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मैं उसे रोकता अगर वो होता अपना मोहन.. वो अपना अगर होता तो फ़िर जाता ही क्यों..
मोहन अब ऐसे मुकाम पर हैँ हम आए.. जिसे आना है आए जिसे जाना है जाए.. जो होना है वो तो होकर ही है रहने वाला.. ये सोच सोचकर फ़िर हम किसलिए घबराए.. रोका तो था उसको हमने कि यूँ ना जाओ.. फ़िर वो चला गया वो फ़िर वो भाड़ में जाए...
🌹मोहन तुम होना नहीं वेळेटाइन डे के मोहताज़.. पूरे साल रागिनी छेड़िये साथ लेकर इश्क़ का साज़..🌹
हम वो नहीं जो वेळेटाइन डे का करें इंतजार.. अरे साल के तीन सौ पेंसठ दिन करो ना प्यार..
ये मेरी बातें तो फुरसत की हैँ मोहन.. मिलो फुरसत में फुरसत से कहेँगे..
कैसी शिकायत मोहन जो कोई गुलाब घाव दे गया... हमने ही तो ख़ुद से पसंद किया था वो कंटीला गुलाब..
तुम क्यों हर किसी को दिखाते हो अपना जख़्म खोलकर.. मोहन यहाँ कौन हर किसी के जख्मों पर मरहम लगाता है..
दूरियां तुम्हारी हमें बहुत खलतीं मोहन,, तुम अगर कभी हमारे करीब से रहे होते,,
मेरी समझ में यह नहीं आता..किसी समय में प्यार मेरे लिए पूजा हुआ करता था.. मैं जमाने से लड़ने को तैयार था इसके लिए..इसके सामने मैं कुछ भी नहीं समझता था किसी को..अब समय बदला बच्चे बड़े हो गए तो यह पूजा में अपने बच्चों को क्यों नहीं करने देता? क्यों मुझे इस प्यार के नाम से नफरत हो गई है..मेरे लिए किसी समय में जो पूजा हुआ करता था यह प्यार अब कैसे मेरे दिल में इसे पूजा नहीं मानता.. अपने बच्चों को मैं पूजा नहीं करने देना चाहता.. ऐसा क्यों? क्या किसी के पास इसका जवाब है?
क्या बात है मोहन आजकल वो बहुत घबराए हुए हैँ.. कहीं शिकार हो गए हैँ या शिकार करके आए हुए हैँ..💐
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