड़ा असहज हो जाती है। तभी अभिनव पास से गुजरता है। वह एक किताब पढ़ रहा है - "द साइकोलॉजी ऑफ फियर"। वह रुकता है और आरव से पूछता है:
अभिनव: "तुम डरते हो, आरव?"

आरव सीधे उसकी आंखों में देखता है:
आरव: "हर कोई डरता है। सवाल ये है कि डर आपको क्या बनाता है।"

अभिनव एक सेकंड के लिए ठिठकता है, फिर मुस्कुराकर आगे बढ़ जाता है।

दृश्य 3: इंटीरियर - फनजोन - दिन


एक बड़ा एंटरटेनमेंट सेंटर। बाउलिंग एलले में शोर। राहुल, रोहित और प्रिया बाउलिंग कर रहे हैं। आशुतोश और नील आर्केड गेम्स खेल रहे हैं।

आरव एक कोने में खड़ा गेंदों को ऑटोमैटिक रिटर्नर में वापस आते देख रहा है। उसकी नजरें हर गेंद के मूवमेंट को फॉलो कर रही हैं, जैसे वह कोई पैटर्न ढूंढ रहा हो।

अभिनव उसके पास आता है, अपनी किताब बंद करके।
अभिनव: "जंगल मजे के लिए नहीं होता। जंगल एक... मिरर होता है। वो इंसान का असली चेहरा दिखाता है। वो डर दिखाता है जिसे हम रोज छुपाते हैं।"

आरव अभिनव की तरफ देखता है, लेकिन जवाब नहीं देता। वह सिर्फ देखता रहता है।

दूर, राहुल फोन पर किसी से बात कर रहा है। वह बाथरूम के पास खड़ा है, आवाज धीमी करके:
राहुल: (फुसफुसाकर) "हां... हां पूजा, प्लान वही है। रात को, जब सब सो रहे होंगे... तू वो व्हाइट ड्रेस पहनकर आना... सीधा उसके टेंट के पास... हां, उस 'फट्टू' को डराना है... वो चीखेगा तो वीडियो वायरल होगा... पैसे की टेंशन मत ले..."

कैमरा स्लो मोशन में नेहा पर - वह राहुल के पीछे से आ रही है और उसकी बातें सुन लेती है। उसका चेहरा कड़क हो जाता है। वह मुड़ती है और पूजा को देखती है, जो दूर बैठी अपने फोन पर मैसेज कर रही है और मुस्कुरा रही है।

कैमरा वापस आरव पर - उसने सब कुछ देख लिया है। राहुल की गुप्त बातचीत, नेहा की प्रतिक्रिया, पूजा की मुस्कान। उसकी उंगलियों का टैपिंग रुक जाता है। अब वह पूरी तरह स्थिर है।

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एक्ट 2 — चेतावनी और कैंप 

दृश्य 4: एक्स्टीरियर - जंगल के किनारे की दुकान - शाम

विस्तार:
शाम के 5 बजे। एक पुरानी, जर्जर दुकान। साइनबोर्ड पर लिखा है: "भोला सिंह जनरल स्टोर - आखिरी दुकान, आगे सिर्फ जंगल"।

भोला सिंह (60), एक पुराने से मिलिट्री के जैकेट में, सबको देख रहा है। उसकी नजरें खासतौर पर आरव पर टिकी हैं।

दुकान में अजीब चीजें हैं: पुराने जानवरों के सींग, सूखे जड़ी-बूटियां, और दीवार पर एक हाथ से बना नक्शा जिस पर कुछ जगह लाल क्रॉस से मार्क हैं।

भोला सिंह: (गंभीर स्वर में) "बच्चों, यहाँ रात नहीं काटते। ये जंगल... याद रखता है। हर पैर के निशान, हर आवाज।"

राहुल हंसता है, एक बीयर का कैन खोलते हुए।
राहुल: "अंकल, आप नेटफ्लिक्स ज्यादा देखते हैं! ये कोई हॉरर मूवी थोड़े ही है।"

दृश्य 5: एक्स्टीरियर - कैम्पसाइट - रात


रात के 8 बजे। कैम्पफायर जल रहा है। तीन टेंट लगे हैं। राहुल, रोहित और आशुतोश गिटार बजा रहे हैं। प्रिया और नील डांस कर रहे हैं।

