बहुत समय पहले घने जंगलों और ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों के बीच बसा एक छोटा सा गाँव था। उस गाँव की सुबहें हमेशा खुशियों से भरी होती थीं। सूरज की पहली किरण जैसे ही खेतों पर पड़ती, चारों तरफ सुनहरी चमक फैल जाती। किसान हल लेकर अपने खेतों की ओर निकल पड़ते, बच्चे हँसते-खेलते गलियों में दौड़ते, और औरतें कुएँ से पानी भरते हुए आपस में हँसी-मज़ाक करती थीं। शाम होते ही पूरा गाँव चौपाल पर इकट्ठा होता। कोई ढोलक बजाता, कोई लोकगीत गाता, तो कोई बच्चों को पुरानी कहानियाँ सुनाता। गाँव में ऐसा अपनापन था कि हर किसी के सुख-दुख में पूरा गाँव साथ खड़ा रहता था।
उसी गाँव के बीचों-बीच एक प्राचीन शिव मंदिर था। उस मंदिर में एक प्रसिद्ध पंडित रहता था, जिसे सब मेकअप पंडित के नाम से जानते थे। उसका असली नाम शायद ही किसी को याद था। लोग उसे मेकअप पंडित इसलिए कहते थे क्योंकि वह पूजा-पाठ करने के साथ-साथ दुल्हनों का श्रृंगार भी करता था। उसके हाथों में ऐसी कला थी कि साधारण चेहरा भी देखते ही देखते दमक उठता था। दूर-दूर के गाँवों से लोग उसे बुलाने आते थे। उसकी एक और खासियत थी कि वह गरीबों से कभी पैसे नहीं लेता था। वह कहता था, "जिस चेहरे पर मुस्कान आ जाए, वही मेरी सबसे बड़ी दक्षिणा है।"
गाँव के लोग उसका बहुत सम्मान करते थे। किसी की शादी हो, कोई त्योहार हो या मंदिर का बड़ा आयोजन, सबसे पहले मेकअप पंडित को ही बुलाया जाता था। उसकी मौजूदगी से हर शुभ काम पूरा माना जाता था।
लेकिन किसी को नहीं पता था कि किस्मत ने उसके लिए एक भयानक अंत लिख रखा था।
एक दिन पास के गाँव में एक बड़ी शादी थी। मेकअप पंडित सुबह ही वहाँ चला गया। पूरे दिन उसने दुल्हन का श्रृंगार किया। जब दुल्हन ने आईने में खुद को देखा तो उसकी आँखों में खुशी के आँसू आ गए। सब लोग मेकअप पंडित की कला की तारीफ करने लगे।
रात काफी हो चुकी थी। लोगों ने उससे कहा, "पंडित जी, आज यहीं रुक जाइए। जंगल का रास्ता रात में सुरक्षित नहीं है।"
लेकिन मेकअप पंडित मुस्कुराया और बोला, "मुझे सुबह मंदिर की आरती करनी है। मैं अभी निकलता हूँ। भगवान मेरी रक्षा करेंगे।"
वह अपना सामान लेकर अकेला ही जंगल के रास्ते चल पड़ा।
आसमान में अचानक काले बादल छा गए। तेज हवा चलने लगी। पेड़ों की डालियाँ अजीब तरह से हिलने लगीं। कुछ ही देर में बिजली चमकने लगी और जोरदार बारिश शुरू हो गई। जंगल में चारों तरफ अँधेरा छा गया।
चलते-चलते उसे ऐसा लगा जैसे कोई उसके पीछे-पीछे चल रहा हो।
वह रुका।
पीछे देखा।
लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
उसने फिर चलना शुरू किया।
इस बार उसे साफ सुनाई दिया...
छन... छन... छन...
जैसे किसी औरत के पायल की आवाज़ उसके बिल्कुल पीछे आ रही हो।
उसका दिल तेजी से धड़कने लगा।
वह पीछे मुड़ा...
