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जिस घर में उसका सम्मान रहेगा, वहीं हर आशीष का मान रहेगा। जहाँ नारी को आदर मिलेगा, वहीं सृष्टि का कल्याण रहेगा। - Nisha ankahi
मरमरी-सी धूप उतरी जब आँगन में, ठिठकी हुई उदासी भी पिघलने लगी। - Nisha ankahi
रिश्तों की भीड़ में जो नाम से पुकारे, वही सहेली सबसे अपनी होती है। - Nisha ankahi
अंजन सिर्फ़ सजावट नहीं, हौसले की लकीर है, जो आँखों को नहीं, नज़रों को धार देता है। - Nisha ankahi
यहाँ चरित्र सवालों में घिरता है, पर ज़मीर से कभी पूछताछ नहीं होती। - Nisha ankahi
खेत-खलिहान से गुजरती पगडंडी बोले, शोर नहीं, अपनेपन के ही मीठे बोल तोले। - Nisha ankahi
“घरौंदा टूटा, बचपन बीता, पर सीखें हमेशा साथ रहीं।” - Nisha ankahi
बाप का घर पराया, पति का उधार हुआ, औरत पूछती रही ...मेरा अपना आशियाना कहाँ? - Nisha ankahi
सरत्या वर्षाच्या प्रवासात एखादी चूक-भूल घडली असेल, तर मनापासून क्षमस्व. नवीन वर्षातही हीच आपुलकी, हीच साथ कायम राहो. - Nisha ankahi
दिख जाए किसी दिन, वो चेहरा जिसे खोजता रहा दिल, बस एक नजर में सारा जहां मिल जाए। - Nisha ankahi
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