एपिसोड 5: करीब आते दिलरात के सन्नाटे में अनन्या बिस्तर पर लेटी सिसकियाँ ले रही थी। आर्यन के शब्द उसके कानों में गूँज रहे – "तेरा भाई कातिल है।" लॉकर की फोटो, अधूरे प्रूफ, सब दिमाग में घूम रहा। "भैया निर्दोष कैसे हो सकता है? या... सच?" अनन्या ने枕 में मुँह छिपा लिया। अचानक फोन बजा – अंकित। "दीदी, सुनो। आर्यन का पुराना दुश्मन 'विक्रम सिंह' पटना पहुँच गया। हमले का बदला लेगा। घर मत जाना!" अनन्या चौंक गई। विक्रम सिंह? अंडरवर्ल्ड का दूसरा किंग? लेकिन आर्यन को बताए या नहीं? शक के बीच डर। रात भर नींद न आई।सुबह आर्यन लिविंग रूम में नाश्ता कर रहा था। कंधे का बैंडेज हट चुका, लेकिन चाल में सावधानी। अनन्या चाय लेकर आई, आँखें सूजी हुईं। आर्यन ने नोटिस किया, "क्या हुआ? रोई?" अनन्या ने चाय रखी, गुस्से से बोली, "तुम्हारा प्रूफ झूठा है! भैया ने कुछ नहीं किया। विक्रम सिंह आया है, सुना?" आर्यन चौंका, फोन निकाला। "कौन बताया?" अनन्या चिल्लाई, "अंकित! तुम्हारी दुनिया से दूर रखो उसे!" झगड़ा भड़क गया। आर्यन ने पहली बार आवाज़ ऊँची की, "तू कुछ नहीं जानती! अर्जुन की मौत का बदला लूँगा। कॉन्ट्रैक्ट पूरा कर, या जेल वापस भेज दूँ भाई को!" अनन्या रो पड़ी, "तुम राक्षस हो आर्यन! प्यार नहीं, नफरत ही करूँगी!" दरवाजा पटककर कमरे में चली गई। आर्यन मुट्ठी भींचे खड़ा रहा, लेकिन आँखों में पछतावा झलका।दोपहर को आर्यन मीटिंग के लिए निकला। "घर मत छोड़ना। सिक्योरिटी बढ़ा दी," कहा और चला गया। अनन्या अकेली, मन भारी। नौकरानी ने खाना सर्व किया, लेकिन भूख न लगी। शाम को बोरियत में बालकनी पर खड़ी। जंगल की हवा, दूर पहाड़ियाँ। अचानक फोन – अंकित। "दीदी, पार्टी में आ जाओ। पुराने दोस्त मिलेंगे। सुरक्षित है।" अनन्या मना करना चाही, लेकिन मन भटका। "ठीक है, आधा घंटा।" साड़ी पहनी, चुपके गेट से निकल गई। पार्टी क्लब में – म्यूजिक, डांस, दोस्त। अंकित ने गले लगाया, "दीदी, खुश हो न?" अनन्या मुस्कुराई, लेकिन मन उदास। डांस फ्लोर पर घूम रही, तभी एक लड़का करीब आया – हैंडसम, स्माइल। "हाय अनन्या, अंकित का दोस्त राहुल। डांस?" अनन्या हँसी, हाथ थामा। पहली बार आजादी का एहसास।लेकिन मुसीबत आई। राहुल ने व्हिस्की ऑफर की, अनन्या ने मना किया। अचानक दो गुंडे आए, अनन्या को घसीटने लगे। "बॉस ने बुलाया!" अंकित दौड़ा, लेकिन पिट गया। अनन्या चिल्लाई। तभी धमाका – दरवाजा टूटा, आर्यन अंदर! काले कोट में, आँखें आग उगल रही। अकेले पाँच गुंडों पर टूट पड़ा। मुक्के, लातें, एक को टेबल से पटका। लीडर को कॉलर पकड़कर दीवार से सटाया, "किसका आदमी?" गुंडा हँसा, "विक्रम का! तेरा भाई व्यर्थ मरा राठौर!" आर्यन ने गन निकाली, लेकिन अनन्या चिल्लाई, "नहीं!" आर्यन रुका, गुंडे भागे। अनन्या को गोद में उठाया, कार में डाला। अंकित को भी सुरक्षित भेजा।घर लौटे। अनन्या काँप रही, गंदे कपड़े। आर्यन ने पानी लाया, "तुम्हें कहा था मत जाना!" अनन्या रो पड़ी, "सॉरी... डर गई।" आर्यन करीब बैठा, पहली बार हाथ थामा। "डरो मत। मैं हूँ न।" उसकी आँखों में गर्माहट। अनन्या का दिल धड़का। ठंडे आर्यन में आग दिखी। "तुम... हमेशा बचाते हो। क्यों?" आर्यन चुप। करीब आया, माथे पर हाथ रखा। अनन्या शरमा गई। वो स्पर्श – पहली बार महसूस हुआ, ये अजनबी नहीं। "कॉन्ट्रैक्ट से ज्यादा... कुछ हो रहा?" अनन्या ने धीरे कहा। आर्यन मुस्कुराया, "शायद। लेकिन सच पहले।" अनन्या सिर हिलाया। दोनों चुप, नज़रें मिली। हवा में रोमांस की शुरुआत।रात को डिनर। आर्यन ने खुद पनीर टिक्का बनाया। "ट्राई करो।" अनन्या हँसी, "तुम कुकिंग?" दोनों बातें करने लगे – बचपन, सपने। आर्यन ने बताया, "अर्जुन मेरा सहारा था। उसकी मौत ने मुझे बदल दिया।" अनन्या ने हाथ रखा, "भैया निर्दोष है आर्यन। साथ ढूँढेंगे सच।" पहली बार करीब आए दिल। लेकिन आर्यन का फोन बजा। अनजान नंबर। "बॉस, विक्रम का मैसेज। असली कातिल मिला। अनन्या का ही चचेरा भाई... राकेश मिश्रा।" आर्यन स्तब्ध। अनन्या को देखा। क्या धोखा?