आरव एक पेड़ के नीचे बैठा है, अपने हाथों को आग की तरफ फैलाए हुए। उसकी परछाई दीवार पर एक विकृत, बड़ा आकार बना रही है।

राहुल आरव के पास आता है, उसके हाथ में व्हिस्की का पैग है।
राहुल: "आज रात का सच्चा सवाल। डर लग रहा है ना? यहाँ का अंधेरा... कुछ अलग है। मानो कोई देख रहा हो।"

आरव आग की लपटों में देखता रहता है।
आरव: "डर लग रहा है... तुम लोगों से। क्योंकि मैं जानता हूं कि इंसान ही सबसे खतरनाक जानवर है।"

अचानक सन्नाटा छा जाता है। अभिनव अंधेरे से निकलकर आता है, उसके हाथ में एक कप चाय है।
अभिनव: "और तुम्हें डरना चाहिए भी। क्योंकि यहाँ हर कोई वो नहीं है, जो दिखता है।"

राहुल ठहाका मारकर हंसता है।
राहुल: "भाई, तू भी किताबी कीड़ा बन गया है! चलो, सब सो जाओ। कल सुबह ट्रेकिंग है।"

सब अपने-अपने टेंट में चले जाते हैं। आरव आखिरी बार जंगल के अंधेरे में देखता है, फिर अपने टेंट में चला जाता है।

कैमरा जंगल के अंधेरे पर - दो चमकती हुई आंखें दिखाई देती हैं, फिर गायब हो जाती हैं।

एक्ट 3 

दृश्य 6: एक्स्टीरियर - जंगल - आधी रात

रात के 2 बजे। आशुतोश अपने टेंट से निकलता है, पेशाब के लिए। वह जंगल में थोड़ा अंदर जाता है।

कैम्प में, राहुल धीरे से सबको जगाता है।
राहुल: (फुसफुसाकर) "चलो! प्रैंक टाइम! आशु बाहर गया है।"

रोहित और विक्रम मुस्कुराते हैं। विक्रम अपना कैमरा तैयार करता है। राहुल आरव के टेंट के पास जाता है और उसे जगाता है।
राहुल: "आरव, जल्दी आ! आशुतोश अभी तक वापस नहीं आया! कुछ गलत लगता है!"

आरव उठता है, अपनी जैकेट पहनता है। उसकी आंखें नींद से भरी नहीं, बल्कि पूरी तरह जागृत हैं।

आरव टॉर्च लेकर जंगल में जाता है। कुछ मिनट बाद, वह भागता हुआ वापस आता है। उसके कपड़ों पर लाल रंग के दाग हैं (बाद में पता चलेगा कि यह केचप है)।

आरव: (घबराई, टूटी आवाज में) "वो... वो गिरा पड़ा है! खून... सब खून है!"

सब डरकर भागते हैं उस दिशा में। एक पेड़ के नीचे आशुतोश जमीन पर पड़ा है, उसके चेहरे पर लाल सिरप लगा हुआ है। वह अचानक उठकर जोर से हंसता है!

आशुतोश: "प्रैंक था, यार! बिल्कुल असली लगा ना? तेरी तो बोलती बंद हो गई!"

सब राहुल की तारीफ करने लगते हैं। रोहित आरव का वीडियो बना रहा है।
रोहित: "देखो 'फट्टू' का चेहरा! क्लासिक!"

कैमरा दो लोगों पर फोकस करता है जो नहीं हंस रहे:

1. अभिनव - वह गुस्से से आशुतोश की तरफ देख रहा है। उसकी मुट्ठियां बंधी हुई हैं।
2. आरव - उसके चेहरे पर राहत नहीं, बल्कि एक गहरी, खतरनाक चिढ़ है। उसकी आंखें संकरी हो गई हैं। उसके हाथ में पकड़ा टॉर्च क्रेक करने की आवाज करता है, जैसे वह उसे तोड़ने वाला हो।

अभिनव: (गुस्से में, आवाज कांपती हुई) "तुम लोगों को पता नहीं किस चीज से खिलवाड़ कर रहे हो! यह जंगल है! यहां मजाक नहीं होता!"

