God Wishar - 2 in Hindi Adventure Stories by Ram Make books and stories PDF | God Wishar - 2

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God Wishar - 2





विक्रम और टीना, कबीर के इस बदले हुए अंदाज़ को देखकर दंग रह गए। उनकी यादों में कबीर हमेशा दब्बू और शांत रहने वाला लड़का था, जो खासकर विक्रम के सामने आते ही सहम जाता था। आखिर स्कूल में बड़े-बड़े पहलवान भी सिंघानिया खानदान के वारिस से पंगा लेने की हिम्मत नहीं करते थे।

लेकिन अब, कबीर बिल्कुल अलग इंसान लग रहा था। उसकी आवाज़ में बेरुखी थी और उसकी आँखों में एक रहस्यमयी शांति।विक्रम ने कबीर की आँखों में अपने लिए तिरस्कार देखा, तो उसका खून खौल उठा। वह उपहास उड़ाते हुए बोला, "छह महीने बाद देख रहा हूँ तुझे, और तू तो काफी बदल गया है! क्यों, थाने में कागज़ काले करने की नौकरी क्या मिल गई, खुद को बहुत बड़ा तीस मार खां समझने लगा है?"विक्रम ने नाक सिकोड़ते हुए आगे कहा, "एक बात कान खोलकर सुन ले कबीर, कचरा हमेशा कचरा ही रहता है। मैं एक चुटकी बजाऊँगा और पुलिस तुझे लात मारकर बाहर निकाल देगी! इसलिए अपनी औकात से बाहर मत उड़!"

जब टीना ने देखा कि विक्रम का गुस्सा बढ़ रहा है, तो वह बीच में बोली, "विक्रम, छोड़ो इसे। इसके मुंह लगना बेकार है! यह अब हमारी ज़िंदगी का हिस्सा नहीं है, चलो यहाँ से!"टीना की बातों से विक्रम का गुस्सा थोड़ा शांत हुआ, लेकिन जब उसने पीछे मुड़कर देखा, तो कबीर अब भी खामोशी से उसे ही देख रहा था। कबीर के चेहरे पर कोई शिकन न देखकर विक्रम चिढ़ते हुए बोला, "तो तू अब भी वही डरपोक चूहा है, है ना?"

अपनी जीत पर मुस्कुराते हुए उसने कहा, "टीना की वजह से मैं तुझ जैसे दो कौड़ी के इंसान के मुँह नहीं लग रहा। बस मेरे रास्ते से हट जा।"इससे पहले कि विक्रम कुछ और कह पाता, सन्नाटे को चीरती हुई एक ज़ोरदार आवाज़ गूंजी।

चटाक!

कबीर ने आगे बढ़कर उसे एक करारा तमाचा जड़ा था। विक्रम लड़खड़ाकर ज़मीन पर गिर पड़ा और अपना गाल सहलाने लगा। टीना उसके पास ही जमी रह गई। दोनों बुरी तरह सदमे में थे। बगीचे में मौत जैसा सन्नाटा छा गया।कबीर ने बड़ी मासूमियत से विक्रम की ओर देखा और कहा, "ओह, सॉरी! मुझे कान के पास किसी मच्छर के भिनभिनाने की आवाज़ आ रही थी। बहुत चिढ़ मच रही थी, तो हाथ अपने आप चल गया। विक्रम, तुम ठीक तो हो?"

कबीर के शांत चेहरे और बात करने के अंदाज़ ने यह साफ कर दिया था कि उसकी नज़रों में विक्रम की हैमत एक मच्छर से ज़्यादा नहीं थी।तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझे हाथ लगाने की!?"विक्रम ने खुद को संभाला और उठते हुए गुस्से में दहाड़ा, "कहाँ मर गए मेरे बॉडीगार्ड? कहाँ हो तुम सब—"लेकिन उसकी बात पूरी होने से पहले ही, एक और प्रहार उसके चेहरे पर हुआ।इस बार कबीर ने और भी ज़ोर से मारा था। एक करारी आवाज़ के साथ विक्रम फिर से ज़मीन पर जा गिरा, उसका आधा चेहरा सूज गया था।

