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बहसबाजी करने से तो अच्छा है कि चलो हम दोनों कोम्प्रोमाईज़ कर लेते हैं ! थोड़ी तुम झुक जाओ थोड़े हम झुक जाते हैं फिर से हम दोनों एक छत निचे साथ रहेते है ।। नरेन्द्र परमार ✍️
बातों बातों में हमें आपसे बहस हो जाती है में आपकों बार-बार समझाता रहेता हूं ! किंतु तो आप मुझे मारने झाडु लेकर आ जाती हों ।। नरेन्द्र परमार ✍️
तेरी वफ़ा पर में यकिन कैसे करु ??? अब तुम पहले जैसी नहीं रही उसमें में क्या करु ??? नरेन्द्र परमार " तन्हा "
जिस उम्र हमें पढ़ाई करना चाहिए था उस उम्र में हमने मोहब्बत किया !! अपने ही हाथों से हमने अपनी ही जिंदगी को बर्बाद किया ।। नरेन्द्र परमार " तन्हा "
हमारे किए गए कुकर्म हमें मौत की मंजूरी नहीं देते हैं हम पथारी में अपनी मौत का इंतजार करते हैं और ईश्वर हमें और तड़पने के लिए छोड़ देते हैं ।। नरेन्द्र परमार ✍️
शादी मे सात फेरे लेने के बाद भी तुम मुझे समझ नहीं पाई हों ! दो बच्चों की मां बन गई हों तुम फिर भी तुम मेरी नहीं हो पाई हों ।। नरेन्द्र परमार ✍️
वो तो जान बुझकर मुझे पागल करतीं हैं में प्यार करता हूं उससे और वो तो नशीली आंखों से मुझे घायल करतीं हैं !! नरेन्द्र परमार ✍️
में तुम्हारा गुरुर तोड़कर तुम्हारी सहेली को पटाऊंगा ! तुम देखती रहे जाओगी ?? और में उससे शादी रचाऊंगा ।। नरेन्द्र परमार ✍️
तूझे टगर टगर देखते देखते मेरी आंखों में नंबर आ गया ! फिर भी तूझे मुझपर थोड़ा-सा भी रहेम नहीं आया ! सोचा नहीं था मैंने की तुम इतनी पत्थर दिल निकलोगी खामखां ईश्वर ने तुम्हें इंसान बनाया ।। नरेन्द्र परमार " तन्हा "
हम तो छोटे मोटे सायर है लाइन मिल गई तो सायरी बन गई ! नहीं तो फिर जाल में फंसी हुई तितली भी हाथ से निकल गई ।। नरेन्द्र परमार ✍️
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