राहुल अभिनव को धक्का देता है।
राहुल: "छोड़ यार, मजाक था! तू भी क्या बोरिंग हो गया है!"
आशुतोश के प्रैंक के बाद, अभिनव बहुत गुस्से में है।

अभिनव: (राहुल का कॉलर पकड़ते हुए) "तुम्हें पता है तुमने क्या किया? तुमने इस जंगल का सम्मान नहीं किया! तुमने डर का मजाक उड़ाया! अब यह जंगल जवाब देगा!"

राहुल अभिनव को धक्का देता है।
राहुल: "तू पागल हो गया है क्या? ये सब किस बारे में बकवास कर रहा है?"

अभिनव सबको एक-एक कर देखता है, उसकी आंखें चमक रही हैं।
अभिनव: "तुममें से एक... तुममें से एक इसे समझता है। डर को। और वो डर से खेल रहा है।"

वह आरव की तरफ देखता है, जो कांप रहा है।
अभिनव: "पर क्या वो सचमुच डर रहा है? या सिर्फ नाटक कर रहा है?"

आरव अपना सिर हिलाता है, आंखें भर आई हैं।
आरव: "मैं... मैं डर गया। मुझे माफ कर दो।"

सब अभिनव को देखते हैं, जो अब और भी संदिग्ध लग रहा है।

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दृश्य 7: एक्स्टीरियर - जंगल - रात (3:30 AM)

सब सो रहे हैं। अचानक एक भयानक चीख सुनाई देती है। सब जाग जाते हैं।

रोहित का टेंट खाली है। उन्हें ढूंढते हैं तो रोहित की लाश एक पेड़ से उल्टा लटकी हुई मिलती है। गले में गहरे निशान। यह कोई प्रैंक नहीं है।

नेहा: (रोते हुए) "ये क्या हुआ? ये किसने किया?"

सब एक दूसरे को देखते हैं। आरव हिस्टीरिकल हो रहा है, रोया जा रहा है।
आरव: "मैंने कहा था! मैंने कहा था यहां कुछ गलत है! चलो यहां से चलते हैं!"

अभिनव शांत है। वह लाश के पास घुटने टेककर जांच कर रहा है।
अभिनव: "ये प्रोफेशनल काम है। गला एक ही सटीक वार से कटा है। कोई अनुभवी... या कोई जो अच्छी तरह जानता है कि कहां काटना है।"

सब अभिनव की तरफ देखते हैं। वह अकेला है जो शांत है।

दृश्य 8: मोंटाज - भय का प्रसार

· विक्रम अपना कैमरा लेकर जंगल में जाता है। वह एक पेड़ के पीछे सफेद कपड़े की झलक देखता है। वह कैमरा उठाता है, फ्लैश चमकता है। अगले फ्रेम में, वह गायब है। सिर्फ उसका कैमरा जमीन पर पड़ा है।
· नील और प्रिया एक साथ रहने की कोशिश करते हैं। रात में, उनके टेंट के बाहर पैरों के निशान दिखते हैं। नील दिल का दौरा पड़ने से मर जाता है। प्रिया पागलों की तरह भाग जाती है।
· आशुतोश की लाश मिलती है - जीभ कटी हुई। एक नोट मिलता है: "बोलने की सजा।"

हर मौत के बाद, अभिनव शांत रहता है, हर दृश्य का विश्लेषण करता है। आरव हर बार और ज्यादा डरा हुआ, कांपता हुआ दिखता है। संदेह की सुई अभिनव की तरफ बढ़ती जाती है।

नेहा (अभिनव से): "तुम... तुम इतने शांत कैसे रह सकते हो? तुम्हारे दोस्त मर रहे हैं!"
अभिनव: "क्योंकि डर हमें मार देगा। मुझे सोचना है। मुझे समझना है कि ये कौन है।"

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एक्ट 5 — पूजा का प्रवेश

दृश्य 9: एक्स्टीरियर - क्लीयरिंग - रात

बचे हुए: राहुल, नेहा, आरव, अभिनव।

अचानक, सफेद कपड़ों वाली आकृति सामने प्रकट होती है। वह पूजा है, पर उसका चेहरा पीला, आंखें खोखली हैं। वह एकदम शांत खड़ी है।

राहुल: (चिल्लाते हुए) "पूजा! तू... तू ठीक है? क्या हुआ तुझे?"

