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छह साल बाद : मुम्बई एक ऑफिस में : “अरे यार !जल्दी चल।” एकथोड़ी गोलू-मोलू सी लड़क...
सुबह शौर्य नींद से जग चुका था, पर उसने आँखें नहीं खोलीं ,सामने के टेबल से कुछ टट...
एक और ब्रह्मास्त्र:- नेहा और प्रज्ञा भी अभी आश्रम में ही रुके हुए हैं।रोहित के ज...
"""" मल्होत्रा विला,,,,!!!""" """ सुबह का वक्त,,, "". बेलकनी से आरही सूरज की तेज...
उन्हीं में से एक मैं भी था, जो यहाँ तो आ गया था, पर मुझे कुछ भी पता नहीं था कि आ...
मच्छरसमीरा ने नफरत से विहान की ओर देखा जो सोया हुआ था. शक्ल पर मत जा रॉकी. इसने...
एपिसोड 7 — "शापित भविष्यवाणी और छलावा ग्रह"युद्ध के मैदान में 'कार्य' की...
: : प्रकरण - 36 : : फिल्मों में अधिकाधिक अभ...
रात का कमरा, हल्की नीली लाइटShreya हीटिंग पैड लगाए लेटी है।चेहरा थका हुआ… आँखें...
महाभारत की कहानी - भाग-१८७ भीष्म द्वारा वर्णित वर्णाश्रमधर्म, चर नियोग और शुल्क...
पब्लिक हाउस के एक सलून बार में, जो चाइनाटाउन की आधिकारिक सीमा से कुछ ही दूरी पर स्थित था, एक कोने में एक छोटे से टेबल पर दो लोग बैठे थे और गंभीर चर्चा में व्यस्त थे। दोनों में कड़ा...
इत्तफाक की बात कि दक्ष के एक और पुत्री थी - विजया। वह सुन्दर नहीं थी। बुद्धिमान तो थी, पर काफी बुद्धिमान नहीं। किसी पुरुष ने उसकी कामना नहीं की, इसलिए वह बिन ब्याही रह गयी। वह प्रौ...
अनुक्रमणिका 1 - एक थी माया ....!!! - विजय कुमार 2 - एक रात - सोनु कसाना 3 - छोटी लड़की की सीख - Abhishek Hada 4 - जाने वाले ज़रा होशियार - डा. मुसाफिर बैठा
बहुत पुरानी बात है। धारा नगरी मे ने उसे मार डाला और स्वयं राजा बन बैठा। उसका राज्य दिनोंदिन बढ़ता गया और वह सारे जम्बूद्वीप का राजा बन बैठा। एक दिन उसके मन में आया कि उसे घूमकर सैर...
लघुकथाएँ "तुमसे सलाह लेना ही मुर्खता है. पगला कहीं के...."कहते हुए रवि पुन: रोने लगा. मिलने का समय समाप्त हो गया था. प्रहरी उसे अंदर ले गया. भोला लौट गया,उसे अपने मित्र की...
एक समय दक्षिण दिशा में एक वृद्ध बाघ स्नान करके कुशों को हाथ में लिए हुए कह रहा था-- हे हो मार्ग के चलने वाले पथिकों ! मेरे हाथ में रखे हुए इस सुवर्ण के कड्कण (कड़ा) को ले लो, इसे सु...
यह मेरी कहानियों का संग्रह है यह सभी कहानियां जीवन के विभिन्न मनोभावों को दिखाती हैं. जीवन के उतार चढ़ाव में डटे रहने वा उम्मीद न छोड़ने की प्रेरणा देती हैं।
रात अपने आगोश में बारिश की बूंदो की ठंडक सी समेटे हुए थी । कभी कभी बादलों की परतों को खोलता हुआ चाँद ऐसे निकलता मानो अपनी चांदनी की छटा बिखेरने की अदा से सबको रूबरू करवाना चाहता ह...
मेरे द्वारा लिखी गयी कहानी फेसबुक मेरे कथा-संग्रह एक देह एक आत्मा से ली गयी है । फेसबुक की वर्चुअल दुनिया वास्तविक में किस तरह से मार्मिक हो जाती है यह इस कहानी में बताया गया है...
जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ जयशंकर प्रसाद © COPYRIGHTS This book is copyrighted content of the concerned author as well as Matrubharti. Matrubharti has exclusive digital publishing...
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