Mr. Ms. Fake in Hindi Comedy stories by kajal jha books and stories PDF | Mr. Ms. Fake - एपिसोड 37

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Mr. Ms. Fake - एपिसोड 37

एपिसोड 37 – मेरी हमशक्ल, मेरी बहन

“हैलो… दीदी।”

उस एक आवाज़ ने पूरे कमरे की हवा रोक दी।

Saanvi की आँखें सामने खड़ी लड़की पर जम गईं।

वही चेहरा।

वही आँखें।

वही नाक।

वही होंठ।

अगर Saanvi को शीशे के सामने खड़ा कर दिया जाता, तो शायद फर्क करना मुश्किल होता।

Saanvi ने एक कदम पीछे लिया।

“तुम…”

उसकी आवाज़ काँप गई।

लड़की ने हल्की-सी मुस्कान दी।

“हाँ… मैं।”

Aryveer की नजरें भी दोनों लड़कियों के बीच घूम रही थीं।

Kabir अगर वहाँ होता तो शायद तुरंत कह देता—

“भाई, अब तो पहचानने के लिए आधार कार्ड निकालना पड़ेगा।”

लेकिन इस वक्त किसी के चेहरे पर मजाक की जगह नहीं थी।

राजवीर की आँखों में आँसू थे।

वह धीरे-धीरे उस लड़की की तरफ बढ़ा।

“तुम यहाँ क्यों आई?”

लड़की ने अपने पिता की तरफ देखा।

“क्योंकि अब बहुत देर हो चुकी है, पापा।”

Saanvi के चेहरे का रंग उड़ गया।

“पापा?”

उसने राजवीर की तरफ देखा।

“ये… तुम्हारी बेटी है?”

राजवीर ने आँखें बंद कर लीं।

कुछ सेकंड तक वह कुछ नहीं बोला।

फिर उसने धीमी आवाज़ में कहा—

“हाँ।”

Saanvi का दिल जैसे एक पल के लिए धड़कना भूल गया।

“तो… ये कौन है?”

राजवीर ने उसकी तरफ देखा।

“तुम्हारी बहन।”

Saanvi की आँखें फैल गईं।

“मेरी… बहन?”

“तुम दोनों जुड़वाँ हो।”

कमरे में सन्नाटा छा गया।

Aryveer ने तुरंत Saanvi की तरफ देखा।

उसके चेहरे पर हैरानी के साथ डर भी था।

Saanvi ने लड़की को देखा।

“लेकिन… मुझे तो हमेशा बताया गया कि मैं अकेली हूँ।”

लड़की की मुस्कान गायब हो गई।

“मुझे भी।”

Saanvi ने उसे गौर से देखा।

“तुम्हारा नाम?”

लड़की कुछ पल चुप रही।

फिर बोली—

“आरोही।”

“आरोही…”

Saanvi ने जैसे उस नाम को महसूस करने की कोशिश की।

आरोही धीरे-धीरे उसके करीब आई।

“मुझे बचपन से बताया गया था कि मेरी एक बहन थी… लेकिन वो मर चुकी है।”

Saanvi का दिल बैठ गया।

“और मुझे बताया गया कि मेरे माता-पिता… मेरे साथ नहीं हैं।”

आरोही ने सिर हिलाया।

“क्योंकि हमें जानबूझकर अलग किया गया था।”

“किसने?”

Saanvi ने तुरंत पूछा।

आरोही ने राजवीर की तरफ देखा।

राजवीर का चेहरा सख्त हो गया।

“सामर।”

Saanvi की आँखों में गुस्सा भर आया।

“सामर ने हमें अलग किया?”

राजवीर ने सिर हिलाया।

“सिर्फ तुम्हें और आरोही को नहीं। उसने हमारी पूरी जिंदगी बर्बाद की।”

Aryveer आगे आया।

“लेकिन अगर सामर इतना कुछ कर चुका था, तो आरोही अब तक कहाँ थी?”

आरोही ने उसकी तरफ देखा।

“एक ऐसी जगह… जहाँ से वापस आना आसान नहीं था।”

“कहाँ?”