पूजा कुछ नहीं बोलती। वह सिर्फ आरव की तरफ देखती है और एक भयानक, दर्द भरी चीख मारती है।

आरव चीखता है और बेहोश होकर गिर जाता है।

अभिनव: "देखो! उसने (पूजा ने) सीधे उसे (आरव को) टार्गेट किया! वो जानती है! वो जानती है कौन है!"

पूजा फिर गायब हो जाती है। राहुल और नेहा आरव को संभालते हैं। अभिनव अंधेरे में पूजा का पीछा करता है।

नेहा: "वो क्या था? क्या पूजा... मर चुकी है? क्या वो भूत है?"
राहुल: "नहीं... नहीं ऐसा नहीं हो सकता। मैंने उससे बात की थी... वो प्रैंक के लिए आई थी..."

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एक्ट 6 — आरव की "मौत" और बढ़ता संदेह 

दृश्य 10: एक्स्टीरियर - कैम्पसाइट - रात

आरव को वापस कैम्प में लाया जाता है। वह बेहोश पड़ा है। अभिनव वापस आता है, पर पूजा को नहीं ढूंढ पाता।

अभिनव: "वो गायब हो गई। पर मुझे यकीन है... वो जिंदा है। और वो जानती है कि हत्यारा कौन है।"

राहुल आरव के पास बैठा है, उसकी नब्ज चेक कर रहा है।
राहुल: "इसकी नब्ज बहुत कमजोर है... मुझे नहीं लगता यह..."
नेहा: (रोते हुए) "नहीं! ऐसा मत कहो!"

तभी आरव की सांसें रुक सी जाती हैं। वह हिलना-डुलना बंद कर देता है।

राहुल उसकी कलाई पर हाथ रखता है, फिर उसकी गर्दन पर।
राहुल: (फुसफुसाते हुए) "कोई... कोई नब्ज नहीं। कोई सांस नहीं।"

नेहा फूट-फूटकर रोने लगती है। अभिनव दूर से देख रहा है, उसके चेहरे पर संदेह है।

अभिनव: "बहुत... सुविधाजनक है। सबसे पहले डरा... सबसे पहले मरा।"

राहुल गुस्से में अभिनव की तरफ घूमता है।
राहुल: "तू क्या कह रहा है? तू कह रहा है कि यह नाटक कर रहा था? देख! यह मर चुका है!"

कैमरा क्लोज-अप आरव के चेहरे पर:


एक्ट 7 — पूजा की मौत: द टर्निंग प्वाइंट 

दृश्य 11: एक्स्टीरियर - घना जंगल - रात

राहुल, नेहा और अभिनव भाग रहे हैं। वे एक छोटी सी गुफा में छिपते हैं।

नेहा: "हमें क्या करना चाहिए? हम फंस गए हैं!"
अभिनव: "हमें उसे (हत्यारे को) लालच देना होगा। बाहर आना होगा।"

राहुल: "क्या मतलब?"
अभिनव: "मैं बाहर जाता हूं। मैं उसे ललकारता हूं। तुम दोनों यहीं रहो।"

अभिनव बाहर निकलता है। कुछ देर बाद, एक चीख सुनाई देती है। राहुल और नेहा बाहर दौड़ते हैं।


एक्ट 8 — पूजा की मौत: द टर्निंग प्वाइंट 

दृश्य: एक्स्टीरियर - घना जंगल - रात

राहुल और नेहा भाग रहे हैं। वे एक क्लीयरिंग में पहुँचते हैं। वहाँ पूजा घुटनों के बल बैठी है, रो रही है।

पूजा: "राहुल... माफ करना... मैं डर गई... मैंने तुम्हारा प्रैंक छोड़ दिया और भाग गई..."

एक काली छाया पेड़ों के पीछे से निकलती है और पूजा के पीछे खड़ी हो जाती है। छाया का हाथ पूजा की गर्दन के पास जाता है।

राहुल: "नहीं! छोड़ो उसे!"

