Invisible: Keeper of the Time Wheel - 3 in Hindi Mythological Stories by jassu books and stories PDF | अदृश्य: कालचक्र का रक्षक - 3

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अदृश्य: कालचक्र का रक्षक - 3

अंधेरा इतना अभेद्य और घना था कि आर्यन को अपनी आँखों के सामने अपनी ही हथेलियाँ दिखाई नहीं दे रही थीं। बनारस की वे संकरी गलियाँ, जो कुछ मिनट पहले तक उसके लिए जानी-पहचानी थीं, अब किसी पराई और खौफनाक दुनिया की भूलभुलैया जैसी महसूस हो रही थीं। सन्नाटा इतना गहरा था कि उसे अपने ही कानों में अपने खून के दौड़ने की और दिल की बेकाबू धड़कनों की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी। हवा जैसे थम सी गई थी, और वातावरण में एक अजीब सी भारीपन व्याप्त था।
अचानक, उसके गले में लटका वह रहस्यमयी लॉकेट, जो अभी कुछ पल पहले किसी दहकते हुए कोयले की तरह उसकी चमड़ी जला रहा था, एकदम से बर्फीला ठंडा हो गया। ठंडक इतनी तीव्र थी कि आर्यन को ऐसा महसूस हुआ जैसे उसकी छाती पर बर्फ का एक टुकड़ा जम गया हो। उसकी रीढ़ की हड्डी में एक सिहरन दौड़ गई।
"आर्यन... वापस मुड़ जाओ... अभी समय है..."
एक महीन, कांपती हुई फुसफुसाहट हवा की लहरों पर तैरती हुई उसके कानों तक आई। यह किसी मनुष्य की आवाज़ नहीं लग रही थी; इसमें एक ऐसी गूँज थी जैसे सदियों पुरानी दीवारें खुद उससे बात कर रही हों। आर्यन ने झटके से पीछे मुड़कर देखा, पर वहाँ सिवाय अंतहीन अंधेरे के कुछ न था। तभी, दूर एक पुरानी जर्जर हवेली के टूटे हुए झरोखे से एक मद्धम नीली रोशनी फूटती हुई दिखाई दी। वह रोशनी स्थिर नहीं थी, बल्कि किसी जीवित स्पंदन की तरह धड़क रही थी।
जैसे ही आर्यन ने अनचाहे कदमों से उस रोशनी की तरफ कदम बढ़ाया, उसे अहसास हुआ कि उसके पैरों के नीचे की ज़मीन हल्की-हल्की थरथरा रही है। देखते ही देखते, वातावरण में घड़ी की सुइयों के चलने की 'टिक-टिक' आवाज़ गूंजने लगी। शुरू में यह आवाज़ धीमी थी, लेकिन धीरे-धीरे यह इतनी तेज़ हो गई कि आर्यन को अपना सिर फटने जैसा महसूस होने लगा। सबसे अजीब बात यह थी कि यह आवाज़ किसी एक दिशा से नहीं, बल्कि हर ईंट, हर पत्थर और यहाँ तक कि हवा के कणों से आ रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे पूरा ब्रह्मांड एक विशाल घड़ी में तब्दील हो गया हो।
तभी उसकी नज़र गली के मुहाने पर पड़ी। वहाँ एक साया खड़ा था—अतिमानवीय रूप से लंबा, धुंधला और पूरी तरह स्थिर। उस साये के हाथ में एक प्राचीन, काले रंग की लकड़ी की छड़ी थी, जिसके ऊपरी सिरे पर एक पीतल की 'रेतघड़ी' (Hourglass) जड़ी थी। आर्यन की आँखें फटी की फटी रह गईं जब उसने देखा कि उस घड़ी के अंदर की सुनहरी रेत गुरुत्वाकर्षण के नियमों को चुनौती देते हुए नीचे गिरने के बजाय ऊपर की तरफ जा रही थी।
आर्यन के कदम पत्थर की तरह भारी हो गए। उसने अपनी कांपती हुई आवाज़ को बटोरकर पूछा, "कौन हो तुम? और यह सब... ये माया क्या है? मैं यहाँ कैसे पहुँचा?"