आरोही ने जवाब नहीं दिया।

उसने अपनी मुट्ठी में पकड़ी हुई एक छोटी-सी चाबी निकाली।

Saanvi की नजर उस चाबी पर टिक गई।

वही आकार।

वही डिजाइन।

उसने तुरंत अपनी गर्दन में पड़ा लॉकेट पकड़ लिया।

“ये चाबी…”

राजवीर ने चौंककर आरोही को देखा।

“तुम्हारे पास ये कहाँ से आई?”

आरोही ने कहा—

“जिस आदमी ने मुझे यहाँ भेजा है, उसने दी।”

Aryveer की आँखें सिकुड़ गईं।

“कौन आदमी?”

आरोही ने उसकी तरफ देखा।

“अभी उसका नाम बताना सही नहीं होगा।”

“क्यों?”

“क्योंकि अगर उसका नाम मैंने लिया…”

आरोही रुक गई।

“तो शायद हम सब अगली सुबह तक जिंदा न रहें।”

Saanvi का चेहरा गंभीर हो गया।

“आरोही, मुझे सच चाहिए।”

आरोही ने उसकी आँखों में देखा।

कुछ पल दोनों बहनें एक-दूसरे को देखती रहीं।

फिर आरोही ने कहा—

“तुम्हें सच चाहिए?”

“हाँ।”

“तो पहले ये जान लो कि तुम्हारे पिता सिर्फ तुम्हें बचाने के लिए गायब नहीं हुए थे।”

राजवीर ने तुरंत कहा—

“आरोही!”

लेकिन देर हो चुकी थी।

Saanvi ने अपने पिता की तरफ देखा।

“क्या मतलब?”

राजवीर चुप रहा।

Aryveer ने उसका हाथ पकड़ लिया।

Saanvi ने उसकी तरफ देखा।

Aryveer ने बस इतना कहा—

“मैं हूँ।”

उस एक वाक्य से Saanvi की आँखें नम हो गईं।

फिर उसने आरोही की तरफ देखा।

“बताओ।”

आरोही ने धीरे से कहा—

“Operation R सिर्फ राजवीर को गायब करने का ऑपरेशन नहीं था।”

“तो?”

“उस ऑपरेशन का असली मकसद था…”

आरोही ने Saanvi की तरफ देखा।

“तुम दोनों को ढूँढना।”

Saanvi के पैरों तले जमीन खिसक गई।

“हमें?”

“हाँ।”

राजवीर ने सिर झुका लिया।

“तुम दोनों में कुछ ऐसा है जो सामर को चाहिए था।”

Aryveer ने पूछा—

“क्या?”

राजवीर ने कोई जवाब नहीं दिया।

आरोही ने आगे बढ़कर कहा—

“हम दोनों के शरीर में एक ही चीज़ है।”

Saanvi ने परेशान होकर पूछा—

“क्या?”

आरोही ने अपनी कलाई से एक पतला काला धागा हटाया।

उसकी कलाई पर एक छोटा-सा निशान था।

Saanvi ने अपनी कलाई देखी।

वही निशान।

दोनों के निशान बिल्कुल एक जैसे थे।

Aryveer ने गौर से देखा।

“ये निशान बचपन से है?”

Saanvi ने सिर हिलाया।

“हाँ।”

आरोही बोली—

“ये सिर्फ निशान नहीं है।”

कमरे में फिर खामोशी छा गई।

तभी बाहर से किसी चीज़ के गिरने की आवाज़ आई।

धड़ाम!