पूजा की आँखें फैल जाती हैं। खींच! का आवाज। पूजा का गला कट जाता है। वह जमीन पर गिर जाती है।

छाया धीरे-धीरे मुड़ती है... राहुल की ओर।

कैमरा एंगल: छाया का पीछे से शॉट। हम छाया की पीठ देखते हैं, राहुल का सामने से चेहरा जो डर से सफेद पड़ गया है।

राहुल की आँखें चौंधिया जाती हैं। उसके मुँह से आवाज निकलती है: "तू...?"
एक्ट 9 — द ग्रेट रिवील: 

दृश्य: एक्स्टीरियर - जंगल का रास्ता - गहरी रात

राहुल अंधाधुंध भाग रहा है। उसकी साँस फूल रही है, आँखों में खौफ। वह एक पेड़ से टकराता है, गिर जाता है, उठता है, और फिर भागता है। आखिरकार, वह एक संकरे रास्ते में अभिनव से सामने टकराता है।

अभिनव शांत खड़ा है। उसके कपड़ों पर धूल लगी है, पर वह डरा हुआ नहीं लगता।
अभिनव: "राहुल! यहाँ आओ, मैं हूँ।"

राहुल पीछे हटता है, उसकी आँखें फैली हुईं। वह हाँफ रहा है, काँप रहा है।
राहुल: (फुसफुसाते हुए, आवाज टूटी हुई) "दूर... दूर रह... मुझसे..."

अभिनव समझता है कि राहुल सदमे में है। वह धीरे-धीरे, शांति से राहुल की तरफ एक कदम बढ़ाता है, हाथ आगे करके, जैसे किसी डरे हुए जानवर को शांत कर रहा हो।
अभिनव: "शांत हो जा, राहुल। साँस ले। मैं तेरा दोस्त हूँ। बस मुझे बताओ क्या हुआ?"

राहुल और पीछे हटता है। उसकी नजरें इधर-उधर भाग रही हैं। वह कुछ बोलने की कोशिश करता है, पर केवल अटकी हुई आवाजें निकलती हैं।
राहुल: "वो... उसने... पूजा... आँखें... उसकी आँखें..."

अभिनव एक और कदम आगे बढ़ाता है, अब वह राहुल के काफी करीब है।
अभिनव: "किसकी आँखें, राहुल? किसने किया? मुझे बताओ।"

दर्शकों का दृष्टिकोण: इस पल में, कैमरा अभिनव के पीछे है। हम अभिनव की पीठ और उसके सामने डर से सफेद, काँपते हुए राहुल को देख रहे हैं। अभिनव का हाथ राहुल के कंधे की ओर बढ़ रहा है। पूरा सेटअप ऐसा लग रहा है जैसे अभिनव ही हत्यारा है और वह अब राहुल पर वार करने वाला है। म्यूजिक ड्रामेटिक हो जाता है।

राहुल की आँखें अचानक अभिनव के पीछे की ओर फिक्स हो जाती हैं। उसका मुँह खुला का खुला रह जाता है।

राहुल: (एक कर्कश चीख) "पीछे...!"

उसी क्षण — व्होश! थप्प!

एक कुल्हाड़ी तेजी से फ्रेम में आती है और अभिनव के दाएँ कंधे और पीठ के बीच जा धंसती है। आवाज गूंजती है।

अभिनव की आँखें चौंधिया जाती हैं। वह आगे की ओर झटका खाता है, एक हल्की सी हैरानी उसके चेहरे पर। फिर वह बिना आवाज किए, सीधे जमीन पर गिर जाता है।

कैमरा तेजी से घूमता है कुल्हाड़ी के आने की दिशा में।

वहाँ खड़ा है आरव।

वह अभिनव के शव के ठीक पीछे खड़ा है, जंगल के अंधेरे से निकलकर आया हुआ। उसके हाथ खाली हैं (कुल्हाड़ी तो अभिनव में फंसी है)। उसके कपड़ों पर गहरे रंग के दाग हैं। उसका चेहरा पसीने से चमक रहा है, पर उसकी आँखें... उसकी आँखें बिल्कुल शांत, बिल्कुल खाली, और सीधे राहुल की तरफ टिकी हुई हैं। कोई डर नहीं। कोई जल्दबाजी नहीं। सिर्फ एक ठंडी, गहरी नज़र।

राहुल जम जाता है। उसका सारा डर, सारी सांसे, सब थम सी जाती हैं। वह अभिनव के शव को देखता है, फिर आरव को। उसे समझ नहीं आ रहा।
राहुल: (बस फुसफुसाहट) "तू... तू मर चुका था... मैंने देखा था... तू बेहोश था..."