कबीर ने नीचे गिरते हुए उसे देखा और तंज कसा: "गर्मियों में ये मच्छर बहुत शोर मचाते हैं। अगर इस वाले ने अब और आवाज़ की, तो मुझे इसे हमेशा के लिए खामोश करना पड़ेगा।"यह साफ तौर पर एक धमकी थी।विक्रम को यकीन ही नहीं हो रहा था कि कबीर ऐसा कर सकता है। वहीं, टीना अब भी चुपचाप खड़ी थी, उसने डर और हैरानी के मारे अपने मुँह पर हाथ रख लिया था।

तभी, दो हट्टे-कट्टे आदमी वहाँ पहुँचे। वे विक्रम के बॉडीगार्ड थे। उन्होंने विक्रम को उठने में मदद की और उनमें से एक कबीर की ओर झपटा और घूंसा ताना!"चलो, शुरू करते हैं," कबीर ने खुद से कहा। उसे याद आया कि उसके हाथ में अब भी वो दो कंकड़ थे जिनसे वह निशाना साधने की प्रैक्टिस कर रहा था। उसकी आँखों में चमक आई और उसने एक के बाद एक दोनों पत्थर बॉडीगार्ड्स की ओर फेंके।

सिस्टम की आवाज़ आई: "डिंग! अचूक निशाना (Throwing Proficiency) सक्रिय। निशाना लगने की दर 100%।"दो हल्की आवाज़ें आईं—एक पत्थर सीधे एक बॉडीगार्ड की दोनों आँखों के बीच माथे पर लगा, जिससे उसका चश्मा दो टुकड़ों में टूट गया। दूसरा पत्थर दूसरे बॉडीगार्ड के घुटने पर जाकर लगा।एक आदमी लंगड़ाते हुए कबीर की तरफ बढ़ा। कबीर थोड़ा हिचकिचाया, लेकिन उसे पता था कि यही मौका है। उसने बहादुरी से एक कदम बढ़ाया और उस बॉडीगार्ड के चेहरे पर ज़ोरदार घूंसा जड़ा!भले ही कबीर की 'ताकत' अब 10 पॉइंट तक पहुँच गई थी, लेकिन यह अभी भी एक औसत इंसान जितनी ही थी। इसका मतलब था कि उसका मुक्का इतना शक्तिशाली नहीं था कि बॉडीगार्ड को एक बार में बेहोश कर दे। वह भारी-भरकम आदमी दर्द से कराहते हुए अपनी जगह पर डगमगाया।

लेकिन 11 पॉइंट की 'फुर्ती' (Dexterity) के साथ कबीर अब पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ था। उसने फुर्ती से बॉडीगार्ड के पेट में एक लात मारी, और वह आदमी आखिरकार ढेर होकर ज़मीन पर गिर पड़ा।"ये क्या हो रहा है..."
दूसरा बॉडीगार्ड विक्रम को उठा रहा था और यह नज़ारा देखकर उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। इससे पहले कि वह उठकर हमला कर पाता, उसने एक जूता अपने चेहरे की तरफ आते देखा।

धाड़! कबीर का भारी बूट बॉडीगार्ड के सिर से टकराया और वह भी बेहोश होकर गिर पड़ा।यह सब इतनी तेज़ी से हुआ कि 10 सेकंड भी नहीं लगे होंगे।विक्रम हक्का-बक्का रह गया। उसका मुँह खुला का खुला रह गया। ये बॉडीगार्ड्स अपने काम के माहिर थे, फिर भी वे इतनी आसानी से हार गए?टीना भी कबीर को गहरे सदमे में देख रही थी। उसे एहसास हुआ कि आज का कबीर उस स्कूल वाले डरपोक लड़के से कोसों दूर था। उसकी नज़र में कबीर की कमज़ोर छवि धूल में मिल गई और उसकी जगह एक दबंग और खूंखार मर्द की छवि उभरने लगी!

