8:30 pm shanti express - 2 in Hindi Motivational Stories by Bhumika Gadhvi books and stories PDF | 8:30 pm शांति एक्सप्रेस - 2

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8:30 pm शांति एक्सप्रेस - 2

       बस धीरे-धीरे विजय चौकड़ी की ओर बढ़ी। अवनी ने खिड़की से बाहर देखा, सड़क के किनारे छोटे-छोटे कैफे, आधुनिक इमारतें, और दूर से IT कंपनी की गगनचुंबी इमारतें दिखाई देने लगीं। हर मोड़ पर शहर की हलचल और जीवन की ऊर्जा उसे अंदर तक महसूस हो रही थी।

       जैसे ही बस उसकी मंजिल  के पास पहुँची, अवनी ने गहरी सांस ली। आज उसका पहला बड़ा मौका था। HR के पद के लिए इंटरव्यू। बैग को कसकर पकड़ते हुए, उसने खुद से कहा, “चलो, अब दिखाते हैं कि मेहनत और आत्मविश्वास क्या कर सकते हैं।” वो बस से उतरकर थोड़े दूर चली वहीं एक कॉम्प्लेक्स में IT कंपनी का ऑफिस था। वहां बाहर ही बड़े अक्षर में कंपनी का नाम लिखा था।  "सी आर बी टेक इंफॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी" अवनी ने पढ़ा और अपने अंदर की सारी हिम्मत इकठ्ठा करके जोर से गहरी सांस लेकर छोड़ी और ऑफिस के दरवाजे को पुश किया।

       अवनी जैसे ही ऑफिस में कदम रखती है, उसे महसूस हुआ कि उसने  एक पूरी तरह से आधुनिक और व्यवस्थित माहौल में प्रवेश कर लिया था। फर्श चमकदार ग्रे टाइल्स से ढंका हुआ था, और दीवारें हल्के नीले और सफेद रंग से रंगी हुई थीं, जो ऑफिस में प्रोफेशनल और शांत वातावरण बना रही थीं।

       ऑफिस के बीचोबीच एक बड़ा खुला लाउंज था, जिसमें आरामदायक सोफे और ग्रीन प्लांट्स रखे हुए थे। कुछ कर्मचारी लैपटॉप पर काम कर रहे थे, तो कुछ मीटिंग टेबल पर चर्चा में व्यस्त थे। हल्की बैकग्राउंड म्यूज़िक और कंप्यूटर की टाइपिंग की आवाज़ से पूरे ऑफिस में काम की हल्की हलचल बनी हुई थी।

       दीवारों पर कंपनी की उपलब्धियों और पुरस्कारों के फ्रेम लगे हुए थे। एक कोने में कॉफी और स्नैक्स का छोटा स्टैंड था, जहां लोग चाय और कॉफी लेते हुए बातचीत कर रहे थे। ऑफिस की खिड़कियों से सूरज की किरणें अंदर आ रही थीं, जिससे कमरे में प्राकृतिक रोशनी और ऊर्जा दोनों महसूस हो रही थी।

       कंपनी के अलग-अलग विभाग खुले स्पेस में व्यवस्थित थे। HR, मार्केटिंग, डेवलपमेंट और सपोर्ट टीम की डेस्क एक दूसरे से थोड़ी दूरी पर थीं, ताकि कर्मचारियों को स्वतंत्रता और सहयोग दोनों का अनुभव हो। लिफ्ट और स्टेयरकेस से अलग फ्लोर पर कॉन्फ्रेंस रूम और मीटिंग रूम भी थे, जिनमें हाई-टेक प्रोजेक्टर और स्मार्ट बोर्ड लगे हुए थे।

         अवनी ने गहरी सांस ली और महसूस किया कि यह ऑफिस न केवल काम के लिए आधुनिक और सुव्यवस्थित है, बल्कि वहां आने वाले हर कर्मचारी के लिए प्रेरणा और सकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ है। यह माहौल उसे यह विश्वास दिला रहा था कि अगर वह यहां काम करती है, तो उसका पेशेवर और व्यक्तिगत विकास दोनों ही होगा।

       रिसेप्शन पर खड़े कर्मचारी ने मुस्कुराते हुए उसका स्वागत किया। अवनी ने अपना नाम बताया और बताया कि वह HR इंटरव्यू के लिए आई है। रिसेप्शनिस्ट ने उसे एक फॉर्म दिया और अपने बारे में फील करने को कहा। अवनी ने ऐसा किया और फॉर्म वापस दिया। तब तक रिसेप्शनिस्ट ने ऑफिस में कॉल करके अवनी के बारेमे बता दिया था। उसने अवनी को इंटरव्यू रूम तक जाने का रास्ता दिखाया।

       कदम-कदम पर नर्वसनेस और उत्साह दोनों मिल रहे थे। अवनी ने गहरी सांस ली और अपने आप से कहा, “ठीक है, अब दिखाना होगा कि मैं क्यों इस पद के लिए योग्य हूँ।”

       कुछ ही देर में वह इंटरव्यू रूम के बाहर खड़ी थी। अंदर से हल्की बातचीत और कंप्यूटर की टाइपिंग की आवाज़ आ रही थी। अवनी को अन्दर आने केलिए कहा गया। अवनी ने दरवाजा खोला, मुस्कुराई और अपने आत्मविश्वास को साथ लेकर उसने कमरे में कदम रखा।

         अवनी ने ऑफिस का माहौल देखा और अपने आप को तैयार किया। वह अभी-अभी M.S.W. (Master of Social Work) की पढ़ाई पूरी करके आई थी, और  कमर्शियल वर्ल्ड में  यह उसका  पहला पेशेवर अनुभव होने जा रहा था। इसलिए उसके दिल में थोड़ी घबराहट भी थी और उत्साह भी।

       वह जानती थी कि फ्रेशर होने के बावजूद उसके पास लोगों के साथ संवाद करने, समझने और सहयोग देने की अच्छी ट्रेनिंग है, जो HR के काम में उसकी सबसे बड़ी ताकत साबित हो सकती है। अवनी  ने अपने बैग को और कसकर पकड़ते हुए खुद से कहा, “मैंने पढ़ाई में जितनी मेहनत की है, अब उसे असली दुनिया में दिखाने का समय है। वो आत्मविश्वास से भरी हुई थी।


                                       क्रमशः....................