आरव एक कदम आगे बढ़ाता है। कोई जवाब नहीं देता। बस आगे बढ़ता है।

यह देखकर, राहुल में जानवरों जैसा डर भर जाता है। वह एक दिल दहला देने वाली चीख मारता है और भागने लगता है।

आरव उसकी ओर देखता रहता है, फिर धीरे-धीरे अभिनव के शव के पास जाता है। वह कुल्हाड़ी के हैंडल को पैर से दबाता है, इसे जमीन से अलग करने के लिए। फिर वह राहुल के भागने की दिशा में चलना शुरू कर देता है - दौड़ता नहीं, बस एक सुनियोजित, दृढ़ चाल से।

कैमरा जमीन पर पड़े अभिनव पर: वह बिल्कुल स्थिर पड़ा है। उसकी आँखें बंद हैं। फिर, बहुत हल्के से, उसकी बायीं हथेली की एक उँगली झटके से हिलती है। फिर स्थिर।

---एक्ट 10 — आखिरी शिकार और भाग 1 का फाइनल

दृश्य 1: एक्स्टीरियर - खड्ड के किनारे - सुबह का अंधेरा (भोर से ठीक पहले)

राहुल खड्ड के किनारे पहुँच चुका है। नीचे गहरी खाई है, नदी का कोलाहल सुनाई दे रहा है। वह फँस गया है। पीछे से धीमे, लेकिन लगातार कदमों की आवाज आ रही है - ठप... ठप... ठप।

नेहा वहाँ पहले से है। वह एक पत्थर के पीछे दुबकी हुई है, हाथ से मुँह ढके, काँप रही है।

आरव दृश्य में प्रवेश करता है। अब उसके हाथ में वह कुल्हाड़ी फिर से है (उसने अभिनव के शव से निकाल ली होगी)। उस पर ताजा खून लगा है। वह रुकता है, राहुल और फिर नेहा को देखता है।

राहुल: (गिड़गिड़ाते हुए, आँसू बहाते हुए) "आरव... भाई... मैं माफी चाहता हूँ। हम सब माफी चाहते हैं। हमने तुझे तंग किया, हमने तेरा मजाक उड़ाया... ये सब मेरी गलती थी। मत... मत मार मुझे। हम दोस्त थे ना?"

आरव कोई प्रतिक्रिया नहीं देता। उसकी श्वास सामान्य है, चेहरा एकदम स्थिर। उसकी नज़रें राहुल पर टिकी हैं, जैसे कोई वैज्ञानिक किसी प्रयोग को देख रहा हो।

नेहा: (फुट-फुट कर रोते हुए) "आरव, प्लीज... हमें जाने दो। हम किसी से कुछ नहीं कहेंगे। मैं तुम्हारी मदद करूँगी। प्लीज..."

आरव धीरे-धीरे कुल्हाड़ी का हैंडल अपनी दोनों हथेलियों के बीच घुमाने लगता है, एक अजीब सी स्नेह से, जैसे कोई अपना पसंदीदा औजार सहला रहा हो।

आरव: (पहली बार इस दृश्य में बोलता है, आवाज बिल्कुल शांत, रोबोटिक) "दोस्त वो होते हैं जो कमजोर को संभालते हैं। तुम लोग... दर्शक थे। और तुमने सस्ता मनोरंजन चुना। तुमने 'फट्टू' को चुना।"

वह एक कदम आगे बढ़ाता है। राहुल चीखता है और अंतिम विकल्प के रूप में नेहा की तरफ धक्का देकर खुद खड्ड के किनारे से छलांग लगा देता है!

नेहा चीखती है और गिर जाती है। आरव तुरंत नेहा की तरफ मुड़ता है, कुल्हाड़ी उठाता है...

कट!

