जागती परछाई by Shivani Paswan in Hindi Novels
Chapter 1 : जो याद नहीं रहना चाहिए था कुछ यादें अचानक गायब नहीं होतीं।वे बस धीरे-धीरे पीछे खिसक जाती हैं, इस तरह कि हमें...
जागती परछाई by Shivani Paswan in Hindi Novels
अगली सुबह मुझे सपने याद नहीं थे।बस एक अजीब-सा बोझ था, जैसे रात में कुछ अधूरा रह गया हो।डायरी मैंने नहीं खोली।कम से कम, म...
जागती परछाई by Shivani Paswan in Hindi Novels
Chapter 4 : जिसे ढूँढा नहीं जातामैंने नाम लिया—Sarika।उसने दो सेकंड सोचा, फिर बोली, “यहाँ इस नाम की कोई active file नहीं...