इतना कह जिया क्यूटी को उठाकर बेड पर ले जाकर लेट जाती हैं। फिर क्यूटी को हग करके सो जाती है। कुछ देर बाद ही जिया गहरी नींद में चली जाती हैं।
जिया के सोते ही क्यूटी अपने एक हाथ के सहारे पर अपना सर रख जिया को देखने लगता हैं। क्यूटी के दिमाग में इस वक्त क्या चल रहा था ये कोई भी नही जानता था।
कुछ देर जिया को ऐसे ही निहारने के बाद क्यूटी आगे बढ़ जिया के माथे को चूम लेता है।
और जिया को अपनी बाहों में भर वो भी सो जाता हैं। आधी रात को जिया की आंख खुलती है उसे प्यास लग रही थी। पर जिया जैसे ही उठती है।
उसे अपने गर्दन पर किसी की गर्म सांसे महसूस होती हैं। ये महसूस कर जिया डर जाती है। जिया अपने हाथ से साइड लैंप को ऑन करती है।
लेंम्प की रौशनी में जिया अपने बगल में देखती है पर उसके बगल में टेडी के अलावा और कुछ नहीं था। जिया को समझ नहीं आ रहा था।
कि उसे बार बार ऐसा क्यों महसूस हो रहा है कि कोई उसे देख रहा है। एक बार फिर जिया इसे अपना भ्रम समझ पानी पीकर सो जाती है।
जिया को लग रहा था कि हॉस्पिटल में पूरा टाइम टेंशन के कारण वो बहुत थक गई है। जिस कारण उसे अब ऐसे भ्रम हो रहे हैं।
यही सब सोच जिया एक बार फिर सो जाती है। अगली सुबह खिड़की से आती हुई धूप जिया के चहरे पर पड़ती है जिस कारण जिया की नींद टूट जाती हैं।
जिया उठ कर बाथरुम में फ्रेस होने चली जाती है। जिया कुछ देर बाद रेड्डी होकर नीचे हॉल में चली जाती हैं। आज भी जिया ने उठने के बाद ये नोटिस ही नहीं किया था।
कि जिस टेडी को लेकर वो रात को सोई थी वो अब वहा नही था। नीचे हॉल में पहुंच जिया चारों तरफ देखती है।
आज भी उसे वहा पर सिर्फ राकेश काका के अलावा और कोई भी दिखाई नहीं देता।
पर जिया खुल कर किसी से पूछ भी नही सकती थी। क्योंकि शादी के कॉन्ट्रेक्ट में लिखा था कि जिया ज्यादा किसी के बारे में पूछ नहीं सकती थी।
इसी कारण वो चुपचाप आकार डायनिंग टेबल पर बैठ जाती है।
डायनिंग टेबल पर बैठी जिया का मन आज कुछ ज़्यादा ही बेचैन था। प्लेट में रखा नाश्ता ठंडा हो रहा था, मगर उसका ध्यान बार-बार रात की बातों पर जा रहा था।
“टेडी… आखिर गया कहाँ?”
कल रात वही टेडी उसकी बाहों में था। वही भारी-सा नीला टेडी, जो उसे अजीब-सी सुरक्षा का एहसास दे रहा था।
और आज… जैसे वो था ही नहीं।
जिया ने धीरे से नज़र उठाकर राकेश काका को देखा।
काका हमेशा की तरह शांत थे, जैसे इस घर में कुछ भी असामान्य नहीं होता।
जिया चाहकर भी पूछ नहीं पाई।
कॉन्ट्रैक्ट की वो लाइन उसके दिमाग में गूंज गई—
“घर के सदस्यों, उनकी आदतों और घर की बातों में दखल नहीं देना होगा।”
जिया ने चुपचाप नाश्ता किया और उठने ही वाली थी कि—
क्लिंक…
किसी धातु के गिरने की आवाज़ आई।
जिया की नज़र सामने रखे ग्लास पर गई, जो हल्का-सा हिल रहा था।
उसका दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
तभी—
“आप इतनी जल्दी उठ गईं?”
पीछे से आई भारी आवाज़ सुनकर जिया सिहर गई।
वो धीरे-धीरे पलटी।
सामने…
विक्रम खड़ा था।
आज वो पहले से अलग लग रहा था।
ब्लैक शर्ट, स्लीव्स मोड़ी हुईं, आँखों में वही रहस्यमयी ठहराव।
जिया ने खुद को संभालते हुए कहा—
जिया: “जी… दादी की तबीयत ठीक है, तो… सोचा नीचे आ जाऊँ।”
विक्रम की नज़र कुछ पल उसके चेहरे पर ठहरी।
जैसे वो कुछ ढूंढ रहा हो।
विक्रम: “आपको यहाँ सब ठीक लग रहा है?”
ये सवाल अचानक था।
जिया चौंकी…
पर फिर मुस्कुरा दी।
जिया: “जी हाँ… सब ठीक है।”
विक्रम ने हल्की-सी मुस्कान दी, लेकिन वो मुस्कान आँखों तक नहीं पहुँची।
विक्रम: “अच्छा है… क्योंकि इस घर में सब कुछ दिखता वैसा नहीं है, जैसा होता है।”
इतना कहकर वो मुड़ गया।
जिया वही खड़ी रह गई।
उसके दिल में एक अजीब-सी ठंडक उतर गई थी।
उसी वक्त…
ऊपर वाले फ्लोर पर—
क्लोज़ेट रूम के अंदर अंधेरा था।
सिर्फ एक हल्की लाल रोशनी जल रही थी।
नीला टेडी वहाँ खड़ा था।
धीरे-धीरे उसके हाथ हिलने लगे।
कपड़े की उँगलियाँ सख़्त होती जा रही थीं।
टेडी की आवाज़ अब मासूम नहीं थी।
टेडी:
“जिया… तुम कुछ नहीं जानती।
और जिन लोगों ने मुझे ये बनाया है…
उनकी गिनती शुरू हो चुकी है।”
उसके सामने दीवार पर लगी तस्वीर अब हिल रही थी।
शर्टलेस लड़के की आँखों में…
हल्की-सी चमक आ गई।
और कमरे में गूँज उठी एक ठंडी हँसी…
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