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बोझ 🥀💔 बचपन में मेरा बचपना कम, घर में मार-पिटाई ज्यादा देखा। कभी कोई पूछे मेरा सबसे अच्छा समय, तो जवाब देने में समय लगता, क्योंकि लगता कुछ हुआ ही नहीं। जो अच्छा समय था, वहां कहना मुश्किल था, माँ की कोख पर भी संकोच होता। घर में प्यार से ज्यादा, मैंने सिर्फ रोकटोक देखी। हर बात पर लड़क़ी होने का अहसास दिलाया गया, और मैं चुप बैठी रही। हर बात उनकी सिर हाँ में मिलती थी, जैसे कठपुतली हूँ कोई। मन कुछ करने को चाहता, तो डर मुझे भूत सा घूरता। पिता के प्यार से ज्यादा, मैंने सिर्फ उनका गुस्सा देखा। माँ की खुली हँसी में भी, मैंने हर वक्त डर देखा। शादी की उम्र हो गई, कहा जा रहा—“ये हमारे सिर से उतर जा।” जैसे कोई करज़ मैं हूँ, मुझे बताया जा रहा कि फ़र्ज़ निभाओ। बेटी होने का फ़र्ज़, उनके पसंद के लड़के के साथ बंधन में। मना किया, तो याद दिलाया गया, हर निवाला जो माँ ने अपने हाथों से खिलाया। ✍️sana sayyad
अधुरी ख्वाहिश 💔 मुझे भी एक पिता चाहिए... मुझे मेरी बहनों जैसी किस्मत चाहिए। वो नज़र चाहिए जो मुझे भरकर प्यार से देखे। जो इंसान मेरे लिए सिर्फ़ एक अजनबी-सा है, वही किसी और के लिए दुनिया का सबसे प्यारा पिता है। मुझे भी ऐसा पिता चाहिए जो मेरी तबीयत ख़राब होने पर पूरी रात न सोए, सुबह होते ही फ़ोन करके पूछे, "तुम ठीक तो हो? नहीं हो तो मैं अभी आ जाता हूँ..." मुझे भी ऐसा पिता चाहिए जो सामने आते ही प्यार से बात करे, मेरे सिर पर हाथ रखे, मेरे दर्द को अपना दर्द समझे। क्यों हर बेटी की किस्मत एक जैसी नहीं होती? क्यों किसी के हिस्से में पिता का बेइंतहा प्यार आता है, और किसी के हिस्से में सिर्फ़ गुस्से से भरी नज़र? शायद मेरे होने या न होने से कोई फ़र्क नहीं पड़ता, लेकिन एक बेटी के दिल में अपने पिता के प्यार की कमी ज़िंदगी भर एक ऐसा खालीपन छोड़ जाती है जो कभी भर नहीं पाता। बस एक ही ख़्वाहिश है... कभी तो मुझे भी कोई ऐसे पुकारे— "बेटा, अपना ख़याल रखना... तुम मेरे लिए बहुत मायने रखती हो।" ✍️sana sayyad
नशीबवान मुलगी ❤️ आज भाजी घेण्यासाठी बाहेर पडले. रस्त्यात एक दृश्य नजरेस पडलं. एक गरीब वडील आणि त्यांची लहानशी मुलगी रस्त्याने चालत होते. अचानक मुलीने वडिलांकडे आईस्क्रीमचा हट्ट केला. क्षणाचाही विचार न करता वडिलांनी हसत-हसत तो हट्ट पूर्ण केला. अंगावर साधे, जुने कपडे होते. संध्याकाळी जेवण मिळेल की नाही, याचीही खात्री नव्हती. तरीसुद्धा खिशात असलेले शेवटचे दहा रुपये त्यांनी केवळ तिच्या आनंदासाठी खर्च केले. आईस्क्रीम हातात मिळताच ती मुलगी आनंदाने उड्या मारत, नाचत पुढे जात होती. तिच्या चेहऱ्यावरचा निष्पाप आनंद पाहून मन भरून आलं. त्या क्षणी जाणवलं—गरिबीकडे पैसे नसतात, पण प्रेम अपार असतं. आणि नकळत ओठांवर हे शब्द आले— **“जिद्द करे मेरी लाडली, तो हर ख्वाहिश पूरी कर दूँ। चाहे जेब हो मेरी खाली, तेरी हँसी कभी फीकी पड़ने न दूँ। घर में हो न हो अनाज की थैली, कमीज़ मेरी चाहे फटी हो पुरानी। दुनिया से लड़ लूँगा मैं अकेला, बस मुस्कान रहे तेरी निशानी।”**. ✍️sana sayyad
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