VORTX - 3 in Hindi Science-Fiction by Suresh sondhiya books and stories PDF | VORTX - 3

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VORTX - 3

— "ब्रह्मांड की दरार: 5वीं सदी का वो खौफनाक सफर"

दृश्य 1: भविष्य की चेतावनी

स्थान: डॉ. आरव की सीक्रेट लैब (वर्ष 3020)

आरव की आँखें स्क्रीन पर जम गई थीं। पसीने की एक बूंद उसके माथे से टपक कर गाल तक आ गई। स्क्रीन पर खून जैसे लाल अक्षरों में चमक रहा था— "VORTX"।

उस एक शब्द ने आरव के दिमाग में 440 वोल्ट का करंट दौड़ा दिया। वह धम्म से ज़मीन पर घुटनों के बल बैठ गया और अपने सिर को दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया।

"एमएसएस (MSS)... वीओआरटीएक्स (VORTX)..." वह पागलों की तरह बुदबुदाया। "हे भगवान! यह... यह कोई साधारण मैसेज नहीं है। यह 'वॉर्टेक्स कोड' है! वही कोड, जो सालों से मेरी टाइम-मशीन की इक्वेशन में कम पड़ रहा था।"

उसने गैजेट की स्क्रीन को छुआ। "और यह मैसेज... यह मैंने ही भेजा है! भविष्य के आरव ने मुझे यह रास्ता दिखाया है!"

अब उसके पास सोचने का एक सेकंड भी नहीं था। आरव झटके से उठा, लेदर जैकेट पहनी और अपनी बाइक स्टार्ट करके आंधी की रफ़्तार से घर की तरफ निकल पड़ा। लेकिन रास्ते में ही एक भारी-भरकम साये ने उसका रास्ता रोक लिया।

वह 'रोबोट अंकल' थे।

(रोबोट अंकल कोई मशीन नहीं, बल्कि आरव के पुराने साथी और गैजेट्स के उस्ताद थे। उनके शरीर पर हमेशा तरह-तरह के टूल और तार लटके रहते थे, इसीलिए सब उन्हें 'रोबोट अंकल' बुलाते थे।)

"डॉक्टर, इतनी जल्दी कहाँ भागे जा रहे हो?" रोबोट अंकल ने अपनी भारी और गंभीर आवाज़ में कहा। "घर जाने से पहले हमें एक और जगह जाना होगा। समय की यात्रा अकेले नहीं की जा सकती, यह खेल बच्चों का नहीं है।"

दृश्य 2: हिमालय का रहस्य

स्थान: हिमालय की बर्फीली चोटियां (गुप्त गुफा)

आरव और रोबोट अंकल भारी बर्फ़बारी को चीरते हुए हिमालय की एक गुप्त गुफा में पहुँचे। यह 'गुरूज़' (The Gurus) का स्थान था। गुफा के अंदर बाहर के तूफ़ान से एकदम उलट, एक रूहानी शांति और दिव्यता थी। सामने एक ऊंचे पत्थरों के आसन पर 'सुप्रीम गुरु' ध्यान में बैठे थे।

सुप्रीम ने अपनी बंद आँखों से ही उन्हें पहचान लिया। "मशीनों का उस्ताद और यह बेचैन वैज्ञानिक... आज मेरी शरण में क्या कर रहे हैं?"

रोबोट अंकल आगे बढ़े, "सुप्रीम, आसमान का सीना फट रहा है। हमें एक मार्गदर्शक चाहिए। एक ऐसा साथी जो 'कालचक्र' (Time Travel) के नियमों और खतरों को समझता हो। हम ब्रह्मांड में पड़ी उस दरार को भरने जा रहे हैं।"

सुप्रीम ने एक गहरे सन्नाटे के बाद अपनी आँखें खोलीं। उनकी नज़रें कोने में बैठे एक बेहद बुजुर्ग और तेजस्वी साधु पर पड़ीं।

