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दिनों को सब पता है और रातें जानती हैं। मेरे कदमों को भी गलियाँ तेरी पहचानती हैं।।
रास्ते में कभी कांटा कभी पत्थर भी आयेगा। दूर मंजिल से पहले आदमी ठोकर भी खायेगा।। मुश्किलें आइना हैं राह की तालीम देती हैं। हौसला जीतने का हो अगर तो जीत जायेगा।। - Lakshmi Narayan Panna
वही घायल बनाती हैं वही मरहम लगाती हैं । बड़ी कमशिन निगाहें हैं क़तल करके हँसाती हैं ।। - Lakshmi Narayan Panna
गुरुर उनका वफा करना सिखा गया। मेरा गिरना मुझे चलना सिखा गया।। - Lakshmi Narayan Panna
#ग़ज़ल आग लगा कर जायेगी वज़्न:- 2222 21122 222 मेरी कविता, कैसे उनको भायेगी। दिल टूटा है, आग लगाकर जायेगी ।। मरहम उनके दर्द का, केवल इतना है। मतवाली ही, प्यास बुझा कर जायेगी।। कहता हूँ फिर भी, छोड़ो रोना धोना। सूखा है, कल फिर हरियाली आयेगी।। क़समें, रश्में, रीत, रिवाजें, छोड़ो भी। उल्फ़त की बस, प्रीत निभाई जायेगी।। शायर दिल का, मज़हब कोई क्या जाने। तोहमत उस पर, रोज लगाई जायेगी।। -Panna
शायर दिल का, मज़हब कोई, क्या जाने। तोहमत, उस पर, रोज लगाई जायेगी।। -Lakshmi Narayan Panna
रोज के उनके, बहाने, यार हैं । दर्द है, तकलीफ़ है, बीमार हैं ।। -Lakshmi Narayan Panna
#ग़ज़ल #मेरे_अल्फ़ाज़_बन_जाओ वज्न-2122. 2122. 2122. 2 लग के होंठों से मेरे अल्फ़ाज़ बन जाओ। तुम मेरी धड़कन कि एक आवाज़ बन जाओ ।। जुम्बिश-ए-हुस्न-ए-नज़र बनकर बहर निकले। तुम ग़ज़ल का इक नया अन्दाज़ बन जाओ।। भूल जानें को जुटी हैं ख़्वाहिशें मुझको। तुम ही मेरी आरजू तुम आज़ बन जाओ।। जल मरे सारा जमाना अपनी उल्फ़त पे। तुम ही मेरी हर खुशी हमराज़ बन जाओ ।। #Panna
https://youtu.be/j3jZzj5wCQU Hindi poem exploring the backstory of laborers, their courage, patience and Social problems. -Panna
#Republicday वतन के नाम पर हम साज़िशें हरगिज़ नही करते। हमें अपने वतन से कम स कम इतनी मोहब्बत है।।
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