कबीर, विक्रम की ओर बढ़ा। विक्रम इतना डर गया कि उसके पैर कांपने लगे, वह भागना तो दूर, खड़ा भी नहीं हो पा रहा था।वह थरथराते हुए हकलाया, "तुम... तुम कबीर नहीं हो सकते। यह मुमकिन ही नहीं है।"कबीर के चेहरे पर एक रहस्यमयी और व्यंग्यात्मक मुस्कान थी। उसने जवाब दिया, "वक्त सबको बदल देता है, विक्रम। पहले मैंने तुम्हारा हिसाब चुकता नहीं किया था, इसलिए तुम्हारे हौसले बढ़ गए थे।"

जैसे-जैसे वह पास आ रहा था, उसकी आँखों में गुस्सा साफ़ झलक रहा था।"त-तुम... क्या चाहते हो!?" विक्रम बुरी तरह आतंकित था। "पैसे? मैं तुम्हें पैसे दूँगा! बस मुझे चोट मत पहुँचाओ!""पैसे?" कबीर मुस्कुराया, "मुझे तुम्हारे पैसे नहीं चाहिए।"उसकी नज़र टीना पर गई, जो अब भी सुन्न खड़ी थी। उसने उसकी ओर इशारा किया और फिर विक्रम को देखा। "टीना। मुझे टीना दे दो और मैं तुम्हें बिना किसी और चोट के जाने दूँगा। वरना, तुम्हारी टांगें तोड़ दूँगा!"

टीना को अपने कानों पर यकीन नहीं हुआ। उसके पूरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि कबीर ऐसी मांग करेगा!उसने धीरे से विक्रम की ओर देखा। अपने दिल में वह दुआ कर रही थी कि उसका बॉयफ्रेंड उसे किसी सौदे की वस्तु की तरह इस्तेमाल न करे।विक्रम भी सन्न था। उसकी नज़र एक तरफ कबीर के बर्फीले चेहरे पर थी और दूसरी तरफ टीना के उतरे हुए चेहरे पर। टीना टूटने की कगार पर लग रही थी। विक्रम एक पल के लिए रुका, कुछ सोचा... लेकिन अंत में, उसका डर उसके आत्मसम्मान पर भारी पड़ गया और उसने सिर हिलाकर 'हाँ' कह दिया।

टीना का दिल टूट गया। उसने विक्रम को देखा और उसकी आँखों से आंसू बह निकले। वहीं कबीर अपनी इस जीत पर खुश था।"हा हा हा! तुम किस तरह के दरिंदे हो बे? मैं तो बस मज़ाक कर रहा था, और तुमने सच में अपनी गर्लफ्रेंड का सौदा कर लिया?" कबीर ने नफरत से अपना सिर हिलाया। "मुझे ऐसी औरत में कोई दिलचस्पी नहीं है। वैसे भी, मुझे दूसरों का छोड़ा हुआ माल नहीं चाहिए!"

उसके शब्द टीना के सीने में तीखे तीरों की तरह चुभ गए। उसे इतनी तकलीफ और दुख हुआ जैसे किसी ने कलेजे में खंजर उतार दिया हो।तभी, वो बॉडीगार्ड जिसे कबीर ने पहले लात मारी थी, अचानक खड़ा हो गया। उसने हवा में घूमकर कबीर पर एक जानलेवा किक मारी।सिस्टम ने कबीर की काबिलियत तो बढ़ा दी थी, लेकिन वह अभी भी एक साधारण इंसान ही था। भले ही उसने समय रहते प्रतिक्रिया दी, लेकिन इतने शक्तिशाली हमले को रोकना उसके बस में नहीं था।