"शास्त्री जी तुम्हारे साथ जाएंगे," सुप्रीम ने गंभीर स्वर में चेतावनी दी। "लेकिन याद रखना डॉक्टर आरव... तुम अतीत में जाकर केवल उतना ही बदल सकते हो जितना 'लिखा' हुआ है। अगर तुमने समय के बहाव से ज्यादा छेड़छाड़ करने की कोशिश की, तो परिणाम विनाशकारी होंगे।"

दृश्य 3: 5वीं सदी का सफर

स्थान: आरव की लैब

शास्त्री जी, आरव और रोबोट अंकल तुरंत वहां से निकले और सीधे आरव की सीक्रेट लैब में पहुँचे।

जैसे ही शास्त्री जी ने लैब में कदम रखा, वे अवाक रह गए। दीवारों पर सैकड़ों मोटे तार मकड़ी के जाल की तरह फैले थे, कमरे में चार विचित्र सीटें लगी थीं और बीच में एक विशाल धातु का छल्ला (Time Ring) खड़ा था।

"एक मामूली मनुष्य के पास काल को भेदने की इतनी दैवीय शक्ति?" शास्त्री जी अचरज में बुदबुदाए।

डॉ. आरव ने समय बर्बाद नहीं किया। उन्होंने तेज़ी से एक विशेष 'माइक्रोचिप' निकाली, उसे एक नीले रंग के केमिकल में डुबोया और फिर मेन कंप्यूटर के स्लॉट में ठोक दिया। रोबोट अंकल ने तुरंत मशीन को पूरी ताकत देने के लिए एक शक्तिशाली 'लिथियम बैटरी' का भारी कनेक्शन जोड़ा।

पूरी लैब 'हम्म्म्म...' की भारी आवाज़ के साथ कांप उठी। धातु के छल्ले के बीच नीली बिजली कौंधने लगी।

आरव ने कीबोर्ड पर अपनी उंगलियां दौड़ाईं। "हम कहाँ जाएं अंकल? इस दरार को रोकने का राज कहाँ दफ़न है?"

रोबोट अंकल ने अपने हाथ में पकड़े टैबलेट पर कुछ गणना की, "हमें उसी दिन जाना होगा जब यह दरार शुरू हुई थी।"

"नहीं!" तभी शास्त्री जी ने टोकते हुए कहा। "हमें जड़ तक जाना होगा। हमें पांचवीं शताब्दी में चलना चाहिए... 'मांदर राज्य' के 'तारा शहर' में। वहां एक प्राचीन मंदिर है, जहाँ ब्रह्मांड की भविष्यवाणियों के गुप्त अभिलेख मौजूद हैं।"

आरव ने कांपते हाथों से कोड डाला— [YEAR: 500 AD - LOCATION: TARA CITY]

उसने लाल 'एंटर' बटन दबाया।

एक कान फोड़ देने वाला धमाका हुआ! लैब की लाइटें फुसफुसाईं, और देखते ही देखते वे तीनों उस कमरे से गायब हो गए।

दृश्य 4: तारा शहर और प्राचीन चेतावनी

स्थान: तारा शहर का मंदिर (वर्ष 500 AD)

जब आरव ने अपनी आँखें खोलीं, तो वह एक पुरानी दुनिया में था। सामने पुराने पत्थर के मकान थे, लोग अजीब वेशभूषा में थे और ठीक सामने एक विशाल, रहस्यमयी प्राचीन मंदिर खड़ा था।

"यह काम कर गया! मैंने कर दिखाया!" आरव खुशी से चिल्लाने ही वाला था कि शास्त्री जी ने उसे रोक दिया।

"अपनी जीत का जश्न बाद में मनाना डॉक्टर," शास्त्री जी ने आरव की कलाई पर बंधी डिवाइस की तरफ इशारा किया। "तुम्हारी यह मशीन इस काल में सिर्फ कुछ ही देर टिक सकती है। हमारे पास बहुत कम समय है।"

