hindi Best Fiction Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Fiction Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cu...Read More


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  • किराएदार

    प्रिशा ने अपने बजट के हिसाब से सारे किराए के घर देख लिए । मगर उसे कोई भी घर सही...

  • ममता की परीक्षा - 119

    "मैं ये कहना चाहता था कि हम ठहरे गाँव वाले, भले पढ़े लिखे दरोगा बन गए लेकिन संस्क...

  • अपंग - 79

    79 ----- "आ---प ----" वह जैसे चकराकर पीछे की ओर हटी | फिर शायद हिम्मत की होगी, आ...

किराएदार By Swati Grover

प्रिशा ने अपने बजट के हिसाब से सारे किराए के घर देख लिए । मगर उसे कोई भी घर सही नहीं लगा । अगर कहीं किराया कम है तो घर साफ सुथरा नहीं है । कहीं मकान मालिक की चिक-चिक इतनी है कि वो...

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ममता की परीक्षा - 119 By राज कुमार कांदु

"मैं ये कहना चाहता था कि हम ठहरे गाँव वाले, भले पढ़े लिखे दरोगा बन गए लेकिन संस्कार तो हमें अपने ग्रामीण दादाजी और पिताजी से ही मिला है जिन्होंने हमें बहुत अच्छे संस्कार देते हुए जी...

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अपंग - 79 By Pranava Bharti

79 ----- "आ---प ----" वह जैसे चकराकर पीछे की ओर हटी | फिर शायद हिम्मत की होगी, आगे बढ़ी ; "आप --कौन ---?" उसने नाटक करने का प्रयास किया | आज वह सफ़ेद साड़ी में थी | अमेरिका में तो &#3...

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पेहचान - 26 - में खुद नहीं जानता मैं क्या कर बैठूंगा By Preeti Pragnaya Swain

अभिमन्यु और पीहू जितनी जल्दी हो सके घर पहुंच गए जैसे ही अभिमन्यु घर में एंट्री किया वो एक दम से पीहू को खींचते हुए बोला ....... क्या कह रही थीं तुम ,तुम उस अर्जुन को नहीं जानती भला...

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प्रायश्चित- 7 - Shatir Chalbaaz By Devika Singh

साल्वे जहां खड़ा था राज उसके पास जाकर वो खड़ा हो गया लेकिन साल्वे को जरा सा भी महसूस नहीं हुआ कि राज उसके पास ही खड़ा है साल्वे की बात सुनकर उसे कुछ समझ में आ रहा था कि असल में यह...

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इश्क़ ए बिस्मिल - 55 By Tasneem Kauser

मोम मुझे यकीन नहीं हो रहा है... बाबा ऐसा कैसे कर सकते है?... मुझे याद नहीं की उन्होंने मुझे कभी इतनी सारी शॉपिंग कराई हो...”सोनिया को अरीज की शॉपिंग बैग्स देख कर ही सदमा लग गया था।...

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तमाचा - 22 (कैद) By नन्दलाल सुथार राही

अब बिंदु का अपने पिता के प्रति व्यवहार कुछ बदल सा गया। वह सिर्फ अपने काम से काम रखती और पिता से केवल इतनी ही बात करती जितनी अतिआवश्यक हो या केवल पिता द्वारा कुछ पूछने पर उसका जवाब...

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अतीत के पन्ने - भाग 29 By RACHNA ROY

आलोक ने कहा हां, और क्या क्यों घर जाकर फिर से बनायेंगे?जतिन ने कहा हां,आदत हो गई है आपको पता है काव्या ने मुझे खाना बनाना सिखाया था उसकी जैसी गुरु और दोस्त मुझे कभी नहीं मिल पाया ख...

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एक अनोखी प्रेम कहानी By धरमा

एक अनोखी प्रेम कहानी गाँव के बच्चे नारायणी को काकी कहते हैं। पहले नारायणी कभी निराश नहीं दिखती थी। जब से उसका पति भूरा बढ़ई बीमार पड़ा है, तभी से वह खोई-खोई रहती है। पति की सेवा-सुश्...

