रात के लगभग 2 बजे थे। बाहर तेज़ हवा चल रही थी। आसमान में बादल घिर आए थे और कभी-कभी बिजली चमक रही थी। हर बार जब बिजली चमकती, तो कमरे की खिड़की से बाहर खड़े पुराने पेड़ की डरावनी परछाईं दीवार पर दिखाई देती।
आदित्य अपने कमरे में अकेला था। उसके माता-पिता शहर से बाहर गए हुए थे और पूरा घर खाली था। वह बिस्तर पर लेटकर मोबाइल पर वीडियो देख रहा था।
अचानक उसके फोन पर एक अनजान नंबर से कॉल आया।
आदित्य ने स्क्रीन की तरफ देखा। नंबर अजीब था — जैसे कोई बहुत लंबा नंबर हो।
उसने सोचा शायद किसी ने गलती से कॉल कर दिया होगा, इसलिए उसने कॉल काट दी।
कुछ सेकंड बाद फिर वही नंबर कॉल करने लगा।
इस बार आदित्य थोड़ा चिढ़ गया। उसने कॉल उठाया और बोला —
“हैलो? कौन है?”
कुछ सेकंड तक बिल्कुल सन्नाटा रहा।
फिर फोन के दूसरी तरफ से बहुत धीमी और टूटी हुई आवाज़ आई —
“आ…दि…त्य…”
आदित्य का दिल हल्का-सा धड़क उठा।
उसने पूछा —
“कौन बोल रहा है?”
आवाज़ फिर आई —
“ध्यान से सुनो… तुम्हारे पास सिर्फ 10 मिनट हैं…”
आदित्य हँस पड़ा।
“क्या मतलब 10 मिनट?”
फोन के दूसरी तरफ से जवाब आया —
“10 मिनट बाद… तुम मरने वाले हो…”
आदित्य ने तुरंत कॉल काट दिया।
उसे लगा कोई दोस्त मज़ाक कर रहा है। लेकिन उसके मन में अजीब-सा डर बैठ गया।
तभी उसके फोन पर एक मैसेज आया।
अनजान नंबर:
“पीछे मत देखना।”
अब आदित्य थोड़ा घबरा गया। उसने कमरे में चारों तरफ देखा। सब कुछ सामान्य था।
बिस्तर, टेबल, कुर्सी… और दीवार पर लगा आईना।
तभी फिर मैसेज आया —
“मैंने कहा था… पीछे मत देखना…”
अब उसका गला सूखने लगा।
अचानक उसे महसूस हुआ कि कमरे का तापमान कम हो गया है।
खिड़की धीरे-धीरे अपने आप खुलने लगी।
किर्रररर… की आवाज से आदित्य और डरने लगा।
ठंडी हवा कमरे में भर गई।
आदित्य ने फोन पर टाइम देखा।
2:05 AM
तभी फोन फिर बजा।
वही नंबर।
इस बार उसने डरते-डरते कॉल उठाया।
दूसरी तरफ वही टूटी हुई आवाज़ आई —
“अभी भी समय है… गलती मत करना…”
आदित्य काँपती आवाज़ में बोला —
“तुम हो कौन?”
कुछ सेकंड बाद जवाब आया —
“मैं… तुम ही हूँ…”
आदित्य चिल्लाया —
“बकवास बंद करो!”
आवाज़ बोली —
“मैं भविष्य का तुम हूँ… और मैं मर चुका हूँ…”
कमरे में अचानक किसी के चलने की आवाज़ आई।
टप… टप… टप…
जैसे कोई धीरे-धीरे उसके पीछे चल रहा हो।
आदित्य अब पूरी तरह डर चुका था।
उसने घबराकर पूछा —
“मेरे साथ क्या होने वाला है?”
फोन की आवाज़ फुसफुसाई —
“तुम पीछे मुड़ोगे… और उसी चीज़ को देखोगे… जिसने मुझे मार दिया…”
आदित्य ने पीछे देखने की कोशिश नहीं की।
उसका दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि उसे खुद अपनी धड़कन सुनाई दे रही थी।
अचानक कमरे की लाइट झपकने लगी।
ऑन… ऑफ… ऑन… ऑफ…
दीवार पर लगी परछाइयाँ हिलने लगीं।
तभी उसे महसूस हुआ कि कोई उसके ठीक पीछे खड़ा है।
उसके गले के पास किसी की ठंडी साँस महसूस हुई।
फोन पर मैसेज आया —
“मत मुड़ना…”
लेकिन डर इंसान से सब्र छीन लेता है।
आदित्य अचानक पीछे मुड़ गया।
पीछे कोई नहीं था।
कमरा खाली था।
कुछ सेकंड तक सब कुछ शांत रहा।
फिर अचानक उसका फोन फिर बजा।
स्क्रीन पर लिखा था —
“10 मिनट पूरे हो गए।”
अगली सुबह पड़ोसियों ने देखा कि आदित्य के घर का दरवाज़ा खुला हुआ है।
जब वे अंदर गए, तो आदित्य का शव उसके कमरे में पड़ा था।
कमरा अंदर से बंद था।
मोबाइल अभी भी उसके हाथ में था।
पुलिस आई और उन्होंने फोन चेक किया।
कॉल लॉग में एक ही नंबर बार-बार दिखाई दे रहा था।
लेकिन सबसे डरावनी बात यह थी —
वह नंबर किसी और का नहीं…
आदित्य के अपने ही फोन का नंबर था।
पुलिस ने सोचा शायद यह कोई तकनीकी गलती होगी।
लेकिन जब उन्होंने फोन की गैलरी खोली…
तो उसमें एक नया वीडियो रिकॉर्ड हुआ मिला।
वीडियो रात 2:10 AM पर रिकॉर्ड हुआ था।
जब उन्होंने वीडियो चलाया…
तो कैमरे में आदित्य अपने बिस्तर पर बैठा दिखाई दे रहा था।
और उसके ठीक पीछे…
अंधेरे में कोई खड़ा था।
धीरे-धीरे वह आकृति कैमरे के पास आई।
उसका चेहरा साफ दिखाई देने लगा।
वह कोई और नहीं…
आदित्य ही था।
लेकिन उसका चेहरा बिल्कुल सफेद था… आँखें काली… और होंठों पर अजीब मुस्कान थी।
वीडियो के आखिरी सेकंड में वह कैमरे के बिल्कुल पास आकर बोला —
“अब मैं बाहर हूँ…”
वीडियो यहीं खत्म हो जाता है।
लेकिन सबसे डरावनी बात यह थी —
उस वीडियो को आदित्य के मरने के 5 मिनट बाद अपलोड किया गया था…
और उसके नीचे कैप्शन लिखा था —
“अगली कॉल… शायद तुम्हें आए।”