two sisters - 10 in Hindi Classic Stories by Mansi books and stories PDF | दो बहने - 10

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दो बहने - 10

Part 10
अब तक आपने देखा कि निशा ओर नियती की पांच दिन बाद की शादी की तारीख तय हुई थी अब आगे की कहानी देखते है।
फिर उसी दिन रात को फिर मिहिर का फोन आया उसने खिमजी से कहा क्या हम सुबह आपके घर आ सकते है आपसे मिलने ओर शादी के फंक्शन के बारे में चर्चा भी कर लेंगे, खिमजी ने कहा जी जी क्यों नहीं आप जरूर आए हमे खुशी होगी,मिहिर ने कहा जी तो फिर ठीक है हम कल सुबह १० बजे आयेंगे। खिमजी ने कहा जी जरूर तो फिर कल मिलते है फिर खिमजी ने फोन रख दिया।
सरला वहा आई ओर पूछा जी किसका फोन था , खिमजी ने कहा मिहिर जी का फोन था कल सुबह १० बजे वह हमसे मिलने ओर शादी के सारे प्रसंग के बारे में चर्चा करने आ रहे है,यह सुन कर सरला ने कहा जी ये तो अच्छी बात है वह हमारे घर आ रहे है हम कल सुबह जल्दी उठ कर तैयार हो जाएंगे।खिमजी ने कहा है यह ठीक रहेगा।
सरला यह बात निशा ओर नियती को बताने गई ओर उनसे कहा बेटा तुम दोनो कल जल्दी उठ जाना मिहिर जी ओर उनका परिवार कल हमारे घर आयेंगे तुम दोनो जल्दी उठ कर तैयार हो जाना निशा ओर नियती ने कहा जी हम रेडी रहेंगे। अगले दिन निशा ओर नियती सुबह के ७ बजे उठ गई ओर वह दोनों ने ओर सरला ने घर काम का सारा काम कर लिया ओर सब लोगो ने नाश्ता भी खा लिया। फिर निशा ओर नियती तैयार होने चली गई, दोनों ने अच्छा सा सूट पहन लिया नियती ने हरे रंग का ओर निशा ने सफेद रंग का अच्छा सा सूट पहन लिया दोनों बहुत सुंदर लग रही थी ओर लगे भी क्यों ना उनके ससुराल वाले पहली बार घर आ रहे थे।
१० बज गए ओर मिहिर,हिना निशान ओर निवान घर आए खिमजी ओर सरला ने उनका घर में स्वागत किया खिमजी ने उन्हें बिठाया ओर बोला माफ करना मिहिर जी हमारा घर आपके घर जितना अच्छा ओर बड़ा तो नहीं है लेकिन आपको दिक्कत ना हो कोई उसकी पूरी कोशिश करेंगे। तब मिहिर ने बड़ी अच्छी बात बोली, घर बड़ा ओर अच्छा होना जरूरी नहीं हे घर में रहने वालो का दिल अच्छा ओर बड़ा होना चाहिए। खिमजी ने कहा जी हम बहुत भाग्यशाली है जो हमारी बेटियों को आप जैसा ससुराल ओर हमे आप जैसे अच्छे समधन ओर समधी मिले।
मिहिर ने कहा जी हम भी बहुत भाग्यशाली है जो आप जैसे अच्छे परिवार की बेटियां हमारे घर की बहू बनने जा रही है।तब निशान ने अपने नजर निशा की ओर करी वह तो निशा को देखता ही रह गया ओर सोचा कितनी सुंदर लग रही है निशा आज।ओर निवान तो नियती को देख कर लट्टू हो गया।दोनों आज बहुत सुंदर लग रही थी। सरला ने कहा निशा नियती जाओ बेटा तुम निशान ओर निवान को अपना घर दिखा लो ओर तुम लोगो कि थोड़ी बाते भी हो जाएंगी। फिर चारो चले गए निशा निशान को अपना कमरा दिखने ले गई ओर नियती निवान को अपना कमरा दिखने ले गई। निशान ने कहा अरे वाह निशा तुम्हारा कमरा तो बहुत अच्छा है निशा ने कहा थैंक यू निशान ने पूछा ओर तुम्हे क्या क्या पसंद है निशा ने कहा मुझे हर जगह घूमना बहुत पसंद है निशान ने कहा अरे वाह यह तो मुझे भी पसंद है।
नियती ने निवान को अपना कमरा दिखाया ,निवान ने बोला अरे नियती तुम्हारा कमरा तो बहुत सुंदर है ओर सिमप्ल भी निशा ने कहा धन्यवाद नियती ने निवान से पूछा आपको क्या क्या करना पसंद है निवान ने कहा मुझे लिखना ओर बहुत सारी किताबें पढ़ने का शोक है। नियती ने कहा अरे वह पढ़ना तो बहुत ही अच्छी बात होती है। निवान ने नियती से पूछा आप इस शादी से खुश तो हो ना, तो नियती ने कहा हा मे खुश हू।दूसरी तरफ सारे बड़े बाते कर रहे थे उसमे मिहिर ने बोला तो कल चारो बच्चो का पहला फंक्शन होगा तो कल नियती ओर निशा की मेहंदी की ओर रात को संगीत कि रसम रखेंगे फिर हल्दी कि ओर दो दिन का ब्रेक होगा ओर फिर शादी होगी।
सबने कहा है यह ठीक रहेगा हिना ओर मिहिर ने निशान ओर निवान को बुलाया ओर वह सब घर चले गए ।सरला ने निशा ओर नियती को बुलाया ओर बोला बेटा कल तुम दोनो की मेहंदी की रसम है तुम दोनो को कोई दिक्कत तो नहीं है ना। निशा ओर नियती ने कहा नहीं मां हमे कोई दिक्कत नहीं है।



कहानी का ११ part जल्द आयेगा 😊