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सेहरा में मैं और तू - 18 By Prabodh Kumar Govil

( 18 )भिनसारे ही जो सूरज निकला, वो और दुनिया के लिए चाहे जैसा भी हो, कबीर के लिए तो ठंडी आतिश और दहकती बर्फ़ सरीखा था। ज़िंदगी की डोर जैसे फिर हाथों में आ गई थी। ज़िंदगी लौट आई थी...

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खाली कमरा - भाग १४ - अंतिम भाग By Ratna Pandey

मोहिनी मैडम की बातें सुनकर राहुल का गुस्सा पिघल कर अब दर्द और पश्चाताप में बदल चुका था। उसकी आँखें रो रही थीं। यह सुनकर खुशबू की आँखें ज़मीन में गड़ी जा रही थीं। उसमें हिम्मत ही नह...

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सोई तकदीर की मलिकाएँ - 31 By Sneh Goswami

सोई तकदीर की मलिकाएँ    31   बसंत कौर के जवाब न देने से रख्खी का हौंसला पस्त नहीं हुआ । उसने हाथ नचाते हुए कहा – बाहर निकल कर देखो , सारा गाँव मुंह जोङ जोङ कर बातें कर रहा है । इस...

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अग्निजा - 76 By Praful Shah

प्रकरण-76 तरह-तरह मलहम, दवाइयां, मेडिकेटेड शैंपू और धूप में बैठने जैसे प्रयोग करने के बाद भी बीमारी पर कोई असर नहीं हो रहा था। उल्टा, बढ़ती ही जा रही थी। दो की जगह तीसरी जगह पर भी...

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कहानी प्यार कि - 56 By Dr Mehta Mansi

" बताओ अंजली तुमने तुम्हारी असली पहचान मुझसे क्यों छिपाई थी ? " मोहित की बात सुनकर अंजली ने एक गहरी सांस ली और उसे आगे की बात बतानी शुरू की..." मोहित मैं पहले से एम बी ए करना चाहती...

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हाँ, मैं भागी हुई स्त्री हूँ - (भाग बाईस) By Ranjana Jaiswal

जिंदगी मानो ठहर गई।अब न नौकरी पर जाने की जल्दी है, न सुबह चार बजे से ही उठकर घर का काम निपटाने की चिंता। न किसी के आने की खुशी ,न जाने का ग़म। अब उन पड़ोसिनों से मेल -जोल बढ़ गया है,ज...

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मुस्कराते चहरे की हकीकत - 28 By Manisha Netwal

विवान अपनी बात पूरी करके वहां से चला गया था लेकिन किसी को समझ नहीं आ रहा था कि इस वक्त उसके दिमाग में क्या चल रहा है,,,,,,,इधर दिल्ली में विनोद और प्रवीण हॉस्पिटल में डॉक्टर के केब...

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किराएदार By Swati Grover

प्रिशा ने अपने बजट के हिसाब से सारे किराए के घर देख लिए । मगर उसे कोई भी घर सही नहीं लगा । अगर कहीं किराया कम है तो घर साफ सुथरा नहीं है । कहीं मकान मालिक की चिक-चिक इतनी है कि वो...

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ममता की परीक्षा - 119 By राज कुमार कांदु

"मैं ये कहना चाहता था कि हम ठहरे गाँव वाले, भले पढ़े लिखे दरोगा बन गए लेकिन संस्कार तो हमें अपने ग्रामीण दादाजी और पिताजी से ही मिला है जिन्होंने हमें बहुत अच्छे संस्कार देते हुए जी...

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अपंग - 79 By Pranava Bharti

79 ----- "आ---प ----" वह जैसे चकराकर पीछे की ओर हटी | फिर शायद हिम्मत की होगी, आगे बढ़ी ; "आप --कौन ---?" उसने नाटक करने का प्रयास किया | आज वह सफ़ेद साड़ी में थी | अमेरिका में तो &#3...

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पेहचान - 26 - में खुद नहीं जानता मैं क्या कर बैठूंगा By Preeti Pragnaya Swain

अभिमन्यु और पीहू जितनी जल्दी हो सके घर पहुंच गए जैसे ही अभिमन्यु घर में एंट्री किया वो एक दम से पीहू को खींचते हुए बोला ....... क्या कह रही थीं तुम ,तुम उस अर्जुन को नहीं जानती भला...