सभी चौंक गए।

Aryveer तुरंत दरवाजे की तरफ बढ़ा।

“कोई बाहर है।”

राजवीर ने भी अपनी जैकेट से फोन निकाला।

Saanvi ने आरोही का हाथ पकड़ लिया।

“मेरे साथ रहना।”

आरोही ने हल्की मुस्कान दी।

“बचपन में पहली बार कोई मुझे ये कह रहा है।”

Saanvi कुछ नहीं बोली।

उसे पहली बार महसूस हुआ कि सामने खड़ी लड़की सिर्फ उसकी हमशक्ल नहीं थी।

वह उसकी जिंदगी का वो हिस्सा थी, जिसके बारे में उससे सालों तक झूठ बोला गया था।

दरवाजा खुला।

बाहर कोई नहीं था।

लेकिन जमीन पर एक सफेद लिफाफा पड़ा था।

Aryveer ने उसे उठाया।

लिफाफे पर सिर्फ एक लाइन लिखी थी—

“एक बेटी मिल गई… अब दूसरी को बचा सकते हो तो बचा लो।”

Saanvi की साँस अटक गई।

Aryveer ने तुरंत उसे अपने पीछे कर लिया।

“ये धमकी है।”

राजवीर ने लिफाफा देखा।

उसके चेहरे पर डर साफ नजर आ रहा था।

“वो जान गया।”

“कौन?” Saanvi ने पूछा।

राजवीर ने धीरे से कहा—

“सामर।”

तभी Aryveer का फोन बजा।

उसने स्क्रीन देखी।

Unknown Number.

उसने कॉल रिसीव की।

“Hello?”

कुछ सेकंड तक दूसरी तरफ सिर्फ खामोशी थी।

फिर एक हँसी सुनाई दी।

“कैसा लगा अपना परिवार देखकर, Aryveer?”

Aryveer का चेहरा सख्त हो गया।

“सामर।”

“Exactly.”

“तुम्हें क्या चाहिए?”

सामर हँसा।

“मुझे वही चाहिए जो सालों पहले चाहिए था।”

“क्या?”

“सच्चाई।”

Aryveer ने दाँत भींचे।

“सच्चाई तुम्हारे सामने है।”

“नहीं, Aryveer।”

सामर की आवाज़ अचानक गंभीर हो गई।

“तुम्हारे सामने अभी सिर्फ आधी सच्चाई है।”

Aryveer चुप रहा।

सामर बोला—

“तुम्हें लगता है Saanvi और Aarohi जुड़वाँ हैं, इसलिए कहानी खत्म हो गई?”

Aryveer ने Saanvi की तरफ देखा।

“क्या मतलब?”

“जिस रात दोनों पैदा हुई थीं…”

सामर कुछ सेकंड रुका।

“उस रात अस्पताल में सिर्फ दो बच्चियाँ पैदा नहीं हुई थीं।”

Saanvi का दिल तेजी से धड़कने लगा।

“तो?”

सामर ने कहा—

“तीन।”

कॉल कट गई।

Aryveer कुछ सेकंड फोन को देखता रह गया।

“क्या हुआ?”

Saanvi ने घबराकर पूछा।

Aryveer ने उसकी तरफ देखा।

वह सच बताना नहीं चाहता था।

लेकिन अब छिपाना भी मुश्किल था।

“सामर ने कहा…”

वह रुक गया।

“क्या?”

“जब तुम और आरोही पैदा हुई थीं…”

उसने गहरी साँस ली।

“उस रात तीन बच्चियाँ पैदा हुई थीं।”

Saanvi और आरोही दोनों एक-दूसरे को देखने लगीं।

राजवीर का चेहरा सफेद पड़ चुका था।

Saanvi ने धीरे से पूछा—

“पापा…”

राजवीर ने उसकी तरफ देखा।

उसकी आँखों में ऐसा डर था, जो Saanvi ने पहले कभी नहीं देखा था।

“क्या ये सच है?”

राजवीर ने कोई जवाब नहीं दिया।

Saanvi की आँखों से आँसू निकल आए।

“पापा… क्या हमारी एक और बहन है?”

राजवीर ने धीरे से आँखें बंद कर लीं।

और फिर…

उसने सिर्फ एक शब्द कहा—

“हाँ।”

Saanvi के हाथ से लॉकेट छूटकर जमीन पर गिर गया।

तीसरी बेटी… अभी जिंदा थी।

और सबसे बड़ा सवाल यह था—

वह आखिर कहाँ थी?