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@aakankshawords
(255)

मेरे सामने ही वो किसी और में खोया रहा,
मैं खामोश थी मगर दिल अंदर से रोता रहा…
उसे क्या पता मेरी नजरें क्या पूछ रही थीं,
वो बेखबर था, और मेरा भरोसा टूटता रहा…” 💔

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नारी को पहले इतना समझा नहीं गया,
उसे बस घर तक ही रखा गया।
पर अब धीरे-धीरे समय बदल रहा है,
और नारी भी आगे बढ़ रहा है।
वो पढ़ना चाहती है, कुछ बनना चाहती है,
अपने दम पर खुद को पहचानना चाहती है।
अब वो सिर्फ घर तक सीमित नहीं है,
उसके सपनों का भी कोई अंत नहीं है।
हर काम में वो अपना हाथ बढ़ाती है,
मुश्किलों से भी नहीं घबराती है।
अगर उसे मौका और साथ मिले,
तो वो हर मंजिल पा सकती है।
कभी वो माँ बनकर सब संभालती है,
कभी बेटी बनकर घर सजाती है,
कभी बहन बनकर साथ निभाती है,
हर रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाती है।
आज वो स्कूल भी जाती है,
अपने सपनों को सजाती है,
कल वही आगे बढ़कर
देश का नाम भी रोशन करती है।
उसे बस थोड़ा सा भरोसा चाहिए,
और आगे बढ़ने का मौका चाहिए,
फिर देखना वो कैसे
हर मुश्किल को आसान बना देती है।
अब नारी चुप नहीं रहती,
वो अपने हक के लिए बोलती है,
गलत को गलत कहने की
हिम्मत भी अब रखती है।
नारी जब आगे बढ़ेगी,
तभी तो देश भी आगे बढ़ेगा।
उसकी मेहनत और हिम्मत से ही
भारत सच में समृद्ध बनेगा।
नारी है तो हर सपना साकार है,
उसी से हर घर-आंगन में प्यार है,
उसका सम्मान ही सबसे बड़ा धन है,
इसी से मजबूत अपना हिंदुस्तान है।

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“मैं अभी भी खड़ी हूँ”
मैं हारकर भी हर बार,
खुद को समझा लेती हूँ,
दिल टूटता है रोज़ थोड़ा,
फिर भी मुस्कुरा देती हूँ।
कभी ख्वाब थे BHU के,
कभी DU की राहें थीं,
अब नंबरों के जंगल में,
बस उम्मीदें ही बाहें थीं।
वो जो कहते थे “छोड़ दो”,
मैं खुद को ही पकड़ लेती हूँ,
ना जाने क्यों हर बार,
मैं ही पहले call कर देती हूँ।
कमज़ोर नहीं हूँ मैं,
बस दिल थोड़ा सच्चा है,
जो चला गया, वो मेरा नहीं,
ये समझना अभी कच्चा है।
डर भी है, confusion भी,
और आँखों में सवाल बहुत,
पर अंदर कहीं एक आवाज़ है—
“तू कर सकती है, बस रुक मत।”
अगर ना मिला वो जो चाहा,
तो इसका मतलब खत्म नहीं,
रास्ते बदल सकते हैं,
पर मंज़िल का कोई अंत नहीं।
मैं टूटी हूँ, ये सच है,
पर खत्म नहीं कहानी,
मैं फिर से उठूँगी एक दिन—
और यही होगी मेरी असली जीत की निशानी।

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“रिश्ता खत्म करने की हिम्मत तो कर ली मैंने,
पर खुद से लड़ना अभी बाकी है।
हर बार ठान लेती हूँ कि अब नहीं करूंगी call,
फिर जाने क्यों उंगलियाँ वही नंबर मिलाती हैं।
शायद उसे नहीं… उस आदत को छोड़ना मुश्किल है,
जो हर रोज़ मेरी जिंदगी का हिस्सा थी।
पर इस बार खुद से वादा किया है,
चाहे दिल कितना भी माने… मैं नहीं मानूँगी।”