वे तीनों दौड़ते हुए मंदिर के गर्भ-गृह में पहुँचे। वहां दीवारों पर अजीबोगरीब चित्र और भाषा उकेरी गई थी। रोबोट अंकल ने तुरंत अपनी टॉर्च और मैग्निफाइंग ग्लास (Magnifying Glass) से पत्थरों को स्कैन करना शुरू किया।

"मिल गया!" रोबोट अंकल एक पुराने, टूटे हुए पत्थर के पास रुके। "यहाँ लिखा है— R3G7।"

"यह हमारे ब्रह्मांड का कोड-नेम है," शास्त्री जी ने प्राचीन भाषा को पढ़ते हुए अनुवाद किया। "इसमें लिखा है... 'यदि भविष्य में कभी आकाश फट जाए, तो उसका उपाय केवल 'ग्रेट नथिंग' (Great Nothing) में है। वहां रखे सिंहासन के नीचे एक पवित्र वस्तु है, जिसे हटाने पर ही यह प्रलयकारी दरार पैदा होती है।' "

आरव का दिल जोर से धड़कने लगा। "तो उसे ठीक कैसे करें गुरुजी?"

शास्त्री जी ने आगे पढ़ा, "उस दरार को भरने के लिए... किसी को उस वस्तु के स्थान पर अपने 'रक्त की एक बूंद' रखनी होगी और सिंहासन को वापस सही जगह पर करना होगा। ऐसा करते ही एक द्वार खुलेगा... जो किसी दूसरे ब्रह्मांड की ओर जाता है। जब वह द्वार खुल जाए, समझ लेना कि खतरा टल गया है।"

तभी आरव की घड़ी से एक तीखी आवाज़ आई— बीप... बीप... बीप...

आरव ने स्क्रीन देखी। टाइमर लाल हो चुका था।

[चेतावनी: वापसी के लिए केवल 10 मिनट शेष]

आरव का पसीना छूट गया। अभी उन्हें 'ग्रेट नथिंग' ढूंढना था, वहां पहुंचना था और यह सब सिर्फ 10 मिनट में करना था। अगर वे चूके, तो वे हमेशा के लिए इसी सदी में फंसकर सड़ जाएंगे।

"दौड़ो!" आरव चिल्लाया।

"रुको!" शास्त्री जी की आवाज़ मंदिर के पत्थरों से टकराकर गूंजी। उनकी आँखों में खौफ था। उन्होंने अभिलेख की आखिरी पंक्ति पर अपनी उंगली रखी।

"हम गलत समझ रहे थे आरव! 'ग्रेट नथिंग' इस काल में नहीं है। यहाँ साफ़ लिखा है— 'यह स्थान समय के उस छोर पर है जहाँ मनुष्य लोहे और बिजली से बात करेगा।' "

आरव का खून जम गया। "क्या? इसका मतलब 'ग्रेट नथिंग' हमारे ही समय में है? 3020 में?"

"हाँ!" शास्त्री जी चिल्लाए। "हम यहाँ समाधान ढूंढने नहीं, सिर्फ यह 'पता' (Address) जानने आए थे। हमें अभी, इसी वक्त वापस लौटना होगा। वह दरार हमारे ही समय में खुलेगी!"

बीप... बीप... बीप...

आरव की कलाई पर बंधी घड़ी ने खतरे की घंटी बजा दी।

[टाइम मशीन अस्थिर: 08:00 मिनट शेष]

अगर वे 8 मिनट के अंदर मशीन तक नहीं पहुंचे, तो 'वॉर्महोल' (Wormhole) बंद हो जाएगा और वे हमेशा के लिए 5वीं शताब्दी में कैद हो जाएंगे— जहाँ न बिजली है, न लैब, और न ही घर जाने का कोई रास्ता।

"मशीन यहाँ से दो किलोमीटर दूर जंगल में है!" आरव ने मुट्ठी भींची। "दौड़ो!"