हम यह नहीं देखते कि आरव वार करता है या नहीं। सीधे अगले दृश्य में कट।

दृश्य 2: एक्स्टीरियर - जंगल - सुबह (कुछ घंटे बाद)

पुलिस, एम्बुलेंस, फोरेंसिक। इंस्पेक्टर शर्मा (45, गंभीर, निर्णायक नज़रों वाला) मौके पर है। वह एक के बाद एक शव देख रहा है, जो अब सफेद चादरों से ढके हुए हैं।

ऑफिसर 1: (नोटबुक में देखते हुए) "सर, कुल 8 शव। पहचान हो गई है। राहुल, नेहा, पूजा, रोहित..."
शर्मा: "8? लिस्ट में 9 नाम हैं।"
ऑफिसर 2: "एक लापता है, सर। नाम आरव। कॉलेज आईडी और एक फटा हुआ बैग मिला है उसी के टेंट के पास।"

शर्मा उस बैग को देखता है जो एक पुलिसवाले प्लास्टिक बैग में डाल रहा है। अंदर किताबें, एक पानी की बोतल।
शर्मा: "लापता... या भगोड़ा।" वह अपनी नोटबुक में लिखता है: "प्राइम सस्पेक्ट: आरव। एकमात्र गैर-मौजूद।"

एक पैरामेडिक अभिनव के शव के पास जाता है (वह अभी भी उसी जगह पड़ा है, कुल्हाड़ी निकाल ली गई है)। पैरामेडिक घुटने टेकता है, चादर हटाता है, अभिनव की गर्दन पर हाथ रखता है। वह सिर्फ 2-3 सेकंड रुकता है। अभिनव का चेहरा पीला, कोई हलचल नहीं।

पैरामेडिक चादर वापस ढककर उठता है और शर्मा की तरफ मुड़कर सिर हिलाता है - 'मृत' का इशारा।

शर्मा एक सेकंड के लिए अभिनव के ढके हुए शव को देखता है, फिर अपना ध्यान दूसरी तरफ कर लेता है।

दृश्य बदलता है: सभी शवों को काले प्लास्टिक बॉडी बैग में डाला जा रहा है। अभिनव के शव को भी एक बैग में डाला जाता है। ज़िप बंद की जाती है। दो पुलिसवाले उसे उठाकर एक एम्बुलेंस के पीछे रख देते हैं, जहाँ पहले से 3-4 और बैग रखे हैं।

दृश्य 3: इंटीरियर / एक्स्टीरियर - एम्बुलेंस / जंगल से बाहर निकलते हुए - दिन

एम्बुलेंस जंगल के उबड़-खाबड़ रास्ते पर चल रही है। अंदर, शवों के बैग रखे हैं। हर झटके के साथ बैग हिलते हैं।

अचानक, एक बैग (वही जिसमें अभिनव है) की ज़िप हल्की सी खिसकती है... फिर रुक जाती है। एम्बुलेंस एक बड़े गड्ढे में से गुजरती है, तेज झटका लगता है।

ज़िप थोड़ी और खुल जाती है। अंदर से अँधेरा दिख रहा है। फिर कुछ नहीं।

दृश्य 4: एक्स्टीरियर - पहाड़ी की चोटी - दिन

आरव एक ऊँची चोटी पर खड़ा है, नीचे दूर जाती हुई पुलिस की गाड़ियों और एम्बुलेंस को देख रहा है। उसने अपने खून से सने कपड़े बदल लिए हैं। अब वह एक सादी शर्ट और जींस में है, एक बैकपैक लटकाए हुए।

वह एक छोटा पॉकेट मिरर निकालता है और अपना चेहरा देखता है। फिर, वह मुस्कुराता है। यह मुस्कान डरावनी है - न खुशी की, न राहत की। यह एक कलाकार की मुस्कान है, जिसने अपनी पहली कृति पूरी की हो।

आरव (वॉयस ओवर): "उन्होंने सोचा मैं डर गया। उन्होंने सोचा मैं मर गया। अब... अब वो जान जाएंगे। डर ने पुराने आरव को मार डाला। अब... डर ही नया आरव है।"

वह मिरर बंद करके बैग में रखता है, पीछे मुड़कर जंगल को एक आखिरी नज़र देखता है, और शहर की ओर चल पड़ता है।

फाइनल शॉट: आरव का सिल्हूट सूरज की रोशनी में दूर जाते हुए। पीछे, जंगल में, कौवे काँव-काँव कर रहे हैं।