chef in Hindi Short Stories by Akshata alias shubhadaTirodkar books and stories PDF | शेफ

Featured Books
  • Whisper in The Dark - 8

    अब आगे।।उसी दिन,,रात के समय।।डार्क हेवेन, मिलान।।रिवांश इस व...

  • वैदही - 2

    काले शीशों वाली एक लंबी ब्लैक BMW अंदर आई। इंजन की धीमी घरघर...

  • तेरे मेरे दरमियान - 66

    मोनिका :- पर .. क्या आदित्य फिर से मुझे अपना़येगा , मोनिका ज...

  • लाल दाग़ - 2

    जैसे-जैसे Sneha घर के करीब पहुँच रही थी, उसके मन में एक अजीब...

  • सौदे का सिन्दूर - भाग 6

    सौदे की ढाल, स्वाभिमान की तलवारहृदय का वह पेचीदा सचतभी डॉक्ट...

Categories
Share

शेफ

"हैलो राहुल मुझे नानी के के यहाँ से आने में देर हो जायेगी तुम और पापा कुछ पार्सल आर्डर कर खा लेना "

"डोंट वोर्री माँ मैं ने बिर्यानी बनायी हैं "

"मज़ाक मत कर "

"नहीं माँ सच्ची"

"मज़ाक मत कर कभी किचन में गए हो तुम जो मुझे कह रहै हो "

"माँ तुम चिंता मत करो "

"ओके मज़ाक मत कर और कुछ आर्डर कर लेना बाय "

शाम का वक़्त था रमेश गैलरी में किताब था उतने में रमा आ गयी

"अरे तुम आ गई "

"हा दोपहर को खाना खाया ना ?"

"अरे हा वो भी पेट भर के अपना बेटा शेफ बन गया अरे क्या बिर्यानी बनाई थीं "

"क्या आप भी मजाक करने लग गए "

"नहीं सच में अरे वो किचन में आधा घंटा कुछ कर रहा था मैं उसे कहा अरे पार्सल आर्डर करते हैं तो कहने लगा शेफ के होते बाहर का क्यों'"

"सच "

"है तुम् भी टेस्ट करो तो पता चलेगा "

रात का समय तीनो खाना खाने बैठते

"अरे राहुल कितनी स्वादिष्ठ बिर्यानी सच में तुमने बनायी पर तुम कब सिख गए चाय तक नहीं बनानी आती है तुम्है और"

"माँ शेफ हूँ मेँ "

'शेफ "

"हा शेफ "

"और अच्छा हुआ तुम दोनों मिल गए कल में तिरंगापुर के एक शहर में कुछ महीनो के लिए जा रहा हूँ"

"तिरंगापुर वहाँ ऑफिस के काम से "

"नहीं माँ मेरा पर्सनल काम हैं "

"पर्सनल काम और वो भी इतनी दूर कौनसा पर्सनल काम है बोलो ?"

"पापा वो मेँ आने के बाद बताऊंगा "

"तू पागल हो गया है उस अनजाने शहर में तू अकेले जायेगा तू मुझे बात क्या है वो बताओ तभी में तुम्है जाने दूँगा समझे "

"हा बेटा बोल बात क्या हैं"?

"माँ कहा न आने के बाद बोलुँगा "

"तो तू नहीं बोलेगा "

"नहीं "

"देखो मुझे गुस्सा मत दे अगर बात क्या है वो बोल अगर तेरा जाना जायज है तो में तुम्है नहीं रोकूंगा "

"माफ़ करना पापा पर में कारण नहीं बता सकता "

"अच्छा मत बताओ जो करना है करो अब तुम बड़े हो गए हो "

"शांत हो जाये रमेश जी "

"राहुल अपने पापा का नाम ले रहै हो "

"माफ़ करना पर में आपका बेटा नहीं वेंकेटेश बोल रहा हूँ "

"वेंकटेश "

"ये तू क्या बोल रहा बेटा "

"हा माँ वेंकटेश "

"याद कीजिये रमेशजी आज से २५ साल पहले मुझे रास्ते पर घायल देख आपने ही मुझे अस्पताल में ले कर गए थे पर मेरी जान ना बच सकी उसी दिन आपको बेटा हुआ और मेरा पुनर्जन्म याद आया "

"हा में ने एक आदमीको अस्पताल में ले कर गया था पर में उसका नाम नहीं जानता पर पुनर्जन्म"

"हा रमेशजी पुनर्जन्म"

मेरा कुछ सपना अधूरा रह गया इसलिए में वापस आ गया जिस दिन एक्सीडेंट हुआ उसे दो दिन बात मेरे हॉटेल का उट्घाटन था पर वो रह गया और शुरवात बिना हॉटेल बंद हो गया में एक शेफ था में वो सपना आपके बेटे के हाथो पूरा करना चाहता हूँ आज आपने जाने से मना किया थो मुझे आपको सच्चाई बतानी पड़ी।

क्या ???

"तो तू क्या चाहता है की हम हमारे बेटे को भूल जाये एकलौता है वो हमारा तुम्है में ने मदत की उसका अंजाम ये "

"में मेरे बेटे को कही जाने नहीं दूँगी "

"शांत हो जाये में आपके बेटे को आपसे दूर करने नहीं आया हूँ बस मेरा सपना वो पूरा करे "

"पर मेरे एक बात समझ नहीं आ रही है इतने दिनों में उसे क्यों कुछ याद नहीं आया "

"देखिये उसे याद हुआ जिस दिन वो पराग से मिलने उसके घर गया था पराग आपके बेटे का दोस्त जो शेफ है हस्सी मजाक में राहुल ने वो शेफ वाली टोपी अपने सिर पर डाली और फोटो खिचवाए और उसके अन्दर छीपा वेंकटेश जाग गया"

"देखो तुम जो कोई हो मेरा बेटा तुम्हरा सपना क्यों पूरा करे वो भी हमें छोड़ कर "

"रमेशजी वो आपका ही बेटा है वो आपको छोड़ कर कही नहीं जायेगा बस मेरे पुनर्जन्म का कर्तव्य पूरा करे "

" रमेश जी में बुरा इन्सान नहीं था मुझ में भी इन्सानियत है में आपसे वादा करता हूँ मेरा सपना पूरा हो ने के बाद वेंकेटेश आपको नज़र नहीं आएगा "

"पर तुम्हारे इस कहानी से हमारे बेटे को अकेले भेज दे "

"वहाँ उसे कुछ तकलीफ नहीं हो की एक बार हॉटेल शुरू हो गया और मेरे छोटे भाईके हाथो में सौपा और एक बार में मेरे अल्मारीमे पड़े शेफ के कपडे पहना चाहता हूँ बस तो मेरा काम हो गया"

"तो तुम अपने भाई को क्यों नहीं कहते "

"रमेशजी वो उतना होशियार नहीं है उसे भी किसका तो सहारा चाइये ना "

"प्लीज़ मुझे जाने दीजिये जब तक मेरा काम नहीं होता मुझे सुकून नहीं मिलेगा और आपको हर रोज़ वेंकटेश से ही मिलना पड़ेगा इस से अच्छा में मेरा काम कर आपका बेटा आपके पास भेज दू "

"नहीं नहीं "

"रमा रो मत "

"ये नहीं मानेगा अगर हमें हमारे राहुल को वापस पाना है तो इसकी बातें मानी पड़ेगी "

"पर

"माँ और रमेश जी आप चिंता ना कीजिये आपका बेटा जल्द ही आपके पास हो का"

"अच्छा चलता हूँ सुबह की ट्रैन है अपने लोगो से जो मिलना है "

"ये क्या रहा हैं "

"रो मत रमा क्या रो मत "

"देखो कुछ दिनों की बात है भगवान पर भरोसा रख।"