अब उसके पास लोकेशन भी थी और वक्त बहुत कम। उसने बाहर खड़ी कार स्टार्ट की और अलेक्जेंड्रिया हाइवे की तरफ पूरी रफ्तार से मोड़ दी।
अल-अकराफ़ ने नोटों की गड्डियों पर हाथ फेरा, गहरी सांस ली और ब्रीफकेस बंद करके नौशाद की तरफ खिसका दिया। उसने सिगार का धुआं छोड़ते हुए सिर हिलाया।
अल-अकराफ़:
"الفلوس حلوة يا باشا، بس أنت اتأخرت كتير... حمدان مير ساب مصر كلها وطار على باكستان في طيارته الخاصة من ساعة زمن."
(El-feloos helwa ya basha, bas enta et'akhart keteer... Hamdan Meer saab Masr kolloha w-taar ala Pakistan fee tayyarto el-khasa men saa'et zaman.)
हिंदी अनुवाद: "पैसा बहुत अच्छा है साहब, लेकिन तुम बहुत देर से आए हो... हमदान मीर तो पूरा मिस्र छोड़कर एक घंटे पहले ही अपने प्राइवेट जेट से वापस पाकिस्तान उड़ चुका है।"
नौशाद की भौहें तन गईं। उसने डीलर के अपने बेपरवाह अंदाज़ को बनाए रखते हुए पूछा:
नौशाद (डीलर के रूप में):
"غريبة يعني... راجل زي حمدان يجي مصر ويفركش الشغل بسرعة كده ليه؟"
(Ghareeba ya'ni... Ragel zay Hamdan yegy Masr w-yefarkesh el-shoghl be-sor'a keda leeh?)
हिंदी अनुवाद: "बड़ी अजीब बात है... हमदान जैसा बड़ा खिलाड़ी मिस्र आए और काम निपटाए बिना इतनी जल्दी क्यों निकल जाए?"
अल-अकराफ़ ने रहस्यमयी अंदाज में कंधे उचकाए।
अल-अकराफ़:
"هو أصلاً ما جاش عشان تجارة عادية... كان عنده مهمة خاصة ومحددة جداً هنا في القاهرة، أول ما خلصها طار على طول على بلده."
(Howa aslan ma-gash ashan tegara aadeya... Kaan ando mohemma khasa w-mehaddada geddan hena fee el-Qahira, awwal ma khallas-ha taar ala tool ala balado.)
हिंदी अनुवाद: "वो असल में यहाँ किसी आम धंधे के लिए आया ही नहीं था... काहिरा में उसका एक बहुत ही खास और तयशुदा काम था। जैसे ही वो पूरा हुआ, वो फौरन अपने मुल्क लौट गया।"
अल-अकराफ़ की यह बात सुनते ही नौशाद के दिमाग में एक ज़ोरदार बिजली सी कौंधी। सारे बिखरे हुए सिरे एक झटके में आपस में जुड़ गए।
नौशाद समझ गया कि वह सीमेंट फैक्ट्री, वो हथियारों की डील और वो सारा ड्रामा सिर्फ एक फरेब था। हमदान का काहिरा आने का असल 'खास काम' सिर्फ दो चीज़ें थीं—पहला, अपनी बड़ी विदेशी ड्रग-वेपन डील को अंजाम देना, और दूसरा, खुद नौशाद को ट्रैप करके उसकी गर्दन में वो खतरनाक न्यूरोटॉक्सिन केमिकल इंजेक्ट करना, ताकि एजेंसी का सबसे बेहतरीन एजेंट अपने ही हाथों अपनी टीम का कातिल बनकर हमेशा के लिए मिट जाए।
नौशाद ने अपनी टेबल पर पड़ी चाबी उठाई, अपने काले चश्मे को ठीक किया और डीलर वाले टशन के साथ खड़ा हुआ।
नौशाद:
"شكراً يا عقرب... وفرت عليا تدوير كتير."
(Shokran ya Aqrab... Waffart alayya tadweer keteer.)
