Vulture Back Story in Hindi Magazine by Ravi Bhanushali books and stories PDF | Vulture Back Story

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Vulture Back Story

शीर्षक: वल्चर: पंखों के पीछे का सच
[दृश्य 1 – अंधेरे से जन्म]
कभी एक साधारण ग्रह था—कायरॉन। वहाँ आसमान हमेशा धूसर रहता था और ज़मीन पर लोग खामोशी में जीते थे। उसी ग्रह की खदानों में एक नौजवान मज़दूर काम करता था—अर्जुन। थके हाथ, धूल से भरा चेहरा, पर आँखों में उड़ने का सपना।
पर्यवेक्षक (डाँटते हुए):
“सपने मत देखो, अर्जुन। यहाँ लोग उड़ते नहीं… दबते हैं।”
अर्जुन (धीमे स्वर में):
“दबते-दबते अगर दिल मर जाए… तो आदमी जिए कैसे?”
रात को वह खदान की छत पर बैठकर टूटे पंखों की पुरानी तस्वीरें बनाता।
[दृश्य 2 – पहला पंख]
एक रात आसमान से धधकता हुआ एक यंत्र गिरा। अर्जुन दौड़कर पहुँचा। भीतर से कराहने की आवाज़ आई। एक अजनबी वैज्ञानिक घायल पड़ा था।
वैज्ञानिक:
“मुझे बचा लो… ये पंख… ये शक्ति… गलत हाथों में चली गई तो तबाही होगी।”
अर्जुन:
“मैं कोई हीरो नहीं हूँ।”
वैज्ञानिक (कमज़ोर मुस्कान):
“हीरो बनना पड़ता नहीं… हालात बना देते हैं।”
वह यंत्र अर्जुन के शरीर से जुड़ जाता है। उसकी पीठ पर ऊर्जा-पंख उग आते हैं। दर्द से चीख, फिर आसमान की ओर पहला छलांग।
अर्जुन (हांफते हुए):
“मैं… उड़ रहा हूँ?”
[दृश्य 3 – रायनॉक्स की ढाल]
दूर के ग्रह वोरकॉन पर युद्ध छिड़ा था। लोहे की खाल वाला योद्धा रायनॉक्स अपने लोगों को बचाते-बचाते घिर चुका था। दुश्मन की ऊर्जा बम गिरने को थे।
रायनॉक्स (गर्जना):
“आज मेरी ढाल टूटेगी… पर लोग नहीं!”
आकाश से एक परछाईं उतरी। वल्चर ने बमों को हवा में ही फोड़ दिया।
वल्चर:
“ढाल टूटे तो आदमी ढाल बनता है… तुमने सही सीखा है।”
रायनॉक्स (हैरान):
“तू कौन है?”
वल्चर (मुस्कुराकर):
“बस एक उड़ता हुआ कर्ज़दार।”
रायनॉक्स पहली बार समझता है कि वह अकेला नहीं है।
[दृश्य 4 – लूमिया की बुझती रोशनी]
रोशनी की योद्धा लूमिया एक अंधेरी आकाशगंगा में फँस गई थी। नेदर-जीव उसकी ऊर्जा चूस रहे थे। उसकी चमक बुझ रही थी।
लूमिया (थरथराती आवाज़ में):
“रोशनी… अंधेरे में हार रही है…”
वल्चर ने अपने पंख फैलाए, अपनी ऊर्जा उसकी ढाल बना दी।
वल्चर:
“रोशनी तब तक नहीं हारती… जब तक कोई उसके लिए खड़ा हो।”
लूमिया (आँखों में आँसू):
“तुम अपनी शक्ति खो दोगे!”
वल्चर:
“शक्ति से ज़्यादा… ज़रूरी दिल है।”
नेदर-जीव पीछे हटते हैं। लूमिया बच जाती है।
[दृश्य 5 – जिप की शरारत]
छोटा इंजीनियर जिप एक अंतरिक्ष तस्कर के जहाज़ में फँस गया था। उसके हाथ बंधे थे।
जिप (खुद से):
“आज अगर बचा… तो हीरो बनूँगा।”
अचानक जहाज़ हिलता है। वल्चर भीतर घुसता है।
वल्चर:
“हीरो बनने से पहले… ताले खोलना सीखो।”
वल्चर जंजीरें तोड़ देता है।
जिप (खुश होकर):
“तुम मेरे सपनों के हीरो हो!”
वल्चर:
“सपनों के हीरो मत बनाओ… असली बनो।”
दोनों भाग निकलते हैं।
[दृश्य 6 – नेक्स का टूटता हौसला]
नेक्स अपने ग्रह पर हार चुका था। विद्रोह कुचल दिया गया था। वह जख़्मी होकर एक घाटी में बैठा था।
नेक्स (खुद से):
“लड़ना बेकार है… दुनिया नहीं बदलती।”
वल्चर उतरता है।
वल्चर:
“दुनिया नहीं बदलती… लोग बदलते हैं। और लोग बदलेंगे तो दुनिया बदलेगी।”
नेक्स (कड़वाहट से):
“तुम उड़ सकते हो… मैं नहीं।”
वल्चर:
“उड़ने के लिए पंख नहीं चाहिए… किसी के लिए खड़े होने की वजह चाहिए।”
नेक्स पहली बार उठ खड़ा होता है।
[दृश्य 7 – काएल का वादा]
काएल एक टूटे हुए स्टेशन पर फँसा था। उसका जहाज़ नष्ट हो चुका था। जीवन-समर्थन खत्म हो रहा था।
काएल (बेहोशी में):
“माँ… माफ़ करना…”
वल्चर उसे उठाकर अपने यान में रखता है।
वल्चर:
“मौत से पहले माफ़ी नहीं माँगते… ज़िंदगी से वादा करते हैं।”
काएल की आँखें खुलती हैं।
काएल:
“तुमने मेरी जान बचाई।”
वल्चर:
“नहीं… मैंने तुम्हें एक मौका दिया। आगे क्या करोगे, वो तुम्हारा काम है।”
[दृश्य 8 – अकेलापन और कीमत]
हर मदद के बाद वल्चर अकेला लौटता। उसके पंख झुलसते, शरीर थकता, पर चेहरे पर वही हल्की मुस्कान।
वल्चर (स्वगत):
“अगर सब बच जाएँ… तो मेरा अकेला रह जाना ठीक है।”
दूर कहीं मीरा की यादें उसे काटतीं। वह आसमान की ओर देखता।
वल्चर:
“मैं उड़ता हूँ… ताकि दिल ज़मीन पर न गिर जाए।”
[दृश्य 9 – बीज जो भविष्य बने]
रायनॉक्स, लूमिया, जिप, नेक्स और काएल—पाँचों अलग-अलग जगहों पर खड़े होकर आसमान की ओर देखते हैं। कहीं दूर एक परछाईं उड़कर ओझल हो जाती है।
रायनॉक्स:
“वह हमें छोड़कर चला गया… पर हमें छोड़कर नहीं गया।”
लूमिया:
“उसने रोशनी दी… रास्ता नहीं।”
नेक्स:
“रास्ता हमें खुद बनाना होगा।”
जिप (हल्की हँसी के साथ):
“और रास्ते में धमाके भी मैं ही करूँगा।”
काएल:
“जब समय आएगा… हम एक टीम बनेंगे।”
[दृश्य 10 – परछाईं से किंवदंती]
अर्जुन अकेला एक सुनसान ग्रह पर उतरता है। अपने जले हुए पंखों को देखता है।
वल्चर (धीमे स्वर में):
“मैं नहीं जानता… कल कौन बचेगा।
पर आज… किसी को बचाना ज़रूरी था।”
वह आसमान की ओर उड़ान भरता है। दूर तारों के बीच उसकी परछाईं एक किंवदंती बन जाती है।