Love... now it's only you. - 6 in Hindi Drama by vaishnavi Shukla books and stories PDF | आशिकी.....अब तुम ही हो। - 6

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आशिकी.....अब तुम ही हो। - 6

अध्याय:6

दृश्य: श्रद्धा का कमरा , छोटा पर सलीके से सजाया हुआ...!

श्रद्धा और प्रीति कमरे के बेड पर बैठी हुई है  उनके  सामने कुछ कागज पड़े हुए है जिसपर खूबसूरत डिसाइंस बने हुए है।

प्रीति:(उन पेपर्स को देखते हुए) वाह...! श्रद्धा, क्या बनाया है तूने जबरदस्त यार...!
(श्रद्धा उसकी बात सुनकर हल्का मुस्कुरा देती है।)

वही बेड के ठीक सामने की दीवार पर एक  डेकोरेटेड चौकोर बोर्ड लगा है जिसपर बड़े और खूबसूरत अक्षरों में लिखा है... Shraddha's Dreamweave Designs...!

श्रद्धा उसके पास जाकर खड़ी होती है और एक हाथ से  उस बोर्ड को छूती है (इस समय उसकी आंखो में एक चमक थी।)
(जिसे देख प्रीति मुस्कुराती है उसके पास आकर)

प्रीति:(श्रद्धा से) यूं इस बोर्ड को निहारने से आपके सपने पूरे नही होने वाले मैडम..!
(श्रद्धा प्रीति की तरफ देखती है।)

प्रीति: तुझे अपने टैलेंट को सबके सामने लाना पड़ेगा..!! ऐसे इन डिजाइंस को कमरे में कैद करके तू फैशन डिजाइनर नही बन जायेगी।

श्रद्धा: हम्म, प्रीति पता है मुझे ...पर उझे कोई छोटी मोटी डिजाइनर नही बनना...मुझे तो खुद की कंपनी खोलनी है..!!जिस के लिए मुझे एक्सपीरियंस चाहिए 
...और मैं सबकुछ अपने दम पर करना चाहती हूं।

प्रीति: तो तूने क्या सोचा है आगे का...!!

श्रद्धा:(थोड़ी देर रुक कर) मैने जॉब करनी की सोची है।... 

प्रीति: बढ़िया है,...वैसे भी इस साल ग्रेजुएशन भी कंप्लीट हो चुका है।

श्रद्धा: हम्म....! जन्माष्टमी का कार्यक्रम हो जाए फिर देखती हूं।
अच्छा ये सब छोड़ .. तू अनाथाश्रम क्यों नही गई..!(प्रीति एक अनाथाश्रम में जॉब करती है।)

प्रीति: छुट्टी ली है तीन दिन की... जन्माष्टमी बाद जाऊंगी।

श्रद्धा:(परेशान होते हुए) प्रीति, तू अपना काम क्यों छोड़ रही है। मैं संभाल लूंगी न..!!

प्रीति: हां हां पता है  कितना संभाल लेगी। (वापस बेड पर बैठते हुए) जाने दे..! कल का प्लान बता ।
(श्रद्धा भी बेड पर आके बैठ जाती है।)

श्रद्धा: (थोड़ी देर सोचते हुए )हां सुन..! कल तुझे पहले जाना होगा मार्केट ...मार्केट जाकर जरूरी सामान ले के मंदिर चली जाना ... मैं पार्थ को स्कूल छोड़कर मंदिर पहुंच जाऊंगी।

प्रीति:ओके बॉस..
(प्रीति और श्रद्धा दोनो हस्ती है।)
प्रीति:अच्छा ठीक है अब घर चलती हूं...बाय बाय 
श्रद्धा: ठीक । बाय
(प्रीति कमरे से निकल जाती है और श्रद्धा बेड और बिखरे कागज समेटने लगती है)

इधर , एक केबिन में जहां रजत जी ,आनंद और अनिरुद्ध मौजूद हैं ।

रजत:(खुशी से अनिरुद्ध को गले लगाकर) I am proud of my son...!! 
Congratulations Ani ..!!

अनिरुद्ध: अनिरुद्ध।

(इस समय अनिरुद्ध के चेहरे पर कोई एक्सप्रेशन नही थे ।)

रजत:अनी मेरे बच्चे। तुम  जब दिल्ली से अवॉर्ड लेके वापस लौटोगे तो हम एक ग्रैंड पार्टी रखेंगे।
 For your achievment। (खुशी से)

अनिरुद्ध:(विथ आउट एनी एक्सप्रेशन) there is no need for this..आपको मेरे लिए ये सब करने की कोई जरूरत नही है डैड ..!
(अनिरुद्ध की ये बात सुनकर रजत के चहरे की मुस्कान कम पड़ जाती है)

रजत:(अनिरुद्ध के कंधे पर हाथ रखते हुए) अनिरुद्ध, माना मैने गलती की थी  पर ..कब तक नाराज रहोगे बेटा..!!
अब तो माफ कर दो, भूल जाओ उस बात को।

अनिरुद्ध:(झुझलाकर उसका हाथ हटाते हुए ) भूल जाऊं...कैसे भूल जाऊं डैड..! मेरा सब कुछ छीन जाने का रीजन सिर्फ आप है।
मेरी मां के संस्कार है जो मैं आपसे respect से बात करता हूं इससे ज्यादा की expectation मुझसे मत रखिएगा..!
(केबिन में कुछ देर शांति छा जाती है)

अनिरुद्ध: अभी आपको कुछ और बात न करनी हो तो मैं जा सकता हूं..?
(अनिरुद्ध की बात सुनकर रजत कोई जवाब नही देते।)

अनिरुद्ध:(उन्हें कुछ न बोलते हुए देखकर) thank you..! (और केबिन से चला जाता है।)
रजत:(पीछे से) अनिरुद्ध...सुनो तो।
(पर अनिरुद्ध तब तक जा चुका था)

रजत आनंद की तरफ देखता है जो अभी तक उन दोनो को बाते सुन रहा था।

रजत :(आनंद से) आनंद बेटा..तुम्ही कुछ समझाओ इसे ..
आनंद:(मायूस होकर) मैं क्या समझाऊं मौसा जी...! में भी कुछ नही कर पा रहा ..! जो कुछ भी  हुआ ... उसके बाद उसने खुद को पूरी तरह बदल लिया ..!!
(अपनी बात के कह कर आनंद भी केबिन से निकल जाता है।)
रजत :(खुद से) अनिरुद्ध, मैं जानता हूं , मुझसे गलती हुई थी..! पर मैं कभी नही चाहता था की वैसा कुछ हो।
पर अगर मेरी गलती की वजह से तुम ऐसे हुए हो।...तो तुम्हे पहले जैसा बनाने का तरीका भी मैं ही दूंढूंगा।...मेरे बच्चे। (और उनकी आंखे हल्की नम हो जाती है। )

आज बस इतना ही....!!