एक भारी आवाज़ के साथ, कबीर पीछे की ओर उड़ता हुआ गया और एक बड़े मेपल के पेड़ के तने से जा टकराया।यह बॉडीगार्ड मार्शल आर्ट्स का उस्ताद था। कबीर के हमले के बाद भी वह वास्तव में बेहोश नहीं हुआ था। वह बस सही मौके का इंतज़ार कर रहा था जब सब बेफिक्र हों।
जब विक्रम ने यह देखा, तो वह उठ खड़ा हुआ और घमंड से हंसने लगा। "कबीर, मिलो 'टाइटन' से! इसे हम टाइटेनियम कहते हैं क्योंकि इसे तोड़ना नामुमकिन है!" विक्रम फिर से हंसा और कबीर के पैरों के पास थूकते हुए बोला, "तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझे नीचा दिखाने की? अब तू भुगतेगा!"

विक्रम टाइटन की ओर मुड़ा। "खत्म कर दो इसे! इसकी टांगें तोड़ दो! जो भी होगा, मैं संभाल लूँगा!"टाइटन ने सिर झटककर विक्रम की बात मान ली। ऐसा लग रहा था कि कबीर के पिछले हमले से उसे अभी भी थोड़ा चक्कर आ रहा है, लेकिन उसने आदेश का पालन किया और आगे बढ़ा।

बाज़ी पलटते देख टीना सुन्न खड़ी थी। उसने आँखों में आँसू लिए कबीर को देखा, उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे।कबीर पेड़ के नीचे पड़ा बुरी तरह घायल होकर हाँफ रहा था। अचानक, उसके दिमाग में एक आवाज़ गूंजी।

"डिंग! चोट से उबरने का कौशल (Injury Recovery Skill) सक्रिय।"तुरंत ही, उसके शरीर में फिर से वह गर्म धारा दौड़ी और उसकी ताकत लौट आई।उसने अपनी आँखें खोलीं और उठ खड़ा हुआ। अपने कपड़ों की धूल झाड़ते हुए वह सीधा खड़ा हो गया। जब उसने विक्रम की ओर देखा, तो उसकी आँखों में एक बार फिर कातिलाना गुस्सा चमक रहा था।
"विक्रम, क्या तुमने अभी कहा कि तुम मुझे खत्म करना चाहते हो?"

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विक्रम और उसका बॉडीगार्ड दोनों एक साथ सन्न रह गए।"यह कैसे मुमकिन है?""कबीर, तुम.यह

विक्रम इतना डर गया था कि उसकी आवाज़ कांपने लगी और वह बुरी तरह हकलाने लगा, लेकिन उसका बॉडीगार्ड 'टाइटन' सधा हुआ खिलाड़ी था। टाइटन के चेहरे पर आया अचंभे का भाव एक पल में गायब हो गया और वह फिर से कबीर की ओर बढ़ा। उसने कबीर के सिर को निशाना बनाकर एक ज़ोरदार किक मारी।"डिंग! हैमर फिस्ट (हथौड़ा मुक्का) कौशल सक्रिय।"कबीर इतना फुर्तीला था कि उसने हमले को चकमा दे दिया, और बड़े ही सधे हुए अंदाज़ में घूमकर बॉडीगार्ड के घुटनों पर एक जोरदार लात जमा दी।

लेकिन टाइटन उम्मीद से कहीं ज़्यादा मज़बूत निकला। वह भारी-भरकम शरीर वाला बॉडीगार्ड बस हल्का सा डगमगाया, लेकिन कबीर की पूरी ताकत से मारी गई वह लात उसे गिराने के लिए काफी नहीं थी।साफ था कि कबीर में अभी भी पर्याप्त शारीरिक ताकत की कमी थी। हालाँकि, उसके पास 'हैमर फिस्ट' की निपुणता थी। उसने तुरंत अपनी तकनीक बदली और फुर्ती से बॉडीगार्ड के पैर खींचकर उसका संतुलन बिगाड़ दिया।

धड़ाम!इस बार उसकी रणनीति काम कर गई, टाइटन ने अपना संतुलन खो दिया और ज़मीन पर जा गिरा। कबीर ने मौके का फायदा उठाया और आव देखा न ताव, बॉडीगार्ड के सिर पर एक के बाद एक प्रहार किए। टाइटन वहीं ढेर हो गया और बेहोश हो गया।

