Quotes by Shivraj Bhokare in Bitesapp read free

Shivraj Bhokare

Shivraj Bhokare

@shivrajbhokare342239
(190.7k)

जो मुस्कुरा रहा है उसे दर्द ने पाला होगा,
जो चल रहा है उसके पाँव में ज़रूर छाला होगा।
बिना संघर्ष के चमक नहीं मिलती इस महफ़िल में,
जो दीया जल रहा है, उसी से तो उजाला होगा।मंजिल मिले न मिले ये तो मुकद्दर की बात है,
पर हम कोशिश भी न करें, ये तो गलत बात है!

.

Read More

किताबें तुम्हें कोई झूठा दिलासा नहीं देतीं,
तुम्हारे अंदर के लालच को हवा नहीं देतीं।
पढ़ोगे होश से तो समझ जाओगे ये कड़वा सच,
ये आईना दिखाती हैं, पर कभी दगा नहीं देतीं।



.

Read More

माझी प्रेरणादायी मराठी डायरी "आत्ममग्न मी" आधीच प्रकाशित झाली आहे. जर तुम्ही अजून ती वाचली नसेल, तर एकदा नक्की वाचा.

ही फक्त शब्दांची मांडणी नाही, तर स्वतःला शोधण्याचा, स्वतःशी संवाद साधण्याचा आणि आयुष्याकडे नव्या नजरेने पाहण्याचा एक छोटासा प्रयत्न आहे.

जर तुम्ही ती आधी वाचली असेल, तर तुमचा अभिप्राय नक्की कळवा. आणि अजून वाचली नसेल, तर आजच "आत्ममग्न मी" सोबत हा प्रवास सुरू करा.

–शिवराज भोकरे...🙏..

Read More

क्या जीवन की भागदौड़, तनाव, असफलता, रिश्तों की उलझन और मन की बेचैनी ने आपको कभी यह सोचने पर मजबूर किया है कि आखिर सच्चा समाधान कहाँ है? यह पुस्तक केवल गीता की व्याख्या नहीं, बल्कि आज के इंसान के जीवन का दर्पण है। इसमें हर अध्याय आपको स्वयं से मिलाने, सही दृष्टि देने और जीवन को नई दिशा में देखने का निमंत्रण देता है। यदि आप केवल पढ़ना नहीं, बल्कि अपने जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए है।

गीता: आज के इंसान के लिए

✍️ Shivraj Bhokare

Read More

🫵

यह तो बस एक झलक है…
ऐसी ही गहराई से भरी अनेक कविताओं, विचारों और आत्मा को स्पर्श करने वाले शब्दों को पढ़ने के लिए पढ़िए —
‘शब्द और सत्य’
मेरे द्वारा लिखित एक भावपूर्ण पुस्तक।
— शिवराज भोकरे.....✍️

Read More

“शब्द और सत्य” — जल्द ही आ रहा है…
कुछ एहसास, कुछ कड़वे सच,
और कुछ ऐसे सवाल… जो आपको सोचने पर मजबूर कर देंगे।
तैयार रहिए…

Read More

बेटी: पिंजरे की चिड़िया नहीं, आसमान की दावेदार

तू किसी के आंगन की बस शोभा नहीं,
तू 'पराया धन' होने का कोई धोखा नहीं।
तुझे सिखाया गया कि झुकना ही तेरी शान है,
पर याद रख, तेरे भीतर भी वही असीम आसमान है।

तुझे विदा करने की तैयारी बचपन से शुरू हुई,
तेरी बुद्धिमत्ता, बस चूल्हे और चौखट तक रुकी।
पर बेटी वह है, जो संस्कारों के जालों को काट दे,
जो अपनी नियति को खुद अपने हाथों से बाँट दे।

आचार्य कहते हैं—मत बना उसे विदाई की एक वस्तु,
उसे बना ऐसा कि वह सत्य के लिए हो सके प्रस्तुत।
उसे गहने नहीं, उसे 'ज्ञान' के हथियार दो,
उसे विवाह का डर नहीं, उसे 'विवेक' का विस्तार दो।

असली कन्यादान वह है, जहाँ अज्ञान का दान हो,
जहाँ बेटी के भीतर, उसके अपने 'स्व' का भान हो।
वह किसी की अर्धांगिनी होने से पहले 'पूर्ण' बने,
वह भीड़ का हिस्सा नहीं, खुद में एक संपूर्ण बने।

(आचार्य प्रशांत से प्रेरित)-Shivraj Bhokare..✍️

Read More