unknown connection - 70 in Hindi Love Stories by Heena katariya books and stories PDF | अनजान रीश्ता - 70

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अनजान रीश्ता - 70

अविनाश तैयार होकर शादी के हॉल की ओर कार लेकर निकल पड़ता है । वह कार को चलाते हुए बस ऐसे ही खुश था पता नहीं क्यों!? पारुल से शादी होने की वजह से!? या उसका बदला पूरा होने वाला है इस वजह से!? ।वह बस सिर को ना में हिलाते हुए .... आगे रास्ते की ओर ध्यान देने लगता है । और सोचता है जो भी हो!? खुशी चाहे जिस बात की भी मिल रही हो...उसका आखिरी मुकाम तो मेरा बदला ही है । और फिर से उसकी आंखे रंग बदलने लगती है। जैसे किसी भूतने उससे काबू किया हो। थोड़ी देर में अविनाश हॉल पर पहुंच जाता है । वह कार को साइड में पार्क करते हुए ... डिक्की में से कुछ सामान ले जाते हुए हॉल में प्रवेश करता है । वहां पंडितजी हवन के लिए कुंड में लकड़ियां सेट कर रहे थे । अविनाश तभी दूसरी और चेयर पर बैठते हुए .... कहता है ।

अविनाश: क्या पंडित जी क्या कर रहे है आप!? ।
पंडित जी: बेटा मुहूर्त थोड़ी देर में निकल जाएगा हवन कुंड में अगर समय पर लकड़ियां ना जली तो अनर्थ हो जाएगा ।
अविनाश: ( बॉक्स में से शराब निकलते हुए ) क्या पंडितजी आप भी!! लोगों ने रीत रश्म से शादी करके कोन-सा झंडे गाड़ दिए है ।
पंडित जी: बेटा हर रीति रिवाज के अपने मायने होते है । और अग्नि देवता को साक्षी मानकर पति पत्नी एक दूसरे को सात जन्म तक साथ रहने की मनोकामना करते है ।
अविनाश: ( शराब को ग्लास में भरते हुए ) आ..हान!! सात जन्मों का साथ....!?। ( थोड़ी देर सोचने के बाद ) फिर तो पंडितजी ये साथ मुझे चाहिए क्योंकि एक जन्म से तो हमारा हिसाब बराबर होने से रहा । चलिए इसी बात पे चेयर्स!! । ( ग्लास दिखाते हुए ) ।
पंडितजी: ( अविनाश की ओर देखते हुए ) रुको!!! ऐसा अनर्थ मत करो!! इससे तुम अपवित्र हो जाओगे!!!।
अविनाश: ( एक घूट में पूरा ग्लास घटकते हुए ) रिलेक्स पंडितजी!!! रिलेक्स!!! ये दो मेरी महबूबा का सामना करने की दवाई है । वर्ना मेरा दिल होश में रहा तो कमजोर पड़ सकता है । और अविनाश खन्ना कभी भी कमजोर नहीं पड़ता ।
पंडितजी: ( और कुछ बोलते नहीं और सिर को ना में हिलाते हुए अपनी तैयारी में लग जाते है । )
अविनाश: ( ग्लास को साइड में रखते हुए ... पूरी बोतल उठा लेता है । और खड़े होते हुए ... वह सारी तैयारी देखते हुए बोतल में से ही शराब पीने लगता है । वह खुश होते हुए पुकारता है । ) राकेश.... !?।
तभी एक हटाकटा पहलवान जैसा आदमी काले बॉडीगार्ड वाले कपड़ो में दौड़ते हुए अविनाश के पास आता है ।
राकेश: जी सर!?।
अविनाश: ( शराब पीते हुए ) नोट बेड तैयारी काफी अच्छी की है तुमने!!! ।
राकेश: थैंक यू सर!!!।
अविनाश: ( खाली बोतल राकेश को थमाते हुए ) वहां से बोतल लाकर दो मुझे ।
राकेश: यस सर!!!।
अविनाश: वैसे राकेश तुमने वो तस्वीरे देखी तो नहीं जो मैने भिजवाने को कहां था ।
राकेश: ( बोतल अविनाश के हाथ में थमाते हुए ) नो सर!!!।
अविनाश: गुड.... और हां ये सारी बाते उस विशी गधे को पता नहीं चली ना!? ।
राकेश: थैंक यू सर.... नो सर विशी सर को कुछ पता नहीं है ।
अविनाश: ओके तुम जा सकते हो और मेरी दुल्हन के अलावा किसी को भी मत अंदर आने देना ।
राकेश: यस सर ( बहार की और जाते हुए ) ।

अविनाश फिर से शराब की बोतल खोलते हुए.... शराब पीने लगता है । वह एक घूट में सारी बोतल घटघटा जाता है । और फिर डगमगाते हुए कदमों से अपनी चेयर पर जाकर बैठ जाता है। तभी पंडित जी कहते है।

पंडितजी: बेटा मूहर्त का समय हो गया है !! कन्या कहां है!?।
अविनाश: ( आंखे बंद थी और आराम से चेयर पर सर रख कर सोया हुआ था ... या कुछ सोच रहा था .... । ) पंडित जी वोह अविनाश खन्ना की दुल्हन है ऐसे ही थोड़ी आ जाएगी । ( मुस्कुराते हुए ) मेरी तरह उसके भी अपने कुछ नियम है.... तो इतनी जल्दी तो वह एंट्री नहीं लाएगी।
पंडितजी: बेटा पर! मुहूर्त के बाद शादी करना अशुभ माना जाता है और यह आखिरी मुहूर्त है इसके बाद सभी अशुभ है।
अविनाश: पंडित जी!! क्या आपने भी लगा रखा है... अविनाश खन्ना चाहे तो वह घड़ी शुभ अगर ना चाहे तो अशुभ... ।
पंडित जी: ( अविनाश की बात सुनकर पंडित जी को पसंद नहीं आई थी । वह यहां से जाना तो चाहते थे लेकिन उसके बॉडीगार्ड उसे जबरदस्ती उठाके लेके आया था । ) ।

आराम से बैठे बैठे कब अविनाश की आंख लग गई उससे पता ही नहीं चला । जब उसके झपकी की वजह से सिर दूसरी और हाथ से गिरने वाला था तब उसकी आंख खुली। वह आंखो को खोलते ही घड़ी में टाइम देखता है... करीबन ढाई घंटे बीत चुके थे । और पारुल का कोई अता पता नहीं था । वह अपने दोनो हाथों के बीच में सिर रखते हुए... सोच में डूब जाता है और मन ही मन कहता है.... ( प्रिंसेस डोंट टेल मि की तुम नहीं आने वाली। क्योंकि जितना मैं तुम्हे जानता हूं तुम आओगी तुम जरूर आएगी... तो थोड़ा जल्दी करो क्योंकि क्या पता मेरा मूड बदल जाए और मैं कुछ ऐसा कर दू जिससे तुम्हे और तकलीफ पहुंचे। पर आज हमारी शादी है तो चलो तुम्हे इतना तो हक है की इंतजार करवाओ तो चलो इसलिए माफ किया । ) तभी कार के रुकने आवाज आती है जिससे अविनाश के चहरे पे एक मुकुराहट आ जाती है । वह आंखे खोलते हुए.... दरवाजे की ओर देखता है तो सिर्फ उसके बॉडीगार्ड ही आ रहे थे। पारुल का कहीं अता पता नहीं था । जिससे उसके चहेरे पर की मुस्कुराहट गायब हो जाती है । उसके बॉडीगार्ड पास आते हुए कहते है।

" सर मैडम हमारे साथ आई थी पर.... पर.... वह तैयार होने के बाद कहां चली गई पता ही नहीं चला.... हम उन्हे ढूंढा लेकिन कहीं नहीं मिली "

अविनाश यह सुनकर आग बबूला हो जाता है और चेयर के पास वाले टेबल को पैर से धक्का देता है । जिससे शराब की सभी बोतले नीचे गिरकर फुट जाती है । वह एक बोतल को उठाने जाता है जो की बच गई थी तभी उसके हाथ में कांच लग जाता है । जिससे वह कांच को खीच कर निकलता है । जिस वजह से उसके हाथ से खून बहने लगता है । उसके बॉडीगार्ड कुछ बोले उससे पहले ही हाथ के इशारे से उन्हे और पंडित जी को साथ लेकर जाने के लिए कह देता है । सभी लोग वहां से चले जाते है। वह वहां पर अकेले यह सारा ताम जाम ये सजावट देखकर हंसने लगता है । " हाहाहाहाहा.... आआहाहा.... सो तुमने दूसरा रास्ता चुना हां आई मस्ट सेय... काफी हिम्मत है तुम में... चलो कोई नहीं देखते है । कहां तक टिक पाती हो तुम.....बीवी ...... । शराब की बोतल खोलने की कोशिश करता है । जिससे उसके हाथ में और भी लहू बहने लगता है । वह शराब पीते हुए बाहर की ओर जा रहा था की तभी किसी के हांफते हुए आवाज आती है.... " रूको...." वह आवाज की दिशा में देखता है तो पारुल लहंगा उठाते हुए भागते हुए आ रही थी। अविनाश थोड़ी देर के लिए सोच रहा था की कहीं ये उसका वहम तो नहीं । लेकिन जब पारुल उसके सामने खड़े होकर हांफते हुए कहती है। " मैं वो..", पारुल कुछ कहे उससे पहले ही अविनाश उसका हाथ थामते हुए उससे हॉल के अंदर ले जाता है । पारुल बस अविनाश के हाथ में बह रहे खून की और देख रही थी । जो की उसके हाथ में भी लग रहा था । अविनाश पारुल को सीधा मंडप की ओर ले जाता है । पारुल मंडप में जाते ही मानो बैचेन सी हो जाती है । मानो वह रोकना चाहती थी यह सब पर कुछ नहीं कर सकती । वह रोना चाहती थी । पर उसके आंखों से अब आंसू भी सुख गए थे । वह बस इसी सोच में डूबी थी की तभी अविनाश कहता है ।

अविनाश: रेडी प्रिंसेस....। ( मुस्कुराते हुए ) ।
पारुल: ( बस बुत बनकर खड़ी थी । बिना पलके जपकाए बिना किसी भाव के । वह अविनाश के बात का जवाब नहीं देती । ) ।
अविनाश: ( शराब हवन कुंड में डालते हुए... लाइटर से हवन में आग लगाता है । ) चलो प्रिंसेस अब बर्बादी.... मतलब शादी करते है ।
पारुल: ( तो बस हवन की ओर देखे जा रही थी। )।

अविनाश पारुल और खुद का गढबंधन करते हुए पारुल का हाथ थामता है । और दूसरे हाथ से शराब पीते हुए ... फेरे लेते हुए कहता है । अब तुम अपने तीन फेरे तो लेने से रही तो हम सीधा चौथे फेरे से शुरू करेंगे क्योंकि मैं तुम्हे वचन देता हूं । ...... पारुल तो बस अविनाश जैसे ले जा रहा था वैसे चल रही थी ।
चौथा फेरा
कुटुम्बसंपालनसर्वकार्य कर्तु प्रतिज्ञां यदि कातं कुर्या:.….
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं चतुर्थ:।। यानी में अविनाश खन्ना तुम्हे भविष्य में परिवार संबंधी धनार्जन और सभी आवश्यकताओं को पूरा करने वाले दायित्वों की ओर ध्यान आकर्षित करने का वचन नहीं देता.... ।

दूसरा फेरा
स्वसद्यकार्ये व्यहारकर्मण्ये व्यये मामापि मन्‍त्रयेथा
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: पंचमत्र
मैं तुम्हे अपने घर-परिवार के कार्यों में, लेन-देन अथवा अन्य किसी खर्च के लिए आप मेरी सलाह ना लेने और उसे अहमियत ना देने का वचन देता हूं । ( पारुल का हाथ थामते हुए वह फेरा लेता है । ) ।

तीसरा फेरा
न मेपमानमं सविधे सखीना द्यूतं न वा दुर्व्यसनं भंजश्वेत
वामाम्गमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं च षष्ठम!!
( शराब पीते हुए पारुल को अपने साथ मानो जबरदस्ती फेरे ले रहा था ) यानी तुम्हारी सहेलियों या अन्य लोगों के बीच बैठने यानि सामाजिक रूप से तुम्हारा कभी भी अपमान करने इसके साथ ही जुआ या किसी अन्य बुरी आदतों का वचन देता हूं। ( तीसरा फेरा भी पूरा हो जाता है । ) ।

चौथा फेरा
परस्त्रियं मातूसमां समीक्ष्य स्नेहं सदा चेन्मयि कान्त कूर्या।
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: सप्तमंत्र कन्या!!
मैं हर पराई स्त्री को माता समान समझूगा और पति-पत्नी के संबंध में किसी को बीच में आने नहीं दूंगा, ये वचन देता हूं ( अविनाश आखिरी फेरा लेते हुए पारुल को बंधन में बांध देता है । )

और पारुल का हाथ छोड़ते हुए खून से मांग भर देता है । और इसी के साथ वेलकम टू इन माय लाइफ वाईफी....। और हमारी शादी भी पूरी हुई .... । ( बोतल को जमीन पर फेंकते हुए जिससे पारुल को मुंह से एक सिसकारी वाली चीख निकल जाती है । ) ।