हिंदी अनुवाद: "शुक्रिया अकराफ़... तुमने मेरी बहुत सी तलाश बचा ली।"
नौशाद बिना किसी शक के बेसमेंट से बाहर निकल आया।
ठंडी रात की हवा में खड़े होकर उसने अपनी मुट्ठियां भींच लीं। हमदान अब पाकिस्तान के अपने सबसे सुरक्षित किले में बैठ चुका था। अगर नौशाद को अपनी बेगुनाही का सबूत, उस ज़हर का एंटीडोट और हमदान का खात्मा चाहिए था, तो उसे एजेंसी की सारी बंदिशें तोड़कर सीधे पाकिस्तान की सरज़मीन पर हमदान के गढ़ में घुसना होगा—और उसके पास बचे थे सिर्फ 9 दिन।
नौशाद ने अल-अकराफ़ के ठिकाने से निकलते ही अपना पूरा प्लान बदल लिया। मिस्र में रुकने का अब कोई मतलब नहीं था। उसने काहिरा के एक पुराने सीक्रेट सेफहाउस से एक जाली पासपोर्ट, नया पहचान पत्र और कराची की एक इनडायरेक्ट कार्गो फ्लाइट का टिकट अरेंज किया। उसका मकसद साफ था—दुश्मन की मांद में घुसकर ही इस साजिश के तार काटे जा सकते थे।
फ्लाइट बोर्ड करने से पहले नौशाद का एनक्रिप्टेड सेटेलाइट फोन वाइब्रेट हुआ। स्क्रीन पर एक सिक्योर सिग्नल चमक रहा था।
नौशाद ने कॉल रिसीव की। दूसरी तरफ से एक कमज़ोर, लेकिन पहचानी हुई आवाज़ आई:
अज़गर:
"सर... मैं अज़गर बोल रहा हूँ।"
नौशाद के चेहरे पर राहत की एक हल्की सी लकीर खिंच गई।
नौशाद इब्राहिम खान:
"अज़गर! तुम कैसे हो? तुम्हारी हालत कैसी है? डॉक्टरों ने तुम्हें बात करने की इजाजत कैसे दी?"
अज़गर:
"दर्द बहुत है सर, लेकिन गोलियां निकल चुकी हैं। साहिर भाई के खास डॉक्टरों ने मुझे स्टेबल कर दिया है। मैं बेड पर लेटकर तमाशा नहीं देख सकता था सर। मुझे पता चला है कि हमदान मिस्र छोड़कर पाकिस्तान भाग चुका है।"
अज़गर की आवाज़ में एक वफादार और दर्द से भरे सिपाही का वही पुराना जज्बा था, जिससे नौशाद का दिल पसीज गया।
नौशाद इब्राहिम खान:
"हाँ अज़गर, उस कमीने का असल मकसद मुझे वो केमिकल इंजेक्ट करके फंसाना था। मैं अभी कराची के लिए निकल रहा हूँ। पाकिस्तान में ही हमदान का खात्मा होगा और मेरी बेगुनाही का सबूत मिलेगा।"
फोन के उस पार अज़गर ने चंद सेकंड का ठहराव लिया, फिर बहुत संजीदगी से बोला:
अज़गर:
"सर, आप वहां बिल्कुल अकेले हैं। एजेंसी आपके पीछे पड़ी है और हमदान अपने इलाके में एक बादशाह की तरह रहता है। मैंने साहिर भाई से कहकर खुद को डिस्चार्ज करवा लिया है। मैं भी अगले 24 घंटे में किसी तरह कराची पहुंच रहा हूँ। हम दोनों मिलकर अपनी टीम के खून का बदला लेंगे सर... मैं आपको अकेला नहीं छोड़ सकता।"
नौशाद ने गहरी सांस ली। उसे अपने इस जख्मी साथी के जज्बे पर गर्व महसूस हुआ। वह नहीं जानता था कि वफादारी के इन मीठे लफ्ज़ों के पीछे क्या खौफनाक जाल बुना जा रहा है।
नौशाद इब्राहिम खान:
"अपनी सेहत का ख्याल रखो अज़गर। कराची पहुंचकर सदर बाज़ार के पास वाले पुराने सेफहाउस का कोड इस्तेमाल करना। वहीं मिलते हैं।"
कॉल कट गई।
नौशाद ने फोन की सिम निकाली, उसे तोड़कर फेंका और कराची जाने वाले विमान की ओर कदम बढ़ा दिए।
उधर काहिरा के हॉस्पिटल में, अज़गर ने अपने ड्रिप के निशान पर बैंडेज बांधी। उसके चेहरे से वह बेबसी और दर्द का नकाब पूरी तरह उतर चुका था। उसकी आँखों में एक बेहद शातिर, ठंडी और ज़हरीली चमक थी। उसने जेब से एक दूसरा सीक्रेट फोन निकाला और सीधे हमदान मीर का नंबर डायल कर दिया।