Meri pyari maa in Hindi Letter by Renuka Chitkara books and stories PDF | मेरी प्यारी माँ

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मेरी प्यारी माँ

मेरी प्यारी माँ ,

कैसी हो तुम ?
ये भी कोई सवाल हुआ,ठीक ही होंगी अब तो l
याद है ना , बचपन में जब मै बीमार होता था , तुम दिन रात एक कर देती थीं l जो जैसा उपाय बताता तुम वो सब कुछ करती थी l
इलाज से ले कर व्रत, पूजा -पाठ ,मन्नत सब कुछ l पर देखो ना...इन सब के बदले क्या दिया मैने तुम्हे ? ठीक से ख्याल भी ना रख पाया तुम्हारा l
उस दिन जब फोन आया था पापा का और पता चला कि तुम ठीक नही हो। शहर के बडे अस्पताल में तुमको ले गये है l मै भागता हुआ वहाँ पहुँचा था लेकिन तुम्हें देख कर कदम जैसे जम गये थे मेरे ।
मुँह पर ऑक्सीजन मास्क पहने गहरी गहरी साँसे लेते देख डर गया था मैं , क्या करता... कभी देखा जो नही था तुम्हे इतना कमजोर और बेबस l
जो हमारे ऊपर आने वाली हर मुसीबत की ढाल थी आज उसके लिए मुझे ढाल बनना था l पर मै ये तय नही कर पा रहा था कि इतनी हिम्मत कहाँ से लाऊँ जो तुम्हे ऐसी हालत में देख भी पाऊँ l
वो 14 दिन... जब तुम्हारी साँसो के साथ मेरी भी साँसे कई बार उखडी थी l जब जब डाक्टर से बात होती ,नाउम्मीदी का अँधेरा और ज्यादा गहरा जाता l दिन पर दिन हालत और खराब होती जा रही थी ,और मै हैरान परेशान सा बस यही सोचता रहता कि तुम्हारे पास जा कर हाथ पकड़ कर प्यार से दो बातें करने की ताक़त कहाँ से लाऊँ l सब कुछ जैसे एक सपने जैसा था मेरे लिये ,जिन्दगी में कभी सोचा ही नही था कि तुम्हे भी कुछ हो सकता है ।
कितना पागल था ना मै ...वेल्टीनेटर का वो घटता बढ़ता ग्राफ मेरी धड़कनो को भी उसी रफ़्तार से घटा बढ़ा रहा था l ना जाने क्यों मुँह से आवाज निकलनी बंद हो जाती थी तुम्हारे सामने जाते ही , ऐसा लगता कि तुम वो हो ही नहीं जिसने हमारे सुख आराम की खतिर अपनी सारी चाहतो सारे अरमानो का त्याग कर दिया था l
स्वार्थी हूँ क्या मै , बताओ ना माँ ? कभी कभी लड़ता भी था ना मै तुमसे कि क्यों नही अपना ध्यान रखती हो ? क्यो हमें अभी भी बच्चो की तरह समझाती हो ? तबियत की परवाह न करते हुए खुद को काम में उलझाये रखना ,घर परिवार बच्चो की ख़ुशी में ही अपनी खुशी ढूँढना ,माँ का तो स्वभाव ही यही होता है ,निश्चल, निस्वार्थी,प्यारी l
खुद को भी समझा नही पा रहा था कि तुम्हारी बिगड़ती हालत को नियति मान लूँ या तुम्हे ठीक करने के लिय कुछ कोशिशें करूँ ?
जो भी मै कर सकता था या जो भी मुझे करना चाहिये था ।
दान ,पूजा पाठ ,मन्नत, व्रत जो कुछ भी तुम मेरे बीमार होने पर किया करती थी l
आई .सी. यू .का वो कमरा ,जहाँ जाते ही मेरा दिल दिमाग सब शून्य मे चला जाता था l मै बिस्तर पर पड़ी ममता की मूरत को दो शब्द प्यार के बोल ही नहीं पाता था , हौसला नही दे पाता ,कि चिंता मत करो माँ ..तुम ठीक हो जाओगी l मै जानता था कि तुम मुझे सुन सकती हो लेकिन कुछ जवाब नही दे सकती l शायद यहीं मेरी गलती थी कि सामने होते हुए भी मैने तुम्हे अकेलापन महसूस कराया ,तुम्हे लगा होगा कि तुम्हारे आस पास कोई अपना नही है ,कोई नही चाहता कि तुम ठीक हो जाओ ,कोई तुम्हारे पास आकर बाते नही करता l
मेरी गलती का अहसास हुआ मुझे लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी । दवा ले कर तुम्हारे पास पहुँचा तो डाक्टर ने गर्दन झुकाते हुए कहा था," आई एम् सॉरी, अब इसकी जरुरत नही है l"
पैरो तले जमीन नही रही , तुम जा चुकी थी ,बिना किसी से शिकायत किये , बिन कुछ कहे , दूर .. बहुत दूर...जहां से चाह कर भी तुमसे कभी बात नहीं कर पाऊंगा l
काश.... मै अपनी गलती सुधार पाता ,काश.... मै बता पाता कि माँ मै बहुत प्यार करता हूँ तुम्हे , मुझे बहुत जरुरत है तुम्हारी , अकेला हो जाऊंगा तुम्हारे बिना ,कैसे रह पाऊंगा ।
तुमसे लिपट कर कितना रोया था मै ...याद है ना !
लेकिन कैसे याद होगा ? तब तो तुम थी ही नही सिर्फ मै था तुम्हारी यादों के साथ और मेरा पछतावा जो हमेशा मुझे याद दिलाता रहेगा कि किसी भी रिश्ते में प्यार सिर्फ होना ही नही समय पर जताना भी जरुरी है ।
वो प्यार हमे जीने का हौसला देता है l मुश्किलों से लड़ने की हिम्मत देता है ।
मां....तुम्हारा जाना तय था ,नियति थी , ना भी होती तो ज्यादा से ज्यादा कुछ और समय के लिए टल जाती लेकिन अंत तो सभी का यही होता है ।
अफ़सोस यही बाकी है कि दिल की बातें दिल ही में न रख उजागर की होती , तुम्हें इस हाल मे देख कर कैसा महसूस कर रहा हूँ मै , ठीक होने के बाद बहुत ख्याल रखता मै तुम्हारा कोई भी काम ना करने देता ।
लेकिन अब क्या अब तो सब कुछ मन मे ही रह गया l
मै आज भी तुम्हे यही कहना चाहता हूँ कि मुझे तुम्हारी अब भी उतनी ही जरुरत है जितनी बचपन में थी l शायद तुमने अपने हिस्से का सारा प्यार कम समय में ही उडेल दिया था जैसे जानती हो कि ज्यादा समय नही है तुम्हारे पास और मै सहेजता रहा सारा प्यार अपने अंदर ही और अब उस प्यार का बाँध आँसुओ के रूप मे निकलता रहता है और तुम्हारी याद दिलाता रहता है l
काश अगर मै ऐसा ना करता तो आज ये काश मुझे बार बार ना बोलना पडता ,तुम्हारी तस्वीर से बातें ना करनी पड़ती l आज मै अपनी इस गलती के लिए तुमसे माफ़ी माँगना चाहता हूँ l उम्मीद है तुम अपने नासमझ बेटे को हमेशा की तरह माफ़ कर दोगी l
कर दोगी ना माँ .........
तुम्हारा बेटा