Ankahi - 3 - 2 in Hindi Drama by Dewy Rose books and stories PDF | अनकही - 3 - 2

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अनकही - 3 - 2








सुबह 8:00 बजे, ब्रेकफास्ट हॉल

नाश्ते का टाइम था। मेहरीश अपनी प्लेट में देख रही थी, पर उसका ध्यान टेबल के दूसरे सिरे पर बैठे रयान पर था। कल का टास्क याद था: "बिना बोले अपने पार्टनर के बारे में एक चीज़ पता करो।"

तभी रयान ने उठकर जूस लेने का फैसला किया। जब वह वापस आया और बैठा, तो उसकी शर्ट की आस्तीन ऊपर खिंच गई। और मेहरीश ने देखा।

उसकी कलाई के ठीक ऊपर, एक टैटू था। संस्कृत में लिखा हुआ। उसे संस्कृत नहीं आती थी, पर वह देवनागरी पढ़ सकती थी। उसने ध्यान से देखा। शब्द थे: "शांतिर्भूत:"

उसकी साँस रुक सी गई। रयान जैसा आदमी, जिसके चेहरे पर हमेशा गुस्सा रहता है, उसने अपने हाथ पर "शांति" टैटू करवाया था। कितनी बड़ी अजीब बात थी। या कितनी बड़ी अच्छी।

रयान ने मेहरीश का चेहरा देखा। उसकी नज़रें उसकी कलाई पर थीं। वह समझ गया। उसने आस्तीन नीचे खींच ली। पर देर हो चुकी थी। मेहरीश ने देख लिया था।

मेहरीश ने अपनी चाय की चुस्की ली। फिर उसने अपना हाथ टेबल पर रखा। उसकी बाईं कलाई ऊपर थी। और वहाँ, एक पतली सी सफेद लाइन थी। कलाई कटा हुआ एक पुराना निशान। पर मिटा नहीं।

रयान की चाय का कप हाथ से फिसल गया। थोड़ा सा गर्म पानी टेबल पर बहा। उसने तुरंत नैपकिन से साफ किया। पर उसकी आँखें उस निशान पर चिपकी हुई थीं।

एक पल के लिए दोनों की नज़रें मिलीं। एक सवाल: "तुम्हारा दर्द कितना गहरा है?"

सुबह 10:00 बजे, ऑब्जर्वेशन एक्सरसाइज

फैसिलिटेटर अर्जुन सिंह ने सबको गार्डन में बुलाया। उन्होंने व्हाइटबोर्ड पर लिखा: "अब शेयर करें आपने क्या ऑब्जर्व किया। बिना बोले। ड्रॉ करें। लिखें। एक्सप्रेस करें।"

रयान ने कागज़ और पेन उठाया। वह बैठ गया एक पेड़ के नीचे। मेहरीश थोड़ी दूर बैठी। दोनों ने लिखना शुरू किया।

रयान ने ड्रॉ किया: एक महिला की परछाई की आकृति। खिड़की के पास खड़ी। चाँदनी में। उसकी पीठ दर्शक की तरफ है। पर उसके कंधे झुके हुए हैं। और खिड़की के शीशे पर, उसका प्रतिबिंब दिख रहा है। और उस प्रतिबिंब के चेहरे पर आँसू हैं।

नीचे लिखा: "वो रोती है जब कोई नहीं देखता।"

मेहरीश ने ड्रॉ किया: एक आदमी का चेहरा। शीशे में। पर शीशा टूटा हुआ है। और टूटे हुए शीशे में, उसका चेहरा कई टुकड़ों में बंटा हुआ है। हर टुकड़े में एक अलग एक्सप्रेशन है: गुस्सा, दर्द, डर, खालीपन।

नीचे लिखा: "वो टूटा हुआ है, पर दिखाता नहीं।"

दोनों ने अपने ड्रॉइंग एक्सचेंज किए।

मेहरीश ने रयान की ड्रॉइंग देखी। उसकी आँखों में पानी आ गया। उसने कल रात की बात सोची। उसका पैनिक अटैक। रयान ने देख लिया था। और वह समझ गया था।

रयान ने मेहरीश की ड्रॉइंग देखी। उसकी साँस फूल गई। वह टूटे हुए शीशे को देख रहा था। अपने आप को देख रहा था। उसने कभी किसी को इतना गहराई से नहीं देखा था। और किसी ने कभी उसे इतनी गहराई से नहीं देखा था।

उसने कागज़ के पीछे लिखा: "तुम्हे केसे पता चला?"

