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Narayan

Narayan

@narayanmahajan.307843


तमन्ना थी कि उनकी अंधेरी रात का उजाला बनूं,
मगर वो चांद की चाहत में मेरे दाग गिनते रह गए।

कभी करना तुम भी किसी का इंतजार ,
वो पल साल ना लगे तो कहना ,
वो मुस्कुराता हुआ चेहरा याद करना ,
ना गिरे आंखों से मोती तो कहना ,
फिर कही मिल जाए जो एक झलक उनकी ,
तपते धरा पर ना बिखरे हिम सी ठंडक तो कहना........

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कुछ मोहब्बतें मुकम्मल होकर नहीं,
एहसास बनकर हमेशा साथ रहती हैं

मैं दिखूँ न दिखूँ बस मुझे अहसासों में महसूस कर लेना....!
मैं लिखूँ न लिखूँ बस मुझे शब्दों में ही पढ़ लेना....!
नजदीक हूं मैं तेरे दिल के इतना कि अपनी धड़कन मे मेरी धड़कन सुन लेना.......🍁🍂💞

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"मनाने रूठने के खेल में ,
हम बिछड़ जाएंगे ये सोचा नहीं था...!!"🥺💔

"दिल पर लगी बातें ,
अक्सर चेहरे की रौनक छीन लेती है...!!"🥺❤️

## **मैं तुम्हें फिर मिलूँगा**
**(इमरोज़ संस्करण)**
*-मनप्रीत मेहनाज़*
मैं तुम्हें फिर मिलूँगा
कहाँ? किस तरह? पता नहीं
शायद तेरा दर्द बन कर
तेरी कविता में उतरूँगा,
या काव्य-बोल की टुणकार ही बन जाऊँ,
तेरी लय के साथ लय मिला लूँ।
शायद तेरी किसी कहानी का पात्र बनकर
तेरी सृजित कथा-भूमि में बनता-बिगड़ता रहूँ।
फिर तेरी कलम का स्पर्श मुझे मुकम्मल कर दे
या अधूरा छोड़ दे
पता नहीं किस तरह, कहाँ
पर तुम्हें ज़रूर मिलूँगा।
शायद हाथों में पकड़ी किताब बन जाऊँ
तू खोले, पढ़े, चूमे
और अपने सीने से लगा कर रखे,
कहीं-कहीं कुछ निशान भी लगाए,
हो सकता है तू बार-बार पढ़े
या आधे में ही छोड़ दे
पर मैं तुम्हें ज़रूर मिलूँगा।
ज़िन्दगी को भरपूर जीने के लिए
एक-दूसरे का हाथ पकड़ कर
लम्बे रास्तों पर चलने के लिए
अँधेरी रातें बिताने के लिए,
सितारों को गिनने के लिए
मैं तुम्हें फिर मिलूँगा।
🍂🍁

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शाम और यादें,
दोनों का आना तय है,
बस फर्क इतना है—
शाम हर रोज़ ढल जाती है,
पर तेरी यादें कभी नहीं… ❤️

कई बार यह अनुभव हुआ है—
कि जीवन में घटनाएँ
हमारी इच्छा से नहीं,
एक अदृश्य विधान से घटित होती हैं।

जब और जहाँ उनका होना लिखा है,
वे वहीं घटित होती हैं—
न एक क्षण पहले,
न एक क्षण बाद।

हम कितनी भी प्रतिज्ञाएँ कर लें,
कितने भी प्रयासों की परतें बुन लें,
पर फल तभी प्रकट होता है
जब समय परिपक्व होता है।

तब समझ आता है—
हम केवल निमित्त हैं,
कर्त्ता तो कोई और ही है…

जिसके हिस्से में जो अनुभव है,
वह उसे प्राप्त होकर ही रहता है—
चाहे वह अवहेलना का स्पर्श हो
या प्रसिद्धि का प्रकाश।

और तब मन धीरे से कह उठता है—
जो भी हो सब स्वीकार है...
Life is a wonderful journey!
Enjoy it...

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सिर्फ बातें नहीं, तेरे लफ्जों का ज़ायका याद आता है,
वो गुफ्तगू का मीठापन आज भी रूह को महकाता है।