💎 Shaadi, Saazish aur Teen Dil
Part 4 – Mandap Ka Faisla
हॉल में अब सिर्फ फैमिली के लोग बचे थे।
बाहर मीडिया का शोर अभी भी सुनाई दे रहा था – चीखें, फ्लैश, सवाल।
अंदर का माहौल इतना भारी था कि साँस लेना भी मुश्किल लग रहा था।
विक्रम माल्होत्रा कुर्सी पर बैठे थे, सिर दोनों हाथों में पकड़े।
प्रिया माल्होत्रा पास में खड़ी रो रही थीं – चुपचाप, लेकिन लगातार।
राजेश माल्होत्रा (चाचा) बार-बार फोन देख रहे थे, जैसे कोई मैसेज का इंतज़ार हो।
राघव दीवार से टिका हुआ था, आँखें बंद, लेकिन मुट्ठियाँ इतनी सख्त कि नाखून हथेली में गड़ रहे थे।
और बीच में आरव और मीरा।
दोनों खड़े थे – एक-दूसरे से थोड़ी दूरी पर।
आरव की आँखें मीरा पर टिकी हुई थीं।
मीरा की आँखें ज़मीन पर।
आरव ने सबसे पहले खामोशी तोड़ी।
“पापा… फैसला लेना होगा।
अभी।
कल सुबह तक अगर हम कुछ नहीं बोले… तो स्टॉक मार्केट खुलते ही सब कुछ गिर जाएगा।
पार्टनर्स कॉल करेंगे, बैंक वाले पूछताछ करेंगे, मीडिया हमें बर्बाद कर देगा।
हमारी इमेज – माल्होत्रा एम्पायर की इमेज – बचानी है।”
विक्रम ने सिर उठाया।
आवाज़ थकी हुई।
“और कैसे बचाएँ?
राघव की शादी टूट गई।
नताशा ने सबके सामने… बच्चे की बात कर दी।
अब कौन शादी करेगा?
कौन इतनी जल्दी…?”
आरव ने धीरे से कहा,
“मैं।”
सबकी साँसें थम गईं।
राघव ने आँखें खोलीं।
“तू…?”
आरव ने सिर हिलाया।
“हाँ।
मैं आज ही शादी कर लूँगा।
उसी मंडप में।
पंडित अभी बाहर हैं।
फूल अभी ताज़ा हैं।
दीये अभी जल रहे हैं।
बस दुल्हन बदलनी है।”
प्रिया ने रोते हुए कहा,
“आरव… बेटा… ये क्या बोल रहे हो?
तुम्हारी शादी… इतनी जल्दी… और किससे?”
आरव ने मीरा की तरफ देखा।
“उससे।
मीरा शर्मा से।”
मीरा ने सिर उठाया।
उसकी आँखों में शॉक था।
“मुझसे?
तुम… पागल हो गए हो?”
आरव ने शांत स्वर में कहा,
“नहीं।
ये सबसे लॉजिकल तरीका है।
तुम पहले से ही यहाँ हो।
तुमने वो फोन कॉल सुना।
तुम्हें पता है कि कोई तुम्हें टारगेट कर रहा है।
अगर तुम बाहर गईं… तो वो आदमी तुम्हें इस्तेमाल करेगा।
अगर तुम मेरे साथ रहीं… तो तुम सुरक्षित रहोगी।
और हमारी फैमिली की इज्ज़त भी बच जाएगी।
दुनिया कहेगी – स्कैंडल हुआ, लेकिन माल्होत्रा फैमिली ने हिम्मत दिखाई।
आरव ने तुरंत फैसला लिया।
एक साधारण लड़की से शादी करके फैमिली को बचाया।
ये स्टोरी… मीडिया को पसंद आएगी।
स्टॉक स्थिर रहेगा।
पार्टनर्स रुक जाएँगे।”
मीरा ने गुस्से से कहा,
“तो मैं तुम्हारी इमेज सेव करने की चीज़ हूँ?
एक प्रॉप?
एक डमी ब्राइड?”
आरव ने कहा,
“नहीं।
तुम एक पार्टनर हो।
एक डील में।
तुम्हें भी फायदा मिलेगा।
तुम्हारे पिता का केस… मैं दोबारा खोलूँगा।
मेरे रिसोर्सेज़, मेरे वकील, मेरी पावर – सब इस्तेमाल होगा।
तुम्हें सच मिलेगा।
और मेरी फैमिली को इज्ज़त।
विन-विन।”
राजेश चाचा ने बीच में कूदकर कहा,
“आरव… ये ठीक नहीं।
ये लड़की कौन है?
कैटरिंग वाली?
हमारे घर में…?”
आरव ने चाचा की तरफ ऐसी नज़र डाली कि राजेश चुप हो गए।
“चाचा… अभी चुप रहिए।
फैसला मेरा है।
और ये फैसला… आज रात ही लागू होगा।”
मीरा ने कदम आगे बढ़ाया।
“और अगर मैं मना कर दूँ?
अगर मैं कहूँ कि मुझे तुम्हारी इस डील में कोई दिलचस्पी नहीं?”
