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  • The Monster Who Love Me - 2

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    उन्हीं में से एक मैं भी था, जो यहाँ तो आ गया था, पर मुझे कुछ भी पता नहीं था कि आ...

  • असुरविद्या - 6

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  • The Hiding Truth - 7

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  • यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (36)

                                : : प्रकरण - 36 : :          फिल्मों में अधिकाधिक अभ...

  • दो पतियों की लाडली पत्नी - 7

    रात का कमरा, हल्की नीली लाइटShreya हीटिंग पैड लगाए लेटी है।चेहरा थका हुआ… आँखें...

  • महाभारत की कहानी - भाग 183

    महाभारत की कहानी - भाग-१८७ भीष्म द्वारा वर्णित वर्णाश्रमधर्म, चर नियोग और शुल्क...

काँटों से खींच कर ये आँचल By Rita Gupta

क्षितीज पर सिन्दूरी सांझ उतर रही थी और अंतस में जमा हुआ बहुत कुछ जैसे पिघलता जा रहा था. मन में जाग रही नयी-नयी ऊष्मा से दिलों दिमाग पर जमी बर्फ अब पिघल रही थी. एक ठंडापन जो पसरा हु...

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एक अदद फ्लैट By Arpan Kumar

नंदलाल यादव दिल्ली में नौकरी करते हैं और साहिबाबाद में किराए के एक फ्लैट में रहते हैं। लोकल ट्रेन से आना-जाना करते हैं। आई.टी.ओ. पर उतर कर बस से आर.के.पुरम जाते हैं।सुबह शाम सप्ताह...

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खूँटे By Kusum Bhatt

‘‘मुझे हवा के घूँट पीने हैं....’’ आवाज झमक कर चेतना में गिरती है... सफेद पिलपिले हाथों से चेहरा घुमाने लगा है बेताल - सीधे..... ‘‘लिजलिजे स्पृश के बोझ तले दबी मेरी गर्दन टीसने लगी...

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कांट्रैक्टर By Arpan Kumar

सब अपने-अपने हिसाब से नौकरी करने आए थे। सब अपने-अपने हिसाब से नौकरी किए जा रहे थे। अगर देखा जाए तो आख़िरकार कोई ऑफिस भला क्या होता है! राजनीति और कार्यनीति का अखाड़ा ही तो। एन.आई.सी....

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खिलता है बुरांश ! By Kusum Bhatt

....आज सांवली शाम का जादू गायब था! वह टहलुई सी चलती रही..., मन का बेड़ा अभी अचानक उठे तूफान के बीच फंसा था...! एक पल को उसके जेहन में खौफनाक विचार उठा - समाप्त कर दे काया माँ... निर...

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अँधेरे में जुगनू By Kusum Bhatt

घर से निकलते समय उसने एक बार भी नहीं सोचा। तूफान का मुकाबला करने की ताकत नहीं थी उसमें। पति ने मारपीट की- बच्चों के सामने! ग्लानि हुई! रोज़-रोज़ गाली-गलौज़, मारपीट... तंग आ गयी थी। वह...

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मोती का पेड By Anita salunkhe Dalvi

पात्र -चार लडके एक लडकी उम्र -7-8-9नाम- प्रेम ,समीर ,ईशान ,राज      राज की बहन रानी        सारे बच्चे अपने मामा की गाव छ...

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प्रतिज्ञा By Munshi Premchand

प्रतिज्ञा उपन्यास विषम परिस्थितियों में घुट घुट कर जी रही भारतीय नारी की विवशताओं और नियति का सजीव चित्रण है। प्रतिज्ञा का नायक विधुर अमृतराय किसी विधवा से शादी करना चाहता है ताकि...

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बेगुनाह गुनेहगार By Monika Verma

सुहानी। एक प्यारी सी लड़की। जो अपने ख्यालो से इस दुनिया को देखती है, समझती है। जिसे संभव असंभव, मुमकिन नामुमकिन, मुश्किल आसान का फर्क समझ नही आता। जो करना चाहती है वो कर के ही रहती...

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एक अपवित्र रात By MB (Official)

उलरिख वॉन जेटजीखोवन के वृत्तान्तों से ली गयी यह कहानी 13वीं सदी की है। बोधकथाओं या प्रकृत कथाओं से अलग यह प्रतीक-कथा अपने समय में एक नया आयाम उद्घाटित करती है।
जब लांसलॉट लड़का ही...

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‘‘मुझे हवा के घूँट पीने हैं....’’ आवाज झमक कर चेतना में गिरती है... सफेद पिलपिले हाथों से चेहरा घुमाने लगा है बेताल - सीधे..... ‘‘लिजलिजे स्पृश के बोझ तले दबी मेरी गर्दन टीसने लगी...

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अँधेरे में जुगनू By Kusum Bhatt

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जब लांसलॉट लड़का ही...

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