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Virendra Dewangan

Virendra Dewangan

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बरसात में सरकारी जमीन पर पौधा लगाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है,, उसका पालन-पोषण करना। ठंड और गरमी में उसको नियमित खादपानी देना।

लेकिन, लोग फोटो खीचवाने के लिए पौधा लगाते है, फिर कभी जाकर नहीं देखते कि जो पौधा उनने रोपा है, वो किस हाल में है।

यही वजह है कि सार्वजनिक स्थल पर लगाए गए ज्यादातर पौधे मुरझा कर सूख जाते। इससे जहाँ सार्वजनिक धन का अपव्यय होता है, वही तापमान में कोई कमी नहीं आती।

अतः, हर उस व्यक्ति को इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी होगी, जो सरकारी जमीन पर पौधरोपण कर रहा है। अन्यथा गरमी दिन दूनी बढती रहेगी। इसे रोकना असंभव हो जाएगा।

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जेन-जी और छात्रों की आढ में उनलोगों को सिर पर बिठाना, जो हिंसक प्रवृत्तिे और अपराधी हैं, जो गाली देते है, जो पुलिस पर हमला करते हैं, जो संविधान को नहीं मानते है, जो देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं और तख्तापलट करना चाहते है। ऐसे लोगों से देश को सावधान हो जाना चाहिए।

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जीवन की सार्थकता तब है, जब अंतरात्मा की आवाज सुनकर गलत कार्यों से दूरी बना लें।
- Virendra Devangan