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K S

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@kalpanasatav823113


कौन लिखता है यार इतनी गहरी बाते?
पढ़कर आंखे नम हो गई ...
चार चार कंधे एक साथ देखकर,
मुर्दे को खयाल आया,
एक ही कंधा काफ़ी था अगर जीते जी
मिला होता ......

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नस्लें तबाह हो जाती हैं दिल दुखाने वालों की,
बददुआ का असर अभी देखा कहां हैं।

कर्जदार हूं में अपने पिता की....!!
जिसने झाड़ू बर्तन नहीं, ✍️ कलम पकड़ाई।

वो घरौंदे बनाना, बनाके मिटाना
वो मासूम चाहत की तस्वीर अपनी
वो ख्वाबों खिलौनों की जहाँगीर अपनी
ना दुनिया का गम था न रिश्तों का
बंधन ...
बड़ी खूबसूरत थी वो ज़िंदगानी ......
भुलाये न भूल सकता हैं कोई ...
वो कागज की कश्ती वो ... बारिश का पानी ..

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आसान तो नहीं था आधे रास्ते से लौटना,
टूटे ख्वाबों के साथ बिखरे सपनों को समेटना।