The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
Continue log in with
By clicking Log In, you agree to Matrubharti "Terms of Use" and "Privacy Policy"
Verification
Download App
Get a link to download app
प्रेम और औपचारिकता में फर्क यह है कि,,, प्रेम उस खाली जगह में भी बार-बार उपस्थिति तलाशता है और औपचारिकता कभी सहुलियत में याद आने पर,,,,, प्रेम में संवाद प्रतीक्षा होती है और औपचारिकता में सहुलियत,,,, औपचारिकता में व्यस्तता प्रबल होती है जबकि प्रेम में कमजोर,,, - Ruchi Dixit
हम किसी बात पर तर्क कर सकते हैं किन्तु तर्क पुष्ट होने पर भी हम उस बात कि पुष्टि नहीं कर सकते जिसे तर्कों से नहीं समझा जा सकता,,,,,,, - Ruchi Dixit
नही कहुँगी कुछ अब! आँखों के निकलते आँसुओं अन्तर उठती पीर से केवल सुनुँगी बस सुनुगी निशब्द बिना व्यवहारिक परिवर्तन के,,,,,,,, - Ruchi Dixit
मैं ही सही हूँ मैं यह नहीं मानती मैं मानती हूँ मैं कुछ नहीं जानती पहली सीढ़ी रास्ता नहीं बनाता यह सोच जी में नहीं आता जब जब पग धरे ही न उस पर.... प्रयास उस पर चढ़कर आगे बढ़ने का है... हाँ और भी रास्ते हैं मंजिल तक पहुंचने के मगर जो मेरे आगे है उस पर पहले माथ धरना है,, - Ruchi Dixit
सच था या सब छला गया वक्त का पहिया चला गया बदली न दशा बदली बदली लेकिन ... सूखा सूखा सब सहा गया ... भ्रम बादल का या भ्रम बदली बदली न अन्तर दशा टली अनन्त कोश में सब्र रचा है बाकी या बचा गया,,,- Ruchi Dixit
.. - Ruchi Dixit
लौटा देना उन्हें वह सबकुछ जिन्होंने खोया है , देने के अफसोस तलेें प्रेम भला कब पनपा है, लेने के बोझ से प्रेम भला जीवित कब बचा है?? - Ruchi Dixit
... - Ruchi Dixit
...... - Ruchi Dixit
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
Please enable javascript on your browser