सिर्फ तीन हमलों में उसने उस दैत्य जैसे आदमी को भी हरा दिया था!पहले तो यह उसकी किस्मत थी कि उसके पास फेंकने के लिए पत्थर थे, लेकिन इस बार यह उसकी अपनी काबिलियत थी। वह एक असली योद्धा की तरह लड़ा था और यह उसकी अपनी मेहनत की जीत थी!विक्रम का चेहरा कागज़ की तरह सफेद पड़ गया था। अब वह वह घमंडी रईसज़ादा नहीं रहा था जो कुछ मिनट पहले था। अब वह खौफनाक नज़रों से कबीर को देख रहा था।

टीना भी डर गई थी। उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसका सीधा-सादा 'एक्स-बॉयफ्रेंड' इतना ताकतवर हो सकता है!इस बीच, तमाशा देख रहे राहगीरों की भीड़ जमा हो गई थी। वे फटी आँखों से यह सब देख रहे थे और आपस में फुसफुसाने लगे थे।"वाह! इस लड़के में तो गजब का दम है!""क्या यह कोई कमांडो है? या मार्शल आर्ट्स का उस्ताद!?""काश! मेरे पास भी ऐसा आदमी होता, तो मुझे कभी डर नहीं लगता!"भीड़ बढ़ती गई और पूरा बगीचा उत्तेजित चर्चाओं की आवाज़ से भर गया।

कबीर को इन सब बातों की कोई परवाह नहीं थी। वह बड़े ही रौब के साथ विक्रम की ओर बढ़ा। ऐसा लग रहा था कि वह वाकई उसकी टांगें तोड़ देगा।विक्रम पूरी तरह आतंकित था। उसका पूरा शरीर थर-थर कांप रहा था, यहाँ तक कि उसकी आँखों से आंसू बहने लगे। वह कबीर को देखते हुए अपना सिर हिलाने लगा और गिड़गिड़ाते हुए बोला, "न-नहीं... पास मत आना।"

लेकिन कबीर इस वक्त अपने आपे में नहीं था। उसके गुस्से ने उसकी बुद्धि पर परदा डाल दिया था और उसे सिवाए बदले के कुछ और नहीं सूझ रहा था। वह उस कांपते हुए आदमी के पास गया और उसे नीचे गिरते हुए देखा। धीरे से, वह नीचे झुका और अपना मुक्का ताना।"यह मेरा बदला है। मैं तुझे मसल दूँगा!"इससे पहले कि वह कुछ कर पाता, टीना दौड़ती हुई आई। उसने कबीर का उठा हुआ हाथ पकड़ लिया और कांपती आवाज़ में मिन्नत की, "कबीर, नहीं... इतने आवेश में मत आओ। प्लीज़, रुक जाओ।"कबीर ने उसकी ओर देखा और अचानक उसे होश आया।

अगर उसने विक्रम को और चोट पहुँचाई, तो उस पर जानबूझकर गंभीर चोट पहुँचाने का केस बन सकता था। और अगर ऐसा नहीं भी होता, तो भी उसे 'सिंघानिया ग्रुप' के गुस्से का सामना करना पड़ता। और इसका मतलब था अपनी पीठ पर खुद ही निशाना बनाना!

आख़िरकार, उसके पास न तो ताकत थी और न ही रसूख। उसके पास तो ढंग के पैसे भी नहीं थे। विक्रम जैसे रसूखदार इंसान के खिलाफ जीतना नामुमकिन था।उसने टीना की ओर देखा और उसके चेहरे के भाव थोड़े नरम हुए। उसने बेरुखी से कहा, "तुम सही कह रही हो।""ओह, शुक्र है—" टीना ने राहत की सांस लेने की कोशिश की, लेकिन कबीर की अगली बात ने उसकी रूह कंपा दी।"...लेकिन मैं कबीर शर्मा हूँ, और मैं बहुत बेरहम हूँ!"इतना कहते ही, उसने पूरी ताकत से विक्रम के चेहरे पर मुक्का जड़ा।

कड़क!

