hindi Best Fiction Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Fiction Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cu...Read More


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साथिया - 48 By डॉ. शैलजा श्रीवास्तव

"मुझे बेहद खुशी है कि तुमने हमारी बात को समझा और हमारी सहमति में ही अपनी सहमति जताई। बाकी फिक्र मत करो हम लोग हमेशा तुम्हारे साथ हैं। और अब तो हमें किसी बात की चिंता ही नहीं है, हम...

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और उसने - 22 - अंतिम भाग By Seema Saxena

(22) ( अंतिम भाग ) “ आज कैसी बातें कर रही है बेटा ? यहाँ तो है ही तेरा घर लेकिन अभी वहाँ पर है तो उसे ही अपना घर समझ और रुचि आंटी को अपनी माँ क्योंकि मैं तो वहां पर हूं नहीं,...

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उलझन - भाग - 17 By Ratna Pandey

बुलबुल के जाने के बाद निर्मला अपने बिस्तर पर लेट कर करवटें बदल रही थी। आज तो उसकी आँखों से नींद कोसों दूर थी। यदि कुछ था तो बेचैनी थी। एक बहुत बड़ी उलझन सामने दिखाई दे रही थी और इस...

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आँच - 4- मुश्किल समय है?(भाग -2) By Dr. Suryapal Singh

एक ओर अवध के भाग्य का फ़ैसला होना था दूसरी ओर मुसलमानों ने हनुमानगढ़ी के पास की एक ज़मीन में नमाज़ पढ़ने पर ज़ोर दिया। औरंगजेब के समय में हनुमानगढ़ी को ध्वस्त कर दिया गया था और उसी के मलब...

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फादर्स डे - 38 By Praful Shah

लेखक: प्रफुल शाह खण्ड 38 रात के गहरे अंधकार में जब सोमवार, मंगलवार में बदल चुका, तब सूर्यकान्त और मर्डेकर के दोपहिया ने पुणे में प्रवेश किया। आगे लंबा रास्ता और अपने गंतव्य के बारे...

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गांव अरनी By Ravindra Chaudhary

साल था 1975. सूरज राजस्थान के धूल भरे मैदानों पर बेरहमी से बरस रहा था और छोटे से गांव अरनी को भट्टी में पका रहा था. बाहरी दुनिया की हलचल से अछूता इस गांव में समय धीमी गति से आगे बढ...

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लंदन में भारतीय शिक्षिका By Dr Sunita Shrivastava

लंदन के बहुत बड़े स्कूल के वार्षिक उत्सव आजार राशि को बेस्ट टीचर्स का एवार्ड लेते समय, कुछ समय पहले की बात याद आ गई.... जब राज का लंदन की बहुत बड़ी कम्पनी में चयन होने की खबर से घर...

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रामचन्द्र की नौकरी By Dikeshwar Sahu

सिद्धेश्वरी ने देखा कि उसका बड़ा बेटा रामचंद्र धीरे-धीरे घर की तरफ आ रहा है। रामचंद्र मां को बताता है कि उसे अच्छी नौकरी मिल गई। मध्यमवर्गीय परिवार था पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक...

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झूठी मौत... By Utpal Tomar

बात उस समय की है, जब राजा और प्रजा के बीच पिता पुत्र जैसा रिश्ता हुआ करता था| प्रजा जब राजा को अथाह सम्मान देती थी और राजा को प्रजा से अपने अपनी संतान की भांति प्रेम होता था| ऐसे ह...

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दिवास्वप्न By Prabodh Kumar Govil

"दिवास्वप्न"एक दूसरे से सटे फ्लैट्स का यही फायदा है कि कभी - कभी सहज ही कही गई बातें भी आसानी से पड़ोसियों को सुनाई दे जाती हैं। लेकिन शायद यही नुकसान भी है।मैं बालकनी में बैठा कुछ...

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वीर दुर्गादास राठौड़ By दिनू

राष्ट्रगौरव दुर्गादास राठौड़ सालवा से शिप्रा तट तक का सफरहिंदुगौरव रणबंका राठौड़जिसने इस देश का पूर्ण इस्लामीकरण करने की औरंगजेब की साजिश को विफल कर हिन्दू धर्म की रक्षा की थी….. उस...

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सरोगेट मदर - 3 (अंतिम भाग) By S Sinha

                                                                  सरोगेट मदर  Last Part - 3 नोट - अभी तक आपने पढ़ा कि गंगा को सरोगेट बेबी को लेकर अपना घर छोड़ कर एक क्लिनिक में शरण ल...

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प्यार की प्यासी By Krishna

मेरा गोरा रंग, बोलती आंखें, कंधों तक बलखाते बाल, चौड़ी छाती, पतली कमर और चिकनी सुडौल जांघे सभी को लुभाती थी। पुरुष मेरे सौंदर्य को देखकर कहते-‘यह लड़की तो किसी रसगुल्ले से कम मुलाय...

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साथिया - 48 By डॉ. शैलजा श्रीवास्तव

"मुझे बेहद खुशी है कि तुमने हमारी बात को समझा और हमारी सहमति में ही अपनी सहमति जताई। बाकी फिक्र मत करो हम लोग हमेशा तुम्हारे साथ हैं। और अब तो हमें किसी बात की चिंता ही नहीं है, हम...

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और उसने - 22 - अंतिम भाग By Seema Saxena

(22) ( अंतिम भाग ) “ आज कैसी बातें कर रही है बेटा ? यहाँ तो है ही तेरा घर लेकिन अभी वहाँ पर है तो उसे ही अपना घर समझ और रुचि आंटी को अपनी माँ क्योंकि मैं तो वहां पर हूं नहीं,...

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उलझन - भाग - 17 By Ratna Pandey

बुलबुल के जाने के बाद निर्मला अपने बिस्तर पर लेट कर करवटें बदल रही थी। आज तो उसकी आँखों से नींद कोसों दूर थी। यदि कुछ था तो बेचैनी थी। एक बहुत बड़ी उलझन सामने दिखाई दे रही थी और इस...

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आँच - 4- मुश्किल समय है?(भाग -2) By Dr. Suryapal Singh

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लेखक: प्रफुल शाह खण्ड 38 रात के गहरे अंधकार में जब सोमवार, मंगलवार में बदल चुका, तब सूर्यकान्त और मर्डेकर के दोपहिया ने पुणे में प्रवेश किया। आगे लंबा रास्ता और अपने गंतव्य के बारे...

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दिवास्वप्न By Prabodh Kumar Govil

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वीर दुर्गादास राठौड़ By दिनू

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सरोगेट मदर - 3 (अंतिम भाग) By S Sinha

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