Akath - 3 in Hindi Drama by silent script books and stories PDF | अकथ - भाग 3

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अकथ - भाग 3

भाग 3

अवनि ने कांपते हाथों से घर का दरवाज़ा खटखटाया। अंदर से कदमों की आवाज़ आई और दरवाज़ा खुला।

‎सामने उसकी माँ खड़ी थीं। वे देख नहीं सकती थीं, इसलिए वो हर चीज़ महसूस करके समझ जाती थीं। वो चुपचाप खड़ी रहीं, जैसे अवनि के कुछ बोलने का इंतज़ार कर रही हों। अवनि के चेहरे पर डर साफ़ दिख रहा था, और माथे पर पसीना था।  .


‎माँ ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और अवनि का दाहिना हाथ पकड़ लिया।
‎"आ गई मेरी बच्ची?" माँ ने प्यार से पूछा। 

‎अवनि एकदम से डर गई। उसके उसी हाथ पर खून के सूखे हुए छोटे-छोटे दाग थे। उसने झटके से अपना हाथ पीछे खींचा और अपना दूसरा हाथ माँ की हथेली पर रख दिया।

‎"हाँ माँ... आ गई," अवनि ने जबरदस्ती मुस्कुराते हुए कहा, पर उसकी आवाज़ कांप रही थी।
‎माँ को कुछ अजीब लगा। उन्होंने पूछा, "अवनि, तू इतना हांफ क्यों रही है? और तेरे हाथ इतने ठंडे क्यों हैं?"

‎अवनि ने बहाना बनाया, "कुछ नहीं माँ, बस सीढ़ियाँ जल्दी चढ़कर आई हूँ। ऑफिस का बहुत सारा काम है, मैं ज़रा हाथ-मुँह धोकर कमरे में जाती हूँ।"

‎माँ को कुछ बोलने का मौका दिए बिना अवनि तेज़ी से बाथरूम की तरफ भागी। अंदर जाते ही उसने दरवाज़ा बंद किया और नल खोल दिया। पानी की आवाज़ के बीच उसने अपने उन कपड़ों को देखा जिन पर एक्सीडेंट के निशान थे। उसने पागलों की तरह साबुन से अपने हाथ रगड़ना शुरू किया। उसे लग रहा था जैसे वो लाल रंग कभी साफ़ नहीं होगा।
‎रात में अवनि की आँख लगी ही थी कि उसे एक पार्क दिखाई दिया। चारों तरफ धुंध थी। दूर एक बेंच रखी थी और नील—हँसते हुए उस बेंच की तरफ दौड़ रहा था।
‎अवनि का गला सूख गया। उसे पता था कि आगे क्या होने वाला है। वह ज़ोर से चिल्लाई,
‎ रुको! वहां मत जाओ... उस बेंच के पास मत जाना!"
‎पर नील ने उसकी एक नहीं सुनी। वह भागता रहा। तभी अचानक अँधेरे से वही कार तेज़ रफ़्तार में आई और नील को ज़ोरदार टक्कर मार दी। नील हवा में उछला और बेंच से जा टकराया।
‎अवनि भागती हुई उसके पास पहुँची। नील ज़मीन पर पड़ा था, उसने हाथ से अवनि की तरफ इशारा किया और कहा— "भूलना मत... मुझे तुमने ही मारा है।
‎अवनि एकदम से झटके के साथ नींद से जागी। उसे महसूस हुआ जैसे सोते-सोते उसे किसी ने ज़ोर से हिला दिया हो।



‎वह उठी और पास रखी बोतल से गटागट पानी पिया। पानी पीने के बाद भी उसका गला सूख रहा था।


"अवनी ने सोचा कि ऐसे तो वह घुट-घुट कर नहीं जी पाएगी। उसे अपने दिमाग से इस बोझ को निकालने के लिए कुछ तो करना ही पड़ेगा। उसने तय किया कि वह एक थेरेपिस्ट की मदद लेगी, लेकिन अगले ही पल एक डर ने उसे घेर लिया—पर मैं उनको कहूँगी क्या? कि मेरी एक छोटी सी गलती की वजह से एक बच्चे की जान चली गई है?



पर क्या वह वाकई मेरी गलती थी?' उलझनों के बीच उसने फैसला किया कि वह जाएगी जरूर, भले ही कोई झूठा बहाना बनाना पड़े।" 


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