Verginiti - 2 in Hindi Love Stories by Ritu kumari books and stories PDF | वर्जिनिटी - भाग 2

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वर्जिनिटी - भाग 2

कमरे के भारी दरवाज़े के ऑटोमैटिक लॉक होने की गूँज अभी माया के कानों में ठहरी भी नहीं थी कि आर्यन की भारी, डरावनी परछाईं उस पर पूरी तरह हावी होने लगी। कमरे में छाई गहरी खामोशी को केवल माया की तेज़ चलती साँसें, उसके दिल की धड़कनें और धीमी सिसकियाँ ही तोड़ पा रही थीं। पूरे कमरे की मद्धम रोशनी में माहौल और भी ज़्यादा तनावपूर्ण महसूस हो रहा था। आर्यन ने बिना कोई जल्दी दिखाए, अपनी महँगी ब्लेज़र उतारी और बेपरवाह अंदाज़ में पास रखे चमड़े के सोफ़े पर फेंक दी। उसके बाद उसने धीमे, सधे और भारी कदमों से माया की तरफ़ बढ़ना शुरू किया। उसकी हर एक चाल में एक शिकारी जैसी आक्रामकता, बेपरवाही और अटूट मालिकाना हक़ साफ़ झलक रहा था।
माया डर के मारे लगातार पीछे हटने लगी। उसके पैर कांप रहे थे और हर कदम के साथ उसका दिल सीने से बाहर आने को बेताब हो रहा था। आखिरकार, उसकी पीठ कमरे की ठंडी संगमरमर की दीवार से जा टकराई। अब भागने या छिपने का हर एक रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका था।
आर्यन ने बिना एक भी पल गँवाए अपनी दोनों मज़ाबूत, चौड़ी बाहें दीवार पर टिका दीं और माया को अपने लंबे, गठीले जिस्म के दायरे में पूरी तरह कैद कर लिया। आर्यन की गहरी, कड़क और मदहोश कर देने वाली आँखों की तीखी नज़र सीधे माया के कांपते, भीगे हुए गुलाबी होंठों पर जाकर टिक गई।
माया ने घबराकर अपने कांपते हाथ उठाए और आर्यन के चौड़े सीने पर रखकर उसे पूरी ताकत से पीछे धकेलने की नाकाम कोशिश की। लेकिन आर्यन अपनी जगह से 1 इंच भी टस से मस नहीं हुआ। उल्टा, उसने माया की दोनों नाज़ुक कलाइयों को अपने एक ही बड़े, सख्त हाथ में दबोच लिया और दीवार से ऊपर ले जाकर कसकर सटा दिया।
"अपनी आँखें मत चुराओ मुझसे, माया," आर्यन का लहज़ा धीमा, भारी लेकिन बेहद कड़क था। "जब आर्यन मल्होत्रा तुम्हारे इतने करीब खड़ा हो, तो तुम्हारी नज़रें सिर्फ़ और सिर्फ़ मुझ पर होनी चाहिए।"
माया की लाचारी और बेबसी: "कृपया... मुझे छोड़ दीजिए! मैं आपके आगे हाथ जोड़ती हूँ, भीख माँगती हूँ। आपने जो 1 करोड़ रुपये मेरे पिता के इलाज के लिए दिए हैं, मैं दिन-रात एक करके, मेहनत करके आपकी एक-एक पाई लौटा दूँगी... मुझे बस थोड़ा सा वक्त दे दीजिए, भगवान के लिए।"
आर्यन का अटूट जुनून: "वक्त? तुम्हें वाकई लगता है माया कि आर्यन मल्होत्रा अपना कीमती वक्त और पैसा किसी उधारी या व्यापार के लिए बर्बाद करता है? मैंने तुम्हारी मजबूरी की पूरी कीमत चुकाई है। अब तुम पर, तुम्हारी हर आती-जाती साँस पर, तुम्हारी इस ख़ामोशी पर और तुम्हारी इस मासूमियत पर सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरा हक़ है।"
इतना कहते ही आर्यन माया की गर्दन की तरफ़ और ज़्यादा झुक गया। उसकी गर्म, मदहोश कर देने वाली साँसें जब माया की नाज़ुक त्वचा से टकराईं, तो माया का पूरा जिस्म झनझना उठा और एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। माया ने डर, घबराहट और शर्म के मारे अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं और अपने निचले होंठ को दाँतों तले दबा लिया।
आर्यन ने अपने दूसरे हाथ की गर्म उंगलियों से माया के चेहरे पर बिखरी जुल्फ़ों को धीरे से पीछे हटाया। उसकी उंगलियाँ माया के ठंडे गालों को सहलाते हुए धीरे-धीरे उसकी नाज़ुक कमर तक उतर आईं। उसने माया की कमर पर अपनी पकड़ मज़बूत की और उसे अपनी तरफ़ इतनी शिद्दत से खींचा कि दोनों के सीने एक-दूसरे से पूरी तरह टकरा गए। माया की धड़कनें अब बेकाबू होकर आर्यन के सीने में गूँज रही थीं।
"मुझसे नफ़रत करो, रो लो, चीख लो, या जितना हो सके खुद को बचाने की कोशिश कर लो... लेकिन आज की रात बीतने के बाद तुम चाहकर भी इस सच को बदल नहीं पाओगी कि तुम सिर्फ़ मेरी हो," आर्यन ने उसके कान के पास झुककर अपनी भारी आवाज़ में फुसफुसाया।
माया समझ नहीं पा रही थी कि यह उसकी ज़िंदगी का सबसे खौफ़नाक सौदा था, या आर्यन का वो जुनूनी, ज़बरदस्ती भरा अधिकार जो धीरे-धीरे उसकी पूरी रूह को अपनी गिरफ़्त में ले रहा था।