आरव ने मुस्कुराकर कहा,
“तुम मना नहीं करोगी।
क्योंकि तुम्हें पता है… बाहर वो आदमी इंतज़ार कर रहा है।
उसने तुम्हारा नाम लिया।
अगर तुम अकेली रहीं… तो वो तुम्हें अगले २४ घंटों में संपर्क करेगा।
या… खत्म करने की कोशिश करेगा।
मेरे साथ… तुम्हें समय मिलेगा।
सुरक्षा मिलेगी।
और सबसे बड़ा… जानकारी मिलेगी।
माल्होत्रा हाउस के अंदर रहकर… तुम सब कुछ देखोगी।
सुनोगी।
जानोगी।
वो राज़ जो तुम्हारे पिता की मौत से जुड़े हैं… शायद यहीं छुपे हैं।”
मीरा चुप हो गई।
उसके मन में हजार बातें चल रही थीं।
माँ का चेहरा… घर का लोन… पढ़ाई… पिता की मौत का दर्द… और वो पुरानी फोटो।
वो धीरे से बोली,
“ठीक है।
मैं मान जाती हूँ।
लेकिन मेरी तीन शर्तें हैं।”
आरव ने सिर हिलाया।
“बोलो।”
मीरा ने उँगलियाँ गिनकर कहा –
“पहली – ये सिर्फ नाम की शादी होगी।
६ महीने।
उसके बाद तलाक।
कोई सवाल नहीं।
दूसरी – मेरी माँ की सेफ्टी।
उनकी जॉब, उनका घर – सब सुरक्षित रहेगा।
तुम्हारी ज़िम्मेदारी।
तीसरी – मेरे पिता के केस में तुम पूरी मदद करोगे।
कोई छुपाव नहीं।
कोई बहाना नहीं।
सच तक पहुँचने में… कोई रुकावट नहीं।”
आरव ने एक सेकंड सोचा।
फिर हाथ आगे बढ़ाया।
“डील।
सारी शर्तें मंज़ूर।”
मीरा ने हाथ मिलाया।
उसके हाथ ठंडे थे।
आरव के गर्म।
दोनों की नज़रें मिलीं।
एक पल के लिए… कुछ ऐसा लगा जैसे समय रुक गया हो।
लेकिन मीरा ने नज़र हटा ली।
आरव ने विक्रम की तरफ देखा।
“पापा… पंडित जी को बुलाइए।
स्टाफ को तैयार होने को कहिए।
शादी… ३० मिनट में।”
विक्रम ने सिर हिलाया।
प्रिया ने आँसू पोछे और मीरा के पास आईं।
“बेटी… मुझे माफ़ करना।
ये सब… इतनी जल्दी…”
मीरा ने धीरे से कहा,
“आंटी… मैं समझती हूँ।
मैं भी मजबूर हूँ।
लेकिन… मैं कोशिश करूँगी कि ये फैमिली के लिए अच्छा साबित हो।”
राघव ने अचानक आवाज़ दी।
“भाई… तू सच में ये कर रहा है?
एक अनजान लड़की से… सिर्फ फैमिली के लिए?”
आरव ने भाई की तरफ देखा।
“हाँ।
क्योंकि फैमिली पहले आती है।
तू जानता है।”
राघव ने सिर हिलाया।
फिर बाहर की तरफ चला गया।
आरव ने मीरा से कहा,
“तुम्हें तैयार होना होगा।
स्टाफ अभी लहंगा लाएगा।
मेकअप… सब।
तुम तैयार हो जाओ।
मैं बाहर मीडिया को हैंडल करता हूँ।”
मीरा ने सिर हिलाया।
“ठीक है।
लेकिन एक बात याद रखना…
ये डील है।
और डील में… भावनाएँ नहीं आनी चाहिए।”
आरव ने हल्का सा मुस्कुराया।
“मुझे पता है।
लेकिन याद रखना…
डील तुमने मानी है…
रूल्स… मैं बनाऊँगा।
और पहला रूल –
तुम कभी मुझसे झूठ नहीं बोलोगी।
क्योंकि अगर बोलीं… तो मैं जान लूँगा।
और फिर… कोई दूसरा मौका नहीं मिलेगा।”
मीरा ने कहा,
“डील।”
और फिर वो स्टाफ के साथ तैयार होने चली गई।
आरव बाहर निकले।
मीडिया की भीड़ पर नज़र डाली।
फिर माइक उठाया।
“सुनिए सब।
आज रात एक दुखद घटना हुई।
मेरे भाई की शादी टूट गई।
लेकिन माल्होत्रा फैमिली हार नहीं मानती।
हम इज्ज़त बचाएँगे।
और इसके लिए… मैं आज ही शादी कर रहा हूँ।
दुल्हन… मीरा शर्मा।
एक बहादुर और ईमानदार लड़की।
अब कोई सवाल नहीं।
थैंक यू।”
फ्लैश और तेज़ हो गए।
अंदर मीरा तैयार हो रही थी।
लहंगा पहना, सिंदूर की तैयारी।
उसने आईने में खुद को देखा।
एक दुल्हन।
लेकिन आँखों में कोई खुशी नहीं।
बस एक ठंडी चुनौती।
उसने खुद से कहा,
“ये सिर्फ शुरुआत है।
सच… जल्दी मिलेगा।
चाहे इसके लिए मुझे कितना भी खेलना पड़े।”
और बाहर… मंडप फिर से तैयार हो रहा था।
नई दुल्हन के लिए।
नई डील के लिए।
नई साजिश के लिए।
पार्ट ४ खत्म।
दोस्तों… अब सब क्लियर? 🔥
पार्ट ४ में फैसला हुआ – मीरा और आरव की डील फाइनल!
शर्तें, रूल्स, और वो आखिरी लाइन… कैसी लगी?
अब पार्ट ५ में शादी का पूरा सीन आएगा – फेरे, सिंदूर, मंगलसूत्र, मीडिया का तूफान, और कार में पहली प्राइवेट बात।
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