Her Silent Secret - 2 in Hindi Drama by Sonam Brijwasi books and stories PDF | Her Silent Secret - 2

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Her Silent Secret - 2

चौहान हवेली – रात का समय
लिविंग रूम –

घर के सभी लोग अपने-अपने कमरों में जा चुके थे। सिर्फ लिविंग रूम में हल्की रोशनी जल रही थी।

विराट (सॉफ्ट मुस्कान के साथ, संपूर्णा के पास बैठते हुए) बोला - 
आज पूरा दिन बहुत भागदौड़ में निकल गया… पर सबसे सुकून का पल अभी मिला है।

संपूर्णा (हल्के से सिर झुकाते हुए) बोली - 
जब आप पास होते हो विराट जी… तो दिन की सारी थकान ऐसे ही गायब हो जाती है।

विराट उसकी तरफ देखता है, कुछ पल चुप रहता है।

विराट (धीरे से) बोला - 
तुम हमेशा सब संभाल लेती हो… घर, बच्चा, और मुझे भी। कभी खुद के लिए जीती भी हो या नहीं?

संपूर्णा हल्का सा मुस्कुराती है।

संपूर्णा बोली - 
मेरा ‘खुद’ आपसे और विवान से शुरू होता है विराट जी… और आप दोनों पर  ही खत्म।

विराट धीरे से उसका हाथ पकड़ लेता है।

विराट (धीमी आवाज़ में) बोला - 
संपूर्णा… अगर तुम न होती, तो ये घर सिर्फ एक इमारत होता। तुमने इसे घर बनाया है।

संपूर्णा उसकी आँखों में देखती है।

संपूर्णा बोली - 
और आपने मुझे एक पहचान दी है विराट जी… सिर्फ नाम नहीं, एक दुनिया दी है।

कुछ पल दोनों के बीच खामोशी रहती है… लेकिन ये खामोशी भारी नहीं, सुकून भरी होती है। विराट हल्के से उसके बालों को पीछे करता है।

विराट बोला - 
मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहना चाहता हूँ… ऐसे ही, पास।

संपूर्णा उसकी तरफ झुकती है।

संपूर्णा (धीरे से) बोली - 
तो रहो ना… हमेशा।

तभी छोटे कदमों की आवाज़ आती है।

विवान (नींद भरी आवाज़ में) बोला - 
मम्मी… पापा…

संपूर्णा तुरंत पीछे हटकर मुस्कुरा देती है।

संपूर्णा बोली - 
अरे मेरा बच्चा अभी तक सोया नहीं?

विवान दौड़कर दोनों के बीच आ जाता है और विराट की गोद में चढ़ जाता है।

विवान बोला - 
मुझे डर लग रहा था… मैं अकेले नहीं सो सकता।

विराट उसे कसकर गले लगा लेता है।

विराट (प्यार से) बोला - 
डरने की कोई बात नहीं है… पापा हैं ना।

विवान अब संपूर्णा की तरफ देखता है।

विवान बोला - 
मम्मी… आप भी मेरे साथ सोओ ना।

संपूर्णा मुस्कुराकर उसके माथे को चूम लेती है।

संपूर्णा बोली - 
ठीक है… आज हम तीनों साथ में सोएंगे।

बेडरूम की हल्की रोशनी। विवान बीच में सोया हुआ है, एक हाथ मम्मी, एक हाथ पापा को पकड़े हुए।

विवान (नींद में बड़बड़ाते हुए) बोला - 
पापा… मम्मी… मुझे मत छोड़ना…

विराट और संपूर्णा एक-दूसरे को देखते हैं।

विराट (धीरे से) बोला - 
हम कभी नहीं छोड़ेंगे तुम्हे… और एक-दूसरे को भी नहीं।

संपूर्णा हल्का सा सिर विराट के कंधे पर रख देती है।

संपूर्णा बोली - 
ये हमारा घर नहीं… हमारी दुनिया है।

तीनों एक ही बिस्तर पर प्यार, सुरक्षा और मासूमियत के बीच एक पूरी दुनिया।

(संपूर्णा की सोच) -
कुछ रिश्ते शब्दों से नहीं… बस साथ से पूरे होते हैं।

विराट और संपूर्णा बालकनी में खड़े हैं। नीचे शहर की हल्की रोशनी चमक रही है।

विराट (धीरे से, बाहर देखते हुए) बोला - 
इतनी शांत रात बहुत कम मिलती है… लगता है जैसे दुनिया थोड़ी देर के लिए रुक गई हो।

संपूर्णा (हल्की मुस्कान के साथ) बोली - 
शायद इसलिए… क्योंकि आज आप जल्दी घर आ गए हो।

विराट उसकी तरफ देखता है और हल्का सा मुस्कुराता है।

विराट बोला - 
अगर मैं हर दिन जल्दी आऊँ… तो क्या ये रातें हमेशा ऐसी हो जाएंगी?

संपूर्णा उसकी आँखों में देखती है।

संपूर्णा बोली - 
फिर तो ये घर हमेशा रोशन रहेगा विराट जी…

विराट धीरे से उसका हाथ पकड़ लेता है।

विराट (नरम आवाज़ में) बोला - 
तुम्हें पता है संपूर्णा… मैं दिनभर चाहे जितना भी व्यस्त रहूँ, लेकिन मन हमेशा यहीं रहता है… इस घर में… तुम्हारे पास।

संपूर्णा हल्के से उसका हाथ कस लेती है।

संपूर्णा बोली - 
और मैं… हर दिन आपकी वापसी का इंतज़ार करती हूँ। चाहे कुछ भी हो जाए।

कुछ पल दोनों चुप रहते हैं… लेकिन ये चुप्पी बहुत कुछ कह रही होती है। विराट उसके माथे पर हल्के से हाथ रखता है।

विराट बोला - 
तुम हमेशा इतनी शांत कैसे रह लेती हो?

