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जाने वाले भी जाकर कहां हमसे दूर जा पाते हैं वो रहते हैं ताउम्र हमारी यादों में घर के खिड़की दरवाजों की छापों में कमरों की हर दीवार और कोनों में छत, चारपाई और बिछौनों में रसोई में छनते पकवानों में सभी खुशियों तीज त्यौहारों में वो रहते हैं आंखों के गीले कोरों में बंद दिल के एक सूने कोने में हमारी कामयाबी और आशीर्वादों में जाने वाले भी दूर कहां जा पाते हैं बस वो आंखों से ओझल होते हैं...!! सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
ज़ख़्म देने वालों से तू इलाज की फरियाद करता है। भरोसे के काबिल नहीं यहां जिंदगी ! और तू लोगों पर ऐतबार की बात करता है । सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
शिकायतें तो बहुत थी उससे नहीं करनी थी उससे कभी बात एक दिन चाय पर बुलाया उसने और चाय की चुस्कियों में घुल गए मिरे गिले-शिकवे तमाम।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
सुनकर किसी की बड़ी बड़ी बातें क्यों हो रहा तू इतना परेशान अंदर से खोखले होते हैं अक्सर मजबूत दिखने वाले मकान। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
किसी को मयस्सर नहीं सूखी रोटी कोई पकवानों पर भी नाम रखता है बिना मशक्कत मिली सहूलियतों की फिर इंसान भला कभी कद्र करता है!! सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
वैसे तो खूबी और खामियां होती हर इंसान में लेकिन झांकते यहां सब दूसरों की गिरेबान में।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
एक साल जोड़ उम्र में एक घटा देती है ..... हिसाब किताब की तेरी दुनियादारी ऐ जिंदगी! सोचने जो बैठूं तो मेरे होश उड़ा देती है।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
छोड़ के नीड़ पंछी एक दिन उड़ जाएगा खाली नीड़ राह तकता पीछे रह जाएगा। खाली हाथ आया था, खाली हाथ जाएगा कर्मों के सिवा ना कुछ साथ तेरे जाएगा। माया माया क्यों करता बंदे! माया महाठगिनी एक की होकर सगी भला, देखा कभी यह टिकती। बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से खाएगा तेरे कर्मों का हिसाब इसी जन्म में पूरा हो जाएगा। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
कोई क्या कहेगा कि कैद से रिहा हुए जबसे जिंदगी में खुशियां दस्तक देने लगी है तबसे।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
मश्विरे कौन करता है अब अपनी ही मैं में जीते है सब दिल पर ज्यादा रख ना तू बोझ फासला बनाकर चलने का है ये दौर। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
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