लेकिन वहाँ फिर भी कोई नहीं था।
अचानक उसके सामने रास्ते के बीचों-बीच लाल रंग की साड़ी पहने एक औरत दिखाई दी। उसके लंबे बाल चेहरे पर बिखरे हुए थे। वह बिल्कुल चुपचाप खड़ी थी।
मेकअप पंडित ने हिम्मत करके पूछा, "बेटी... इतनी रात में यहाँ क्या कर रही हो?"
औरत ने धीरे-धीरे अपना चेहरा ऊपर उठाया।
उसकी आँखें पूरी तरह काली थीं।
चेहरे पर एक डरावनी मुस्कान फैल गई।
इतना देखते ही मेकअप पंडित के हाथ-पैर काँपने लगे।
उसने भगवान शिव का नाम लिया और भागने की कोशिश की।
लेकिन अचानक उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे किसी ने उसके पैरों को पकड़ लिया हो।
वह ज़मीन पर गिर पड़ा।
जंगल में उसकी चीख गूँज उठी...
और फिर...
सब कुछ शांत हो गया।
अगली सुबह गाँव वालों ने जंगल में उसकी लाश पड़ी देखी। उसके चेहरे पर इतना भयानक डर था कि देखने वालों की रूह काँप गई। उसके पास रखा मेकअप का बक्सा खुला पड़ा था, लेकिन उसके अंदर रखा एक छोटा पुराना आईना गायब था।
उस दिन के बाद पूरे गाँव की खुशियाँ जैसे खत्म हो गईं।
रात होते ही लोग अपने घरों के दरवाजे बंद कर लेते। कोई भी अँधेरा होने के बाद जंगल की तरफ जाने की हिम्मत नहीं करता था।
लेकिन डर की शुरुआत तो अब हुई थी...
हर शादी में अजीब घटनाएँ होने लगीं।
दुल्हन जब भी आईने में अपना चेहरा देखती, उसे अपने पीछे वही लाल साड़ी वाली औरत दिखाई देती।
जैसे ही वह पीछे मुड़ती...
वहाँ कोई नहीं होता।
धीरे-धीरे गाँव की कई दुल्हनें रहस्यमयी तरीके से बीमार पड़ने लगीं।
कुछ ने तो दावा किया कि रात में कोई उनके कमरे में बैठकर उनका मेकअप करता है।
सुबह उठने पर उनके चेहरे पर लाल रंग की अजीब आकृतियाँ बनी होती थीं।
लोगों ने समझ लिया कि मेकअप पंडित की मौत कोई साधारण हादसा नहीं थी।
उस जंगल में कोई भयानक शक्ति जाग चुकी थी।
एक रात गाँव का एक युवक हिम्मत करके उस जंगल में गया ताकि सच का पता लगा सके।
आधी रात होते ही उसे वही पुराना आईना एक पेड़ के नीचे रखा दिखाई दिया।
जैसे ही उसने उसे उठाया...
आईने में उसका चेहरा नहीं दिखा।
उसकी जगह वही लाल साड़ी वाली औरत मुस्कुरा रही थी।
अचानक आईना अपने आप टूट गया।
चारों तरफ से औरत की डरावनी हँसी गूँजने लगी।
युवक जान बचाकर गाँव की ओर भागा।
लेकिन अगले दिन वह भी रहस्यमयी तरीके से मृत मिला।
उसके बाद किसी ने भी उस जंगल की ओर जाने की हिम्मत नहीं की।
आज भी कहा जाता है कि अमावस्या की रात अगर कोई उस पुराने जंगल से गुजरता है, तो उसे पायल की आवाज़ सुनाई देती है।
कुछ लोग दावा करते हैं कि उन्हें रास्ते में एक पुराना मेकअप का बक्सा दिखाई देता है।
अगर कोई लालच में आकर उसे खोल देता है...
तो उसके पीछे एक ठंडी आवाज़ सुनाई देती है—
"क्या तुम मेरा अधूरा श्रृंगार पूरा करोगे...?"
जो भी उस आवाज़ का जवाब देता है...
वह फिर कभी अपने घर वापस नहीं लौटता।
और कहते हैं कि आज भी उस जंगल में किसी नई आत्मा का इंतज़ार किया जा रहा है...