मेहरीश ने जवाब लिखा: "में तुम्हे समझती हु शायद।"

दोपहर 2:00 बजे, साइलेंट लंच

लंच टेबल पर दोनों फिर साथ बैठे। आज उनके बीच वह अजनबीपन नहीं था। एक साइलेंट अंडरस्टैंडिंग थी।

रयान ने मेहरीश की प्लेट देखी। उसने सब्ज़ी ली थी, दाल ली थी, पर चावल नहीं लिए थे। "कार्ब्स से दूरी?" उसने सोचा।

मेहरीश ने रयान की प्लेट देखी। उसने सब कुछ लिया था। पर वह बस खाना खा रहा था। एन्जॉय नहीं कर रहा था। जैसे यह सिर्फ एक टास्क हो।

रयान ने अपने चावल का कुछ हिस्सा मेहरीश की प्लेट में डाल दिया। बिना पूछे। बिना इशारा किए।

मेहरीश ने देखा। हैरान हुई। फिर उसने मुस्कुराया। एक रियल स्माइल। पहली बार। उसने चावल खाए।

रयान ने वह मुस्कान देखी। उसका दिल एक अजीब सी धड़कन से धड़का। उसने कभी किसी की मुस्कान के लिए ऐसा फील नहीं किया था।

लंच के बाद, मेहरीश ने एक नोट लिखा: "गुस्सा एक भावना है, तुम उसकी पहचान नहीं हो।।"

रयान ने पढ़ा। उसकी आँखें भर आईं। उसने जवाब लिखा: "तुम्हारी पहचान इस बात से नहीं होती कि तुम चुप हो।"

शाम 4:00 बजे, पर्सनल स्पेस एक्सरसाइज

अर्जुन सिंह ने नया टास्क दिया: "पर्सनल स्पेस। अपने पार्टनर का एक पर्सनल आइटम देखने को मिलेगा। बिना पूछे। फिर उसके बारे में लिखो।"

रयान को मेहरीश का बैग मिला। मेहरीश को रयान का वॉलेट।

मेहरीश ने वॉलेट खोला। क्रेडिट कार्ड्स। लॉयल्टी कार्ड्स। बहुत सारे नोट्स। फिर एक पुरानी फोटो। रयान युवा है। शायद 10 साल का। एक महिला के साथ। उसकी माँ। दोनों मुस्कुरा रहे हैं। असली मुस्कान। वह रयान जिसे आज वह जानती है, उस चेहरे में नहीं है।

रयान ने मेहरीश के बैग में देखा। मेकअप नहीं। परफ्यूम नहीं। सिर्फ किताबें। एक डायरी। दवाइयाँ। एक पुराना पर्स। उसने पर्स खोला। एक फोटो। मेहरीश और एक बुजुर्ग महिला। उसकी माँ। दोनों की आँखों में दर्द है। पर होंठों पर मुस्कान है।

फोटो के पीछे लिखा था: "माँ, मैं तुम्हें मिस करती हूँ। हर सेकंड।"

दोनों ने एक-दूसरे की चीज़ें वापस कीं। कोई शब्द नहीं। सिर्फ एक लुक। "आई अंडरस्टैंड।"

रात 8:00 बजे, कैंडललाइट सेशन

रात का आखिरी सेशन। सबके सामने एक मोमबत्ती। अर्जुन सिंह ने लिखा: "आज आपने अपने पार्टनर के बारे में क्या सीखा? एक शब्द में बताएँ।"

एक-एक कर सबने अपना शब्द लिखा। मेहरीश ने लिखा: "स्ट्रेंथ।"

रयान ने लिखा: "कमज़ोरी दिखा पाना।"

दोनों ने एक-दूसरे के शब्द देखे। रयान ने सोचा: "वह मुझमें स्ट्रेंथ देखती है?" मेहरीश ने सोचा: "वह मुझमें वल्नरेबिलिटी देखता है?"