दृश्य 5: मौत की दौड़ (The Countdown)

तीनों मंदिर की सीढ़ियों से नीचे कूदे। प्राचीन तारा शहर के लोग इन अजीब कपड़े पहने लोगों को भागते देख हैरान थे। लेकिन आरव को किसी की परवाह नहीं थी। उसके दिमाग में सिर्फ एक ही चीज़ चल रही थी— ब्रह्मांड का अंत।

रोबोट अंकल समझ गए कि बूढ़े शास्त्री जी इतनी तेज़ नहीं दौड़ पाएंगे। उन्होंने बिना एक पल गंवाए शास्त्री जी को अपने कंधों पर लाद लिया।

"अपनी सांसें थाम लो गुरुजी!" रोबोट अंकल ने कहा और अपनी पूरी ताकत लगाकर चीते की रफ़्तार से जंगल की तरफ भागे।

पीछे-पीछे आरव अपनी पूरी जान लगाकर दौड़ रहा था। फेफड़े जल रहे थे, पैरों में दर्द हो रहा था, लेकिन वह रुका नहीं।

[04:00 मिनट शेष...]

जंगल की कंटीली झाड़ियाँ उनके कपड़े और त्वचा फाड़ रही थीं।

"जल्दी डॉक्टर! मशीन का सिग्नल टूट रहा है!" रोबोट अंकल आगे से चिल्लाए।

सामने खाली मैदान में वह धातु का छल्ला खड़ा था। लेकिन उसमें से चिंगारियां निकल रही थीं और वह धीरे-धीरे पारदर्शी (Invisible) होने लगा था। पोर्टल बंद हो रहा था!

[01:00 मिनट शेष...]

"कूद जाओ!" आरव पूरी ताकत से चीखा।

रोबोट अंकल ने शास्त्री जी के साथ मशीन के दायें हिस्से में एक लंबी छलांग लगाई। आरव लड़खड़ाया... उसका पैर पेड़ की एक मोटी जड़ में फंसा और वह गिरते-गिरते बचा।

घड़ी ने आखिरी खौफनाक चेतावनी दी: [10... 9... 8...]

आरव ने ज़मीन पर खून से सना हाथ मारा और अपनी आख़िरी ताकत जुटाकर मशीन की तरफ झपटा।

जैसे ही उसका हाथ मशीन के हैंडल पर पड़ा... टाइमर शून्य (0) पर पहुँच गया।

[00:00]

एक भयंकर, अंधी कर देने वाली सफ़ेद रौशनी (Flash) हुई। इतनी तेज कि पूरा जंगल दिन की तरह चमक उठा।

एक भयानक धमाके के साथ मशीन वहां से गायब हो गई... और पीछे रह गया सिर्फ़ 5वीं शताब्दी का खौफनाक सन्नाटा और उड़ती हुई धूल।

दृश्य 6: असली मुसीबत

स्थान: वर्ष 3020 (आरव की लैब)

लैब के ठंडे फर्श पर धम्म से तीनों आ गिरे। धुआं निकल रहा था।

आरव हांप रहा था, उसका दिल किसी हथौड़े की तरह पसलियों से टकरा रहा था। उसने अपनी घड़ी देखी— वे सही सलामत वापस आ गए थे।

शास्त्री जी ने उठते हुए कांपती आवाज़ में कहा, "हम बच गए... लेकिन असली मुसीबत अब शुरू हुई है आरव। अब हमें अपने ही समय में उस 'ग्रेट नथिंग' को ढूंढना है और उस दरार को भरना है।"

आरव ने धीरे से अपना सिर उठाया और कंप्यूटर स्क्रीन की ओर देखा जहाँ 'VORTX' कोड अभी भी चमक रहा था।

"तैयार हो जाइये," आरव ने दृढ़ता से कहा। "ब्रह्मांड को बचाने का खेल अब शुरू होता है।"

(स्क्रीन काली हो जाती है)

लेखक: सुरेश सोंधिया

फूल बनकर मुस्कुराना जिंदगी है,

मुस्कुरा के गम भुलाना जिंदगी है,

मिलकर लोग खुश होते है तो क्या हुआ,

बिना मिले रिश्ता निभाना जिंदगी