संपूर्णा मुस्कुराती है।

संपूर्णा बोली - 
क्योंकि मुझे पता है… मेरी दुनिया मेरे सामने खड़ी है।

विराट उसके करीब आ जाता है, आवाज़ बहुत धीमी हो जाती है।

विराट बोला - 
और मैं चाहता हूँ… ये दुनिया कभी मुझसे दूर न जाए।

संपूर्णा उसकी तरफ झुक जाती है, हल्की सी मुस्कान के साथ।

संपूर्णा बोली - 
तो फिर मुझे थामे रखना… हमेशा।

तभी कमरे से छोटी सी आवाज़ आती है—

विवान (नींद में चलते हुए) बोला - 
मम्मी… पापा…

दोनों तुरंत मुस्कुराकर अलग हो जाते हैं। संपूर्णा दौड़कर अंदर जाती है और विवान को गोद में उठा लेती है।

संपूर्णा बोली - 
मेरा बच्चा… अभी तक सोया नहीं?

विवान अपनी आँखें मसलते हुए बोलता है—
मैं अकेले नहीं सो सकता… मुझे आप दोनों चाहिए।

विराट उसके सिर पर हाथ फेरता है।

विराट बोला - 
आज से तुम्हें डरने की जरूरत नहीं है… हम दोनों हमेशा तुम्हारे साथ हैं।

बेडरूम में हल्की रोशनी। विवान बीच में सोया हुआ है, दोनों माता-पिता उसके पास बैठे हैं। विवान धीरे-धीरे सो जाता है।

संपूर्णा (धीरे से) बोली - 
देखो विराट जी… कितना शांत हो गया हमारा बच्चा।

विराट बोला - 
क्योंकि उसे पता है… हम साथ हैं।

संपूर्णा उसका हाथ पकड़ लेती है।

संपूर्णा बोली - 
और मैं चाहती हूँ… ये साथ कभी खत्म न हो।

विराट हल्के से मुस्कुराता है।

विराट बोला - 
नहीं होगा… कभी नहीं।

तीनों एक ही कमरे में, एक ही सुकून में। बाहर रात शांत है…और अंदर एक परिवार पूरी तरह सुरक्षित। प्यार सिर्फ कहने का नाम नहीं… साथ जीने का नाम है।

चौहान हवेली – सुबह

संपूर्णा शीशे के सामने खड़ी होकर अपने बाल ठीक कर रही थी।
हल्की सुबह की रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी। वह शांत थी… अपने ही विचारों में खोई हुई। तभी अचानक विराट धीरे से पीछे से आता है और उसे अपनी बाहों में भर लेता है। उसका चेहरा संपूर्णा की गर्दन के पास झुक जाता है। संपूर्णा एकदम हल्की सी चौंक जाती है।

संपूर्णा (धीरे से, घबराहट और शर्म के साथ) बोली - 
अरे… क्या कर रहे हो आप… कोई देख लेगा… विवान देख लेगा!

विराट हल्का सा मुस्कुराता है, बिना उसे छोड़े हुए।

विराट (धीरे, गर्म आवाज़ में) बोला - 
विवान स्कूल गया है… और घर में अभी सिर्फ तुम हो… और मैं।

संपूर्णा की धड़कन तेज हो जाती है, लेकिन वह उसे दूर नहीं करती।

संपूर्णा (धीरे से) बोली - 
आपको कभी समझ नहीं आता… मैं कितनी शर्मिंदा हो जाती हूँ ऐसे में।

विराट उसकी गर्दन के पास हल्की आवाज़ में बोलता है—
और तुम्हें पता है… मुझे ये पल कितने अपने लगते हैं?

संपूर्णा हल्के से मुस्कुराती है, फिर धीरे से बोलती है—
आप हमेशा ऐसे ही अचानक आते हो… और मेरा दिल तेज कर देते हो।

विराट उसे धीरे से अपनी तरफ घुमाता है। अब दोनों आमने-सामने हैं। विराट उसकी आँखों में देखता है।

विराट (धीरे, भावुक होकर) बोला - 
संपूर्णा… तुम हर दिन और भी खूबसूरत लगती हो। जैसे समय तुम्हें और अपना बना रहा हो।

संपूर्णा शर्म से नजरें झुका लेती है।

संपूर्णा बोली - 
और आप… हमेशा मुझे ऐसे ही परेशान करते रहोगे क्या?

विराट हल्का सा हंसता है।

विराट बोला - 
अगर ये प्यार है… तो हाँ।

तभी बाहर से दरवाज़े की घंटी बजती है। दोनों तुरंत अलग हो जाते हैं। संपूर्णा जल्दी से अपने बाल ठीक करती है और सांस संभालती है।

संपूर्णा (घबराते हुए) बोली - 
देखा मैंने कहा था न… कोई आ गया!

विराट मुस्कुराते हुए दरवाज़े की तरफ देखता है।

विराट बोला - 
आराम से… अभी तो दिन शुरू हुआ है।

संपूर्णा आईने की तरफ देखती है, हल्का सा मुस्कुराती है।
विराट पीछे से उसे देख रहा होता है—उसकी आँखों में सिर्फ अपनापन।
कुछ रिश्ते शब्दों से नहीं… अचानक छू जाने से और भी गहरे हो जाते हैं।