अर्जुन सिंह ने आखिरी टास्क दिया: "कल आखिरी दिन है। आपको अपने पार्टनर को एक गिफ्ट देना है। बिना पैसे के। बिना खरीदे। सिर्फ खुद से।"

रात 10:30 बजे, बालकनी में

मेहरीश बालकनी में खड़ी थी। चाँद फिर निकला था। पर आज बादल थे। चाँद छुप-छुपकर दिख रहा था।

तभी रयान भी बालकनी में आया। दोनों की बालकनियाँ अलग थीं, पर पास थीं।

रयान ने कुछ फेंका। एक पेपर का प्लेन। वह मेहरीश की बालकनी में उतरा।

मेहरीश ने उठाया। खोला। लिखा था: "कल मैं जा रहा हूँ। पर मैं तुम्हें फिर से देखना चाहता हूँ। रियल लाइफ में। क्या तुम मिलोगी?"

मेहरीश ने देखा। उसका दिल धड़क रहा था। डर और उम्मीद का मिक्स। उसने पेपर के पीछे लिखा: "हॉव?"

प्लेन वापस फेंका।

रयान ने पढ़ा। उसने लिखा: "मैं तुम्हें ढूँढ लूँगा। प्रॉमिस।"

फिर उसने एक और चीज़ फेंकी। एक पत्थर। वही सफेद पत्थर जो उसने मेहरीश को दिया था। पर अब उस पर कुछ लिखा था। मेहरीश ने देखा। लिखा था: "यू आर नॉट अलोन।"

उसकी आँखों से आँसू आ गए। उसने पत्थर को छाती से लगा लिया। फिर उसने भी कुछ फेंका। उसकी डायरी की एक पन्ना। उस पर बस एक लाइन थी: "थैंक यू फॉर सीइंग मी।"

°°°°°

अगली सुबह, चेकआउट का टाइम। सब अपना-अपना सामान पैक कर रहे थे। मेहरीश ने देखा कि रयान उसकी तरफ आ रहा है। वह रुका। उसके हाथ में एक एन्वलप था।

उसने एन्वलप मेहरीश को दिया। बिना कुछ कहे।

मेहरीश ने खोला। अंदर एक कार्ड था। उस पर लिखा था: "मल्होत्रा एंटरप्राइजेज़। माय ऑफिस एड्रेस। जब तुम तैयार हो तब।"

और नीचे, एक पर्सनल नंबर।

पर सबसे नीचे, एक और लाइन: "पी.एस.: में तुम्हारी पूरी कहानी जानना चाहता हु, sab कुछ।"

मेहरीश ने देखा। फिर रयान को देखा। उसने अपने बैग से एक छोटा सा पैकेट निकाला। उसने रयान को दिया।

रयान ने खोला। अंदर था... एक सूखा हुआ फूल। वही जंगली गुलाब जो उन्होंने नेचर वॉक में देखा था। और एक नोट: "ये मेरा पसंदीदा फूल है… अब ये तुम्हारा है।"

दोनों की आँखें मिलीं। एक साइलेंट गुडबाई। एक साइलेंट प्रॉमिस।

पर जैसे रयान मुड़कर जाने लगा, मेहरीश ने पुकारा... बिना आवाज के। बस उसका हाथ उठा। और रयान ने मुड़कर देखा। उसकी आँखों में एक सवाल था।

मेहरीश ने अपने होंठों पर उंगली रखी। फिर अपने दिल पर। एक मूक संदेश: "यह राज़ बस तुम्हारे लिए है।"

और फिर वह चली गई। अपने बैग के साथ। अपने राज़ों के साथ। पर अब एक नए राज़ के साथ भी: रयान का नंबर उसकी हथेली में छुपा हुआ था।

क्या वह कॉल करेगी? क्या वह मिलने जाएगी? या यह साइलेंट रिट्रीट सिर्फ एक खूबसूरत याद बनकर रह जाएगा?