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143 कोई अंत नहीं, एक शुरुआत की बात है,
ये वो मोड़ है जहाँ मेहनत फिर से साथ है।
थोड़ा सा कम लग सकता है ये आंकड़ा,
पर सपनों से बड़ा कभी कोई ना हिसाब है।
डीयू की गलियों में उम्मीदें चलती हैं,
हर कोशिश के पीछे नई रौशनी पलती है।
कभी कटऑफ ऊपर, कभी नीचे झुकता है,
पर मेहनत करने वाला कभी नहीं रुकता है।
जो आज रह गया थोड़ा सा पीछे कहीं,
वो कल सबसे आगे भी हो सकता वहीं।
बस खुद पर भरोसा बनाए रखना तुम,
क्योंकि कोशिशों की हार नहीं होती कभी।

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सच्चा मित्र
तुम नमक नहीं, चंदन हो,
मेरे जीवन का मधुर स्पंदन हो।
जब-जब मन में पीड़ा आती है,
तुम्हारी बातों से ठंडक छा जाती है।
दुनिया अक्सर घाव बढ़ा देती है,
दर्द पर नमक छिड़क जाती है।
पर तुम चंदन बनकर आते हो,
हर पीड़ा को शीतल कर जाते हो।
जब राहें धुंधली हो जाती हैं,
और उम्मीदें भी सो जाती हैं,
तब तुम दीपक बनकर जलते हो,
अंधेरों में रास्ता दिखाते हो।
सच्चा मित्र वही कहलाता है,
जो हर दुख में साथ निभाता है।
जो गिरने पर हाथ बढ़ाता है,
और हिम्मत भी दे जाता है।
तुम नमक नहीं, चंदन हो,
जीवन का सुंदर बंधन हो।
घावों को भरने के साथ-साथ,
मन को शीतल करने का कारण हो। 🌸

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हर सुबह की तरह सूरज वही था,हवा भी वही थी, आसमान भी वही था,पर पंछी आज कुछ उदास थे,क्योंकि एक बेटी का सपना आज टूटने वाला था।

पापा की इज्जत रखने कोउसने हाथों में मेहंदी सजा ली,जिस बाप ने उम्र भर जोड़ा खजाना,वो भी बेटी के ब्याह में लुटा दी।

सोचा था खुशियों का घर मिलेगा,कोई हमसफर साथ निभाएगा,पर किस्मत ने ऐसा मोड़ दियाजहाँ हर दिन दर्द ही आएगा।

पहला थप्पड़ पड़ा तो चुप रह गई,सोचा गुस्से में होगा, मान लिया,धीरे-धीरे वो जुल्म बढ़ता गयाऔर उसने सब कुछ सहना जान लिया।

दुल्हन बनने का शौक था उसका,पर पल भर में सब बिखर गया,जिसे हमसफर कहने चली थी,वही उसका सबसे बड़ा दर्द बन गया।

यकीन मानो, हर चुना हुआ रिश्ताहमेशा खुशियाँ नहीं लाता,कभी-कभी माँ-बाप का भरोसा भीबेटी की खामोशी में दर्द बन जाता।

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बारिश और यादें
पहली बारिश अक्सर बीमार कर देती है,
दूसरी में वो पहली सी महक नहीं रहती।
कुछ एहसास भी मौसम जैसे बदल जाते हैं,
दिल वही रहता है, मगर धड़कन वही नहीं रहती।

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प्रथम प्रेम ही सच्चा और गहरा होता है,
क्योंकि उसमें कोई छल-कपट नहीं होता है।
अनजाने में ही दिल किसी का हो जाता है,
और वही एहसास उम्र भर साथ रह जाता है।
पहली बार जो धड़कनों में नाम उतरता है,
वो याद बनकर हमेशा दिल में ठहरता है।
समय भले ही आगे बढ़ जाए बहुत दूर,
पर पहला प्रेम दिल से कभी नहीं उतरता है। ✨

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गंगा की हवा, वो गलियाँ काशी की,
यादों में अब भी महकती रहेंगी।
छोड़ तो रहा हूँ आज तेरी चौखट,
पर मेरी पहचान यहीं से रहेगी।
मेरे हर ख़्वाब में एक नाम रहेगा—
Banaras Hindu University,
तू सिर्फ़ विश्वविद्यालय नहीं,
मेरी ज़िंदगी का एक ख़ूबसूरत मुकाम रहेगा।

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