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प्रायश्चित- 7 - Shatir Chalbaaz By Devika Singh

साल्वे जहां खड़ा था राज उसके पास जाकर वो खड़ा हो गया लेकिन साल्वे को जरा सा भी महसूस नहीं हुआ कि राज उसके पास ही खड़ा है साल्वे की बात सुनकर उसे कुछ समझ में आ रहा था कि असल में यह...

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इश्क़ ए बिस्मिल - 55 By Tasneem Kauser

मोम मुझे यकीन नहीं हो रहा है... बाबा ऐसा कैसे कर सकते है?... मुझे याद नहीं की उन्होंने मुझे कभी इतनी सारी शॉपिंग कराई हो...”सोनिया को अरीज की शॉपिंग बैग्स देख कर ही सदमा लग गया था।...

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तमाचा - 22 (कैद) By नन्दलाल सुथार राही

अब बिंदु का अपने पिता के प्रति व्यवहार कुछ बदल सा गया। वह सिर्फ अपने काम से काम रखती और पिता से केवल इतनी ही बात करती जितनी अतिआवश्यक हो या केवल पिता द्वारा कुछ पूछने पर उसका जवाब...

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अतीत के पन्ने - भाग 29 By RACHNA ROY

आलोक ने कहा हां, और क्या क्यों घर जाकर फिर से बनायेंगे?जतिन ने कहा हां,आदत हो गई है आपको पता है काव्या ने मुझे खाना बनाना सिखाया था उसकी जैसी गुरु और दोस्त मुझे कभी नहीं मिल पाया ख...

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एक अनोखी प्रेम कहानी By धरमा

एक अनोखी प्रेम कहानी गाँव के बच्चे नारायणी को काकी कहते हैं। पहले नारायणी कभी निराश नहीं दिखती थी। जब से उसका पति भूरा बढ़ई बीमार पड़ा है, तभी से वह खोई-खोई रहती है। पति की सेवा-सुश्...

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सेहरा में मैं और तू - 18 By Prabodh Kumar Govil

( 18 )भिनसारे ही जो सूरज निकला, वो और दुनिया के लिए चाहे जैसा भी हो, कबीर के लिए तो ठंडी आतिश और दहकती बर्फ़ सरीखा था। ज़िंदगी की डोर जैसे फिर हाथों में आ गई थी। ज़िंदगी लौट आई थी...

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खाली कमरा - भाग १४ - अंतिम भाग By Ratna Pandey

मोहिनी मैडम की बातें सुनकर राहुल का गुस्सा पिघल कर अब दर्द और पश्चाताप में बदल चुका था। उसकी आँखें रो रही थीं। यह सुनकर खुशबू की आँखें ज़मीन में गड़ी जा रही थीं। उसमें हिम्मत ही नह...

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सोई तकदीर की मलिकाएँ - 31 By Sneh Goswami

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अग्निजा - 76 By Praful Shah

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कहानी प्यार कि - 56 By Dr Mehta Mansi

" बताओ अंजली तुमने तुम्हारी असली पहचान मुझसे क्यों छिपाई थी ? " मोहित की बात सुनकर अंजली ने एक गहरी सांस ली और उसे आगे की बात बतानी शुरू की..." मोहित मैं पहले से एम बी ए करना चाहती...

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हाँ, मैं भागी हुई स्त्री हूँ - (भाग बाईस) By Ranjana Jaiswal

जिंदगी मानो ठहर गई।अब न नौकरी पर जाने की जल्दी है, न सुबह चार बजे से ही उठकर घर का काम निपटाने की चिंता। न किसी के आने की खुशी ,न जाने का ग़म। अब उन पड़ोसिनों से मेल -जोल बढ़ गया है,ज...

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मुस्कराते चहरे की हकीकत - 28 By Manisha Netwal

विवान अपनी बात पूरी करके वहां से चला गया था लेकिन किसी को समझ नहीं आ रहा था कि इस वक्त उसके दिमाग में क्या चल रहा है,,,,,,,इधर दिल्ली में विनोद और प्रवीण हॉस्पिटल में डॉक्टर के केब...

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