"कहिए करण सर, या फिर मिस्टर करण मेहरा कहूँ?" आरव ने फोन कान से लगाते ही बिना किसी भूमिका के बेहद ठंडे और सपाट लहजे में कहा।
दूसरी तरफ कुछ सेकंड के लिए गहरा सन्नाटा छा गया। फिर अचानक ठहाके मारकर हँसने की आवाज़ आई। करण का वह सीधा और मासूम दोस्त वाला मुखौटा अब पूरी तरह उतर चुका था।
"वाह आरव! मानना पड़ेगा, तुम्हारी डिजिटल फॉरेंसिक स्किल्स का जवाब नहीं। मुझे लगा था कि तुम और यह बेवकूफ रिया एक-दूसरे पर शक करते-करते ही आपस में उलझ जाओगे और मैं आराम से डेटा लेकर निकल जाऊँगा," करण की आवाज़ में एक अजीब सा घमंड और मक्कारी थी।
आरव ने अपनी मुट्ठी को और कसकर भींच लिया। "तुमने दोस्ती के नाम पर पीठ में छुरा घोंपा है, करण। कंपनी का डेटा चुराकर और रिया के भाई को मोहरा बनाकर तुम खुद को बहुत होशियार समझ रहे हो?"
"दोस्ती? बिजनेस में कोई दोस्ती नहीं होती, मेरे भाई!" करण ने हँसते हुए कहा। "डेटा मेरे पास है, और सारे डिजिटल सबूत यही चीख-चीखकर कह रहे हैं कि यह चोरी तुम्हारी एक्सेस आईडी से हुई है। अगर पुलिस आई, तो तुम जेल जाओगे और रिया का भाई तो वैसे ही हमारे कब्ज़े में है। लेकिन मैं तुम्हें एक मौका देता हूँ..."
"कैसा मौका?" आरव ने पूछा।
"अगले आधे घंटे में गोमती नगर वाले पुराने वेयरहाउस पर आ जाओ। उस डेटा का बैकअप डिलीट करने की मुख्य की (Master Decryption Key) तुम्हारे पास है। वह की मुझे सौंप दो, और मैं रिया के भाई को छोड़ दूँगा। साथ ही तुम्हें इस केस से दूर रहने का सेफ़ रास्ता दूँगा। अगर पुलिस को बताने की गलती की, तो रिया का भाई ज़िंदा नहीं बचेगा।" इतना कहकर करण ने फोन काट दिया।
कैफे में सन्नाटा छा गया। रिया कांपते हुए आरव का हाथ पकड़कर रोने लगी। "आरव... मत जाओ वहाँ! विक्रम और करण बहुत ख़तरनाक लोग हैं। वे तुम्हें जान से मार देंगे!"
आरव ने रिया के आँसू पोंछे। उसकी आँखों में अब डर का नामोनिशान नहीं था; वहाँ सिर्फ एक तीखा जुनून और फैसला था। "अगर हम आज पीछे हटे रिया, तो वे हमें पूरी ज़िंदगी ब्लैकमेल करेंगे। उन्होंने मेरे प्यार, मेरी इज़्ज़त और मेरी दोस्ती का तमाशा बनाया है। अब इस खेल का नियम मैं तय करूँगा।"
आरव ने तुरंत अपने लैपटॉप पर एक पेन ड्राइव लगाई। उसने मास्टर की (Master Key) का एक डुप्लीकेट फ़र्ज़ी कोड तैयार किया, जो देखने में बिल्कुल असली लगता था, लेकिन सिस्टम में डालते ही वह सामने वाले के पूरे डेटा को खुद-ब-खुद नष्ट (Self-destruct) कर देता। इसके साथ ही, उसने साइबर क्राइम ब्रांच के स्पेशल एसपी को पूरी सच्चाई, स्क्रीनशॉट्स और लाइव लोकेशन ट्रैकर का लिंक ईमेल कर दिया।
"रिया, तुम मेरे साथ चलोगी," आरव ने लैपटॉप बंद करते हुए कहा। "लेकिन तुम बाहर गाड़ी में ही रहोगी। जब तक मैं इशारा न करूँ, अंदर मत आना।"
रात के करीब नौ बजे, लखनऊ की बारिश में भीगता हुआ वह पुराना वेयरहाउस एक भयानक भूतिया हवेली जैसा लग रहा था। चारों तरफ अंधेरा था और सिर्फ एक कोने में ज़ंग लगी लाइट जल रही थी। आरव ने भारी कदमों से वेयरहाउस के बड़े दरवाज़े को धक्का दिया।
अंदर करण अपनी महंगी कार के बोनट पर बैठा मुस्कुरा रहा था, और उसके पीछे दो लंबे-चौड़े बाउंसर खड़े थे। वहीं एक कोने में रिया का भाई कुर्सी से बँधा हुआ था, जिसके मुँह पर पट्टी लगी थी।
"अकेले आए हो? बहुत समझदार हो आरव," करण ने नीचे कूदते हुए कहा। "लाओ, पेन ड्राइव मुझे दो और अपने इस घटिया प्यार के नाटक को खत्म करो।"
आरव ने अपनी जेब से पेन ड्राइव निकाली और उसे उंगली में घुमाते हुए करण की आँखों में देखा। "पेन ड्राइव तो मिल जाएगी करण, लेकिन क्या तुमने कभी सोचा है कि जब एक हैकर को पता चलता है कि उसके साथ खेल खेला जा रहा है, तो वह डिफेंस नहीं... सीधे अटैक करता है?"