उस साये ने धीरे से अपना सिर ऊपर उठाया। जब आर्यन ने उसका चेहरा देखा, तो उसके मुँह से चीख निकलते-निकलते रह गई। उस साये की आँखें नहीं थीं; उसकी आँखों के कोटरों में अंधकार के बीच जलते हुए नक्षत्र और गैलेक्सियाँ घूम रही थीं। उसकी आवाज़ किसी गहरी गुफा से आती हुई गूँज जैसी थी:
"कालचक्र रुक चुका है, रक्षक। समय की धारा ने अपना मार्ग बदल लिया है। और तुम... तुम उस महान यंत्र की वह अंतिम 'चाबी' गले में लटकाए घूम रहे हो जिसे खोजने के लिए युगों से युद्ध लड़े गए हैं। पर याद रखना युवक, जब समय रुकता है, तो नियति अपनी बलि मांगती है। तुम्हारा हर बढ़ता कदम अब तुम्हारी जान की कीमत मांगेगा।"
आर्यन कुछ समझ पाता, उससे पहले ही उस रहस्यमयी आकृति ने अपनी लकड़ी की छड़ी को पूरी ताकत के साथ ज़मीन पर पटका। एक कान फाड़ देने वाला धमाका हुआ और नीली रोशनी का एक ऐसा बवंडर उठा जिसने आर्यन के अस्तित्व को ही अपनी लपेट में ले लिया। बनारस की वे तंग गलियाँ, वे पुरानी दीवारें और वह सन्नाटा—सब कुछ भाप बनकर उड़ गया।
जब आर्यन ने अपनी आँखें खोलीं, तो उसके सामने का दृश्य पूरी तरह बदल चुका था। वह अब बनारस की किसी गली में नहीं था। वह एक विशाल और भव्य मंदिर के प्रांगण में खड़ा था। यह मंदिर आधुनिक वास्तुकला से कोसों दूर था; इसकी ऊँची दीवारें काले पत्थरों से बनी थीं जिन पर ऐसी भाषा में मंत्र लिखे थे जो हज़ारों सालों से विलुप्त हो चुकी थीं। मंदिर के शिखर बादलों को छू रहे थे, और चारों ओर एक ऐसी रहस्यमयी ऊर्जा व्याप्त थी जो आर्यन के शरीर के हर रोम-रोम को झंकृत कर रही थी।
यह 'समय का मंदिर' था, जो इतिहास के पन्नों से मिटा दिया गया था। आर्यन को महसूस हुआ कि उसका लॉकेट अब मंदिर के गर्भगृह की दिशा में एक चुंबकीय खिंचाव पैदा कर रहा है। उसे समझ आ गया था कि वह अब केवल एक छात्र या एक आम लड़का नहीं रहा; वह एक ऐसे खेल का हिस्सा बन चुका था जहाँ हार का मतलब सिर्फ मौत नहीं, बल्कि पूरे विश्व के समय का अंत था।
सीढ़ियों पर पहला कदम रखते ही, मंदिर के भारी पत्थर के दरवाज़े अपने आप खुलने लगे, जैसे वे सदियों से इसी रक्षक की प्रतीक्षा कर रहे हों।
 क्या आर्यन को गर्भगृह तक पहुँचने के लिए किसी पहेली को सुलझाना होगा?
 पुराना रक्षक: क्या मंदिर के अंदर उसे कोई ऐसा चित्र या मूर्ति मिलेगी जो हुबहू उसके जैसी दिखती हो?
 दुश्मन की दस्तक: क्या वह साया उसका दोस्त है या दुश्मन? शायद कोई और भी है जो इस मंदिर की शक्तियों पर कब्ज़ा करना चाहता है।