misunderstanding in Hindi Comedy stories by Vandna Sharma books and stories PDF | गलतफहमी

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गलतफहमी


कहानी - गलतफहमी

ममता ने आज घर का काम बिजली की फुर्ती से निपटाया। आंगन में दोनों बच्चे, गोलू और गिन्नी, गृहकार्य में सिर खपाए बैठे थे।

ममता ने दुपट्टा संभालते हुए बड़ी बेटी से कहा, "गिन्नी, सुन! आज राशन की दुकान खुली है। पड़ोस वाली शर्मा आंटी बता रही थीं कि आज मिट्टी का तेल भी बटेगा। मैं उन्हीं के साथ तेल लेने जा रही हूँ। तुम दोनों भाई-बहन लड़ना मत, पढ़ाई करना।"

"ठीक है मम्मी," दोनों ने एक सुर में कहा।

ममता थैला लेकर निकल गई। घर में पढ़ाई चलती रही।

तभी दरवाजे पर खटपट हुई। बच्चों के पिताजी, रमेश बाबू, आज दफ्तर से जल्दी आ गए। अंदर आए तो सन्नाटा। रसोई में झांका, कमरे में देखा, श्रीमती जी नदारद!

उन्होंने आवाज लगाई, "गोलू! तुम्हारी मम्मी कहां गई है, दिखाई नहीं दे रही?"

गोलू होमवर्क में डूबा था। बिना सिर उठाए ही बोला, "तेल लेने।"

रमेश बाबू का माथा ठनका। 'इतना बड़ा हो गया, बाप से मजाक करता है!' उन्होंने गुस्से में गोलू के गाल पर हल्की सी चपत लगाई, "बोलने की तमीज नहीं है? बड़ों से ऐसे बात करते हैं?"

गोलू हक्का-बक्का। उसे समझ ही नहीं आया गलती क्या हुई।

अब रमेश बाबू गिन्नी की तरफ मुड़े, "तुम बताओ गिन्नी, कहां गई है मम्मी?"

गिन्नी ने सहमते हुए कहा, "पापा... तेल लेने गई हैं।"

बस! रमेश बाबू का पारा सातवें आसमान पर। "अच्छा! तुम भी! क्या सिखाते हैं तुम्हारे स्कूल में? बड़ों से मजाक करने की भी हद होती है!"

गिन्नी को भी एक चपत पड़ गई। दोनों बच्चे आंखों में आंसू लिए, एक-दूसरे को देख रहे थे। सोच रहे थे, 'हमने तो सच बोला, फिर पिटाई क्यों हुई?'

तभी दरवाजे पर ममता की आवाज आई। वह हांफती हुई अंदर आई। उसके हाथ में पांच लीटर वाली पीली कैन थी, जिसमें से मिट्टी के तेल की खुशबू आ रही थी।

रमेश बाबू ने आदत के मुताबिक बिना देखे ही पूछा, "कहां गई थी?"

ममता बोली, "अरे, तेल लेने गई थी! बड़ी लाइन थी, बड़ी मुश्किल से मिला है।"

अब जाकर रमेश बाबू ने नजर ऊपर उठाई। सामने सचमुच तेल की कैन देखकर उनका चेहरा देखने लायक था। कभी कैन को देखते, कभी बच्चों के लाल गालों को।

ममता ने पूछा, "क्या हुआ? मूड क्यों खराब है?"

रमेश बाबू झेंपते हुए बोले, "अं... कुछ नहीं... ठीक है, ठीक है। जा, एक कप चाय बनाकर ला। बहुत थक गया हूँ।"

गिन्नी से रहा नहीं गया। उसने मासूमियत से पूछा, "मां, हमने तो सही कहा था कि आप तेल लेने गई हो, फिर हमें डांट क्यों पड़ी?"

अब जाकर ममता को सारा माजरा समझ आया। वह अपनी हंसी रोक नहीं पाई। हंसते-हंसते लोटपोट हो गई, "अरे मेरे भोले बच्चों! तुम्हारे पापा को गलतफहमी हो गई!"

"कैसी गलतफहमी?" दोनों ने पूछा।

ममता ने समझाया, "'तेल लेने गई है' का एक मतलब तो मिट्टी का तेल लाना होता है, और दूसरा मतलब होता है - बेकार में इधर-उधर घूमना! तुम्हारे पापा ने दूसरा वाला मतलब समझ लिया।"

यह सुनकर पहले तो रमेश बाबू शर्माए, फिर गोलू मुस्कुराया, फिर गिन्नी खिलखिलाई और आखिर में चारों जोर-जोर से हंसने लगे।

रमेश बाबू ने दोनों बच्चों को पास बुलाकर पुचकारा, "माफ कर दो बेटा, पापा ने बिना सुने ही समझ लिया।"

उस दिन घर में चाय के साथ-साथ हंसी की महफिल भी चली।
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली