शिमला की वो रात आम रातों जैसी नहीं थी। खिड़की के बाहर घना कोहरा पहाड़ों को अपनी आगोश में लिए हुए था, जैसे कोई राज़ छुपाने की कोशिश कर रहा हो। मायरा अपने आलीशान लेकिन पुराने विला के लिविंग रूम में बैठी थी। हाथ में कॉफी का मग था, जिसकी गर्माहट उसकी हथेलियों को सुकून दे रही थी, पर उसका दिल किसी अनजाने डर से कांप रहा था।
मायरा एक मशहूर आर्किटेक्ट थी, जो अपने अतीत के जख्मों को भरने के लिए इस शांत शहर में आई थी। अचानक, सन्नाटे को चीरते हुए उसके मुख्य द्वार पर एक भारी दस्तक हुई।
'ठक... ठक... ठक...'
इस वक्त? रात के दो बजे? मायरा का दिल गले को आ गया। उसने दबे पांव दरवाजे के पास जाकर 'आई-होल' से बाहर झांका। बाहर अंधेरा था, लेकिन पीली लाइट की मद्धम रोशनी में एक लंबा, गबरू जवान शख्स खड़ा था। उसने डार्क ब्लू ओवरकोट पहना था और उसके कंधे बर्फ से ढके थे।
मायरा ने कांपते हाथों से कुंडी खोली। दरवाजा खुलते ही ठंडी हवा का एक झोंका अंदर आया और उसके साथ आई एक ऐसी खुशबू—चंदन और सिगार का मेल—जो मायरा को अंदर तक महका गई।
"जी? आप कौन?" मायरा ने अपनी आवाज को सख्त करने की कोशिश की।
सामने खड़े शख्स ने अपनी नजरें उठाईं। उसकी आंखें... वो इतनी गहरी और नशीली थीं कि मायरा एक पल के लिए अपनी सुध-बुध खो बैठी। चेहरे पर हल्की दाढ़ी और होंठों पर एक ऐसी मुस्कान, जो जितनी दिलकश थी, उतनी ही रहस्यमयी।
"माफी चाहता हूं इस वक्त परेशान करने के लिए। मेरी गाड़ी खाई के पास खराब हो गई है और मेरा फोन भी काम नहीं कर रहा। क्या मैं अंदर आकर एक कॉल कर सकता हूं?" उसकी आवाज भारी और मखमली थी, जैसे कोई पुरानी वायलिन बज रही हो।
मायरा को पता था कि अजनबियों को घर में घुसने देना खतरे से खाली नहीं, पर उस शख्स की आंखों में एक ऐसी कशिश थी कि मायरा ने उसे अंदर आने का रास्ता दे दिया।
"अंदर आइये," मायरा ने कहा।
उस शख्स ने अंदर कदम रखा। उसका नाम आर्यन था। उसने अपना कोट उतारा और सोफे पर बैठ गया। मायरा उसे फोन देने के लिए मुड़ी, तभी आर्यन ने उसका हाथ पकड़ लिया। बिजली के करंट जैसा अहसास मायरा के पूरे जिस्म में दौड़ गया।
"इतनी घबराई हुई क्यों हो, मायरा?" आर्यन ने धीमे से पूछा।
मायरा चौंक गई। "तुम्हें... तुम्हें मेरा नाम कैसे पता?"
आर्यन खड़ा हुआ और धीरे-धीरे मायरा की तरफ बढ़ने लगा। वह पीछे हटी, यहां तक कि उसकी पीठ दीवार से जा लगी। आर्यन ने अपने दोनों हाथ दीवार पर टिका दिए, मायरा को अपने घेरे में लेते हुए। उसके चेहरे की दूरी मायरा से महज कुछ इंच थी। रोमांस की एक लहर दोनों के बीच बहने लगी, सांसें आपस में टकरा रही थीं।
"तुम्हें क्या लगा था? तुम दुनिया के किसी भी कोने में चली जाओगी और मैं तुम्हें ढूंढ नहीं पाऊंगा?" आर्यन की आवाज में अब प्यार के साथ-साथ एक सनक भी थी।
मायरा का गला सूख गया। "मैं तुम्हें नहीं जानती... तुम कौन हो?"
आर्यन ने अपनी जेब से एक सोने की चेन निकाली, जिसमें एक छोटा सा लॉकेट था। उसने उसे खोलकर मायरा के सामने किया। उस लॉकेट के अंदर दो तस्वीरें थीं—एक आर्यन की और दूसरी मायरा की। लेकिन मायरा की उस तस्वीर में उसके चेहरे पर खून के निशान थे और उसकी आंखें बंद थीं।
तस्वीर को देखकर मायरा की चीख निकलने ही वाली थी कि आर्यन ने उसके होंठों पर अपना हाथ रख दिया।
"चुप... शोर नहीं जानम। आज की रात सिर्फ हमारे मिलने की रात नहीं है, बल्कि उस गुनाह के हिसाब की रात है जो तुमने तीन साल पहले किया था।"
आर्यन ने धीरे से मायरा के कान के पास झुककर फुसफुसाया, "लोग कहते हैं कि तुमने मुझे मार दिया था... पर देखो, मैं वापस आ गया हूं। तुम्हारा प्यार लेने या तुम्हारी जान लेने... ये फैसला आज रात होगा।"
अचानक विला की सारी बत्तियां गुल हो गई। अंधेरे में सिर्फ आर्यन की आंखों की वो लाल चमक दिख रही थी, जो किसी शिकारी की तरह लग रही थी। मायरा को महसूस हुआ कि उसके गले पर कोई ठंडी और नुकीली चीज छुई है—शायद एक चाकू।
"तो बताओ मायरा, पहले रोमांस शुरू करें या इंतकाम?"
क्या मायरा ने सच में आर्यन का कत्ल करने की कोशिश की थी?
आर्यन के पास मायरा की वो 'मरी हुई' तस्वीर कहां से आई?
क्या ये सच में आर्यन है या कोई उसका हमशक्ल जो मायरा को पागल करना चाहता है?