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mohansharma

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@momosh99


तू निशाना तो लगा हम कहाँ जा पाएंगे ..
हम तो आशिक हैँ ख़ुद निशाने पे आ जाएंगे..

तुम क्यों पसार देते हो दामन हर एक के सामने..
हर हाथ सहारा दे मोहन ये कोई जरुरी तो नहीं..

उतरे तो दोनों ही थे मैदाने इश्क़ में मोहन..
वो किनारा कर गए हमें मंझधार में छोड़कर..

वो अपने में खूब राज छुपाए बैठा था मोहन..
जो अपने आप को खुली किताब कहता था.

इश्क़ में मोहन जिसने भी चोट खाई है..
शायरी बस उसी के समझ में आई है..

तुम अच्छे पहले भी लगते थे मोहन प्यार सहित..
अच्छे अभी भी लगते हो तुम मगर प्यार रहित..

कभी इश्क़ ऐसे मोड़ पर ले आता है..
जहाँ समझ नहीं आता..
इधर जाएं
या
उधर जाएं
अब यहाँ
खड़े भी रहें
तो कब तक
और क्यूँ.
फ़िर आदमी
चल देता है
एक रास्ते पर
बेमकसद..

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किसी की पसंद होना कोई बड़ी बात नहीं..
कब तक रहते हो पसंद ये बड़ी बात है..

कोई अपना होता तो करते भी बात उसकी..
गैरों की बात करना भी भला कोई बात हुईं..

ये मानकर चलना तुम बहुत अच्छे जब तक लगोगे..
तब तक मोहन अगले का मक़सद ना पूरा हो जाए..