भीड़ ने विक्रम की नाक टूटने की आवाज़ सुनी, और उसके तुरंत बाद उसकी दिल दहला देने वाली चीख गूंजी।पूरे बगीचे में सन्नाटा पसर गया। कुछ लोग जो बीच-बचाव करना चाहते थे, वे भी पीछे हट गए। वे अपनी हड्डियाँ नहीं तुड़वाना चाहते थे!यह लड़का वाकई उतना ही बेरहम था जितना उसने कहा था!

"डिंग! आपने विक्रम की मज़ाक उड़ाने की इच्छा को कुचल दिया। एट्रीब्यूट पॉइंट + 1।"
"डिंग! आपने बॉडीगार्ड्स की आपको सबक सिखाने की इच्छा को खत्म कर दिया। एट्रीब्यूट पॉइंट + 1।"
"डिंग! आपने विक्रम की नाक न तुड़वाने की इच्छा को चकनाचूर कर दिया। एट्रीब्यूट पॉइंट + 1।"
"डिंग! आपने तमाशा देख रहे लोगों की दिलचस्पी पूरी की। विश वैल्यू + 1।""डिंग! आपने लोगों की लड़ाई रुकवाने की इच्छा को बेअसर कर दिया। एट्रीब्यूट पॉइंट + 1।"

"कुल फ्री एट्रीब्यूट पॉइंट्स: 4।"
"कुल विश वैल्यू: 3/10।"

सिस्टम के नोटिफिकेशन कबीर के दिमाग में गूंजते रहे, जबकि विक्रम ज़मीन पर पड़ा बेबस होकर कराह रहा था। कबीर ने उसे तिरस्कार से देखा और तंज कसा, "क्यों, अब किसकी छुट्टी हुई?"लेकिन विक्रम ने कोई जवाब नहीं दिया। दर्द से कराहने की आवाज़ के अलावा वहां गहरी खामोशी थी।

कबीर ने टीना की ओर देखा, जिसके चेहरे का रंग उड़ चुका था। वह नफरत से फुफकारा और जाने के लिए मुड़ा, लेकिन तभी भीड़ में से पुलिस की वर्दी में एक महिला सामने आई।वह महिला करीब पच्चीस साल की लग रही थी। उसका चेहरा गरिमामय और शांत था। पुलिस की वर्दी में भी वह बला की खूबसूरत लग रही थी।वह धीरे से चलकर आई और उसकी नज़र ज़मीन पर पड़े आदमी पर गई। उसने अपनी भौहें सिकोड़ीं और कबीर की ओर देखा। "कबीर, यहाँ क्या हो रहा है?"

वह उसी टीम की इंस्पेक्टर थीं जिसमें कबीर काम करता था, यानी उनकी बॉस। उनका नाम पूजा था। पूजा अपने विभाग की सबसे काबिल और सख्त अफसरों में गिनी जाती थीं। वे अनुशासन की पक्की थीं।कबीर उन्हें देखकर एक पल के लिए ठिठक गया। लेकिन उसने जल्दी ही खुद को संभाला और अपना सख्त चेहरा बदलकर हल्की मुस्कान के साथ बोला, "इंस्पेक्टर साहिबा, आप यहाँ? मैं तो बस एक... छोटे से विवाद को सुलझा रहा था।"

"विवाद?"पूजा ने अपनी भौहें और सिकोड़ीं। वह अभी-अभी वहां पहुँची थीं और उन्हें पता नहीं था कि माजरा क्या है
विक्रम ने, जो अभी भी ज़मीन पर बेबस पड़ा था, पूजा की ओर उम्मीद भरी नज़रों से देखा और चिल्लाया, "ऑफिसर! मैं विक्रम सिंघानिया हूँ। इस आदमी ने मेरी नाक तोड़ दी और यह मुझे जान से मारने वाला था। इसे गिरफ्तार करो!""क्या?" पूजा ने कबीर की ओर मुड़कर फुसफुसाते हुए पूछा, "कबीर, आखिर मामला क्या है?"

कबीर ने एक लंबी सांस ली। "मैडम, समझाना थोड़ा मुश्किल है। पहले इसे डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।"पूजा ने सिर हिलाया और भीड़ के किनारे खड़े अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों और वार्ड बॉयज़ को इशारा किया। "इधर आओ," पूजा ने उन्हें आवाज़ दी। "लगता है यहाँ किसी की नाक टूट गई है।"
पुलिस अफसर का आदेश सुनते ही वे लोग स्ट्रेचर लेकर वहां पहुँचे।जैसे ही विक्रम को स्ट्रेचर पर लिटाया गया, वह पूजा पर चिल्लाया। "मेरे पिता के टैक्स के पैसों से तुम्हारी तनख्वाह आती है, ऑफिसर! तुम्हें इसका जवाब देना होगा!"पूजा ने विक्रम को तीखी नज़रों से देखा और कहा, "मिस्टर सिंघानिया, टैक्स देना हर नागरिक का कर्तव्य है।"

"मेरा विभाग जनता की सेवा के लिए है, आपके पिता की कंपनी की चाकरी के लिए नहीं। मैं आपको कोई जवाबदेह नहीं हूँ। और वैसे भी," उन्होंने आगे कहा, "अभी मैं ड्यूटी पर नहीं हूँ, इसलिए अगर आप इस मामले को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो थाने फोन कीजिए।"उनके शब्दों में एक ऐसी ठंडी सच्चाई थी कि कोई बहस की गुंजाइश नहीं बची।विक्रम का बहुत बड़ा अपमान हुआ था, और उसके चेहरे पर नफरत साफ दिख रही थी। उसने पूजा को गुस्से से देखा और फिर कबीर की ओर मुड़ा। "बस इंतज़ार कर कबीर!" वह चिल्लाया। "मैं तुझे इतना बर्बाद कर दूँगा कि तू उम्र भर जेल की चक्की पीसेगा!"

कबीर ने दबी हुई मुस्कान के साथ कहा, "गर्मियों में सच में बहुत शोर मचाने वाले कीड़े आ जाते हैं। बहुत परेशान करते हैं। अगली बार अगर कोई मच्छर मेरे कान में भिनभिनाया, तो मेरे पास उसे हमेशा के लिए शांत करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।"कबीर की आवाज़ फिर से बर्फीली हो गई थी और उसकी आँखें विक्रम के शरीर में चुभ रही थीं। विक्रम की टूटी हुई नाक में असहनीय दर्द उठा और वह कांप उठा। दर्द, डर और अपमान के मिले-जुले अहसास से वह इतना तिलमिला गया कि बेहोश हो गया।

टीना ने अपनी आँखों के आंसू पोंछे और कबीर को देखा। फिर वह विक्रम के पीछे-पीछे भाग गई।तमाशा खत्म हो चुका था। भीड़ में से ज़्यादातर लोग कबीर से डरे हुए थे, उन्होंने एक आखिरी बार उसे देखा और अपने-अपने रास्ते चल दिए।पूजा ने चिंता भरे स्वर में पूछा, "कबीर, तुम्हारे सिर की चोट कैसी है?"कबीर ने हंसकर जवाब दिया, "आपकी चिंता के लिए शुक्रिया, मैडम। मैं बिल्कुल ठीक हूँ।"

"चलो, अच्छी बात है। आओ, थोड़ा टहलते हैं।"आसमान में चाँद चमक रहा था और पूजा, कबीर के साथ अस्पताल के बगीचे में टहलने लगीं। उन्होंने कबीर की ओर देखते हुए पूछा, "अभी जो हुआ, वो क्या था? तुमने विक्रम सिंघानिया की नाक तोड़ दी?"